सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर बैनगंगा के लखनवाड़ा घाट में विशेष आयोजन, सामूहिक तर्पण और महाआरती

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के पावन अवसर पर सिवनी जिले में बैनगंगा नदी के लखनवाड़ा घाट पर विशेष धार्मिक आयोजन किया जाएगा। बैनगंगा तर्पण समिति, लखनवाड़ा घाट, सिवनी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सामूहिक पार्थिव श्राद्ध, सामूहिक तर्पण, महाआरती और महाप्रसाद वितरण जैसे धार्मिक कार्यक्रम होंगे। आयोजन को लेकर समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने की अपील की है।

पितरों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने के महत्वपूर्ण अवसर सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर सिवनी जिले में धार्मिक आयोजन की तैयारियां की गई हैं। बैनगंगा नदी के लखनवाड़ा घाट पर 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या उत्सव आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न धार्मिक गतिविधियां होंगी।

बैनगंगा तर्पण समिति, लखनवाड़ा घाट, सिवनी की ओर से जारी आमंत्रण के अनुसार श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक पार्थिव श्राद्ध, सामूहिक तर्पण, महाआरती और महाप्रसाद वितरण का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से पितरों का स्मरण करने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप तर्पण एवं श्राद्ध कर्म में शामिल होने का अवसर प्रदान करना है।

10 अक्टूबर को लखनवाड़ा घाट पर होगा आयोजन

आमंत्रण पत्र के अनुसार 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या उत्सव बैनगंगा लखनवाड़ा घाट, सिवनी में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 5:30 बजे शुरू होगा और शाम 6 बजे तक विभिन्न धार्मिक गतिविधियां निर्धारित हैं।

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर होने वाले इस आयोजन में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों के पहुंचने की संभावना है। नदी तट पर सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम होने के कारण पूरे दिन श्रद्धा और धार्मिक वातावरण देखने को मिल सकता है।

समिति की ओर से आमंत्रण पत्र में श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर आयोजन की गरिमा बढ़ाने तथा पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने का आग्रह किया गया है।

सुबह 5:30 बजे सामूहिक पार्वण श्राद्ध

कार्यक्रम का पहला प्रमुख आयोजन सुबह 5:30 बजे सामूहिक पार्वण श्राद्ध होगा। आमंत्रण पत्र में इसे कार्यक्रम की शुरुआत के रूप में दर्ज किया गया है।

सर्वपितृ अमावस्या को पितरों के स्मरण से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिन परिवार अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्राद्ध तथा तर्पण जैसे कर्म करते हैं।

लखनवाड़ा घाट पर सामूहिक आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक साथ धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इससे व्यक्तिगत धार्मिक आस्था के साथ सामूहिक सहभागिता का भाव भी मजबूत होगा।

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सुबह 7:30 बजे होगा सामूहिक तर्पण

सामूहिक पार्थिव श्राद्ध के बाद सुबह 7:30 बजे सामूहिक तर्पण का आयोजन किया जाएगा। बैनगंगा नदी के तट पर होने वाला यह कार्यक्रम सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या उत्सव का प्रमुख हिस्सा रहेगा।

तर्पण भारतीय धार्मिक परंपरा में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया मानी जाती है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए निर्धारित धार्मिक विधि के अनुसार तर्पण कर सकेंगे।

नदी तट पर सामूहिक तर्पण का आयोजन होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता की संभावना है। समिति ने लोगों से आयोजन में गरिमामय तरीके से शामिल होने की अपील की है।

सर्वपितृ अमावस्या का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं में सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इसे उन पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध के लिए भी विशेष माना जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण से निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया हो।

पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हैं। श्राद्ध, तर्पण और अन्य धार्मिक परंपराओं के माध्यम से पितरों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

हालांकि विभिन्न परिवारों और परंपराओं में श्राद्ध एवं तर्पण की विधि अलग-अलग हो सकती है। इसलिए श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक आचार-विचार के अनुसार अनुष्ठान करते हैं।

शाम 6 बजे बैनगंगा तट पर होगी महाआरती

दिनभर के धार्मिक कार्यक्रमों के बाद शाम 6 बजे महाआरती आयोजित की जाएगी। बैनगंगा नदी के लखनवाड़ा घाट पर होने वाली महाआरती आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगी।

नदी तट पर सामूहिक रूप से होने वाली आरती में श्रद्धालु भाग ले सकेंगे। इस दौरान धार्मिक वातावरण के साथ बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी की संभावना है।

महाआरती के माध्यम से आयोजन का समापन धार्मिक एवं सामूहिक भावना के साथ होगा। समिति की ओर से श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।

महाआरती के साथ होगा महाप्रसाद वितरण

आमंत्रण पत्र में शाम 6 बजे महाप्रसाद वितरण का भी उल्लेख किया गया है। यानी महाआरती के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की जाएगी।

धार्मिक आयोजनों में सामूहिक प्रसाद वितरण सामाजिक सहभागिता और आपसी सद्भाव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। लखनवाड़ा घाट पर भी आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से महाप्रसाद ग्रहण करने का अवसर मिलेगा।

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बैनगंगा तट पर बनेगा धार्मिक माहौल

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर बैनगंगा नदी के लखनवाड़ा घाट पर सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। सामूहिक श्राद्ध और तर्पण के बाद शाम को महाआरती तथा महाप्रसाद वितरण होगा।

नदी तट पर होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक सहभागिता का भी अवसर प्रदान करेगा। एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एकत्रित होने से सामूहिक धार्मिक वातावरण बनने की संभावना है।

आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पितृ स्मरण की परंपरा को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। परिवारों के लिए यह अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होगा।

श्रद्धालुओं के लिए कार्यक्रम की पूरी जानकारी

आमंत्रण पत्र में दिए गए कार्यक्रम के अनुसार श्रद्धालु इस प्रकार आयोजन में शामिल हो सकते हैं—

  • स्थान: बैनगंगा लखनवाड़ा घाट, सिवनी
  • दिनांक: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार
  • सुबह 5:30 बजे: सामूहिक पार्थिव श्राद्ध
  • सुबह 7:30 बजे: सामूहिक तर्पण
  • शाम 6:00 बजे: महाआरती
  • शाम 6:00 बजे: महाप्रसाद वितरण
  • आयोजक: बैनगंगा तर्पण समिति, लखनवाड़ा घाट, सिवनी

श्रद्धालुओं के लिए यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्यक्रम में शामिल होते समय स्थानीय व्यवस्था और आयोजक समिति द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पालन किया जाए। नदी घाट पर होने वाले कार्यक्रम में भीड़ और जल क्षेत्र को देखते हुए व्यक्तिगत सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।

आयोजन का सामाजिक पक्ष भी महत्वपूर्ण

धार्मिक आयोजनों का प्रभाव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के लोग एक स्थान पर एकत्रित होते हैं और सामूहिक सहभागिता का अवसर मिलता है।

लखनवाड़ा घाट पर आयोजित होने वाला सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कार्यक्रम भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसमें अलग-अलग परिवारों के लोग एक साथ पितरों का स्मरण करेंगे। सामूहिक श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक जुड़ाव को भी बढ़ावा मिल सकता है।

विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए ऐसे अवसर पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को समझने का माध्यम बन सकते हैं। परिवारों में पूर्वजों के प्रति सम्मान और स्मरण की परंपरा को आगे बढ़ाने में भी ऐसे आयोजनों की भूमिका रहती है।

आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम होने के कारण श्रद्धालुओं में उत्साह रहने की संभावना है। सुबह होने वाले श्राद्ध और तर्पण से लेकर शाम की महाआरती तक पूरा कार्यक्रम धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहेगा।

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समिति द्वारा जारी आमंत्रण में श्रद्धालुओं से आयोजन में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने की अपील की गई है। इससे स्पष्ट है कि आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम के रूप में नहीं बल्कि सामूहिक श्रद्धा के अवसर के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

भविष्य में ऐसे आयोजनों को मिल सकता है विस्तार

बैनगंगा नदी और उसके घाट स्थानीय स्तर पर धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। सामूहिक तर्पण और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से घाटों पर लोगों की सहभागिता बढ़ती है।

यदि ऐसे आयोजन नियमित रूप से व्यवस्थित तरीके से होते हैं तो स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन और सामाजिक सहभागिता को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसके लिए घाट की स्वच्छता, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश और भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहेगा।

हालांकि वर्तमान आयोजन के संबंध में उपलब्ध आमंत्रण पत्र में मुख्य रूप से धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी दी गई है। आयोजन से जुड़ी अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बारे में अलग से कोई विस्तृत जानकारी यहां उपलब्ध नहीं है।

पितरों के स्मरण और सामाजिक एकजुटता का अवसर

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर नहीं बल्कि परिवार और समाज के स्तर पर पूर्वजों के योगदान को याद करने का समय भी माना जाता है। लखनवाड़ा घाट पर होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से इसी भावना से जुड़ने का अवसर देगा।

सुबह होने वाले श्राद्ध और तर्पण के बाद शाम को बैनगंगा तट पर महाआरती और महाप्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस तरह आयोजन की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठान से होकर सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूरी होगी।

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को बैनगंगा नदी के लखनवाड़ा घाट, सिवनी में विशेष धार्मिक आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में सुबह 5:30 बजे सामूहिक पार्थिव श्राद्ध, सुबह 7:30 बजे सामूहिक तर्पण तथा शाम 6 बजे महाआरती और महाप्रसाद वितरण होगा।

बैनगंगा तर्पण समिति ने श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होकर पितरों का स्मरण करने और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनने की अपील की है। सर्वपितृ अमावस्या की धार्मिक परंपरा, बैनगंगा नदी का तट और सामूहिक आयोजन—तीनों मिलकर इस कार्यक्रम को सिवनी के लिए विशेष धार्मिक अवसर बनाएंगे। उपलब्ध आमंत्रण पत्र के अनुसार श्रद्धालुओं से अपेक्षा की गई है कि वे आयोजन की गरिमा बनाए रखते हुए इसमें सहभागिता करें।