(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। लाईफ लाईन पैथालॉजी लैब के संचालक मुरेस डेहरिया के पिता एवं वन विभाग के सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर जवाहर लाल डेहरिया का देवलोक गमन हो गया है। उनके निधन की खबर से परिवार, परिचितों और शुभचिंतकों के बीच शोक की लहर है। जवाहर लाल डेहरिया पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और स्वास्थ्य लाभ के लिए सिवनी स्थित जठार अस्पताल में उपचाररत थे।
15 एवं 16 सितंबर की दरम्यानी रात लगभग साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ परिवार ने एक वरिष्ठ सदस्य और शुभचिंतकों ने एक सहज, मृदुभाषी एवं सहयोगी व्यक्तित्व को खो दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, जवाहर लाल डेहरिया मूलतः छिंदवाड़ा जिले के रोहना ग्राम के निवासी थे। वन विभाग में सेवाकाल के दौरान उन्होंने अपनी कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा के कारण अलग पहचान बनाई थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे अपने परिचितों और सामाजिक संपर्कों के बीच सहज व्यवहार तथा लोगों की सहायता करने की भावना के लिए जाने जाते रहे।
वन विभाग में रहा लंबा सेवाकाल
जवाहर लाल डेहरिया ने अपने व्यावसायिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा वन विभाग में सेवाएं देते हुए बिताया। वे डिप्टी रेंजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवाकाल के दौरान उनके बारे में बताया जाता है कि वे अपने कार्य के प्रति कर्मठ और कर्तव्यपरायण कर्मचारी के रूप में पहचाने जाते थे।
वन विभाग जैसे क्षेत्र में जिम्मेदारियां निभाते हुए कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों, वन क्षेत्रों और विभागीय दायित्वों से जुड़े विभिन्न कार्यों का निर्वहन करना पड़ता है। ऐसे में अनुशासन, जिम्मेदारी और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जवाहर लाल डेहरिया के परिचितों के अनुसार, उन्होंने अपने सेवाकाल में इन जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाया। यही वजह रही कि विभागीय कार्यक्षेत्र में उन्हें लोकप्रिय कर्मचारी के रूप में भी पहचान मिली।
उनके निधन के बाद उनके सेवाकाल से जुड़े लोग और परिचित भी उनके साथ बिताए समय को याद कर रहे हैं।
‘हैप्पी टू हेल्प’ के सिद्धांत में रखते थे विश्वास
जवाहर लाल डेहरिया के व्यक्तित्व की एक विशेष बात लोगों की सहायता करने की उनकी प्रवृत्ति बताई जाती है। वे ‘हैप्पी टू हेल्प’ यानी दूसरों की मदद करके प्रसन्नता महसूस करने के सिद्धांत को अपनाकर जीवन जीते थे।
लोगों के साथ उनका व्यवहार सहज और मृदुभाषी बताया जाता है। सामान्य जीवन में किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद या पेशे से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और लोगों के साथ उसके संबंधों से भी बनती है। जवाहर लाल डेहरिया के संदर्भ में भी उनके परिचित उनके सरल स्वभाव और सहयोग की भावना को विशेष रूप से याद करते हैं।
उनसे जुड़े लोगों के लिए उनका यह व्यवहार उनके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण पहचान रहा। जरूरत के समय किसी की सहायता करना और लोगों के साथ सहजता से पेश आना उनके सामाजिक व्यवहार का हिस्सा रहा।
कुछ दिनों से चल रहा था स्वास्थ्य उपचार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जवाहर लाल डेहरिया पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते उन्हें सिवनी के जठार अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका उपचार चल रहा था।
परिजनों और शुभचिंतकों को उम्मीद थी कि उपचार के बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा, लेकिन 15 एवं 16 सितंबर की दरम्यानी रात लगभग 11:30 बजे उनका निधन हो गया।
उनके निधन की सूचना मिलते ही परिवार और परिचितों में शोक का वातावरण निर्मित हो गया। उनके निधन से परिजनों को गहरा आघात पहुंचा है।
छिंदवाड़ा स्थित निज निवास से निकलेगी अंतिम यात्रा
जवाहर लाल डेहरिया की अंतिम यात्रा उनके छिंदवाड़ा के गुलाबरा स्थित निज निवास से निकाली जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम यात्रा अपराह्न 12 बजकर 30 मिनट पर उनके निवास से पातालेश्वर मोक्षधाम के लिए प्रस्थान करेगी।
अंतिम यात्रा में परिवारजनों, रिश्तेदारों, परिचितों और शुभचिंतकों के शामिल होने की संभावना है। उनके निधन की सूचना के बाद बड़ी संख्या में लोग परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
परिवार के लिए यह समय अत्यंत कठिन और भावनात्मक है। ऐसे अवसर पर रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों की उपस्थिति शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करती है।
कर्मठ और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी के रूप में बनी पहचान
जवाहर लाल डेहरिया के जीवन का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक सेवा से जुड़ा रहा। वन विभाग में डिप्टी रेंजर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
उनके परिचित उन्हें कर्मठ, कर्तव्यपरायण और लोकप्रिय कर्मचारी के रूप में याद करते हैं। लंबे सेवाकाल के दौरान सहकर्मियों और विभाग से जुड़े लोगों के साथ बने संबंध उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विरासत माने जा सकते हैं।
सरकारी सेवा में किसी कर्मचारी की कार्यशैली का प्रभाव उसके सेवानिवृत्त होने के बाद भी लोगों की स्मृतियों में बना रहता है। जवाहर लाल डेहरिया के मामले में भी उनके परिचित उनके सेवाकाल और व्यवहार को याद कर रहे हैं।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि किसी भी पद पर रहते हुए कर्तव्य के प्रति ईमानदारी और लोगों के प्रति सहयोग की भावना व्यक्ति को अलग पहचान दिला सकती है।
परिवार और परिचितों में शोक का माहौल
जवाहर लाल डेहरिया के निधन की खबर सामने आने के बाद परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। उनके पुत्र मुरेस डेहरिया सिवनी में लाईफ लाईन पैथालॉजी लैब का संचालन करते हैं।
पिता के निधन का समाचार परिवार के लिए गहरे व्यक्तिगत दुख का विषय है। जीवन में माता-पिता का स्थान विशेष होता है और उनके निधन से उत्पन्न रिक्तता को भर पाना आसान नहीं होता।
इस दुख की घड़ी में परिवार के रिश्तेदार, मित्र और शुभचिंतक उनके साथ खड़े हैं तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
रोहना ग्राम से जुड़ी थी पहचान
जवाहर लाल डेहरिया मूल रूप से छिंदवाड़ा जिले के रोहना ग्राम के निवासी थे। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने वन विभाग में अपनी सेवाएं दीं और डिप्टी रेंजर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
उनका जीवन छिंदवाड़ा और सिवनी क्षेत्र से जुड़ा रहा। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके सामाजिक संपर्क और परिचितों का दायरा बना रहा।
किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके कार्यक्षेत्र तक सीमित नहीं रहती। परिवार, गांव, सहकर्मी और सामाजिक संपर्क उसके जीवन की व्यापक तस्वीर तैयार करते हैं। जवाहर लाल डेहरिया के जीवन में भी ये सभी पहलू दिखाई देते हैं।
मृदुभाषी व्यवहार रहा प्रमुख गुण
परिचितों के अनुसार जवाहर लाल डेहरिया मृदुभाषी स्वभाव के व्यक्ति थे। सहजता से बातचीत करना और दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहना उनके व्यवहार का हिस्सा था।
‘हैप्पी टू हेल्प’ की भावना को अपनाकर दूसरों की मदद करने में खुशी महसूस करना उनके व्यक्तित्व से जुड़ा बताया जाता है। इसी कारण उनके परिचितों के बीच उनकी छवि एक सहयोगी और मिलनसार व्यक्ति की रही।
निधन के बाद किसी व्यक्ति को सबसे अधिक उसके व्यवहार और उससे जुड़ी स्मृतियों के माध्यम से याद किया जाता है। जवाहर लाल डेहरिया के मामले में भी उनके सहयोगी स्वभाव और सरल व्यवहार को लोग स्मरण कर रहे हैं।
अंतिम यात्रा के कार्यक्रम की जानकारी
परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जवाहर लाल डेहरिया की अंतिम यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार है—
- स्थान: छिंदवाड़ा, गुलाबरा स्थित निज निवास
- समय: अपराह्न 12:30 बजे
- गंतव्य: पातालेश्वर मोक्षधाम
- अंतिम यात्रा: निज निवास से पातालेश्वर मोक्षधाम के लिए
अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोग निर्धारित समय के अनुसार गुलाबरा स्थित उनके निवास पर पहुंच सकते हैं।
एक सेवाभावी व्यक्तित्व की स्मृतियां रहेंगी
जवाहर लाल डेहरिया का जीवन सरकारी सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और सहयोग की भावना से जुड़ा रहा। वन विभाग में डिप्टी रेंजर के रूप में उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दीं और सेवानिवृत्ति के बाद भी परिचितों के बीच सहज एवं सहयोगी व्यक्तित्व के रूप में अपनी पहचान बनाए रखी।
उनके निधन के बाद परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस अपूरणीय क्षति को स्वीकार करना है। हालांकि किसी प्रियजन की कमी पूरी नहीं की जा सकती, लेकिन उनके जीवन से जुड़ी अच्छी स्मृतियां परिवार और परिचितों के बीच हमेशा बनी रहती हैं।
उनके सेवाकाल से जुड़े लोग उन्हें एक कर्मठ और कर्तव्यपरायण कर्मचारी के रूप में याद करेंगे, जबकि परिवार और करीबी लोग उनके मृदुभाषी तथा सहयोगी स्वभाव को स्मरण करेंगे।
शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं
जवाहर लाल डेहरिया के निधन पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया एवं हिन्द गजट परिवार ने शोक व्यक्त किया है। दोनों परिवारों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।
उनका निधन परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। सार्वजनिक जीवन और सामाजिक संबंधों में उनके संपर्क में रहे लोग भी उनके निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर जवाहर लाल डेहरिया का निधन उनके परिवार के साथ-साथ उन्हें जानने वाले लोगों के लिए भी दुखद समाचार है। वन विभाग में कर्मठ एवं कर्तव्यपरायण कर्मचारी के रूप में उनका सेवाकाल और लोगों की मदद करने की उनकी भावना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख पहचान रही।
15 एवं 16 सितंबर की दरम्यानी रात सिवनी के जठार अस्पताल में उनके निधन के बाद अब उनकी अंतिम यात्रा छिंदवाड़ा स्थित निज निवास से पातालेश्वर मोक्षधाम के लिए निकलेगी। उनके पीछे परिवार और परिचितों के बीच उनकी स्मृतियां और जीवन से जुड़े अनुभव रह जाएंगे।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।