(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश का बालाघाट जिला एक बार फिर कृषि क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को लेकर चर्चा में है। धान उत्पादन और उपार्जन के मामले में जिले ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। इस वर्ष बालाघाट में 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले के किसानों की मेहनत और प्रगतिशील सोच की सराहना करते हुए कहा कि यहां के किसानों ने खेती-किसानी में नई मिसाल कायम की है। धान के साथ-साथ कोदो और अन्य श्रीअन्न के उत्पादन में भी बालाघाट अपनी अलग पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से बालाघाट की कृषि उपज मंडी, गोंगलई में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और कृषि योजनाओं के अंतर्गत आयोजित क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को बधाई दी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ प्राकृतिक कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियां अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि खेती के साथ आय के अन्य साधन विकसित करने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
बालाघाट बना मध्यप्रदेश का धान का कटोरा
बालाघाट जिले की पहचान लंबे समय से धान उत्पादन और चिन्नौर चावल की विशिष्टता से जुड़ी रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले का चिन्नौर चावल अपनी खुशबू के कारण विशेष पहचान रखता है और इसका निर्यात विदेशों तक किया जाता है। इसी वजह से बालाघाट को मध्यप्रदेश का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस वर्ष जिले में 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन हुआ है, जिसके साथ बालाघाट पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। यह उपलब्धि जिले के किसानों की मेहनत और कृषि गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
धान के अलावा जिले में कोदो और दूसरे श्रीअन्न के उत्पादन की भी अपनी पहचान है। श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों के सामने फसल विविधीकरण के अवसर बन सकते हैं। इससे पारंपरिक धान उत्पादन के साथ अन्य फसलों को भी कृषि व्यवस्था में स्थान मिल सकता है।
बालाघाट की कृषि पहचान केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। जिले की भौगोलिक परिस्थितियां, प्राकृतिक संसाधन और मेहनतकश किसान इसे कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी संभावनाओं वाला जिला बनाते हैं।
नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास को नई गति मिलने की उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बालाघाट जिले को नक्सलवाद से मुक्ति मिलने के बाद यहां विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से खेती-किसानी को आगे बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए प्रयास किए जाएंगे।
बालाघाट जिला खनिज संपदा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि देश का 80 प्रतिशत मैंगनीज यहां से निकलता है तथा मलाजखंड में तांबे का विशाल भंडार है। जिले की पहचान खनिज संपदा, कृषि उत्पादन और विशेष खान-पान से जुड़ी हुई है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास गतिविधियों का विस्तार होने से सड़क, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों को महत्व मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने जिले में इन सुविधाओं के विस्तार के साथ दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहित करने की बात कही।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और परिवहन सुविधाएं बेहतर होने से किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। वहीं बिजली और पानी की उपलब्धता कृषि गतिविधियों, सिंचाई और प्रसंस्करण से जुड़े कामों के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसका उद्देश्य किसानों के हित में संचालित योजनाओं को आगे बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के प्रयास करना है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्राकृतिक कृषि के माध्यम से खेती को टिकाऊ बनाने और कृषि गतिविधियों में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री के अनुसार बालाघाट जिले के कुछ किसानों का पंजीयन छूट जाने के कारण पंजीयन पोर्टल 4 नवंबर तक खोल दिया गया है। जिन किसानों ने अभी तक धान खरीदी के लिए पंजीयन नहीं कराया है, वे निर्धारित समयसीमा तक अपना पंजीयन करा सकते हैं।
यह निर्णय उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो किसी कारणवश पहले पंजीयन नहीं करा पाए थे। समर्थन मूल्य पर उपार्जन की प्रक्रिया में पंजीयन एक आवश्यक चरण होता है। इसलिए किसानों को निर्धारित समय के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से किसानों को आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। प्रदेश सरकार भी किसानों के हित में विभिन्न योजनाओं के जरिए सहायता उपलब्ध करा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बालाघाट जिले के 3 लाख 76 हजार से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल रहा है। इसके अतिरिक्त जिले के 1 लाख 29 हजार से अधिक किसानों को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों के लिए कुल 876 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है।
कृषि ऋण किसानों के लिए खेती की तैयारी, बीज, खाद, मजदूरी और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने का महत्वपूर्ण साधन होता है। ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था से पात्र किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के साथ-साथ प्रदेश में लाड़ली बहनों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को जनकल्याण से जोड़ते हुए कहा कि इनके माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बंद पड़ी 36 दुग्ध समितियां फिर होंगी शुरू, दूध संग्रहण का लक्ष्य 50 हजार लीटर
बालाघाट जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जिले में बंद हो चुकी 36 दुग्ध समितियों को फिर से शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही दूध संग्रहण के लिए मिल्क रूट तैयार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार जिले में प्रतिदिन दुग्ध संग्रहण 3,500 लीटर से बढ़कर 10,000 लीटर हो गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाना है।
दुग्ध उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। खेती के साथ पशुपालन करने से किसानों को केवल फसल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। नियमित दूध उत्पादन से परिवारों को आय का दूसरा स्रोत मिलता है।
मिल्क रूट तैयार होने से दूध संग्रहण और परिवहन की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर ऐसे ग्रामीण और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दुग्ध समितियों को सक्रिय करना उपयोगी हो सकता है, जहां किसानों को अपनी उपज और पशु उत्पादों के विपणन के लिए सुविधाओं की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों के बीच आयोजित प्रतियोगिता का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार इस पहल से पशुपालकों में उत्साह बढ़ रहा है और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है।
मत्स्य पालन में भी अग्रणी है बालाघाट जिला
बालाघाट में कृषि के साथ मत्स्य पालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में अग्रणी है।
उन्होंने बताया कि जिले के 15 हजार मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं और उन्हें 9 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया गया है। इससे मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को अपने व्यवसाय के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिला है।
मुख्यमंत्री ने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत खराड़ी जलाशय में स्थापित केज कल्चर की जानकारी भी दी। इस जलाशय में 94 केज कल्चर स्थापित कर 282 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया गया है।
केज कल्चर जलाशयों में मछली पालन की एक पद्धति है। इसके माध्यम से जलाशय के भीतर निर्धारित जालीनुमा संरचनाओं में मछलियों का पालन किया जाता है। इससे जल संसाधनों का उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं।
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और उद्यानिकी को भी अपनाएं। इससे आय के अलग-अलग स्रोत विकसित हो सकते हैं और कृषि पर निर्भर परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
निजी भूमि पर बांस और सागौन लगाकर अतिरिक्त आय का विकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को निजी भूमि पर वृक्षारोपण के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन पर बांस, सागौन और अन्य इमारती पौधे लगाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
खेती के साथ वृक्षारोपण को अपनाने से किसानों को लंबे समय में आय का एक अन्य विकल्प मिल सकता है। हालांकि इस तरह के पौधों से आर्थिक लाभ मिलने में समय लगता है। इसलिए पौधों का चयन, भूमि की उपयुक्तता, देखभाल और संबंधित नियमों की जानकारी जरूरी होती है।
सरकार की ओर से निजी क्षेत्रों में वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का उद्देश्य किसानों को कृषि के अलावा अन्य गतिविधियों से भी आर्थिक लाभ के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना से ग्रामीणों को मिलेगा आबादी भूमि का दस्तावेजी अधिकार
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर उसके मालिकों को वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस योजना के अंतर्गत नि:शुल्क रजिस्ट्री पर प्रदेश सरकार 10 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसका उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उनकी आबादी भूमि के पक्के दस्तावेज उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण परिवारों के लिए भूमि और मकान के दस्तावेज कई कारणों से महत्वपूर्ण होते हैं। बैंक से ऋण लेने, संपत्ति से जुड़े अधिकार प्रमाणित करने और भविष्य में संपत्ति का हस्तांतरण करने के लिए वैध दस्तावेज उपयोगी हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री मिलने से संबंधित व्यक्ति को अपनी भूमि पर वैध मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होंगे और वह नियमानुसार अपनी संपत्ति बच्चों के नाम भी हस्तांतरित कर सकेगा।
यह योजना किसानों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण बताई गई है।
प्रगतिशील किसानों ने मुख्यमंत्री को बताए अपने नवाचार और आय के स्रोत
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले के कई प्रगतिशील किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने किसानों से उनकी कृषि गतिविधियों, नवाचारों और आय के स्रोतों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
ग्राम पांडेवाड़ा के किसान वेदराम राहंगडाले ने बताया कि वे मत्स्य पालन का कार्य कर रहे हैं और अपने व्यवसाय के माध्यम से 30 लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। यह उदाहरण बताता है कि कृषि से जुड़ी गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी तैयार कर सकती हैं।
लांजी तहसील के ग्राम अमेड़ा के किसान मुकेश नेवारे ने बताया कि वे धान की खेती के साथ सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी का कार्य भी करते हैं। उन्होंने मशरूम उत्पादन भी शुरू किया है। इस तरह एक ही परिवार द्वारा अलग-अलग गतिविधियां अपनाने से आय के कई स्रोत विकसित हो सकते हैं।
ग्राम कोहकाडीबर की मंजू नगपुरे ने बताया कि वे आत्मा परियोजना और आजीविका मिशन से जुड़ी हैं तथा ड्रोन दीदी के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने इस काम से 1.25 लाख रुपये की आय होने की जानकारी दी।
ग्राम बगड़मारा के किसान जियालाल राहंगडाले ने मुख्यमंत्री को प्राकृतिक खेती अपनाने के बारे में बताया। वहीं ग्राम गुदमा के किसान गुलाब चौधरी ने कहा कि वे 30 एकड़ भूमि में गेहूं की खेती करते हैं और 425 क्विंटल उत्पादन प्राप्त करते हैं।
इन किसानों के अनुभवों से खेती के साथ अन्य गतिविधियों को अपनाने, तकनीक का उपयोग करने और कृषि आधारित रोजगार विकसित करने की संभावनाएं सामने आती हैं।
कृषि क्विज के विजेताओं को मिलेंगे ट्रैक्टर, बुलेट और ई-स्कूटी
कार्यक्रम में कृषि योजनाओं पर आधारित क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं से भी मुख्यमंत्री ने संवाद किया। लॉटरी के माध्यम से चुने गए विजेताओं को पुरस्कार मिलने जा रहे हैं।
विजेताओं में लामता तहसील के ग्राम कुम्हारी की दिवला पटले को ट्रैक्टर, वारासिवनी तहसील के ग्राम एकोड़ी के मनोज हरिनखेड़े को बुलेट बाइक और ग्राम सिकंदरा की कविता शिव को ई-स्कूटी पुरस्कार में मिलने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने तीनों विजेताओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कृषि योजनाओं से जुड़ी क्विज प्रतियोगिता का उद्देश्य किसानों और आम लोगों में कृषि योजनाओं के प्रति जानकारी तथा जागरूकता बढ़ाने से भी जुड़ा है।
कृषि विकास के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
बालाघाट में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान सामने आए आंकड़े जिले की कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। 60 लाख क्विंटल धान उपार्जन, 10 हजार लीटर प्रतिदिन दुग्ध संग्रहण, 15 हजार मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड और 1 लाख 29 हजार से अधिक किसानों को ब्याज मुक्त ऋण जैसी जानकारियां विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती हैं।
हालांकि इन योजनाओं का दीर्घकालीन प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किसानों को समय पर भुगतान, बाजार तक पहुंच, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और जरूरी सुविधाएं मिलती रहें। केवल उत्पादन बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना और लागत के अनुपात में लाभ प्राप्त होना भी जरूरी है।
प्राकृतिक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियां किसानों को आय के वैकल्पिक साधन उपलब्ध करा सकती हैं। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन और किसानों को लगातार मार्गदर्शन देना आवश्यक होगा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान रहे उपस्थित
बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन बालाघाट की कृषि उपज मंडी, गोंगलई में किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की।
इस अवसर पर बालाघाट-सिवनी की सांसद भारती पारधी, विधायक गौरव सिंह पारधी, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य मौसम बिसेन, नगर पालिका अध्यक्ष बालाघाट भारती सुरजीत सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम में कपिल यार्दे, यशवंत लिल्हारे, कल्पना मर्सकोले, सत्यनारायण अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की।
धान उत्पादन से आगे बढ़कर बहुआयामी कृषि अर्थव्यवस्था की ओर बालाघाट
बालाघाट का 60 लाख क्विंटल धान उपार्जन के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल करना जिले की कृषि पहचान को मजबूत करता है। चिन्नौर चावल, कोदो और अन्य श्रीअन्न के उत्पादन के साथ जिले में पशुपालन और मत्स्य पालन की गतिविधियां भी किसानों की आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और पारंपरिक कृषि के साथ अन्य व्यवसायों को जोड़ने का आह्वान किया है। जिले में दुग्ध संग्रहण को 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य, बंद पड़ी 36 दुग्ध समितियों को फिर शुरू करने की पहल और मत्स्य पालन से जुड़े प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि किसानों को उत्पादन के साथ-साथ बेहतर बाजार, उचित मूल्य, आधुनिक तकनीक और समय पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध हो। यदि कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं के विकास के प्रयास निरंतर आगे बढ़ते हैं, तो बालाघाट की कृषि अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और मजबूत बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।