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ठंड भी क्या चीज़ है—शादी के सामने फीकी पड़ ही जाती है! सिवनी की गलियों में दिसंबर की ठिठुरती शाम थी। हवा इतनी तेज कि बोनट वाले भी काँप जाएँ!…