(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। सिवनी अग्रवाल समाज ने 11 अक्टूबर को लूघरवाड़ा के अग्रसेन भवन में महाराज श्री अग्रसेन का 5180वां जन्मोत्सव मनाने का आयोजन किया है। चार दिवसीय कार्यक्रम 8 अक्टूबर सुबह 10 बजे ध्वजारोहण से शुरू होगा, जिसमें गंगानगर के प्रसिद्ध अनाज व्यवसायी श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल द्वारा ध्वज पताका फहराई जाएगी। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय प्रतिभा को मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम की रूपरेखा
ध्वजारोहण के बाद शाम 7 बजे से समाज के विभिन्न महिला मंच – अग्रोहा सखी मंच, माधवी मंच, प्रगति महिला मंच, अग्रसेन महिला एकता मंच और अग्रनारी शक्ति मंच – द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। मैरिज ग्रुप और बैचलर ग्रुप में बालीवुड जोड़ी का प्रदर्शन भी दर्शकों को आकर्षित करेगा। 9 अक्टूबर को विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों के लिए बुके बनाना, क्ले आर्ट, ड्राइंग, रील बनाना और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएँगी। 10 अक्टूबर को आनंद मेला में खान‑पान, हस्तकला स्टाल, म्यूजिकल चेयर, क्विज़ और खेल‑जीतो कार्यक्रमों के साथ पुरस्कार वितरण होगा।
सुरक्षा, तकनीक और सामाजिक प्रतिबद्धताएँ
समारोह में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवकों ने भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था की है। कार्यक्रम स्थल पर डिजिटल साइन बोर्ड और लाइव स्ट्रीमिंग सेटअप के माध्यम से दूरस्थ दर्शकों को भी भागीदारी का अवसर मिलेगा। समाज के प्रवक्ता श्री संजय अग्रवाल ने बताया कि 11 अक्टूबर को मुख्य समारोह से पहले सुबह 10 बजे गंगानगर से भव्य वाहन रैली निकलेगी, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों को सजाया जाएगा और स्थानीय व्यापारियों को समर्थन मिलेगा।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: सिवनी अग्रवाल समाज
• आयोजन: अग्रसेन 5180वां जन्मोत्सव
• स्थान: लूघरवाड़ा, गंगानगर
• मुख्य उद्देश्य: सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सहभागिता, युवा सशक्तिकरण
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: चार दिवसीय कार्यक्रम, महिला मंच प्रस्तुतियां, विभिन्न प्रतियोगिताएं, वाहन रैली
• लक्ष्य: स्थानीय समुदाय को एकजुट करना, प्रतिभा को मंच देना, सुरक्षा एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना
अग्रसेन 5180वां जन्मोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराओं को जीवित रखेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपायों के साथ सामाजिक सहभागिता को भी सुदृढ़ करेगा। नियमित समीक्षा और समुदाय‑केन्द्रित पहलें भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रमों को सतत विकास और सांस्कृतिक समृद्धि की दिशा में ले जाएँगी।