उपभोक्ता हित में विभागों का बेहतर समन्वय जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक में कई बड़े निर्देश

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक में उपभोक्ता हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और खाद्यान्न भंडारण में नुकसान कम करने के प्रयासों की सराहना की। बैठक में राशन वितरण, परिवहन व्यवस्था, ई-केवाईसी और वेयरहाउसिंग सुधारों पर विशेष चर्चा हुई। सरकार ने योजनाओं की पारदर्शिता और लागत बचत को प्रशासनिक सफलता बताया।

(सोनाली खरे)

भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और उपभोक्ता हित से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। शुक्रवार 22 मई 2026 को मंत्रालय में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि खाद्य विभाग को अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य करना चाहिए ताकि योजनाओं का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे।

बैठक में राशन वितरण व्यवस्था, खाद्यान्न भंडारण, परिवहन, तकनीकी निगरानी, उपभोक्ता संरक्षण और विभिन्न नवाचारों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा किए जा रहे डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों की सराहना करते हुए इन्हें और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

उपभोक्ता हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की सभी योजनाओं का अंतिम उद्देश्य आम उपभोक्ता को बेहतर सेवाएं देना है। खाद्य विभाग द्वारा किए गए कई नवाचारों का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुधारों के माध्यम से सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर कार्य करने से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं पर भी नियंत्रण लगेगा।

उचित मूल्य दुकानों का जन पोषण मार्ट के रूप में उन्नयन

बैठक में मुख्यमंत्री ने उचित मूल्य दुकानों को “जन पोषण मार्ट” के रूप में विकसित करने की पहल की सराहना की। सरकार का उद्देश्य राशन दुकानों को केवल खाद्यान्न वितरण केंद्र तक सीमित न रखकर उन्हें बहुउद्देश्यीय जनसेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है।

इस योजना से:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी
  • पोषण संबंधी वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ेगी
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बनेंगे
  • उपभोक्ताओं को एक ही स्थान पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हो सकेंगी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

मोबाइल संदेश से राशन वितरण की जानकारी

मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को मोबाइल पर राशन वितरण संबंधी जानकारी भेजने की व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण कदम बताया गया। अब लाभार्थियों को राशन उपलब्धता, वितरण तिथि और अन्य सूचनाएं सीधे मोबाइल संदेश के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं।

इस व्यवस्था के प्रमुख लाभ:

  • पारदर्शिता में वृद्धि
  • फर्जी वितरण पर नियंत्रण
  • लाभार्थियों को समय पर जानकारी
  • शिकायतों में कमी

डिजिटल तकनीक के उपयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना से परिवहन लागत में बचत

बैठक में मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि परिवहन मार्गों के रूट ऑप्टिमाइजेशन से सरकार को लगभग 42 लाख रुपए प्रति माह की बचत हो रही है।

सरकार द्वारा लागू की गई इस प्रणाली में:

  • वाहनों की बेहतर रूट प्लानिंग
  • समय की बचत
  • ईंधन खर्च में कमी
  • वितरण प्रक्रिया में तेजी

जैसे लाभ सामने आए हैं।

मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासनिक दक्षता का अच्छा उदाहरण बताते हुए अन्य विभागों में भी इस तरह की व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए।

जीपीएस मॉनिटरिंग से बढ़ी निगरानी

मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। स्टेट लेवल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से वाहनों की निगरानी की जा रही है।

इस तकनीक से:

  • खाद्यान्न परिवहन की रियल टाइम मॉनिटरिंग
  • अनियमितताओं पर नियंत्रण
  • समय पर डिलीवरी
  • परिवहन प्रक्रिया में पारदर्शिता

सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी योजनाओं में डिजिटल निगरानी व्यवस्था भ्रष्टाचार कम करने और जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

खाद्यान्न भंडारण में नुकसान कम करने की पहल

बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय गोदामों में खाद्यान्न भंडारण के दौरान होने वाली क्षति को कम करना भी रहा। मुख्यमंत्री ने वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के कर्मचारियों को भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई में प्रशिक्षण दिलाने की पहल की प्रशंसा की।

खाद्यान्न भंडारण में अक्सर:

  • नमी
  • खराब रखरखाव
  • कीट संक्रमण
  • परिवहन संबंधी समस्याएं

के कारण नुकसान होता है।

सरकार अब आधुनिक लॉजिस्टिक्स और वैज्ञानिक भंडारण पद्धतियों पर जोर दे रही है ताकि नुकसान कम हो और सार्वजनिक संसाधनों की बचत हो सके।

ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से पारदर्शिता

सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन द्वारा सभी स्तरों पर ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था लागू किए जाने को भी मुख्यमंत्री ने सराहा। डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है।

इस व्यवस्था से:

  • भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बनी
  • भ्रष्टाचार की संभावना कम हुई
  • समय पर भुगतान संभव हुआ
  • रिकॉर्ड प्रबंधन आसान हुआ

डिजिटल गवर्नेंस के बढ़ते उपयोग को राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।

ULIP सॉफ्टवेयर से वाहनों का सत्यापन

बैठक में जानकारी दी गई कि उपार्जन, मिलिंग और परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहनों का सत्यापन अब ULIP सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा रहा है।

यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि:

  • केवल वैध वाहन ही उपयोग में लिए जाएं
  • फर्जी वाहनों की एंट्री रोकी जा सके
  • परिवहन व्यवस्था सुरक्षित और पारदर्शी बने
  • सरकारी भुगतान में गड़बड़ी न हो

तकनीक आधारित सत्यापन प्रणाली को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

जूट बारदाना खरीद में नई व्यवस्था से करोड़ों की बचत

मुख्यमंत्री को बैठक में बताया गया कि समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न उपार्जन के लिए जूट कमिश्नर से खाली बारदाना खरीदने हेतु सीसी लिमिट से भुगतान की नई व्यवस्था लागू की गई है।

इस व्यवस्था से राज्य को लगभग 18 करोड़ रुपए की ब्याज राशि बचाने में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश इस प्रणाली को लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बना है।

इस कदम को वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक नवाचार का उदाहरण माना जा रहा है।

गेहूं प्रोसेसिंग और ग्रेडिंग के लिए नया मॉडल तैयार करने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में गेहूं उपार्जन कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ऐसा मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए जिसमें:

  • गेहूं की प्रोसेसिंग
  • ग्रेडिंग
  • पैकेजिंग
  • मूल्य संवर्धन

जैसे कार्य लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योग विभाग के सहयोग से किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में स्व-सहायता समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इससे ग्रामीण रोजगार और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

राशन आपके ग्राम योजना पर भी चर्चा

बैठक में मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस योजना का उद्देश्य दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक समय पर राशन पहुंचाना है।

सरकार का प्रयास है कि:

  • दूरदराज गांवों में वितरण व्यवस्था मजबूत हो
  • हितग्राहियों को अनावश्यक परेशानी न हो
  • पारदर्शी वितरण प्रणाली विकसित हो
  • ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके

उज्ज्वला योजना और ई-केवाईसी पर फोकस

बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ई-केवाईसी अभियान की भी समीक्षा की गई।

ई-केवाईसी के जरिए सरकार लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है ताकि:

  • फर्जी लाभार्थियों की पहचान हो सके
  • वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचे
  • योजनाओं में पारदर्शिता बढ़े
  • सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सत्यापन से योजनाओं की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ती हैं।

प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव

खाद्य विभाग से जुड़े ये सुधार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि सामाजिक प्रभाव भी रखते हैं। राशन वितरण, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े विषय हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • तकनीक आधारित निगरानी से भ्रष्टाचार कम हो सकता है
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी
  • लागत बचत से सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा
  • गरीब और जरूरतमंद वर्ग को अधिक लाभ मिलेगा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक ने यह संकेत दिया है कि मध्यप्रदेश सरकार अब तकनीक, पारदर्शिता और समन्वय आधारित प्रशासनिक मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। राशन वितरण से लेकर खाद्यान्न भंडारण और परिवहन व्यवस्था तक कई क्षेत्रों में सुधार के प्रयास दिखाई दे रहे हैं।

उपभोक्ता हित को केंद्र में रखकर किए जा रहे ये बदलाव आने वाले समय में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बना सकते हैं। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन इसी गति से जारी रहा तो राज्य में खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता दोनों को मजबूत आधार मिल सकता है।