खंडवा के श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह ने बनाया ड्राई ऐश निष्पादन का नया रिकॉर्ड, 7793 मीट्रिक टन का सफल प्रबंधन

खंडवा स्थित श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह ने 7793 मीट्रिक टन ड्राई ऐश के सफल निष्पादन के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे पर्यावरणीय जिम्मेदारी और संसाधन प्रबंधन की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच फ्लाई ऐश के पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग की यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में सतत विकास का संकेत देती है।

पर्यावरणीय जिम्मेदारी की दिशा में बड़ी उपलब्धि

(ब्यूरो कार्यालय)

खण्डवा (साई)।खंडवा जिले में स्थापित श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह ने ड्राई ऐश निष्पादन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी देते हुए बताया कि कुल 210 बल्कर ट्रकों के माध्यम से 7793 मीट्रिक टन ड्राई ऐश का सफल निष्पादन किया गया।

यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विद्युत उत्पादन और ऐश प्रबंधन का संतुलन

यह ताप विद्युत गृह 600 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों तथा 660 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों के माध्यम से विद्युत उत्पादन करता है। कोयले से संचालित इन इकाइयों में ऐश का उत्पादन स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे सुरक्षित और उपयोगी तरीके से निष्पादित करना आवश्यक होता है।

ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है। इसी संदर्भ में ड्राई ऐश का प्रभावी निष्पादन ऊर्जा क्षेत्र की स्थिरता का संकेत देता है।

पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, फेज-1 से 143 बल्कर ट्रकों द्वारा 5229 मीट्रिक टन ड्राई ऐश का निष्पादन किया गया, जो पिछले वर्ष के 131 बल्कर ट्रकों से अधिक है।

इसी प्रकार फेज-2 से 67 बल्कर ट्रकों के माध्यम से 2563 मीट्रिक टन ड्राई ऐश का सफल निष्पादन हुआ।

इस प्रकार कुल मिलाकर 210 बल्कर ट्रकों से 7793 मीट्रिक टन ड्राई ऐश निजी कंपनियों को भेजी गई।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि फ्लाई ऐश के पुन: उपयोग की दिशा में प्रबंधन की कार्यप्रणाली अधिक सशक्त और प्रभावी हुई है।

क्या है ड्राई ऐश और क्यों है महत्वपूर्ण

ड्राई ऐश, जिसे फ्लाई ऐश भी कहा जाता है, ताप विद्युत गृहों में कोयले के दहन से उत्पन्न उप-उत्पाद है।

इसके प्रमुख उपयोग:

  • पोर्टलैंड सीमेंट के आंशिक विकल्प के रूप में
  • कंक्रीट निर्माण में मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने में
  • जल अवशोषण कम करने में
  • ईंट, टाइल और सड़क निर्माण में
  • औद्योगिक पेंट और कोटिंग्स में

विशेष रूप से क्लास-एफ फ्लाई ऐश का उपयोग एंटी-कोरोज़िव और वाटरप्रूफ कोटिंग्स में किया जाता है, जिससे लागत कम होती है और गुणवत्ता में सुधार होता है।

पर्यावरणीय दृष्टि से बढ़ता महत्व

विश्व स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त मानक लागू हो रहे हैं। कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों के लिए ऐश प्रबंधन एक संवेदनशील मुद्दा है।

यदि ऐश का उचित निस्तारण न हो, तो:

  • भूमि प्रदूषण
  • जल स्रोतों पर प्रभाव
  • वायु गुणवत्ता में गिरावट
  • स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर

जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ऐसे में ड्राई ऐश का औद्योगिक उपयोग पर्यावरणीय दबाव को कम करने का व्यावहारिक समाधान माना जाता है।

नीतिगत प्रतिबद्धता और प्रशासनिक प्रबंधन

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा फ्लाई ऐश के सदुपयोग, रीसाइक्लिंग और निबटारे के लिए नीतिगत स्तर पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

हाल ही में स्थापित सीमेंट क्लिंकर संयंत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जो ऐश के पुन: उपयोग को बढ़ावा देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐश को उद्योगों में कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाए, तो यह ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल का प्रभावी उदाहरण बन सकता है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

ड्राई ऐश निष्पादन के बढ़ते स्तर का सीधा प्रभाव स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

  • निर्माण उद्योग को किफायती कच्चा माल
  • सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी
  • पर्यावरणीय जोखिम में कमी
  • औद्योगिक इकाइयों के लिए लागत नियंत्रण

यह पहल औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास है।

ऊर्जा क्षेत्र में सतत विकास की दिशा

ऊर्जा क्षेत्र में सतत विकास केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है।

इसके अंतर्गत शामिल हैं:

  • प्रदूषण नियंत्रण
  • अपशिष्ट प्रबंधन
  • संसाधनों का पुन: उपयोग
  • ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाना

श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह का यह रिकॉर्ड इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण

ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भविष्य में ऐश प्रबंधन के लिए और अधिक तकनीकी नवाचार आवश्यक होंगे।

स्वचालित ऐश कलेक्शन सिस्टम, बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और उद्योगों के साथ दीर्घकालिक समझौते इस दिशा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

यदि राज्य स्तर पर ऐश आधारित उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जाता है, तो यह हरित औद्योगिक विकास का आधार बन सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

आने वाले वर्षों में निम्न संभावनाएं उभर सकती हैं:

  • ऐश आधारित निर्माण सामग्री का व्यापक उपयोग
  • ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स में फ्लाई ऐश की अनिवार्यता
  • निर्यात योग्य ऐश उत्पाद
  • कार्बन फुटप्रिंट में कमी

यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र को पर्यावरणीय जवाबदेही के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में संकेत देती है।

🔹️⃣ निष्कर्ष

खंडवा स्थित श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह द्वारा 7793 मीट्रिक टन ड्राई ऐश के सफल निष्पादन का रिकॉर्ड केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, संसाधन प्रबंधन और सतत विकास की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ अपशिष्ट प्रबंधन को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। यदि इसी प्रकार वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से फ्लाई ऐश का उपयोग जारी रहा, तो यह मॉडल अन्य ऊर्जा संयंत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।