(ब्यूरो कार्यालय)
बागपत (साई)। राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में शासकीय हाईस्कूल ऐरमा, विकासखंड कुरई, सिवनी के माध्यमिक शिक्षक अनिल राजपूत को सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दो अलग‑अलग संस्थाओं द्वारा 4 अक्टूबर 2026 को महात्मा ज्योतिबा फुले धर्मार्थ ट्रस्ट, भिवानी (हरियाणा) और 5 अक्टूबर 2026 को चौधरी केहर सिंह एजुकेशनल ट्रस्ट, बड़ौत, बागपत (उत्तर प्रदेश) में आयोजित किया गया। अनिल राजपूत के नवाचारी शिक्षण‑पद्धति और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।
शिक्षण में नवाचार और NEP‑2020 का अनुपालन
अनिल राजपूत पारंपरिक पद्धति के साथ रचनात्मक, सृजनात्मक और गतिविधि‑आधारित शिक्षण को मिलाते हैं। उन्होंने विषयों को व्यवहारिक रूप से समझाने के लिए प्रयोगशाला, मॉडल, समूह चर्चा और प्रोजेक्ट‑आधारित कार्यों को नियमित किया है। यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय शिक्षा नीति‑2020 के ‘शिक्षक को कौशल विकासकर्ता’ के विचार के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जहाँ रटने की बजाय अनुभवात्मक सीखने पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों की तार्किक सोच, रचनात्मकता और भावनात्मक क्षमता को विकसित करने हेतु विभिन्न सह‑शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्रमुख उपलब्धियां और भविष्य की दिशा
• विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन में लगातार सुधार।
• स्कूल में विज्ञान मेले, कला प्रतियोगिताएँ और सामाजिक सेवा कार्यक्रमों का नियमित आयोजन।
• डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके ऑनलाइन संसाधन और इंटरैक्टिव लर्निंग मॉड्यूल तैयार करना।
• शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में भाग लेकर नवीनतम शैक्षिक तकनीकों को अपनाना।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: शासकीय हाईस्कूल ऐरमा, सिवनी
• आयोजन: राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह (डॉ. राधाकृष्णन सम्मान)
• स्थान: भिवानी (हरियाणा) और बड़ौत, बागपत (उत्तर प्रदेश)
• मुख्य उद्देश्य: उत्कृष्ट शिक्षण‑पद्धति और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को मान्यता देना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: NEP‑2020 के अनुरूप गतिविधि‑आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना
• लक्ष्य: भविष्य में अधिक नवाचारपूर्ण शैक्षणिक मॉडल विकसित करना और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षण मानकों को ऊँचा उठाना
अनिल राजपूत द्वारा अपनाई गई सक्रिय, तकनीकी‑समर्थित और छात्र‑केंद्रित शिक्षण पद्धति न केवल स्कूल के शैक्षणिक मानकों को ऊँचा करती है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को भी साकार करती है। नियमित रूप से आयोजित सम्मान और मूल्यांकन कार्यक्रम शिक्षक‑छात्र संबंध को सुदृढ़ करेंगे, जिससे सतत् शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक विकास की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
