राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में MP का परचम, इंदौर दूसरे-जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर; वार्ड-60 भी सम्मानित

मध्यप्रदेश ने स्वच्छ हवा के मोर्चे पर हासिल की बड़ी उपलब्धि

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली (साई)। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों ने देश के शीर्ष पांच स्वच्छ वायु शहरों में जगह बनाई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर ने देश में दूसरा, जबलपुर ने तीसरा और राजधानी भोपाल ने चौथा स्थान हासिल किया है।

इस उपलब्धि ने मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। खास बात यह है कि केवल बड़े शहरों ने ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों ने भी अलग-अलग आबादी वर्गों में बेहतर प्रदर्शन किया है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर सोमवार, 7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में चयनित शहरों और स्थानीय निकायों को सम्मानित किया गया।

समारोह में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने सम्मान प्रदान किए।

टॉप-5 में मध्यप्रदेश के तीन शहर

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी NCAP के अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों के बीच वायु गुणवत्ता सुधार और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है। वर्ष 2026 के सर्वेक्षण में 130 प्रमुख शहरों को निर्धारित मापदंडों के आधार पर रैंकिंग में शामिल किया गया।

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में मध्यप्रदेश के तीन शहरों ने शीर्ष पांच में स्थान बनाया।

प्रमुख रैंकिंग

  • इंदौर – दूसरा स्थान
  • जबलपुर – तीसरा स्थान
  • भोपाल – चौथा स्थान
  • ग्वालियर – 39वां स्थान

इस श्रेणी में इंदौर, जबलपुर और भोपाल का एक साथ शीर्ष पांच में पहुंचना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

यह परिणाम इसलिए भी अहम है क्योंकि बड़े शहरों में बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल और शहरीकरण के कारण वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती रहता है।

इंदौर ने हासिल किया दूसरा स्थान

स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार अपनी पहचान बनाने वाले इंदौर ने स्वच्छ वायु प्रबंधन में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। शहर ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदौर में धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड सड़क सफाई, हरित क्षेत्र के विस्तार और नागरिक सहभागिता जैसे उपायों पर विशेष जोर दिया गया।

शहरी क्षेत्रों में सड़क की धूल वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में शामिल होती है। ऐसे में सड़कों की नियमित सफाई और धूल नियंत्रण के प्रयासों को प्रदूषण कम करने की दिशा में उपयोगी माना जाता है।

इंदौर नगर निगम की ओर से महापौर पुष्यमित्र भार्गव, आयुक्त क्षितिज सिंघल और एमआईसी सदस्य अश्विनी शुक्ला ने समारोह में सम्मान ग्रहण किया।

इंदौर की उपलब्धि में किन प्रयासों की भूमिका रही?

शहर के प्रदर्शन से जुड़े प्रमुख प्रयासों में शामिल रहे—

  • मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग
  • धूल नियंत्रण के उपाय
  • हरित क्षेत्रों का विस्तार
  • नागरिक सहभागिता
  • स्वच्छता गतिविधियों का निरंतर संचालन
  • शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने की पहल

स्वच्छता के साथ वायु गुणवत्ता प्रबंधन को जोड़कर काम करने की यह रणनीति इंदौर के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण रही।

जबलपुर देश में तीसरे स्थान पर

जबलपुर ने भी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों के आधार पर शहर को यह राष्ट्रीय पहचान मिली।

जबलपुर नगर निगम की ओर से महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू‘, आयुक्त राम प्रसाद अहिरवार, कमलेश श्रीवास्तव, संभव अयाची और जी.एस. मरावी ने सम्मान प्राप्त किया।

जबलपुर का तीसरा स्थान हासिल करना इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश के अलग-अलग बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर किए जा रहे प्रयासों का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में दिखाई दे रहा है।

भोपाल चौथे स्थान पर, वार्ड-60 को भी राष्ट्रीय सम्मान

राजधानी भोपाल ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में चौथा स्थान हासिल किया। इसके अलावा भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को वार्ड स्तरीय वायु गुणवत्ता सुधार और स्थानीय स्तर पर किए गए पर्यावरणीय नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

वार्ड-60 में हरित पहल, सघन पौधारोपण और नागरिक जागरूकता से जुड़े प्रयासों को उपलब्धि का आधार बताया गया है।

भोपाल नगर निगम की ओर से अपर आयुक्त अमन मिश्रा और एमआईसी सदस्य आर.के. सिंह बघेल ने सम्मान ग्रहण किया।

यह उपलब्धि खास इसलिए है क्योंकि वायु गुणवत्ता में सुधार केवल शहर स्तर की बड़ी परियोजनाओं से संभव नहीं होता। स्थानीय स्तर पर वार्ड, कॉलोनी और नागरिक समूहों की भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दूसरे शहरों का प्रदर्शन भी रहा उल्लेखनीय

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में मध्यप्रदेश के अन्य शहरों ने भी अलग-अलग आबादी वर्गों में स्थान बनाया।

3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उज्जैन को 16वां और सागर को 21वां स्थान मिला। वहीं, 3 लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देवास ने सातवां स्थान हासिल किया।

ग्वालियर को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 39वां स्थान मिला।

इस तरह सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के कई शहरों की मौजूदगी यह बताती है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन का दायरा केवल प्रदेश के सबसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किन उपायों पर जोर?

शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तरों पर काम करना पड़ता है। सड़क की धूल से लेकर निर्माण गतिविधियों और कचरा जलाने तक, अलग-अलग स्रोतों पर नियंत्रण जरूरी होता है।

प्रदेश में किए गए प्रयासों में मुख्य रूप से निम्न पहलें शामिल बताई गई हैं—

  1. धूल नियंत्रण

सड़कों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित सफाई और अन्य उपाय किए जाते हैं। धूल नियंत्रण शहरी वायु गुणवत्ता सुधार का एक अहम हिस्सा है।

  1. निर्माण स्थलों की निगरानी

निर्माण और विकास कार्यों के दौरान धूल के फैलाव को रोकने के लिए निर्माण स्थलों की निगरानी महत्वपूर्ण है। निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन और धूल नियंत्रण से आसपास के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है।

  1. खुले में कचरा जलाने पर रोक

कचरा खुले में जलाने से स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। इसलिए खुले में कचरा जलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना स्वच्छ वायु प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  1. हरित क्षेत्र का विस्तार

पेड़-पौधे और हरित क्षेत्र शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सघन पौधारोपण और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर दिया जाना इसी दिशा में एक कदम है।

  1. जनभागीदारी

वायु प्रदूषण केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। कचरा नहीं जलाना, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाना सामूहिक स्तर पर प्रभाव डाल सकता है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की भूमिका

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत देश के शहरों में वायु प्रदूषण कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

सर्वेक्षण आधारित रैंकिंग का एक उद्देश्य शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना भी है। जब विभिन्न शहरों के प्रयासों की तुलना होती है तो बेहतर प्रदर्शन करने वाले मॉडल सामने आते हैं और दूसरे शहर उनसे सीख सकते हैं।

मध्यप्रदेश के लिए इस वर्ष की रैंकिंग इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इंदौर, जबलपुर और भोपाल का शीर्ष पांच में आना प्रदेश के शहरी पर्यावरण प्रबंधन को राष्ट्रीय चर्चा में लाता है।

जनभागीदारी बनी उपलब्धि की अहम कड़ी

वायु गुणवत्ता सुधार के लिए सरकारी योजनाओं के साथ लोगों की आदतों में बदलाव भी जरूरी है। यदि नागरिक खुले में कचरा जलाने से बचें, निर्माण कार्यों में नियमों का पालन हो और हरित क्षेत्रों का संरक्षण किया जाए, तो स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पैदा किया जा सकता है।

भोपाल के वार्ड-60 को मिला सम्मान इस बात को रेखांकित करता है कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्र में किए गए स्थानीय प्रयास भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।

वार्ड स्तर की पहलें शहर की समग्र पर्यावरणीय स्थिति को मजबूत करने में आधार तैयार करती हैं।

क्या इस रैंकिंग से आगे की चुनौतियां खत्म हो गईं?

राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर स्थान निश्चित रूप से उपलब्धि है, लेकिन इसे अंतिम लक्ष्य नहीं माना जा सकता। शहरों में लगातार बढ़ता शहरीकरण, वाहन संख्या, निर्माण गतिविधियां और मौसम संबंधी परिस्थितियां भविष्य में भी वायु गुणवत्ता के लिए चुनौती बनी रह सकती हैं।

इसलिए जरूरी होगा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहर अपनी मौजूदा व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत करें और नए प्रदूषण स्रोतों की समय रहते पहचान करें।

सिर्फ एक सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब लंबे समय तक वायु गुणवत्ता में सुधार कायम रहे और इसका लाभ आम नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जीवन गुणवत्ता में दिखाई दे।

भविष्य के लिए क्या मायने रखती है यह सफलता?

मध्यप्रदेश के तीन शहरों का शीर्ष पांच में शामिल होना प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि स्वच्छता, हरित विकास, धूल नियंत्रण और जनभागीदारी को एक साथ लेकर चलने वाली रणनीति शहरी पर्यावरण प्रबंधन में उपयोगी हो सकती है।

आने वाले समय में प्रदेश के लिए चुनौती यह होगी कि इंदौर, जबलपुर और भोपाल जैसे शहर अपने प्रदर्शन को बनाए रखें और अन्य शहर भी बेहतर रैंकिंग की दिशा में आगे बढ़ें।

उज्जैन, सागर, देवास और ग्वालियर जैसे शहरों के लिए भी इस रैंकिंग से आगे सुधार की संभावनाएं खुलती हैं। यदि स्थानीय स्तर पर प्रभावी योजनाओं और नियमित निगरानी को मजबूत किया जाता है, तो आने वाले सर्वेक्षणों में प्रदेश के और शहर बेहतर स्थान हासिल कर सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि के रूप में सामने आया है। इंदौर ने दूसरा, जबलपुर ने तीसरा और भोपाल ने चौथा स्थान हासिल कर देश के शीर्ष पांच में मध्यप्रदेश की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

इसके अलावा भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को वार्ड स्तरीय वायु गुणवत्ता सुधार, हरित पहल, पौधारोपण और नागरिक जागरूकता के प्रयासों के लिए राष्ट्रीय सम्मान मिलना स्थानीय भागीदारी की अहमियत को भी सामने लाता है।

धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड सफाई, हरित क्षेत्र विस्तार, निर्माण स्थलों की निगरानी और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे प्रयासों को आगे भी निरंतरता देना जरूरी होगा। यह उपलब्धि निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाली है, लेकिन स्वच्छ हवा का लक्ष्य दीर्घकालिक प्रयास और निरंतर जनभागीदारी से ही कायम रखा जा सकता है।