मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना: अब प्लॉट और मकान की पक्की रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 12.87 लाख पंजीयन पूरे

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे भू-स्वामियों को बड़ी राहत देने की तैयारी है, जिनके पास प्लॉट या मकान के पट्टे तो हैं, लेकिन उनकी पक्की रजिस्ट्री नहीं हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री नि:शुल्क कराने के निर्देश दिए हैं। योजना में रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क का भुगतान राज्य सरकार करेगी। एक नवंबर 2026 तक प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी होने की जानकारी दी गई है।

प्लॉट और मकान भू-स्वामी का, पक्की रजिस्ट्री का खर्च सरकार उठाएगी

मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से अपनी जमीन या मकान पर रह रहे ऐसे परिवारों के लिए राहत की पहल की गई है, जिनके पास संपत्ति का पट्टा अथवा अधिकार संबंधी दस्तावेज तो मौजूद हैं, लेकिन उनके नाम पक्की रजिस्ट्री नहीं है। अब ऐसे पात्र भू-स्वामियों को उनकी संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री कराने के लिए स्टाम्प शुल्क की राशि स्वयं खर्च नहीं करनी होगी। राज्य सरकार यह राशि अपने खजाने से वहन करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इसे व्यापक अभियान के रूप में संचालित किया जाए और सभी पात्र भू-स्वामियों की रजिस्ट्री जल्द से जल्द पूरी कराई जाए। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का मजबूत दस्तावेजी अधिकार उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य में अपनी संपत्ति का उपयोग आर्थिक जरूरतों के लिए भी कर सकें।

एक नवंबर 2026 की स्थिति में प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी होने की जानकारी बैठक में दी गई। सरकार ने 15 नवंबर तक इस संख्या को 20 लाख तक पहुंचाने का प्रयास करने का लक्ष्य रखा है।

पक्की रजिस्ट्री के लिए हितग्राहियों को नहीं देना होगा स्टाम्प शुल्क

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केवल प्लॉट या मकान का कब्जा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ पक्के राजस्व दस्तावेज होना भी जरूरी है। संपत्ति के विधिवत दस्तावेज भू-स्वामी के अधिकारों को प्रमाणित करने और संपत्ति से जुड़े विभिन्न कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में ऐसे अनेक परिवार हैं, जिनके पास प्लॉट या मकान के पट्टे उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी पक्की रजिस्ट्री नहीं हुई है। ऐसे पात्र हितग्राहियों को मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत पक्की रजिस्ट्री उपलब्ध कराई जाएगी।

इस योजना की खास बात यह है कि संपत्ति भू-स्वामी की ही रहेगी और रजिस्ट्री भी उसी के नाम होगी, लेकिन पंजीयन के लिए लगने वाले स्टाम्प शुल्क का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इससे पात्र परिवारों पर रजिस्ट्री के खर्च का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

यह व्यवस्था उन ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जो अपनी संपत्ति के दस्तावेज मजबूत कराना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक कारणों से अब तक पंजीयन नहीं करा पाए हैं।

संपत्ति के दस्तावेज मजबूत होने से खुल सकते हैं आर्थिक अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समीक्षा बैठक में कहा कि पक्की रजिस्ट्री मिलने से भू-स्वामियों की समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे। संपत्ति के विधिवत दस्तावेज होने से संबंधित व्यक्ति को अपनी संपत्ति के आधार पर ऋण प्राप्त करने की पात्रता और अवसर मिल सकते हैं।

ग्रामीण परिवारों के सामने अक्सर ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब उन्हें मकान निर्माण, बच्चों की शिक्षा, व्यवसाय शुरू करने, कृषि कार्य या अन्य आवश्यकताओं के लिए धन की जरूरत होती है। ऐसे समय में संपत्ति के स्पष्ट और विधिवत दस्तावेज आर्थिक संस्थानों के समक्ष संपत्ति संबंधी अधिकार प्रमाणित करने में मददगार हो सकते हैं।

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हालांकि, रजिस्ट्री हो जाने का अर्थ यह नहीं है कि बैंक से ऋण स्वत: स्वीकृत हो जाएगा। ऋण देने का निर्णय संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था अपनी पात्रता, दस्तावेजों और अन्य शर्तों के आधार पर करेगी। इसके बावजूद पक्के दस्तावेज संपत्ति धारक की वित्तीय पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

एक नवंबर तक 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी

मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने योजना की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि एक नवंबर 2026 तक प्रदेश में कुल 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। आगामी 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना के तहत बड़े स्तर पर पंजीयन कार्य किया जा रहा है। अब प्रशासन के सामने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की चुनौती भी है कि कोई पात्र परिवार जानकारी के अभाव, दस्तावेजों की कमी या स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया में देरी के कारण लाभ से वंचित न रह जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के साथ-साथ योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक पात्र परिवार इस पहल की जानकारी प्राप्त कर सकें।

धनतेरस पर गांवों में पहुंचेंगे मंत्री, सांसद और विधायक

योजना को गति देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी 6 नवंबर को धनतेरस के दिन प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक गांव अथवा अपनी पसंद के किसी गांव में पहुंचेंगे।

जनप्रतिनिधि संबंधित गांव में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री अपने सामने पूरी कराने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। इसका उद्देश्य गांव स्तर पर अभियान की वास्तविक प्रगति देखना और पंजीयन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कराना है।

मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिले के प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्रीगण और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित करें। गांवों में रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस गांव में शत-प्रतिशत रजिस्ट्री का कार्य पूरा हो जाएगा, वहां जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक छोटा कार्यक्रम आयोजित किया जाए। इस तरह गांवों में योजना के प्रति जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

ग्रामीण संपत्ति के अधिकार को मजबूत करने की पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन और मकान से जुड़े दस्तावेज कई बार परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। कुछ मामलों में परिवारों के पास लंबे समय से संपत्ति का कब्जा और पट्टा तो होता है, लेकिन पंजीकृत दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें संपत्ति संबंधी कामों में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

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पक्की रजिस्ट्री से संपत्ति के अधिकारों का दस्तावेजी आधार मजबूत होता है। इससे संपत्ति के हस्तांतरण, उत्तराधिकार, वित्तीय लेनदेन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता लाने में मदद मिल सकती है।

सरकार की ओर से स्टाम्प शुल्क वहन किए जाने की व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे पात्र परिवारों को पंजीयन की प्रक्रिया से जोड़ना है, जो खर्च के कारण अब तक इससे दूर रहे हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह जरूरी होगा कि राजस्व अभिलेखों और पंजीयन संबंधी विवरणों में सही जानकारी दर्ज हो तथा हितग्राही को उसके नाम से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।

योजना के क्रियान्वयन में प्रशासन की भूमिका अहम

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि योजना को केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे बड़े जन-अभियान के रूप में चलाया जाए। इसके लिए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।

सितंबर 2026 में शुरू किए गए प्रदेशव्यापी स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान के संबंध में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, ग्रामीण आबादी भूमि के निजी संपत्ति अधिकार अभिलेखों के नि:शुल्क पंजीयन का लक्ष्य लगभग 50 लाख संपत्तियों तक रखा गया है। इस प्रक्रिया में भूमि की लैंड लिंकिंग और आवेदक की समग्र आईडी से ई-केवाईसी जैसी औपचारिकताएं भी शामिल बताई गई हैं। <span>यह विवरण अभियान की प्रक्रिया और उसके व्यापक लक्ष्य को समझने में मदद करता है।</span>

ऐसी प्रक्रिया में पटवारी, तहसीलदार और पंजीयन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। दस्तावेजों का सत्यापन, भूमि की पहचान, हितग्राही की पात्रता और पंजीयन की कार्यवाही समय पर पूरी होना जरूरी है। <span>योजना के प्रारंभिक क्रियान्वयन संबंधी जानकारी में ‘सारा’ और ‘संपदा’ डिजिटल माध्यमों के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है।</span> <Cite refs={[“turn805904search4″,”turn805904search7”]}/>

पात्र हितग्राहियों के सामने क्या हो सकती हैं चुनौतियां?

योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए केवल रजिस्ट्री शुल्क सरकार द्वारा वहन करना ही पर्याप्त नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजों की उपलब्धता, भूमि की पहचान और अभिलेखों में दर्ज जानकारी से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

प्रशासन के सामने कुछ प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार हो सकती हैं—

  • दस्तावेजों का सत्यापन: पट्टे और राजस्व अभिलेखों में दर्ज जानकारी का सही मिलान करना।
  • भूमि की पहचान: संबंधित प्लॉट या मकान की पहचान और भूमि अभिलेखों से उसका संबंध स्पष्ट करना।
  • पात्रता की जांच: यह सुनिश्चित करना कि योजना का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र भू-स्वामी को ही मिले।
  • जागरूकता की कमी: ग्रामीण परिवारों को योजना, जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया की जानकारी देना।
  • समयबद्ध पंजीयन: बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां पूरी करते समय गुणवत्ता और दस्तावेजों की शुद्धता बनाए रखना।

यदि इन पहलुओं पर जिला स्तर पर नियमित निगरानी की जाती है, तो पंजीयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। वहीं, किसी हितग्राही के दस्तावेजों में कमी या भूमि संबंधी विवाद होने पर उसका समाधान नियमानुसार किया जाना आवश्यक होगा।

जनजागरूकता और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर रहेगा जोर

मुख्यमंत्री ने योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर लोगों को यह जानकारी मिलना जरूरी है कि किन परिवारों को योजना का लाभ मिलेगा, कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे और पंजीयन की प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाएगी।

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धनतेरस के दिन जनप्रतिनिधियों के गांवों में पहुंचने की पहल को भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रजिस्ट्री की प्रगति की समीक्षा करने और हितग्राहियों की समस्याओं को सामने लाने का अवसर मिल सकता है।

जिला कलेक्टरों की जिम्मेदारी होगी कि वे संबंधित जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर पंजीयन प्रक्रिया को गति दें। शत-प्रतिशत रजिस्ट्री पूरी होने वाले गांवों में कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी इसी अभियान का हिस्सा हैं।

अगले वर्ष युवा वर्ष से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पक्की रजिस्ट्री कराने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने इस पहल को अगले वर्ष ‘युवा वर्ष’ से जोड़ने की बात भी कही है।

इसका व्यापक उद्देश्य यह है कि संपत्ति के दस्तावेजों को केवल राजस्व विभाग की औपचारिकता न माना जाए, बल्कि उन्हें परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं से भी जोड़ा जाए। पक्के दस्तावेज होने पर परिवारों को संपत्ति संबंधी अधिकारों को प्रमाणित करने में सुविधा मिल सकती है और वे नियमानुसार वित्तीय संस्थाओं से ऋण के विकल्प तलाश सकते हैं।

हालांकि योजना की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि पात्र परिवारों को समय पर रजिस्ट्री मिले, दस्तावेजों में त्रुटियां न रहें और पंजीयन के बाद भी उन्हें जरूरत पड़ने पर राजस्व अभिलेखों से संबंधित सहायता उपलब्ध हो।

समीक्षा बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप तथा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे, आयुक्त भू-अभिलेख निधि निवेदिता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा के साथ ही आगामी दिनों में पंजीयन कार्य को तेज करने और निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

दस्तावेजी मालिकाना हक से ग्रामीण परिवारों को मिल सकती है आर्थिक मजबूती

मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना ग्रामीण क्षेत्रों के उन पात्र परिवारों के लिए महत्वपूर्ण पहल है, जिनके पास प्लॉट या मकान का पट्टा तो है, लेकिन पक्की रजिस्ट्री नहीं है। स्टाम्प शुल्क का खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाने से ऐसे परिवारों को पंजीयन कराने में आर्थिक राहत मिलेगी।

एक नवंबर तक 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी होने के बाद सरकार ने 15 नवंबर तक 20 लाख पंजीयन का लक्ष्य सामने रखा है। धनतेरस पर मंत्री, सांसद और विधायकों के गांवों में पहुंचने से अभियान को स्थानीय स्तर पर गति देने की कोशिश होगी।

अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि योजना का लाभ सभी पात्र भू-स्वामियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे। रजिस्ट्री के साथ दस्तावेजों की शुद्धता, भूमि अभिलेखों का सही मिलान और हितग्राहियों को समय पर प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित करना होगा। यदि इन पहलुओं पर प्रभावी अमल होता है, तो यह पहल ग्रामीण परिवारों के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने और उनकी आर्थिक संभावनाओं को बढ़ाने में सहायक हो सकती है।