1 अक्टूबर से LPG सिलेंडर पर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

(ब्यूरो कार्यालय)
बंग्लुरू (साई)। 1 अक्टूबर 2026 को कई प्रमुख नियामक परिवर्तन लागू होंगे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सब्सिडी वाले घरेलू LPG सिलेंडर के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) को अनिवार्य कर दिया है। इसी दिन रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर नई ब्याज दर नीति लागू की, जिससे सभी शाखाओं में समान दरें मिलेंगी। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ता सुरक्षा, वित्तीय समानता और प्रशासनिक सुगमता को सुदृढ़ करना है।

LPG सिलेंडर पर नया नियम

सरकार ने पहले 30 जून 2026 को BAA पूरा करने की समयसीमा निर्धारित की थी, लेकिन कई बार विस्तार के बाद 14 सितंबर 2026 को अंतिम तिथि तय हुई। अब 1 अक्टूबर से यह नियम सख्ती से लागू होगा। सब्सिडी के साथ रेग्युलेटेड रिटेल सेलिंग प्राइस पर LPG रिफिल लेने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है। जिन ग्राहकों ने अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं की, उन्हें सिलेंडर बाजार कीमत पर खरीदना पड़ेगा और सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़े दर्शाते हैं कि 19 सितंबर तक 89.9% सक्रिय घरेलू LPG ग्राहक ने BAA पूरा कर लिया था।

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RBI के FD नियम में बदलाव

RBI ने FD पर ब्याज दर नियंत्रण के नियमों में संशोधन किया है। 1 अक्टूबर से सभी शाखाओं में एक ही बैंक के ग्राहकों को समान FD दरें मिलेंगी। यह परिवर्तन मुख्यतः 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक के बड़े डिपॉजिट पर लागू होगा, इसलिए सामान्य FD निवेशकों पर प्रभाव सीमित रहेगा। समानता के साथ ब्याज दरों का निर्धारण वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाएगा और प्रतिस्पर्धा को स्वस्थ बनाएगा।

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खबर के प्रमुख बिंदु

• कंपनी/संस्था: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, RBI
• आयोजन: बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्यकरण एवं FD दर समानता नियम
• स्थान: नई दिल्ली (केन्द्रीय स्तर पर लागू)
• मुख्य उद्देश्य: उपभोक्ता सुरक्षा, वित्तीय समानता, प्रशासनिक दक्षता
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 1 अक्टूबर से BAA अनिवार्य, सभी RBI शाखाओं में समान FD दरें
• लक्ष्य: सब्सिडी लाभ का सही वितरण, बाजार में मूल्य स्थिरता, निवेशकों का भरोसा

नए नियमों के साथ सरकार ने उपभोक्ता कल्याण और वित्तीय पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से LPG सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जाएगा, जबकि समान FD दरें निवेशकों के विश्वास को सुदृढ़ करेंगी। नियमित निगरानी और तकनीकी समर्थन के माध्यम से इन पहलुओं को निरंतर सुधारते रहना भारत के सार्वजनिक क्षेत्र एवं वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।