सिवनी में बिजली चोरी के खिलाफ चला विशेष जांच अभियान
(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। बिजली चोरी और विद्युत के अवैध उपयोग पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिवनी संभाग में बड़ा जांच अभियान चलाया गया। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 07 सितंबर 2026 को सिवनी संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में विद्युत कनेक्शनों और मीटरों की जांच की गई।
मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिवनी संभाग में बिजली के अवैध उपयोग और चोरी को रोकने के लिए एक व्यापक जांच अभियान चलाया गया। अधीक्षण अभियंता (संचा.संधा.) वृत्त सिवनी श्री पी.के. गेडाम, कार्यपालन अभियंता (संचा.संधा.) संभाग सिवनी श्री आर.एस. डावर के निर्देशन में वितरण केन्द्र सहायक अभियंता सिवनी (शहर) के विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक चेकिंग की गई।

इस विशेष अभियान के दौरान विभाग की टीमों को बिजली के उपयोग से जुड़ी कई तरह की अनियमितताएं मिलीं। जांच के बाद विद्युत अधिनियम के तहत कुल 32 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं।

विभाग ने संकेत दिया है कि बिजली चोरी और अवैध उपयोग के खिलाफ यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। सिवनी संभाग में आगे भी क्रमबद्ध तरीके से जांच अभियान चलाए जाने की बात कही गई है।
10 विशेष जांच टीमों ने संभाला मोर्चा
बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए सिवनी संभाग में कुल 10 विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों का नेतृत्व सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं द्वारा किया गया।

टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर विद्युत कनेक्शनों की जांच की। इस दौरान मीटर की स्थिति, बिजली उपयोग का तरीका और कनेक्शन के स्वीकृत उपयोग की जांच की गई।
अभियान का उद्देश्य ऐसे मामलों की पहचान करना था, जहां विद्युत का उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत किया जा रहा था या बिजली की वास्तविक खपत को प्रभावित करने के लिए किसी प्रकार की अनधिकृत व्यवस्था की गई थी।
विभाग के मुताबिक जांच के दौरान मिली अनियमितताओं के आधार पर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किए गए।
जांच में सामने आईं बिजली उपयोग की कई अनियमितताएं
विशेष जांच अभियान के दौरान विभाग ने बिजली चोरी और अनधिकृत बिजली उपयोग से जुड़े अलग-अलग तरीकों को चिन्हित किया। प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य रूप से छह प्रकार की अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
मीटर से छेड़छाड़ का मामला
जांच के दौरान कुछ मामलों में विद्युत मीटर से छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई। विभाग के अनुसार, मीटर के पीछे छेद करके उसकी गति को प्रभावित करने और बिजली चोरी करने जैसी अनियमितता पाई गई।

मीटर बिजली की खपत को मापने का महत्वपूर्ण उपकरण होता है। ऐसे में मीटर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश विद्युत विभाग की जांच के दायरे में आती है।
सर्विस लाइन में कट लगाकर बिजली का उपयोग
जांच में मुख्य सर्विस लाइन में सीधे कट लगाकर बिजली का अवैध उपयोग किए जाने से संबंधित मामले भी सामने आए।

इस तरह की व्यवस्था में बिजली के नियमित मापन और बिलिंग प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा सकता है। विभाग ने ऐसे मामलों में भी कार्रवाई की है।
बाईपास के जरिए बिजली का अनधिकृत उपयोग
जांच टीमों को कुछ ऐसे मामले भी मिले, जिनमें घरों में अतिरिक्त अर्थिंग बनाकर सीधे बाईपास के माध्यम से बिजली का उपयोग किए जाने का उल्लेख है।
विभाग ने इस तरह के उपयोग को अनधिकृत विद्युत उपयोग के रूप में लिया और संबंधित प्रकरणों में कार्रवाई की।
घरेलू कनेक्शन से व्यावसायिक उपयोग भी जांच के दायरे में
अभियान के दौरान बिजली कनेक्शन के वास्तविक उपयोग की भी जांच की गई। विभाग के अनुसार कुछ मामलों में घरेलू विद्युत कनेक्शन का गैर-घरेलू या व्यावसायिक कार्यों के लिए उपयोग किए जाने की अनियमितता सामने आई।
विद्युत कनेक्शन जिस श्रेणी के लिए स्वीकृत होता है, उसके अनुरूप उसका उपयोग करना जरूरी होता है। यदि घरेलू कनेक्शन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया जाता है, तो यह विभागीय नियमों के तहत जांच का विषय बन सकता है।
इस तरह के मामलों में विभाग द्वारा कनेक्शन की वास्तविक स्थिति और स्वीकृत श्रेणी की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
स्मार्ट मीटर को बाईपास करने की भी शिकायत
बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे आधुनिक स्मार्ट मीटर भी इस जांच अभियान के दायरे में रहे। प्रेस विज्ञप्ति में स्मार्ट मीटर को बाईपास कर अवैध रूप से बिजली उपयोग किए जाने के मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

स्मार्ट मीटर बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लगाए जाते हैं। ऐसे में मीटर की व्यवस्था को बाईपास करने का प्रयास विभागीय जांच में गंभीर अनियमितता के रूप में सामने आ सकता है।
जांच के दौरान पाई गई मुख्य अनियमितताएं निम्नलिखित हैं:
- विद्युत मीटर से छेड़छाड़: विद्युत मीटर के पीछे छेद कर मीटर की गति को धीमा करने और चोरी करने के मामले।
- सर्विस लाइन में कट: मुख्य सर्विस लाइन में सीधे कट लगाकर अवैध रूप से बिजली का उपयोग।
- अवैध अर्थिंग: घरों में अतिरिक्त अर्थिंग बनाकर सीधे बाईपास तरीके से विद्युत का अनाधिकृत उपयोग।
- घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग: घरेलू विद्युत कनेक्शन का गैर-घरेलू या व्यावसायिक कार्यों में अवैध उपयोग।
- स्मार्ट मीटर बाईपास: आधुनिक स्मार्ट मीटरों को बाईपास कर अवैध रूप से बिजली का उपयोग।
- स्वीकृत भार से अधिक उपयोग: स्वीकृत भार से अधिक भार का उपभोक्ता द्वारा उपयोग किए जाने के मामले।
उपरोक्त सभी मामलों में विद्युत अधिनियम की धारा 135, 138 और 126 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की गई है।
इस कार्रवाई के दौरान बिजली विभाग की चेकिंग टीम में कार्यपालन अभियंता (वितरण) उपसंभाग सिवनी श्री संदीप धुर्वे, सहायक अभियंता श्री संदीप डोंगरे, श्री नीलेश कुमार उइके, श्री जगदीश प्रसाद परिहार, श्री मनीष कुमार मरकाम, श्री भूपाल सिंह उइके, श्री मुकेश कुमरे, कनिष्ठ अभियंता श्री प्रमोद कुमार सराठे, श्री शरदेन्दु पाण्डे, श्री आशीष कुर्चे, श्री राहुल प्रकाश, श्री नरेन्द्र कुमार ठाकरे, श्री नौलेश तिवारी, श्री मुकेश मरस्कोले, श्री जगदीश्वर दुबे, वरिष्ठ परीक्षण सहायक श्री राजेश कुमार मार्को, श्री रामेश्वर नायक एवं सिवनी शहर के लाइन कर्मचारी श्री आत्माराम सनोडिया, श्री कमल कुमार देशमुख, श्री आनंद पटले, श्रीमती ज्योतेश्वरी पटले, श्रीमती सीमा सनोडिया, श्रीमती अंजूलता जावर, श्रीमती दीपा ठाकुर, श्री कोमेद्र भरने, श्री पवन शरणागत, श्री दीपेन्द्र परिहार, श्री मोहन सिंह बघेल और कार्यालयीन स्टाफ मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग पर भी नजर
जांच अभियान के दौरान केवल चोरी के मामलों पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि स्वीकृत विद्युत भार के अनुरूप बिजली उपयोग हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच की गई।
विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कुछ मामलों में स्वीकृत भार से अधिक भार का उपयोग किए जाने की बात सामने आई।
किसी कनेक्शन पर निर्धारित स्वीकृत भार से अधिक विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल किए जाने पर कनेक्शन की तकनीकी और वाणिज्यिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता को नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
विद्युत अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज हुए प्रकरण
विभाग के अनुसार जांच के दौरान सामने आए मामलों में विद्युत अधिनियम की धारा 135, 138 और 126 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की गई है।
इन धाराओं के तहत अलग-अलग प्रकार की विद्युत अनियमितताओं और अनधिकृत उपयोग से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि, किसी मामले में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच और आगे की निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति या उपभोक्ता के खिलाफ प्रकरण दर्ज होना अपने आप में अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाता। संबंधित मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है।
32 प्रकरण दर्ज होने से बढ़ी विभागीय सख्ती
एक विशेष अभियान में 32 प्रकरणों का पंजीबद्ध होना सिवनी संभाग में बिजली चोरी और अनधिकृत उपयोग के खिलाफ विभाग की सक्रियता को दर्शाता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में 10 जांच टीमों की तैनाती से एक साथ कई स्थानों पर कनेक्शनों की जांच संभव हुई। इससे विभाग को विद्युत उपयोग की वास्तविक स्थिति की पड़ताल करने में मदद मिली।
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विभाग ने बिजली चोरी के अलावा कनेक्शन के गलत उपयोग, मीटर से छेड़छाड़ और स्वीकृत भार से अधिक उपयोग जैसी अनियमितताओं को भी जांच के दायरे में रखा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है महत्वपूर्ण?
बिजली विभाग की इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं के लिए अपने विद्युत कनेक्शन और मीटर की स्थिति को लेकर सतर्क रहना जरूरी है।
उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—
- बिजली मीटर के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।
- सर्विस लाइन में अवैध कट या बाईपास न लगाया जाए।
- बिजली का उपयोग स्वीकृत कनेक्शन की श्रेणी के अनुसार किया जाए।
- घरेलू कनेक्शन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नियमों के विपरीत न किया जाए।
- स्वीकृत भार से अधिक बिजली की जरूरत होने पर नियमानुसार भार बढ़वाया जाए।
- स्मार्ट मीटर या विद्युत उपकरणों में किसी प्रकार की अनधिकृत तकनीकी छेड़छाड़ न की जाए।
- बिजली से संबंधित किसी समस्या के समाधान के लिए अधिकृत विभागीय प्रक्रिया का उपयोग किया जाए।
बिजली चोरी का असर केवल विभाग तक सीमित नहीं
बिजली चोरी या अनधिकृत उपयोग का प्रभाव केवल बिजली वितरण कंपनी के स्तर तक सीमित नहीं माना जाता। विद्युत वितरण व्यवस्था में वास्तविक खपत और बिलिंग का सही आकलन महत्वपूर्ण होता है।
यदि किसी क्षेत्र में बिजली का अनधिकृत उपयोग होता है तो इससे वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा मीटर या लाइन से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियां विद्युत सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम पैदा कर सकती हैं।
इसी कारण बिजली विभाग समय-समय पर विशेष जांच अभियान चलाता है। सिवनी में भी 10 विशेष टीमों के माध्यम से की गई जांच इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है।
कार्रवाई का प्रशासनिक और सामाजिक असर
इस अभियान का प्रशासनिक प्रभाव यह है कि बिजली विभाग द्वारा अनियमित विद्युत उपयोग की निगरानी को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष जांच टीमों की तैनाती से विभागीय निगरानी मजबूत हो सकती है।
सामाजिक स्तर पर भी ऐसी कार्रवाई उपभोक्ताओं को बिजली के वैध उपयोग के प्रति जागरूक कर सकती है। जो उपभोक्ता नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं, उनके लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि वितरण व्यवस्था में अनधिकृत उपयोग को नियंत्रित किया जाए।
हालांकि, विभागीय कार्रवाई के प्रत्येक मामले का परिणाम संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
किन क्षेत्रों में हुई कार्रवाई?
जारी प्रेस विज्ञप्ति में सिवनी संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाए जाने की जानकारी दी गई है। सिवनी शहर के लाइन कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, उपलब्ध सूचना में 32 प्रकरणों से जुड़े सभी उपभोक्ताओं के नाम और व्यक्तिगत पते सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए ऐसे मामलों में बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति या स्थान का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा।
आगे भी जारी रहेगा बिजली जांच अभियान
बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि सिवनी संभाग में बिजली के अवैध उपयोग और चोरी को रोकने के लिए व्यापक जांच अभियान क्रमबद्ध रूप से जारी रखा जाएगा।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में भी अलग-अलग क्षेत्रों में विद्युत कनेक्शनों और मीटरों की जांच की जा सकती है। विभाग की निगरानी विशेष रूप से उन मामलों पर केंद्रित रह सकती है, जहां मीटर से छेड़छाड़, बाईपास, अवैध कनेक्शन या स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग जैसी शिकायतें या संदेह सामने आते हैं।
इससे बिजली उपभोक्ताओं के लिए अपने कनेक्शन की स्थिति और बिजली उपयोग के नियमों का पालन करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
बिजली विभाग की कार्रवाई से क्या संदेश?
सिवनी में हुई कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि बिजली चोरी और अनधिकृत बिजली उपयोग को लेकर विभाग जांच व्यवस्था को सक्रिय बनाए हुए है।
10 विशेष जांच टीमों के माध्यम से एक साथ अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई और 32 प्रकरणों का पंजीबद्ध होना इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
हालांकि, विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य केवल मामले दर्ज करना नहीं, बल्कि विद्युत वितरण व्यवस्था में नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी है। यदि उपभोक्ता निर्धारित नियमों के अनुसार बिजली का उपयोग करते हैं तो अनावश्यक विवाद और कानूनी कार्रवाई की स्थिति से बचा जा सकता है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है निगरानी
विभाग ने अभियान को आगे भी क्रमबद्ध तरीके से जारी रखने की जानकारी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सिवनी संभाग के अन्य क्षेत्रों में भी जांच अभियान देखने को मिल सकता है।
खासकर उन कनेक्शनों पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है, जहां बिजली के उपयोग और स्वीकृत कनेक्शन में अंतर पाया जाता है या मीटर तथा लाइन से संबंधित अनियमितता की आशंका होती है।
आम उपभोक्ताओं के लिए इस स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि वे अपने बिजली कनेक्शन की श्रेणी, स्वीकृत भार और मीटर की स्थिति को लेकर नियमों का पालन करें।
सिवनी संभाग में 07 सितंबर 2026 को बिजली चोरी और अवैध बिजली उपयोग के खिलाफ चलाए गए विशेष जांच अभियान में कुल 32 प्रकरण दर्ज किए गए। इस अभियान के लिए सहायक और कनिष्ठ अभियंताओं के नेतृत्व में 10 विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था।
जांच के दौरान विद्युत मीटर से छेड़छाड़, सर्विस लाइन में कट, बाईपास के जरिए बिजली उपयोग, घरेलू कनेक्शन के व्यावसायिक इस्तेमाल, स्मार्ट मीटर को बाईपास करने और स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग जैसी अनियमितताओं का उल्लेख विभागीय प्रेस विज्ञप्ति में किया गया है।
विभाग ने संबंधित मामलों में विद्युत अधिनियम की धारा 135, 138 और 126 के तहत कार्रवाई की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी और अवैध उपयोग के खिलाफ जांच अभियान आगे भी क्रमबद्ध रूप से जारी रहेगा।
ऐसे में सिवनी जिले के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने विद्युत कनेक्शन का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार करें। बिजली चोरी से बचना, मीटर से छेड़छाड़ न करना और स्वीकृत भार व कनेक्शन श्रेणी के अनुरूप बिजली का इस्तेमाल करना न केवल कानूनी रूप से जरूरी है, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित विद्युत व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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