राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश के 6 शिक्षकों को किया सम्मानित, CM मोहन यादव ने दी बधाई

शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश का बढ़ा मान, राष्ट्रपति मुर्मु ने 6 शिक्षकों को किया राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली (साई)।  शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण सामने आया है। शनिवार, 05 सितंबर 2026 को आयोजित नेशनल टीचर अवॉर्ड-2026 समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया। इस समारोह में मध्यप्रदेश के शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले छह शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को भी सम्मान प्राप्त हुआ।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने वाले मध्यप्रदेश के शिक्षकों में डॉ. अर्चना शुक्ला, श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह, सुश्री संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, श्रीमती रीना गुप्ता और श्रीमती ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं।

इन शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़कर नवाचार, तकनीक, शोध, कौशल प्रशिक्षण, सामाजिक जागरूकता और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने वाले सभी छह शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों मध्यप्रदेश के शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है।

शिक्षक केवल ज्ञान नहीं, भविष्य का निर्माण करते हैं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इन छह शिक्षकों ने अपने समर्पण, नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित की है। उनकी उपलब्धियां प्रदेश के अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का काम करेंगी।

शिक्षकों का राष्ट्रीय सम्मान इस बात को भी रेखांकित करता है कि शिक्षा में बेहतर परिणाम केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि शिक्षक की सोच, नेतृत्व, प्रयोग करने की क्षमता और विद्यार्थियों के प्रति प्रतिबद्धता से भी हासिल किए जा सकते हैं।

शिक्षा में नवाचार से लेकर कौशल विकास तक योगदान

इस वर्ष मध्यप्रदेश से सम्मानित शिक्षकों की खासियत उनके कार्यक्षेत्र की विविधता है। किसी ने विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा में अभिनव प्रयोग किए, तो किसी ने सीमित संसाधनों वाले विद्यालय में जनभागीदारी के माध्यम से बदलाव लाया।

वहीं गणित को रोचक और प्रयोग आधारित बनाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शिक्षा से जोड़ने, उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा दिव्यांग प्रशिक्षुओं को डिजिटल कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने जैसे कार्य भी राष्ट्रीय सम्मान की सूची में शामिल रहे।

इससे यह संकेत मिलता है कि आधुनिक शिक्षा का दायरा केवल कक्षा और किताब तक सीमित नहीं है। शिक्षा में तकनीक, कौशल, अनुसंधान, पर्यावरण और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

डॉ. अर्चना शुक्ला ने विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा में किया नवाचार

सम्मानित शिक्षकों में डॉ. अर्चना शुक्ला विज्ञान एवं जीव विज्ञान की शिक्षिका हैं। पिछले करीब 15 वर्षों से वे परियोजना आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के साथ कई अभिनव और कम लागत वाली परियोजनाएं संचालित की हैं। उनके कार्यों में पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर रहा है।

उनकी उल्लेखनीय पहलों में एक हजार से अधिक स्पैरो हाउस की स्थापना, विद्यालय परिसर में मौजूद वृक्षों की क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल मैपिंग और ‘प्लांट इमोशन’ जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

इन प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देने के बजाय उन्हें अपने आसपास के पर्यावरण को समझने और उसके संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया।

शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने जनभागीदारी से बदली विद्यालय की तस्वीर

श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह अंग्रेजी शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करते हुए सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में जनभागीदारी के जरिए बदलाव लाने के लिए सम्मानित हुए हैं।

उनके प्रयासों का प्रभाव विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या और उपस्थिति दोनों में दिखाई दिया। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों की संख्या 69 से बढ़कर 202 हुई, जबकि उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंची।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान केवल विद्यालय की संख्या और उपस्थिति बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बाल विवाह रोकने, विद्यालय छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने तथा दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया।

यह उदाहरण बताता है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षक स्थानीय समुदाय को साथ लेकर शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में बदलाव ला सकते हैं।

संगीता यादव ने गणित को बनाया आनंदपूर्ण विषय

सुश्री संगीता यादव प्रधान शिक्षिका के रूप में नवाचार आधारित गणित शिक्षण और शिक्षक सशक्तिकरण के लिए जानी जाती हैं।

उन्होंने गणित को विद्यार्थियों के लिए कठिन या केवल किताबों तक सीमित विषय बनाने के बजाय उसे प्रयोग, गतिविधि और रुचि से जोड़ने की दिशा में कई कार्यक्रम संचालित किए।

उनकी पहलों में गणितोत्सव, क्वेस्ट फॉर मैथमेटिक्स, मैथेमाइंड और बैगलेस मैथमेटिक्स डे जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें समस्या समाधान तथा प्रयोग आधारित सीखने के लिए प्रेरित करना है।

इसके साथ ही वे तकनीक आधारित शिक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के उपयोग को भी शिक्षा से जोड़ रही हैं। बदलते शैक्षणिक वातावरण में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रो. सौरव दत्ता का अनुसंधान और शोधपरक शिक्षा पर जोर

प्रो. सौरव दत्ता आईआईएसईआर भोपाल में पादप जीवविज्ञानी हैं। उनका कार्य शिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से विद्यार्थियों में मौलिक एवं शोधपरक सोच विकसित करने से जुड़ा है।

उन्हें आईआईएसईआर भोपाल द्वारा दो बार डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पौधों के विकास से संबंधित उनका शोध विशेष रूप से उल्लेखनीय है। आज जब जलवायु परिवर्तन कृषि, पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े अनेक सवालों को प्रभावित कर रहा है, ऐसे में पौधों की अनुकूलन क्षमता पर शोध का महत्व बढ़ जाता है।

उनका योगदान इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें शोध और वैज्ञानिक सोच की ओर प्रेरित किया जाए।

रीना गुप्ता ने दिव्यांग प्रशिक्षुओं को बनाया डिजिटल रूप से सक्षम

श्रीमती रीना गुप्ता शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन में श्रवण एवं दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड में प्रशिक्षण अधिकारी हैं।

वे पिछले 16 वर्षों से दिव्यांग प्रशिक्षुओं को कंप्यूटर और डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका लक्ष्य प्रशिक्षण के माध्यम से दिव्यांग युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है।

विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्ग के दिव्यांग प्रशिक्षुओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनका कार्य उल्लेखनीय रहा है।

वर्तमान समय में डिजिटल कौशल रोजगार के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में दिव्यांग प्रशिक्षुओं को तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ज्योतिबाला राठौर ने प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बनाई कड़ी

श्रीमती ज्योतिबाला राठौर राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला), इंदौर में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में छह वर्ष और शिक्षण क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है।

उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्होंने प्लेसमेंट अधिकारी के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़ी संख्या में प्रशिक्षुओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में उनका योगदान रहा है।

कौशल विकास के मौजूदा दौर में प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल ट्रेड सिखाने तक सीमित नहीं है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ज्योतिबाला राठौर का कार्य इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

छह शिक्षकों की उपलब्धि से प्रदेश का बढ़ा गौरव

मध्यप्रदेश के छह शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन शिक्षकों के कार्यों को देखें तो सभी ने अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं के विकास के लिए नए तरीके अपनाए हैं।

इन छह शिक्षकों की उपलब्धियों से शिक्षा के कई महत्वपूर्ण आयाम सामने आते हैं—

  • परियोजना आधारित और प्रयोगात्मक शिक्षा
  • पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता
  • विद्यालयों में जनभागीदारी
  • बाल विवाह और स्कूल ड्रॉपआउट के खिलाफ प्रयास
  • गणित में नवाचार आधारित शिक्षण
  • शिक्षा में तकनीक और AI का उपयोग
  • उच्च शिक्षा में शोध और वैज्ञानिक सोच
  • दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए डिजिटल कौशल
  • कौशल प्रशिक्षण और रोजगार
  • महिलाओं एवं वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास

शिक्षा नीति के लक्ष्यों से जुड़ते दिखे प्रयास

मध्यप्रदेश से सम्मानित शिक्षकों के काम में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, तकनीक समर्थ और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा दिखाई देती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी सीखने को अधिक व्यावहारिक, समग्र और कौशल आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर शिक्षकों द्वारा किए जा रहे नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि किसी भी शिक्षा व्यवस्था की सफलता केवल पुरस्कारों की संख्या से नहीं मापी जा सकती। इसके लिए विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम, विद्यालयों में उपस्थिति, शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर और समान अवसर जैसे व्यापक मानकों को भी लगातार मजबूत करना आवश्यक है।

सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जताई प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने और शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के छह शिक्षकों का सम्मान इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। एक ओर जहां विद्यालयी शिक्षा में नए प्रयोगों की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर कौशल विकास और उच्च शिक्षा में शोध को भी मजबूत करना जरूरी है।

शिक्षकों को नवाचार के लिए बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध होने से ऐसे प्रयोगों को अन्य विद्यालयों और संस्थानों तक भी पहुंचाया जा सकता है।

विद्यार्थियों और युवा शिक्षकों के लिए प्रेरणा

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं हैं। इनसे दूसरे शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी सीखने और नए प्रयोग करने की प्रेरणा मिलती है।

एक शिक्षक का नवाचार यदि सफल होता है तो उसे दूसरे विद्यालयों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है। इसी तरह कौशल प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और शोध आधारित शिक्षण के अच्छे उदाहरण व्यापक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने भी उम्मीद जताई कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां प्रदेश के युवा शिक्षकों और विद्यार्थियों को नए प्रयोग करने तथा उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेंगी।

आगे की राह में नवाचार और गुणवत्ता पर जोर जरूरी

मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल उपलब्धियों को सम्मानित करना पर्याप्त नहीं होगा। इन सफल प्रयोगों को चिन्हित कर उन्हें अन्य स्कूलों, प्रशिक्षण संस्थानों और शैक्षणिक संस्थाओं तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा।

विशेषकर डिजिटल शिक्षा, AI, पर्यावरण आधारित परियोजनाएं, गणित में गतिविधि आधारित शिक्षण, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े कौशल जैसे क्षेत्रों में अच्छे मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है।

इससे शिक्षक सम्मान का प्रभाव एक समारोह तक सीमित न रहकर लंबे समय तक विद्यार्थियों और शिक्षा व्यवस्था तक पहुंच सकता है।

शिक्षक दिवस 2026 पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा मध्यप्रदेश के छह शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। डॉ. अर्चना शुक्ला, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, रीना गुप्ता और ज्योतिबाला राठौर ने शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

इनकी उपलब्धियां बताती हैं कि आज शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं है। शिक्षक पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता, तकनीक, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगार की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सम्मानित शिक्षकों को दी गई बधाई के साथ यह उपलब्धि प्रदेश के शिक्षक समुदाय के लिए भी प्रेरणा का अवसर है। आने वाले समय में इन नवाचारों को व्यापक स्तर पर अपनाना और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य पर निरंतर ध्यान देना इस सम्मान को और सार्थक बना सकता है।