(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने तथा गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन ने ‘सुमन पंचायत’ (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पंचायत) पहल प्रारंभ की है। इस पहल के अंतर्गत निर्धारित तीन शर्तें पूरी करने वाली पात्र ग्राम पंचायतों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्राम पंचायतों को मातृ एवं शिशु मृत्यु रोकने की सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ना भी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सिवनी डॉ. पंकज दुबे ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जिन ग्राम पंचायतों में निर्धारित एक वर्ष की अवधि के दौरान मातृ मृत्यु का कोई प्रकरण दर्ज नहीं होगा, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का कोई प्रकरण नहीं होगा और पंचायत की सक्रिय भागीदारी से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जाएगा, वे इस सम्मान के लिए पात्र होंगी।
इस पहल के तहत स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, नियमित प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल और बच्चों का नियमित टीकाकरण इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य हैं।
खास बात यह है कि इस पहल में केवल ग्राम पंचायतों को ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले विकासखंड और जिले को भी प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। सर्वाधिक पात्र सुमन पंचायतों वाले उत्कृष्ट विकासखंड और जिले को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, आपातकालीन परिवहन और जनजागरूकता गतिविधियों के लिए किया जाएगा।
तीन शर्तें पूरी करने पर मिलेगा सुमन पंचायत सम्मान
मध्यप्रदेश शासन की सुमन पंचायत पहल में ग्राम पंचायतों की पात्रता के लिए तीन महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित की गई हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पात्रता के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को निर्धारित एक वर्ष की अवधि के दौरान निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी।
- ग्राम पंचायत में मातृ मृत्यु का कोई प्रकरण नहीं होना चाहिए
पहली शर्त के अनुसार निर्धारित एक वर्ष की अवधि में संबंधित ग्राम पंचायत में मातृ मृत्यु का कोई प्रकरण दर्ज नहीं होना चाहिए। गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद की अवधि में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस शर्त का प्रमुख उद्देश्य है।
इसके लिए गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक जांच और प्रसव के दौरान उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
- पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का कोई प्रकरण नहीं होना चाहिए
दूसरी शर्त के तहत निर्धारित अवधि में ग्राम पंचायत क्षेत्र में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का कोई प्रकरण नहीं होना चाहिए।
इसके लिए नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल, समय पर टीकाकरण, पोषण संबंधी जागरूकता और बच्चों के बीमार होने पर समय पर उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक है।
बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में परिवार की जागरूकता के साथ स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
- पंचायत की सक्रिय भागीदारी से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना होगा
तीसरी शर्त संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने से संबंधित है। इसके तहत ग्राम पंचायत को गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित करने और आवश्यक सहयोग प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
संस्थागत प्रसव का अर्थ है कि महिला का प्रसव घर के बजाय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा अन्य मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थान में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में कराया जाए।
इससे प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की पहचान और समय पर उपचार की संभावना बढ़ती है।
इन तीनों शर्तों को निर्धारित अवधि में पूरा करने वाली पात्र ग्राम पंचायतों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा।
मातृ मृत्यु रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन जरूरी
सुमन पंचायत पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती चरण से ही स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार गर्भावस्था का पंजीयन देर से कराया जाता है। इसके कारण आवश्यक स्वास्थ्य जांच, पोषण संबंधी सलाह और संभावित जोखिमों की पहचान में देरी हो सकती है।
समय पर पंजीयन होने से स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिला की स्वास्थ्य स्थिति का रिकॉर्ड रख सकता है। इसके आधार पर प्रसवपूर्व जांच, आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श और प्रसव की संभावित तारीख के अनुसार व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।
गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच से एनीमिया, उच्च रक्तचाप और अन्य संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने में मदद मिलती है।
विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान महत्वपूर्ण है। ऐसी महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं वाले अस्पताल में प्रसव की व्यवस्था उपलब्ध कराना जरूरी होता है।
सुमन पंचायत पहल के माध्यम से गांव स्तर पर ऐसी महिलाओं की पहचान और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
संस्थागत प्रसव से जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
घर पर प्रसव के दौरान कई बार ऐसी जटिलताएं सामने आ सकती हैं, जिनके लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। अधिक रक्तस्राव, प्रसव में कठिनाई और अन्य आपातकालीन स्थितियों में समय पर उपचार नहीं मिलने से महिला और नवजात दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
अस्पताल में प्रसव होने पर प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी आवश्यकतानुसार उपचार उपलब्ध करा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
सुमन पंचायत पहल में ग्राम पंचायत की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि गांव के जनप्रतिनिधि और स्थानीय कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं तथा उनके परिवारों से सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं।
वे परिवारों को संस्थागत प्रसव के लाभ समझाने, अस्पताल तक पहुंचने की व्यवस्था बनाने और प्रसव के समय आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
नवजात शिशुओं की देखभाल और टीकाकरण पर रहेगा विशेष ध्यान
सुमन पंचायत पहल का दायरा केवल सुरक्षित प्रसव तक सीमित नहीं है। इसमें जन्म के बाद नवजात शिशुओं की देखभाल और बच्चों के नियमित टीकाकरण को भी महत्व दिया गया है।
जन्म के शुरुआती दिन शिशु के स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान नवजात की उचित देखभाल, स्तनपान, स्वच्छता और किसी भी असामान्य लक्षण पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक होता है।
स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कार्यकर्ताओं को परिवारों तक आवश्यक जानकारी पहुंचाने और बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
इस पहल के अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियों को बढ़ावा देना उद्देश्य है:
- नवजात शिशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच।
- जन्म के तुरंत बाद स्तनपान के प्रति जागरूकता।
- बच्चों का निर्धारित समय पर टीकाकरण।
- कुपोषण और पोषण संबंधी समस्याओं की पहचान।
- बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर उपचार।
- माताओं को शिशु देखभाल और पोषण संबंधी जानकारी देना।
इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति परिवारों की जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
तीन विभाग मिलकर करेंगे योजना का क्रियान्वयन
सुमन पंचायत पहल की सफलता के लिए अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। मध्यप्रदेश शासन ने इसके क्रियान्वयन में स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की है।
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, संस्थागत प्रसव और नवजात शिशुओं की देखभाल से संबंधित सेवाओं को मजबूत बनाने का काम करेगा।
आशा और एएनएम जैसी मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण रहेगी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भूमिका
ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। गांव में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
बच्चों की वृद्धि, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
तीनों विभागों के समन्वय से गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उपयोगिता बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
ग्राम पंचायत को एक लाख रुपये, उत्कृष्ट विकासखंड और जिले को 50-50 हजार रुपये
सुमन पंचायत पहल में पात्र ग्राम पंचायतों को सम्मानित करने के साथ आर्थिक प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया गया है।
इसमें प्रोत्साहन राशि का विवरण इस प्रकार है:
| पात्र इकाई | प्रोत्साहन राशि |
| पात्र ग्राम पंचायत | ₹1,00,000 |
| उत्कृष्ट विकासखंड | ₹50,000 |
| उत्कृष्ट जिला | ₹50,000 |
ग्राम पंचायत को एक लाख रुपये की राशि के साथ प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त जिस विकासखंड में सर्वाधिक पात्र सुमन पंचायतें होंगी, उसे उत्कृष्ट विकासखंड के रूप में प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी प्रकार सर्वाधिक पात्र सुमन पंचायतों वाले उत्कृष्ट जिले को भी 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, आपातकालीन परिवहन और जनजागरूकता गतिविधियों के लिए किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं, बल्कि गांवों और स्थानीय प्रशासन के बीच मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित करना भी है।
एक लाख रुपये की राशि का उपयोग स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने में होगा
सुमन पंचायत सम्मान के अंतर्गत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसका उपयोग स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए किया जाना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के साथ अस्पताल तक पहुंच भी एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।
विशेषकर गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने के लिए समय पर परिवहन उपलब्ध होना आवश्यक है।
आपातकालीन परिवहन की बेहतर व्यवस्था से जरूरत पड़ने पर महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं के परिवारों के साथ संवाद और पोषण संबंधी जानकारी देने जैसी गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
हालांकि, प्रोत्साहन राशि का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि पंचायत और संबंधित विभाग उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप कितनी प्रभावी ढंग से करते हैं।
आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
सुमन पंचायत पहल को गांव स्तर पर सफल बनाने में आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी।
ये कार्यकर्ता ग्रामीण परिवारों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं। गर्भवती महिलाओं के पंजीयन से लेकर प्रसव के बाद मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की निगरानी तक उनकी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं।
आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। एएनएम नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराने में भूमिका निभाती हैं। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पोषण और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों में सहयोग करती हैं।
यदि इन कार्यकर्ताओं को पंचायत का सक्रिय सहयोग मिलता है, तो गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
इसके लिए नियमित बैठकों, स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड के रखरखाव और जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
सिवनी की ग्राम पंचायतों के लिए बड़ा अवसर, सामूहिक प्रयास से मिल सकता है सम्मान
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज दुबे ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से सुमन पंचायत पहल में सक्रिय सहभागिता की अपील की है।
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जा सकता है और सिवनी जिले की अधिकाधिक ग्राम पंचायतों को सुमन पंचायत सम्मान के लिए पात्र बनाया जा सकता है।
सिवनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इस पहल की सफलता के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को अपने गांव की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देना होगा।
गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, प्रसवपूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और नवजात शिशुओं की नियमित देखभाल जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता देनी होगी।
इसके साथ ही गांव के प्रत्येक परिवार को यह समझाना भी जरूरी है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सम्मान के लिए केवल आंकड़े नहीं, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण
सुमन पंचायत पहल के माध्यम से ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने का प्रयास निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता का आकलन केवल पुरस्कार प्राप्त करने वाली पंचायतों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए।
गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार, प्रसव के दौरान आपातकालीन सहायता और बच्चों के पोषण की स्थिति भी महत्वपूर्ण पहलू हैं।
विशेषज्ञों के दृष्टिकोण से मातृ एवं शिशु मृत्यु रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक होता है।
इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं, प्रशिक्षित कर्मचारी, आवश्यक दवाएं, जांच की व्यवस्था और आपातकालीन परिवहन की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
ग्राम पंचायतों को भी यह प्रयास करना होगा कि कोई गर्भवती महिला जानकारी के अभाव, आर्थिक कठिनाई या परिवहन की समस्या के कारण आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा से वंचित न रहे।
सुमन पंचायत पहल से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मिल सकती है नई दिशा
मध्यप्रदेश शासन की सुमन पंचायत पहल ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सामुदायिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है। इस पहल के माध्यम से ग्राम पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सिवनी जिले के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। यदि ग्राम पंचायतें, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर निर्धारित उद्देश्यों पर काम करते हैं, तो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
एक लाख रुपये का सम्मान और प्रशस्ति-पत्र ग्राम पंचायतों के लिए प्रोत्साहन का माध्यम बन सकता है। वहीं उत्कृष्ट विकासखंड और जिले को मिलने वाली राशि से स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सुमन पंचायत पहल का वास्तविक उद्देश्य केवल ग्राम पंचायतों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि हर गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व और हर बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य का अवसर उपलब्ध कराना है। सिवनी जिले की पंचायतें यदि सामूहिक जिम्मेदारी के साथ इस दिशा में प्रयास करती हैं, तो अधिकाधिक गांव इस सम्मान के पात्र बन सकते हैं। आखिरकार किसी भी गांव की सबसे बड़ी उपलब्धि यही होगी कि वहां माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे तथा प्रत्येक परिवार को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।