मध्यप्रदेश में 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के विकास प्रस्तावों को मंजूरी, वनों के लिए 17,240 करोड़ तो सिंचाई परियोजनाओं को मिलेंगे 4,103 करोड़

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)।  मध्यप्रदेश के समग्र विकास, पर्यावरण संरक्षण, कृषि विस्तार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में 23 हजार 300 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में वनों के संवर्धन एवं वन्यजीव संरक्षण, सिंचाई परियोजनाओं, नगरीय अधोसंरचना, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और लोकायुक्त संगठन के संचालन सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

मंत्रि-परिषद के निर्णयों की जानकारी देते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि प्रदेश में वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी नौ प्रमुख योजनाओं के लिए 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये तथा लोकायुक्त संगठन के सुचारू संचालन के लिए 573 करोड़ 85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इन फैसलों का प्रभाव प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ कृषि, पर्यावरण, रोजगार, प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ने की संभावना है।

वनों के संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण के लिए 17,240 करोड़ रुपये से अधिक मंजूर

मंत्रि-परिषद की बैठक में सबसे बड़ा वित्तीय प्रावधान वन विभाग की नौ प्रमुख योजनाओं के लिए किया गया है। इन योजनाओं के सुचारु संचालन के लिए कुल 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए मंजूर की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश में वन प्रशासन को मजबूत करना, वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव विविधता का संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्वीकृत राशि का प्रमुख विवरण इस प्रकार है:

योजना स्वीकृत राशि
कार्यकारी योजना संगठन एवं वन वृत्तों की स्थापना 10,664.79 करोड़ रुपये
क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना 1,994.30 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना 1,623.79 करोड़ रुपये
इमारती लकड़ी उत्पादन 1,107.06 करोड़ रुपये
जू एवं रेस्क्यू सेंटर की स्थापना 604.23 करोड़ रुपये

इसके अतिरिक्त वन मुख्यालय की स्थापना, वन प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन, कार्ययोजना निर्माण और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीव प्रबंधन के लिए भी बजट स्वीकृत किया गया है।

इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के नौ टाइगर रिजर्व और दस राष्ट्रीय उद्यानों के संरक्षण एवं विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

वैज्ञानिक तरीके से होगा वनों का प्रबंधन

वन संरक्षण की योजनाओं में केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि वनों की दीर्घकालिक सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रबंधन भी शामिल है।

कार्य आयोजना निर्माण के तहत वनों के सतत प्रबंधन के लिए दस वर्षीय कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी। वन प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन से वनकर्मियों को प्रशिक्षित और कार्यदक्ष बनाने में सहायता मिलेगी।

क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना का उद्देश्य विकास कार्यों के लिए वन भूमि के उपयोग से होने वाली पर्यावरणीय क्षति को कम करना है। इसके अंतर्गत क्षतिपूरक वृक्षारोपण और अन्य संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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वहीं संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीव प्रबंधन के तहत सघन गश्त, बाघों की निगरानी और वन्यजीवों के रेस्क्यू जैसे कार्यों को व्यवस्थित किया जाएगा।

उज्जैन और जबलपुर में नए जू एवं रेस्क्यू केंद्र स्थापित करने की योजना भी इस स्वीकृति का हिस्सा है।

छह जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये

किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मंत्रि-परिषद ने छह जिलों की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।

यह स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए दी गई है।

इन परियोजनाओं में पन्ना की मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना, विदिशा की टेम मध्यम सिंचाई परियोजना, मऊगंज-सीधी-सिंगरौली की सीतापुर हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना और उज्जैन की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना शामिल हैं।

पन्ना की मझगांव परियोजना के लिए 69.36 करोड़ रुपये

पन्ना जिले की मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 69 करोड़ 36 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इस परियोजना के अंतर्गत बांध का निर्माण कर लगभग 13,060 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था विकसित की जा रही है।

सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से पानी का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होता है। इससे कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।

विदिशा की टेम सिंचाई परियोजना को 277.52 करोड़ रुपये

विदिशा जिले की लटेरी तहसील में टेम नदी पर स्थित टेम मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 277 करोड़ 52 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

इस परियोजना का उद्देश्य विदिशा जिले में 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी परियोजना की भूमिका निर्धारित की गई है।

सीतापुर हनुमना परियोजना के लिए 3,620.82 करोड़ रुपये

मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से निर्माणाधीन सीतापुर हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना के संचालन एवं संधारण के लिए 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।

इस परियोजना के अंतर्गत सोन नदी पर बैराज का निर्माण कर संचित जल के माध्यम से लगभग 1 लाख 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जाएगी।

इस परियोजना से विंध्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की संभावना है।

उज्जैन की शिप्रा नदी को प्रवाहमान रखने के लिए 136.03 करोड़ रुपये

उज्जैन में शिप्रा नदी को वर्षभर प्रवाहमान बनाए रखने के उद्देश्य से संचालित सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के लिए 136 करोड़ 3 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

परियोजना के अंतर्गत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी बैराज बनाया जाना है। वर्षाकाल में यहां से जल उठाकर सिलारखेड़ी बांध में संग्रहित किया जाएगा। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार इस जल को दोबारा शिप्रा नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था की जाएगी।

यह परियोजना उज्जैन की जल व्यवस्था और शिप्रा नदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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शहरों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए 700 करोड़ रुपये

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास करने के लिए मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को दो वर्ष तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है।

इस योजना के लिए 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। योजना की अवधि 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक निर्धारित की गई है।

इसके माध्यम से नगरीय निकायों में नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न विकास कार्य किए जा सकेंगे।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • पेयजल व्यवस्था का विस्तार और सुधार।
  • शहरों में साफ-सफाई की व्यवस्था।
  • स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं सुधार।
  • सड़कों और नालियों का निर्माण।
  • श्मशान घाट और सामुदायिक भवनों का निर्माण।
  • आपदा प्रबंधन संबंधी अधोसंरचना।
  • खेल एवं मनोरंजन स्थलों का विकास।
  • रैन बसेरों का निर्माण।
  • अन्य आवश्यक नगरीय विकास कार्य।

इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना और नगरीय निकायों को आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन, 610.51 करोड़ रुपये मंजूर

मध्यप्रदेश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मंत्रि-परिषद ने उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है।

इस योजना के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए निर्धारित की गई है।

यह राज्य पोषित योजना है। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश हेल्थ सेक्टर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम 2020 और 2025 की नीतियों में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार निवेशकों को पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है।

इसका उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करना, निवेश के नए अवसर विकसित करना और रोजगार की संभावनाएं बढ़ाना है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ने से चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ निवेश की मात्रा, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सुविधाओं की आम नागरिकों तक पहुंच पर निर्भर करेगा।

लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए 573.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति

भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े लोकायुक्त संगठन के सुचारु संचालन के लिए भी मंत्रि-परिषद ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

लोकायुक्त संगठन के लिए 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 573 करोड़ 85 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।

इसमें से:

  • 553 करोड़ 85 लाख रुपये कार्यालय स्थापना, वेतन, भत्तों और कार्यालय व्यय के लिए।
  • 20 करोड़ रुपये विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए।

लोकायुक्त संगठन की कार्यक्षमता प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

इस वित्तीय स्वीकृति से संगठन के नियमित संचालन और आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जबलपुर के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के लिए पद सृजन

मंत्रि-परिषद ने जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के संचालन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

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संग्रहालय के नियमित संचालन, देखरेख और प्रशासनिक कार्यों के लिए सहायक अनुसंधान अधिकारी (संग्रहालय प्रभारी) का एक नियमित पद स्वीकृत किया गया है।

इसके साथ ही संग्रहालय के संचालन और संधारण के लिए वार्षिक 83 लाख 18 हजार रुपये की राशि मंजूर की गई है।

इस राशि का उपयोग प्रशासनिक व्यय, बिजली, पानी, भवन रखरखाव और अन्य आवश्यक संचालन संबंधी कार्यों में किया जाएगा।

राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। संग्रहालय के व्यवस्थित संचालन से उनके योगदान और जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को संरक्षित रखने में सहायता मिल सकती है।

मंत्रि-परिषद के फैसलों का प्रदेश के विकास पर क्या होगा असर?

मंत्रि-परिषद की बैठक में स्वीकृत प्रस्ताव अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें पर्यावरण संरक्षण, सिंचाई, शहरी सुविधाएं, स्वास्थ्य निवेश और प्रशासनिक व्यवस्था को महत्व दिया गया है।

इन फैसलों के संभावित प्रभावों को पांच प्रमुख क्षेत्रों में समझा जा सकता है।

  1. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: सिंचाई परियोजनाओं से कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने की क्षमता विकसित होगी। इससे किसानों को फसल उत्पादन की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
  2. पर्यावरण और जैव विविधता: वन संरक्षण, क्षतिपूर्ति वनीकरण और वन्यजीव प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।
  3. शहरी विकास: पेयजल, सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण से नगरीय जीवन की गुणवत्ता में सुधार की संभावनाएं हैं।
  4. स्वास्थ्य एवं रोजगार: स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने से उद्योगों के विस्तार और रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
  5. प्रशासनिक जवाबदेही: लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने से उसकी प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

पांच वर्षों की स्वीकृतियों के बाद अब क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

मंत्रि-परिषद के फैसलों में कई योजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि संबंधित विभागों को आने वाले वर्षों में स्वीकृत योजनाओं का संचालन और वित्तीय प्रबंधन करना होगा।

वन संरक्षण से लेकर सिंचाई परियोजनाओं तक इन प्रस्तावों का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार किया जाएगा।

इसके लिए परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति, वित्तीय अनुशासन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

सिंचाई परियोजनाओं के मामले में किसानों तक पानी पहुंचना, वन योजनाओं में वास्तविक संरक्षण कार्य होना और नगरीय योजनाओं में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होना परिणामों के आकलन के प्रमुख आधार होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई है। वनों के संरक्षण, छह जिलों की सिंचाई परियोजनाओं, शहरी अधोसंरचना, स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए किए गए वित्तीय प्रावधान प्रदेश के विकास की विभिन्न आवश्यकताओं से जुड़े हैं। अब इन फैसलों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि स्वीकृत योजनाएं निर्धारित समय में जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से उतरती हैं और उनका लाभ आम नागरिकों, किसानों तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों तक कितना पहुंचता है।