(ब्यूरो कार्यालय)
बैतूल (साई)। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को बैतूल जिले के प्रवास के दौरान वन समितियों, तेंदूपत्ता संग्राहकों, किसानों, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने चार जिलों के 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को 30 करोड़ रुपये से अधिक की बोनस राशि अंतरित की। इसके साथ ही ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ रुपये से अधिक का काष्ठ लाभांश भी वितरित किया गया। बैतूल जिले के समग्र विकास के लिए 443 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं में 154 करोड़ रुपये की रामघाटी मध्यम सिंचाई परियोजना, 70 करोड़ रुपये की लागत से चार जलाशयों का निर्माण, घोड़ाडोंगरी में बैराज और जलाशय, 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से फुटबॉल टर्फ तथा इनडोर और आउटडोर स्टेडियम का निर्माण और बैतूल में जनजातीय संग्रहालय की स्थापना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त नलजल योजनाओं, सड़कों के चौड़ीकरण, शासकीय विद्यालयों की सुविधाओं, पर्यटन विकास और ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणाएं की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गरीब, किसान, युवा, महिला और जनजातीय समाज के कल्याण के लिए विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।
3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिला 30 करोड़ से अधिक बोनस
बैतूल में आयोजित तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण वन उपज संग्रहण से जुड़े परिवारों को बोनस राशि का वितरण रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चार जिलों के 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के बैंक खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की।
इससे दक्षिण बैतूल, पश्चिम बैतूल, उत्तर बैतूल, पांढुर्णा (दक्षिण छिंदवाड़ा), पूर्व छिंदवाड़ा, पश्चिम छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम वन मंडलों के संग्राहक लाभान्वित हुए। इस प्रकार बोनस वितरण सात वन मंडलों के माध्यम से चार जिलों के लाभार्थियों तक पहुंचा।<Cite refs={[“turn147574search0″,”turn147574search3″,”turn147574search10”]}/>
तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य मुख्य रूप से वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण और जनजातीय परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। गर्मियों के मौसम में तेंदूपत्ता संग्रहण कर परिवार अपनी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं। इस कार्य में मेहनत, समय और वन क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में बोनस राशि का वितरण संग्रहण कार्य से जुड़े परिवारों के लिए आर्थिक सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि तेंदूपत्ता संग्राहकों के परिश्रम का सम्मान और उनका वाजिब हक है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में अब तक तेंदूपत्ता संग्राहकों को 80 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।
ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ से अधिक का काष्ठ लाभांश
तेंदूपत्ता संग्राहकों के साथ ग्राम वन समितियों को भी आर्थिक लाभ दिया गया। मुख्यमंत्री ने 13 करोड़ रुपये से अधिक का काष्ठ लाभांश वितरित किया।
ग्राम वन समितियां स्थानीय स्तर पर वन संरक्षण, वन प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण समुदायों को वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में भागीदारी का अवसर मिलता है।
काष्ठ लाभांश का वितरण वन समितियों के सदस्यों और स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक भागीदारी का माध्यम है। इससे वन संरक्षण के प्रति स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी और सहभागिता को प्रोत्साहन मिल सकता है।
वन आधारित अर्थव्यवस्था वाले बैतूल जैसे जिले में तेंदूपत्ता बोनस और काष्ठ लाभांश का वितरण विशेष महत्व रखता है।
बैतूल को 443 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के विकास को गति देने के लिए 443 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 297 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 52 कार्यों का भूमिपूजन और 145 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 55 कार्यों का लोकार्पण किया गया।<Cite refs={[“turn147574search1″,”turn147574search3”]}/>
इन कार्यों का संबंध मुख्य रूप से सिंचाई, जल संसाधन, पेयजल, सड़क, शिक्षा, खेल, पर्यटन और जनजातीय विकास से है।
बैतूल जिले की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जल संसाधनों का विकास और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना महत्वपूर्ण है। जिले के कई क्षेत्रों में कृषि, वन आधारित आजीविका और ग्रामीण व्यापार स्थानीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं।
ऐसे में विकास कार्यों का प्रभाव केवल शहर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी इसका लाभ मिलना जरूरी है।
154 करोड़ की रामघाटी मध्यम सिंचाई परियोजना को मंजूरी
मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाओं में 154 करोड़ रुपये की लागत से रामघाटी मध्यम सिंचाई परियोजना का विकास शामिल है।
बैतूल जिले के कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण विषय है। खेती में वर्षा पर निर्भरता कम करने और किसानों को जरूरत के समय पानी उपलब्ध कराने के लिए जल संसाधन परियोजनाओं की भूमिका अहम होती है।
रामघाटी मध्यम सिंचाई परियोजना से संबंधित प्रमुख अपेक्षाएं इस प्रकार हैं:
- कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा का विस्तार।
- वर्षा आधारित खेती पर निर्भरता कम करने में सहायता।
- फसलों के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराने की संभावना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन को प्रोत्साहन।
- किसानों की फसल संबंधी योजना बनाने की क्षमता में सुधार।
हालांकि परियोजना से कितने गांवों और कितने हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा, इसका विस्तृत तकनीकी विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
परियोजना की वास्तविक उपयोगिता उसके निर्माण, जल संग्रहण क्षमता, नहर अथवा वितरण व्यवस्था और किसानों तक पानी पहुंचने पर निर्भर करेगी।
70 करोड़ से बनेंगे चार जलाशय, घोड़ाडोंगरी में बैराज भी बनेगा
जल संसाधनों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने बैतूल जिले में 70 करोड़ रुपये की लागत से चार जलाशयों के निर्माण की घोषणा की।
इसके अलावा घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में बैराज और जलाशय विकसित किए जाएंगे।
बैतूल की भौगोलिक परिस्थितियों में जल संरक्षण और वर्षा जल का प्रभावी उपयोग महत्वपूर्ण है। जिले में कृषि और ग्रामीण आजीविका का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक जल संसाधनों पर निर्भर करता है।
चार जलाशयों के निर्माण से जल संग्रहण की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने की संभावनाएं बन सकती हैं।
घोड़ाडोंगरी में बैराज निर्माण की घोषणा भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
जलाशय और बैराज जैसी परियोजनाओं की सफलता के लिए केवल निर्माण पर्याप्त नहीं होता। जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण, जल वितरण, रखरखाव और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है।
यदि इन पहलुओं पर व्यवस्थित तरीके से काम किया जाता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि गतिविधियों को लाभ मिल सकता है।
नलजल योजनाओं के लिए 50 करोड़ रुपये देने की घोषणा
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने नलजल योजना के कार्यों के लिए 50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
ग्रामीण परिवारों के लिए घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचना बुनियादी जरूरत है। कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता, जलस्रोतों का संरक्षण और पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता बनी रहती है।
नलजल योजनाओं के विस्तार से ग्रामीण परिवारों को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
इस दिशा में जरूरी होगा कि निर्माण के साथ नियमित जलापूर्ति, पाइपलाइन रखरखाव और जल गुणवत्ता की जांच पर भी ध्यान दिया जाए।
विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में पेयजल संकट से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में जलस्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा।
47 करोड़ से सड़कों का चौड़ीकरण, दूरस्थ गांवों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने सड़क चौड़ीकरण के लिए 47 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
बैतूल जिले में सड़क नेटवर्क का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि जिले के कई ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्र भौगोलिक रूप से अलग-अलग परिस्थितियों में स्थित हैं।
सड़कें बेहतर होने से ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलती है।
इसके साथ ही किसानों को कृषि उपज मंडियों तक पहुंचाने, वन उपज के परिवहन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने में भी बेहतर सड़क संपर्क उपयोगी होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजरे-टोले और दूरस्थ गांवों में रहने वाले जनजातीय परिवारों को भी बेहतर सड़क और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना की सुगम बसों की सुविधा मिल रही है।
सड़क चौड़ीकरण के कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा और समय पर निर्माण पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि नियमित रखरखाव भी जरूरी है।
100 करोड़ से अधिक के फुटबॉल टर्फ और स्टेडियम बनेंगे
बैतूल जिले में खेल सुविधाओं को विस्तार देने के लिए मुख्यमंत्री ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से फुटबॉल टर्फ, इनडोर और आउटडोर स्टेडियम विकसित करने की घोषणा की।
यह घोषणा जिले के युवाओं और खेल प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फुटबॉल सहित विभिन्न खेलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए गुणवत्तापूर्ण मैदान, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की आवश्यकता होती है।
नई खेल सुविधाओं के विकास से जिले में खेल गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा देने की संभावना है।
इन परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख संभावित लाभ हैं:
- फुटबॉल खिलाड़ियों को बेहतर मैदान उपलब्ध होना।
- इनडोर खेलों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होना।
- आउटडोर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन आसान होना।
- स्थानीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के अवसर मिलना।
- युवाओं में खेल और शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहन।
हालांकि, खेल परिसरों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वहां प्रशिक्षकों, उपकरणों, रखरखाव और नियमित प्रतियोगिताओं की पर्याप्त व्यवस्था हो।
बैतूल में बनेगा जनजातीय संग्रहालय, संस्कृति और परंपराओं को मिलेगा संरक्षण
बैतूल में जनजातीय संग्रहालय की स्थापना की घोषणा जिले के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
बैतूल जिले की पहचान जनजातीय समाज, उसकी परंपराओं, लोककला, रीति-रिवाज और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हुई है।
जनजातीय संग्रहालय के माध्यम से स्थानीय समुदायों के इतिहास, पारंपरिक जीवनशैली, कला, शिल्प, वेशभूषा और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित एवं प्रदर्शित करने का अवसर मिल सकता है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने भी कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए भव्य संग्रहालय की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख करते हुए जनजातीय समाज के सम्मान और ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण की बात कही।
संग्रहालय की स्थापना में स्थानीय जनजातीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उनके इतिहास और संस्कृति का दस्तावेजीकरण उनकी सहमति और वास्तविक योगदान के साथ किया जाना चाहिए।
इससे संग्रहालय केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय समाज की पहचान और सांस्कृतिक शिक्षा का केंद्र भी बन सकता है।
50 करोड़ से जनजातीय बेटियों के लिए कन्या शिक्षा परिसर और छात्रावास
शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने जनजातीय बेटियों के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत से कन्या शिक्षा परिसर और छात्रावास का भूमिपूजन किया।
जनजातीय और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं के सामने स्कूल तक पहुंचने, आवास और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण जैसी चुनौतियां हो सकती हैं।
ऐसे में आवासीय शिक्षा सुविधाओं का विकास बालिकाओं की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को किताबें, साइकिल, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और कक्षा 12वीं के स्कूल टॉपर्स को स्कूटी देने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।
कन्या शिक्षा परिसर की सफलता के लिए शिक्षकों की उपलब्धता, छात्रावास की सुविधाएं, सुरक्षा, पुस्तकालय और डिजिटल शिक्षा संसाधनों पर विशेष ध्यान देना होगा।
50 करोड़ से शासकीय हाईस्कूलों में बढ़ेंगी सुविधाएं
बैतूल जिले के शासकीय हाईस्कूलों में 50 करोड़ रुपये की लागत से सुविधाओं का विस्तार करने की घोषणा भी की गई।
सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
विद्यालयों में बेहतर भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पेयजल, स्वच्छता और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का विकास विद्यार्थियों के अध्ययन वातावरण को बेहतर बना सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा संबंधी सुविधाओं का विस्तार कर रही है।
हालांकि, शिक्षा की गुणवत्ता केवल भवन और संसाधनों पर निर्भर नहीं करती। नियमित कक्षाएं, पर्याप्त शिक्षक, विषयवार प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
कुकरू खामला में 15 करोड़ से पर्यटन सुविधाओं का विस्तार
बैतूल जिले के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन संभावनाओं को देखते हुए कुकरू खामला में 15 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख करते हुए यहां कॉफी के बागान विकसित करने की बात कही।
कुकरू खामला क्षेत्र में ईको टूरिज्म की संभावनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
पर्यटन सुविधाओं का विकास होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बन सकते हैं। होमस्टे, स्थानीय खानपान, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
लेकिन पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।
ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व में सफारी गेट और बटरफ्लाई पार्क
बैतूल जिले में वन और जैव विविधता आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं।
- ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट में 7 करोड़ रुपये की लागत से सफारी गेट बनाया जाएगा।
- रिजर्व फॉरेस्ट के पास 3 करोड़ रुपये की लागत से बटरफ्लाई पार्क विकसित किया जाएगा।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाना तथा पर्यटन गतिविधियों को विकसित करना है।
बटरफ्लाई पार्क के माध्यम से तितलियों और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की संभावना है।
सफारी गेट के विकास से वन पर्यटन को व्यवस्थित स्वरूप मिल सकता है। हालांकि, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, पर्यटकों की संख्या और पर्यावरणीय नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।
बैतूल-मुलताई में 24 करोड़ के नए कारखाने, एक हजार एकड़ में औद्योगिक विकास की संभावना
मुख्यमंत्री ने बैतूल और मुलताई में 24 करोड़ रुपये के नए कारखाने स्थापित करने की बात कही।
इसके साथ ही वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल जिले में लगभग एक हजार एकड़ भूमि पर औद्योगिक विकास परियोजनाएं विकसित करने की संभावना का उल्लेख किया।
औद्योगिक विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे युवाओं को अपने क्षेत्र में काम मिलने की संभावना बनेगी और स्थानीय व्यापार तथा सेवाओं को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि, औद्योगिक परियोजनाओं की वास्तविक सफलता निवेश, भूमि की उपलब्धता, पर्यावरणीय स्वीकृति, आधारभूत सुविधाओं और रोजगार सृजन पर निर्भर करेगी।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए कौशल विकास और उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।
युवाओं के लिए रोजगार और एक लाख पदों पर भर्ती की जानकारी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं के रोजगार का विषय भी प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक 85 हजार शासकीय पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं और एक लाख नए पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। साथ ही प्रदेश के एक लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
बैतूल में घोषित औद्योगिक और पर्यटन परियोजनाओं को भी स्थानीय रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखा जा सकता है।
हालांकि, रोजगार संबंधी इन घोषणाओं की वास्तविक उपलब्धि का आकलन नियुक्तियों, भर्ती प्रक्रिया की स्थिति और नए उद्योगों में पैदा होने वाले रोजगार के आंकड़ों से किया जाना चाहिए।
कोदो-कुटकी और गौपालन को प्रोत्साहन, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि और पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए किसानों एवं जनजातीय परिवारों से गौपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गोवर्धन पूजा के अवसर पर वृंदावन गांवों में अच्छे पशुधन की प्रतियोगिताएं आयोजित करने और पशुपालकों को पुरस्कृत करने का निर्णय ले रही है।
इसके साथ ही कोदो-कुटकी सहित मोटे अनाजों यानी श्रीअन्न के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
बैतूल और आसपास के जनजातीय क्षेत्रों में कोदो-कुटकी जैसे पारंपरिक अनाजों का विशेष महत्व है। इनके उत्पादन और विपणन को बेहतर बनाने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं।
इसके लिए जरूरी है कि किसानों को उन्नत बीज, प्रसंस्करण सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीण संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री और सुगम परिवहन पर जोर
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
इसके अलावा दूरस्थ गांवों और जनजातीय बस्तियों को बेहतर सड़क संपर्क तथा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना के अंतर्गत बस सुविधाओं से जोड़ने की बात कही।
ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का विस्तार होने से विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों को लाभ मिल सकता है।
वहीं संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की व्यवस्था आसान होने से ग्रामीण परिवारों को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुविधा मिल सकती है।
इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी व्यापक होगा, जब पात्र परिवारों को समय पर सुविधाएं मिलें और ग्रामीण क्षेत्रों में उनका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाए।
दीपावली से पहले कर्मचारियों को 2 प्रतिशत डीए की सौगात
मुख्यमंत्री ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार निर्णय ले रही है।
इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि के वितरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और सिंचाई सुविधाओं को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
15 से 17 नवंबर तक मनाया जाएगा जनजातीय गौरव उत्सव
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में 15 नवंबर से 17 नवंबर तक तीन दिवसीय उत्सव आयोजित करने की जानकारी दी।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासतों का संरक्षण आवश्यक है।
उन्होंने पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज के सम्मान और स्वाभिमान को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन का उद्देश्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों और समाज के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देना है।
कार्यक्रम में ये जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित
बैतूल में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, राज्यसभा सदस्य माया नारोलिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, विधायक प्रेमशंकर वर्मा, विधायक योगेश पंडाग्रे और विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक, वन समितियों के सदस्य और स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए।
विकास घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
बैतूल जिले को मिली 443 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात के बाद अब इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निगाहें रहेंगी।
विशेष रूप से सिंचाई, जलाशय, पेयजल और सड़क निर्माण से संबंधित कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विकास योजनाओं की सफलता का आकलन केवल भूमिपूजन या घोषणा से नहीं, बल्कि निर्माण की प्रगति, निर्धारित समय सीमा और आम नागरिकों को मिलने वाले लाभ से किया जाना चाहिए।
बैतूल के लिए घोषित प्रमुख कार्यों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण अपेक्षाएं रहेंगी:
- सिंचाई परियोजनाओं से वास्तव में कितने किसानों को लाभ मिलता है।
- जलाशयों और बैराज के निर्माण से जल उपलब्धता कितनी बढ़ती है।
- ग्रामीण सड़कों और नलजल योजनाओं का काम कितनी तेजी से पूरा होता है।
- जनजातीय संग्रहालय से स्थानीय संस्कृति को कितना संरक्षण मिलता है।
- खेल परिसरों से जिले के युवाओं को कितने प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के अवसर मिलते हैं।
- पर्यटन विकास से स्थानीय लोगों को कितना रोजगार प्राप्त होता है।
इन सभी पहलुओं पर नियमित निगरानी और पारदर्शिता जरूरी होगी।
बोनस से वनवासियों को आर्थिक राहत, विकास परियोजनाओं से बैतूल के भविष्य को नई उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 31 अक्टूबर 2026 का बैतूल दौरा वन आधारित आजीविका, कृषि, सिंचाई, शिक्षा, खेल, पर्यटन और जनजातीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।
एक ओर चार जिलों के 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को 30 करोड़ रुपये से अधिक बोनस और ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ रुपये से अधिक काष्ठ लाभांश का वितरण किया गया, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले के लिए 443 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया।
154 करोड़ रुपये की रामघाटी मध्यम सिंचाई परियोजना, चार जलाशयों का निर्माण, घोड़ाडोंगरी में बैराज, 100 करोड़ रुपये से अधिक की खेल सुविधाएं और जनजातीय संग्रहालय जैसी घोषणाएं जिले के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
इसके अतिरिक्त कुकरू खामला में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व में सफारी गेट और बटरफ्लाई पार्क तथा बैतूल-मुलताई में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल भी स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करती है।
अब इन सभी घोषणाओं के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी समयबद्ध क्रियान्वयन की होगी। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, किसानों को सिंचाई मिले, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और जनजातीय समाज की संस्कृति एवं आजीविका सुरक्षित रहे, तभी इन विकास कार्यों की सार्थकता सिद्ध होगी।
बैतूल को मिली विकास की इन सौगातों से जिलेवासियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि घोषित परियोजनाएं धरातल पर कितनी तेजी से उतरती हैं और आम जनता को उनका वास्तविक लाभ कब तक मिल पाता है।