सिवनी के पॉक्सो प्रकरण में हाई कोर्ट से बृज बिहारी वर्मा को नियमित जमानत, 50 हजार रुपये का निजी मुचलका देना होगा

सिवनी पॉक्सो केस में बृज बिहारी वर्मा को हाई कोर्ट से जमानत

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर की एकलपीठ ने सिवनी जिले के पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक प्रकरण में आरोपी बृज बिहारी वर्मा की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन ने 26 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो सक्षम जमानतें प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश विचारण न्यायालय की संतुष्टि के अधीन है।

यह मामला सिवनी जिले के थाना सिवनी में दर्ज अपराध क्रमांक 87/2026 से संबंधित है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 137(2) एवं 64(2)(m) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(L)/6 के तहत अपराध दर्ज हैं। हाई कोर्ट में यह याचिका विविध आपराधिक प्रकरण क्रमांक MCRC-40344/2026 के रूप में प्रस्तुत की गई थी।

विचारण में पीड़िता का परीक्षण, विवेचना पूरी होने को भी माना आधार

हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, आरोपी की ओर से नियमित जमानत के लिए दलील दी गई कि मामले में पीड़िता का विचारण न्यायालय में परीक्षण हो चुका है। बचाव पक्ष ने पीड़िता की गवाही के कुछ अंशों का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने अभियोजन के कथन का समर्थन नहीं किया। आरोपी की ओर से यह भी बताया गया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 वर्ष चार माह थी।

आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार, प्रकरण की विवेचना पूरी हो चुकी थी और आरोप-पत्र भी प्रस्तुत किया जा चुका था। बचाव पक्ष ने यह दलील भी दी कि विचारण पूरा होने में अभी समय लग सकता है तथा आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है।

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दूसरी ओर, राज्य शासन की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। राज्य की ओर से प्रस्तुत पक्ष में पीड़िता के कथन और घटना के समय उसकी आयु का उल्लेख करते हुए जमानत नहीं दिए जाने की मांग की गई।

तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार के बाद याचिका स्वीकार

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार किया। न्यायालय ने अपने आदेश में पीड़िता का विचारण न्यायालय में परीक्षण हो जाने, घटना के समय उसकी आयु 17 वर्ष चार माह होने, विवेचना पूरी होने, आरोप-पत्र दाखिल किए जाने और विचारण पूरा होने में समय लगने की संभावना का उल्लेख किया।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित माना। इसी आधार पर नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई।

50 हजार रुपये का निजी मुचलका और दो जमानतें जरूरी

हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि आरोपी 50,000 रुपये का निजी मुचलका तथा इतनी ही राशि की दो सक्षम जमानतें प्रस्तुत करेगा। इनकी स्वीकृति संबंधित विचारण न्यायालय की संतुष्टि के अधीन होगी।

आरोपी को विचारण के दौरान न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी तारीखों पर उपस्थित रहना होगा। आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 480(3) के प्रावधानों का पालन करने का निर्देश भी दिया गया है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जमानत का आदेश विचारण समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, जमानत लेकर फरार होने या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने की स्थिति में यह आदेश अप्रभावी हो जाएगा।

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अधिवक्ता सौवीर सिंह राजपूत ने रखा आरोपी का पक्ष

इस प्रकरण में आरोपी की ओर से अधिवक्ता सौवीर सिंह राजपूत, दीपांशु श्रीवास्तव, विक्रम तंतुवाय ने हाई कोर्ट में पक्ष रखा। न्यायालय के आदेश में उनके नाम का उल्लेख आवेदक के अधिवक्ता के रूप में दर्ज है। राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता पार्वती पटेल उपस्थित रहीं।

जमानत का आदेश, दोषमुक्ति का निर्णय नहीं

इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाई कोर्ट ने आरोपी को नियमित जमानत प्रदान की है, न कि मामले में दोषमुक्त घोषित किया है। आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जमानत याचिका स्वीकार करते समय मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की जा रही है।

इसलिए प्रकरण का अंतिम निर्णय विचारण न्यायालय में साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर होना है। जमानत मिलने से आरोपी को विचारण लंबित रहने के दौरान निर्धारित शर्तों के अधीन रिहा होने की राहत मिली है।

प्रकरण का विवरण

  • न्यायालय: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर
  • पीठ: न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन
  • MCRC क्रमांक: 40344/2026
  • अपराध क्रमांक: 87/2026
  • पुलिस थाना: सिवनी, जिला सिवनी, मध्य प्रदेश
  • आदेश दिनांक: 26 अक्टूबर 2026
  • आरोपी: बृज बिहारी वर्मा
  • आदेश का परिणाम: नियमित जमानत याचिका स्वीकार
  • जमानत की शर्त: 50,000 रुपये का निजी मुचलका और समान राशि की दो सक्षम जमानतें

आधार: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का मूल आदेश, न्यूट्रल साइटेशन क्रमांक 2026:MPHC-JBP:85630।