शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान, CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा—जरूरतमंद वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ऑफलाइन TET कराने के होंगे प्रयास
(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश में शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण संदेश सामने आया। शनिवार, 05 सितंबर 2026 को राजधानी भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 का आयोजन किया गया। समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी का शिल्पकार बताते हुए कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला उनका घर होता है, जहां माता-पिता उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं। इसके बाद शिक्षक उनके ज्ञान, व्यक्तित्व और जीवन की दिशा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए शिक्षकों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जहां गुरूर खत्म होता है और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ऑफलाइन TET परीक्षा कराने के प्रयास और प्रबंध किए जाने की घोषणा भी की।
प्रशासन अकादमी में हुआ राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस राज्य स्तरीय समारोह का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान मां सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया गया।
समारोह में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 प्राप्त करने वाले शिक्षकों के साथ गत वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
राज्यपाल श्री पटेल का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधा भेंट कर स्वागत किया, जबकि स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक, उनके परिजन और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे।
राज्यपाल बोले—शिक्षक राष्ट्र निर्माण की पीढ़ी तैयार करते हैं
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपने संबोधन में शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि बच्चे विकसित भारत के कर्णधार हैं और शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्पकार हैं।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक बच्चों की बुद्धि, क्षमता और अपेक्षाओं को समझें तथा उनके साथ अपनापन और सहनशीलता का व्यवहार करें।
उन्होंने कहा कि बच्चों की कठिनाइयों और जिज्ञासाओं को धैर्य के साथ सुनना और प्रेमपूर्वक उनका समाधान करना शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने शिक्षकों से स्वयं ज्ञान और नैतिक गुणों का आदर्श बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में ईमानदारी, सहनशीलता और जुझारूपन जैसे गुण विकसित करने के साथ उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास किया जाना चाहिए।
शिक्षा को लगातार अपडेट और इनोवेशन की जरूरत
राज्यपाल श्री पटेल ने बदलती दुनिया के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में निरंतर बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती।
वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के बदलते अवसरों के अनुरूप शिक्षा में लगातार अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन जरूरी है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच मौजूद दीवारों को कम करते हुए विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने के अधिक अवसर मिलने चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक की भूमिका अब केवल पाठ पढ़ाने वाले व्यक्ति की नहीं रही। उन्हें विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने, उन्हें प्रेरित करने और सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक की भूमिका भी निभानी होगी।
मुख्यमंत्री ने गुरु-शिष्य परंपरा को बताया भारतीय संस्कृति की धरोहर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अध्यक्षीय संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर बताया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां गुरूर समाप्त होता है और गुण प्रारंभ होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है।
उन्होंने शिक्षकों की तुलना दीपक से करते हुए कहा कि शिक्षक स्वयं कठिनाइयों के बीच रहकर विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से रोशन करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता-पिता के बाद शिक्षक ही ऐसे व्यक्ति होते हैं, जो चाहते हैं कि विद्यार्थी वही बने, जो वह वास्तव में बनना चाहता है और उसे जीवन में वह सब मिले, जिसे वह प्राप्त करना चाहता है।
वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ऑफलाइन TET कराने की घोषणा
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को TET परीक्षा देना है और जिन्हें इसकी आवश्यकता है, उनके लिए ऑफलाइन TET परीक्षा कराने के प्रयास और प्रबंध किए जाएंगे।
यह घोषणा ऐसे शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़ी आवश्यकता पूरी करनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के हित में सरकार जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत होने वाली TET परीक्षा ऑफलाइन मोड पर होगी। शिक्षा विभाग के माध्यम से शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो और वे निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन करें।
उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि मेरिट सूची में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे शासकीय स्कूलों से होते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार यह उपलब्धि शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम से संभव होती है।
उन्होंने कहा कि देश का नक्शा कागज पर बनाया जा सकता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में बनती है। शिक्षक इन कक्षाओं के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को तैयार करने का काम करते हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक शिक्षक को अपने शिष्य की प्रगति में सबसे अधिक आनंद और गर्व तब मिलता है, जब उसका विद्यार्थी स्वयं से आगे बढ़ता है।
भारत की गुरु-शिष्य परंपरा का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए गुरुकुल व्यवस्था, गुरु-शिष्य संबंध और प्राचीन विश्वविद्यालयों की भूमिका को याद किया।
उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहां शिक्षा ग्रहण की थी। इसी तरह उन्होंने महर्षि विश्वामित्र और भगवान श्रीराम के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्य में छिपी प्रतिभा और क्षमता को पहचानकर उसे सही दिशा दे सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल वर्तमान के लिए विद्यार्थियों को तैयार नहीं करते, बल्कि कई पीढ़ियों पर उनका प्रभाव पड़ता है।
स्कूल शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के योगदान को सराहा
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस पूरे देश में गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में युवा पीढ़ी देश को आगे ले जाएगी और इसमें अभिभावकों के साथ शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मंत्री ने शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में भी शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। बालाघाट जैसे क्षेत्रों में भी शिक्षकों ने विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा और संस्कार देने का काम किया है।
उन्होंने ऐसे शिक्षकों के योगदान का उल्लेख किया, जो अपने वेतन का हिस्सा तक विद्यालय को बेहतर बनाने में लगाते हैं और बच्चों को स्कूल आने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रेरित करते हैं।
25 हजार रुपये सम्मान राशि के साथ शिक्षकों का सम्मान
समारोह में सम्मानित शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और 25 हजार रुपये की नगद सम्मान राशि प्रदान की गई।
यह सम्मान केवल शिक्षकों के व्यक्तिगत योगदान की पहचान नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है।
नवाचार, विद्यार्थी हित, सामाजिक जागरूकता, कौशल विकास और विद्यालयों के बेहतर संचालन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलने से दूसरे शिक्षकों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
इन जिलों के उत्कृष्ट शिक्षकों को मिला सम्मान
समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया। प्रदत्त विवरण के अनुसार सम्मानित नामों में सुसनेर, बालाघाट, बैतूल, दमोह, गुना, नर्मदापुरम, कटनी, मंदसौर, नरसिंहपुर, नीमच, निवाड़ी, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सिवनी, शाजापुर, सीधी, उज्जैन, छतरपुर, छिंदवाड़ा और इंदौर सहित कई जिलों के शिक्षक शामिल हैं।
सम्मानित शिक्षकों की सूची में श्री शिवलाल दांगी, श्री धन्नालाल बिसेन, श्री रीतेश कुमार पथाड़े, श्री सुखनंदन साहू, श्री नरेंद्र कुमार भारद्वाज, श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा, श्री महेंद्र सिंह ठाकुर, श्री राकेश कुमार गुप्ता, सुश्री शिखा शर्मा, श्री लोकेंद्र सिंह पंवार और सुश्री ज्योति पाठक सहित अन्य शिक्षक शामिल हैं।
इसी क्रम में श्री राकेश कुमार वर्मा, श्री सुरेश चंद्र सोनी, सुश्री शर्मिला उपाध्याय, सुश्री रीनादेवी कटरे, श्री हेमंत कुमार वैद्य, श्री राकेश द्विवेदी, सुश्री सीमा परमार, सुश्री पूनम मिश्रा, श्री बिहारीलाल प्रजापति और श्री अरुण कुमार भादे को भी सम्मान मिला।
इसके अलावा श्री बलराम अहिरवार, श्री मुकेश कुमार शर्मा, श्री अरुण कुमार मित्तल, श्री मुकेश प्रजापति, श्री मनीष तिवारी, श्री अजय कुमार मिश्रा, श्री मुकेश नागर, श्री राजेश महेश्वरी, श्री मोहित कुमार गर्ग, सुश्री पूजा पांडे, श्री सतीश पांडे, सुश्री श्वेता तिवारी और सुश्री अजिता के नाम भी प्रदत्त सूची में शामिल हैं।
गत वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त करने वाले श्रीमती शीला पटेल और श्री भैरूलाल ओसारा को भी समारोह में सम्मानित किया गया।
संपादकीय तथ्य-जांच नोट: प्रदत्त कार्यक्रम विवरण में “प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षक” सम्मानित होने का उल्लेख है, जबकि उपलब्ध नामावली में 36 नाम हैं। इनमें दो नाम राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्तकर्ताओं के हैं। प्रकाशन से पहले सम्मानित शिक्षकों की आधिकारिक संख्या और नामावली का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान करना उचित होगा।
शिक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर?
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का महत्व केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था में नवाचार और बेहतर कार्य को प्रोत्साहित करने का संदेश भी जाता है।
शिक्षकों को सम्मान मिलने से विद्यालय स्तर पर नए प्रयोगों को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही सरकार द्वारा TET से संबंधित घोषणा यह संकेत देती है कि शिक्षक सेवा से जुड़े मुद्दों पर भी नीतिगत स्तर पर ध्यान दिया जा रहा है।
आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका लगातार बदल रही है। डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल विकास और रोजगार आधारित शिक्षा के बढ़ते महत्व के बीच शिक्षकों को भी अपने ज्ञान और शिक्षण पद्धति को लगातार अपडेट करना होगा।
भविष्य में शिक्षकों की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी
विकसित भारत के लक्ष्य के संदर्भ में शिक्षा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें जीवन, रोजगार, तकनीक और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना जरूरी होगा।
इस दिशा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमता और रुचि को पहचानकर उन्हें सही दिशा दें तो शिक्षा का प्रभाव कक्षा से निकलकर समाज तक पहुंच सकता है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री के संबोधनों में भी इसी व्यापक भूमिका पर जोर दिया गया। शिक्षक को ज्ञान देने वाले व्यक्ति के साथ-साथ चरित्र निर्माणकर्ता, मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में देखा गया।
शिक्षक दिवस 2026 पर भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह ने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को एक बार फिर सामने रखा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी का शिल्पकार बताया, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षक के सामाजिक योगदान को रेखांकित किया।
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक संदेश मुख्यमंत्री की जरूरतमंद वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ऑफलाइन TET परीक्षा कराने के प्रयास की घोषणा रही। इसके साथ ही शिक्षकों को नवाचार, तकनीक, कौशल और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देने का संदेश दिया गया।
राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों की उपलब्धियां यह बताती हैं कि शिक्षा में बदलाव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि कक्षा में शिक्षक के प्रयासों से भी आता है। आने वाले समय में इन उत्कृष्ट कार्यों को व्यापक स्तर पर अपनाना और शिक्षकों को आवश्यक संसाधन एवं अवसर उपलब्ध कराना मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

मौसम विभाग पर जमकर पकड़, लगभग दो दशकों से मौसम का सटीक पूर्वानुमान जारी करने के लिए पहचाने जाते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय महेश रावलानी वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजीटल न्यूज एजेंसी है. इसका शुभारंभ 18 दिसंबर 2008 को किया गया था. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में देश विदेश, स्थानीय, व्यापार, स्वास्थ्य आदि की खबरों के साथ ही साथ धार्मिक, राशिफल, मौसम के अपडेट, पंचाग आदि का प्रसारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है. इसके वीडियो सेक्शन में भी खबरों का प्रसारण किया जाता है. यह पहली ऐसी डिजीटल न्यूज एजेंसी है, जिसका सर्वाधिकार असुरक्षित है, अर्थात आप इसमें प्रसारित सामग्री का उपयोग कर सकते हैं.
अगर आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को खबरें भेजना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 9425011234 या ईमेल samacharagency@gmail.com पर खबरें भेज सकते हैं. खबरें अगर प्रसारण योग्य होंगी तो उन्हें स्थान अवश्य दिया जाएगा.
