(ब्यूरो कार्यालय)
देहरादून (साई)। दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना जल्द राहत लेकर आ सकती है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ने वाला हलगोया-हरिद्वार लिंक मार्ग नवंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में यातायात के लिए खोले जाने की तैयारी है। करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा यह 51 किलोमीटर लंबा सिक्सलेन एक्सेस-कंट्रोल हाईवे सहारनपुर, रुड़की और हरिद्वार के बीच आवागमन को अधिक सुगम बनाने में मदद करेगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की ओर से इस मार्ग पर सुरक्षा मानकों और फिनिशिंग से जुड़े शेष कार्य पूरे किए जा रहे हैं। परियोजना के चालू होने से दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार जाने वाले वाहनों को एक वैकल्पिक तेज मार्ग मिल सकेगा। खास तौर पर रुड़की और बहादराबाद के आसपास यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा लगभग 90 मिनट में पूरी होने की संभावना जताई है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय वाहन की गति, यातायात, प्रवेश-निकास बिंदुओं और सड़क की परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा। <Cite refs={[“turn378304search0″,”turn378304search2″,”turn378304search3”]}/>
हलगोया से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर का सिक्सलेन लिंक मार्ग
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के बीच हलगोया से हरिद्वार को जोड़ने वाला यह लिंक मार्ग उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में बड़गांव के पास स्थित हलगोया मुस्तहकम गांव से शुरू होता है। यहां से छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल हाईवे आगे उत्तराखंड की ओर बढ़ता है और रुड़की क्षेत्र को जोड़ते हुए हरिद्वार के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-334 तक पहुंच उपलब्ध कराता है।
पूरे मार्ग की लंबाई लगभग 51 किलोमीटर बताई गई है। इसमें सहारनपुर जिले के भीतर करीब 19 किलोमीटर का हिस्सा आता है। यह हिस्सा मुख्य रूप से 17 गांवों की सीमाओं से होकर गुजरता है। इस मार्ग के निर्माण से सहारनपुर और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क को एक नया विकल्प मिलेगा।
परियोजना की लागत लगभग 1,500 करोड़ रुपये बताई गई है। मार्ग को इस तरह तैयार किया गया है कि लंबी दूरी के वाहनों को शहरों और कस्बों के भीतर से गुजरने की जरूरत कम पड़े। इससे स्थानीय यातायात और हाईवे पर चलने वाले वाहनों के बीच होने वाला टकराव भी कम किया जा सकता है।
नवंबर के आखिरी सप्ताह में खोलने की तैयारी, फिनिशिंग पर काम
हलगोया-हरिद्वार हाईवे पर फिलहाल निर्माण के अंतिम चरण से जुड़े काम किए जा रहे हैं। एनएचएआई की ओर से सुरक्षा मानकों की जांच और फिनिशिंग का काम पूरा कराया जा रहा है।
सहारनपुर क्षेत्र में परियोजना के निर्माण और यातायात के लिए इसे खोलने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। एनएचएआई के रुड़की डिवीजन के परियोजना निदेशक पुनीत गर्ग के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानों पर फिनिशिंग का काम जारी है और नवंबर के अंतिम सप्ताह तक वाहनों की आवाजाही शुरू कराने की तैयारी है। <Cite refs={[“turn378304search0″,”turn378304search9”]}/>
किसी भी एक्सेस-कंट्रोल हाईवे को यातायात के लिए खोलने से पहले सुरक्षा से जुड़े जरूरी इंतजाम पूरे करना महत्वपूर्ण होता है। सड़क की सतह, संकेतक, इंटरचेंज, सुरक्षा अवरोध, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं की जांच के बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू की जाती है।
इसलिए नवंबर के अंतिम सप्ताह की तारीख को फिलहाल प्रस्तावित समयसीमा के रूप में देखना उचित होगा। अंतिम तारीख और यातायात शुरू होने की आधिकारिक सूचना संबंधित प्राधिकरण की ओर से जारी किए जाने के बाद ही यात्रा की योजना बनाना बेहतर रहेगा।
एक्सेस-कंट्रोल हाईवे पर कहीं से भी प्रवेश नहीं कर सकेंगे वाहन
इस हाईवे की प्रमुख विशेषता इसका एक्सेस-कंट्रोल डिजाइन है। इसका मतलब है कि वाहन चालक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी स्थान से हाईवे पर प्रवेश नहीं कर सकेंगे और न ही मनचाही जगह से बाहर निकल सकेंगे।
एनएचएआई की ओर से निर्धारित इंटरचेंज और प्रवेश-निकास बिंदुओं के माध्यम से ही वाहनों को हाईवे पर चढ़ने और उतरने की अनुमति होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 51 किलोमीटर के इस मार्ग पर दो प्रमुख स्थानों पर प्रवेश और निकास की सुविधा रखी गई है।
- उत्तर प्रदेश के नागल में: हाईवे के आठवें किलोमीटर के आसपास।
- उत्तराखंड के सलीयर में: हाईवे के 32वें किलोमीटर के आसपास।
इस व्यवस्था का उद्देश्य हाईवे पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित रखना और अचानक प्रवेश या निकास से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम करना है।
एक्सेस-कंट्रोल सड़क पर निर्धारित स्थानों के अलावा अन्य जगहों से वाहन प्रवेश नहीं कर सकते। इसलिए यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपने गंतव्य के अनुसार सही इंटरचेंज की जानकारी रखना जरूरी होगा।
सहारनपुर के 17 गांवों को मिलेगा बेहतर सड़क संपर्क
हलगोया-हरिद्वार लिंक हाईवे का एक बड़ा हिस्सा सहारनपुर जिले से होकर गुजरता है। इससे जिले के कई गांवों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की संभावना है।
उपलब्ध परियोजना विवरण में जिन गांवों का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं—
- हलगोया अहतमाल
- हलगोया मुस्तहकम
- शीतलाखेड़ा
- शीतलाखेड़ा अहतमाल
- पहाड़पुर
- गांगनौली
- साधारण सिर
- बसेड़ा
- डंगरौली
- नैनसोब
- खेड़ामुगल
- बिलासपुर शेखूपुर
- शेऊपुर
- ताजपुर
- नाफेपुर
- पनियाली कासिमपुर
- अकबरपुर उर्फ भारापुर
इन गांवों के आसपास रहने वाले लोगों को क्षेत्रीय संपर्क में सुधार का लाभ मिल सकता है। हाईवे के कारण स्थानीय स्तर पर परिवहन, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि एक्सेस-कंट्रोल व्यवस्था के कारण हर गांव से सीधे हाईवे पर प्रवेश संभव नहीं होगा। यात्रियों को निर्धारित इंटरचेंज तक पहुंचना होगा। इसलिए स्थानीय लाभ का स्तर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि गांवों से इन प्रवेश-निकास बिंदुओं तक संपर्क मार्ग कितने सुविधाजनक हैं। <Cite refs={[“turn378304search0″,”turn378304search1”]}/>
उत्तराखंड में सलीयर, मेहवड़ कलां और रहमतपुर तक पहुंचेगा मार्ग
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से आगे बढ़ने के बाद यह हाईवे उत्तराखंड में प्रवेश करेगा। इसके बाद मार्ग सलीयर, मेहवड़ कलां और रहमतपुर जैसे क्षेत्रों से जुड़ते हुए बहादराबाद तक पहुंचेगा।
इस कनेक्टिविटी का लाभ रुड़की और हरिद्वार के बीच यात्रा करने वाले लोगों को मिल सकता है। दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले वाहन शहरों के भीतर के व्यस्त हिस्सों से बचते हुए हरिद्वार की ओर बढ़ सकेंगे।
बहादराबाद के आसपास सड़क फिनिशिंग का काम पूरा होने के बाद पूरे लिंक मार्ग को यातायात के लिए खोलने की तैयारी है। इस हिस्से के चालू होने से हरिद्वार की ओर जाने वाले वाहनों को एक नया विकल्प मिलेगा।
दिल्ली से हरिद्वार की दूरी और यात्रा समय में कमी की उम्मीद
दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले यात्रियों को वर्तमान में अलग-अलग मार्गों का उपयोग करना पड़ता है। यात्रा का समय इस बात पर निर्भर करता है कि वाहन किस रास्ते से जा रहा है, किस समय यात्रा की जा रही है और रास्ते में कितना ट्रैफिक है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते हरिद्वार पहुंचने के दौरान कई स्थानों पर यातायात का दबाव मिल सकता है। छुट्टियों, सप्ताहांत और धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों की संख्या बढ़ने से यात्रा में अधिक समय लगना भी सामान्य है।
हलगोया-हरिद्वार लिंक मार्ग के चालू होने के बाद दिल्ली से आने वाले वाहन बागपत और शामली की दिशा से हलगोया पहुंचकर इस नए सिक्सलेन मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। इससे सहारनपुर, रुड़की और बहादराबाद के व्यस्त हिस्सों में लगने वाले जाम से बचने का विकल्प मिल सकता है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 27 अक्टूबर 2026 को एक कार्यक्रम में कहा था कि नई सड़क परियोजना के चालू होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा करीब डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट में पूरी हो सकती है। यह एक अनुमानित यात्रा समय है, जिसकी वास्तविक पुष्टि मार्ग के पूरी तरह चालू होने और परिचालन व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही हो सकेगी। <Cite refs={[“turn378304search2″,”turn378304search3″,”turn378304search6”]}/>
रुड़की और बहादराबाद के जाम से मिल सकती है राहत
हरिद्वार की ओर जाने वाले वाहनों के लिए रुड़की और बहादराबाद के आसपास का यातायात कई बार चुनौती बन जाता है। खासकर धार्मिक पर्वों, छुट्टियों और पर्यटन सीजन में वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़क पर दबाव बढ़ सकता है।
नया लिंक मार्ग लंबी दूरी के वाहनों को शहरों के व्यस्त हिस्सों से बचाकर आगे बढ़ने का विकल्प देगा। इससे स्थानीय और बाहरी यातायात को अलग-अलग रास्ते उपलब्ध हो सकते हैं।
इसके संभावित लाभ इस प्रकार हैं—
- दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक तेज मार्ग मिलेगा।
- सहारनपुर और रुड़की के बीच संपर्क बेहतर होगा।
- रुड़की और बहादराबाद के व्यस्त मार्गों पर वाहनों का दबाव घट सकता है।
- हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
- पर्यटन और धार्मिक यात्रा के दौरान सड़क परिवहन को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि जाम से पूरी तरह मुक्ति मिलने का दावा करना जल्दबाजी होगी। इसके लिए शहरों के भीतर की सड़क व्यवस्था, पार्किंग, स्थानीय यातायात प्रबंधन और अन्य संपर्क मार्गों का भी बेहतर होना जरूरी है।
हाईवे पर छह बड़े पुल और छह फ्लाईओवर
इस 51 किलोमीटर लंबे हाईवे को तेज और व्यवस्थित यातायात के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार मार्ग पर छह बड़े पुल और छह फ्लाईओवर बनाए गए हैं।
उत्तराखंड के बढ़ेड़ी क्षेत्र के पास लगभग 870 मीटर लंबा एलिवेटेड रोड भी तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य उस क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है।
पुल और फ्लाईओवर किसी भी बड़े हाईवे परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से नदियों, नालों, स्थानीय सड़कों और अन्य यातायात मार्गों को पार करने की सुविधा मिलती है। वहीं एलिवेटेड रोड के कारण कुछ व्यस्त हिस्सों में वाहनों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ने का रास्ता मिल सकता है।
इस तरह की संरचनाएं यात्रा समय घटाने के साथ सड़क पर वाहनों के टकराव और ट्रैफिक रुकावट की आशंका कम करने में भी सहायक हो सकती हैं। <Cite refs={[“turn378304search0″,”turn378304search1”]}/>
2027 के हरिद्वार महाकुंभ और धार्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण
हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन बना रहता है। गंगा स्नान, धार्मिक पर्वों और विशेष आयोजनों के दौरान यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
वर्ष 2027 में हरिद्वार में प्रस्तावित धार्मिक आयोजन और कुंभ संबंधी गतिविधियों को देखते हुए सड़क संपर्क का बेहतर होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध होने से यातायात प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
नया हाईवे चालू होने पर दिल्ली से आने वाले वाहनों को हरिद्वार की दिशा में एक वैकल्पिक रास्ता मिलेगा। इससे यात्रा की योजना बनाना आसान हो सकता है और मौजूदा मार्गों पर दबाव बांटने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि किसी बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान केवल हाईवे का निर्माण पर्याप्त नहीं होता। पार्किंग, बसों के संचालन, स्थानीय यातायात, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शहर में प्रवेश-निकास की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
बेहतर सड़क संपर्क का असर केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहता। इससे व्यापार, पर्यटन, परिवहन और स्थानीय रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।
दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार आने वाले पर्यटकों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने से क्षेत्र में आवागमन बढ़ने की संभावना है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, धार्मिक पर्यटन और छोटे कारोबारों पर पड़ सकता है।
सहारनपुर और आसपास के गांवों को भी बेहतर संपर्क का लाभ मिल सकता है। कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं को बाजार तक पहुंचाने में समय की बचत हो सकती है। हालांकि इन आर्थिक लाभों का वास्तविक आकार मार्ग के उपयोग, स्थानीय संपर्क सड़कों और व्यापारिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
हलगोया-हरिद्वार हाईवे एक्सेस-कंट्रोल होगा, इसलिए यात्रियों को सामान्य सड़क की तरह कहीं से भी प्रवेश करने की सुविधा नहीं मिलेगी।
यात्रा की योजना बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होगा—
- हाईवे के आधिकारिक रूप से खुलने की पुष्टि करें।
- अपने गंतव्य के अनुसार नागल या सलीयर इंटरचेंज की जानकारी लें।
- निर्धारित प्रवेश और निकास बिंदुओं का ही उपयोग करें।
- गति सीमा और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें।
- टोल और अन्य परिचालन संबंधी नियमों की जानकारी पहले प्राप्त करें।
- यात्रा समय का अनुमान लगाते समय ट्रैफिक और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखें।
हाईवे खुलने के शुरुआती दिनों में यातायात व्यवस्था और प्रवेश-निकास के नियमों को समझना भी यात्रियों के लिए उपयोगी रहेगा।
दिल्ली-हरिद्वार कनेक्टिविटी को मिलेगा नया विकल्प
हलगोया से हरिद्वार तक बनने वाला 51 किलोमीटर लंबा सिक्सलेन एक्सेस-कंट्रोल हाईवे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस मार्ग को नवंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में खोलने की तैयारी की जा रही है।
इसके शुरू होने से दिल्ली, सहारनपुर, रुड़की और हरिद्वार के बीच आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है। छह बड़े पुल, छह फ्लाईओवर और बढ़ेड़ी के पास 870 मीटर लंबा एलिवेटेड रोड इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं हैं।
दिल्ली से हरिद्वार का सफर करीब 90 मिनट में पूरा होने की संभावना जताई गई है, लेकिन वास्तविक यात्रा समय मार्ग के चालू होने, यातायात और अन्य परिचालन स्थितियों पर निर्भर करेगा।
अब यात्रियों की नजर इस बात पर रहेगी कि एनएचएआई फिनिशिंग और सुरक्षा संबंधी कार्य कब तक पूरे करता है और हाईवे को आधिकारिक रूप से किस तारीख से वाहनों के लिए खोला जाता है।