(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश सरकार ने लखन पटेल से पशुपालन विभाग छीन लिया है। यह फैसला दिल्ली से आए एक कॉल के बाद लिया गया है। इसके बाद लखन पटेल को आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने अभी तक इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि फोन आने के बाद सीएम मोहन यादव नाराज थे। इसके बाद रातों-रात दफ्तर खुले, नोटिफिकेशन तैयार हुआ और उसे दिल्ली भेज दिया गया।
लखन पटेल के पर कतरे
मध्य प्रदेश सरकार ने लखन पटेल से पशुपालन विभाग छीन लिया है। यह फैसला दिल्ली से आए एक कॉल के बाद लिया गया है। इसके बाद लखन पटेल को आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार ने अभी तक इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि फोन आने के बाद सीएम मोहन यादव नाराज थे।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं
इसके बाद रातों-रात दफ्तर खुले, नोटिफिकेशन तैयार हुआ और उसे दिल्ली भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक बात यहां तक पहुंच गई थी कि पटेल से मंत्री पद छीना जा सकता है।
लेकिन अगर ऐसा होता तो सरकार को कैबिनेट में बदलाव करना पड़ता। इसी स्थिति से बचने के लिए फिलहाल सिर्फ राज्यमंत्री लखन पटेल का विभाग बदल दिया गया है।
लखन पटेल का राजनीतिक सफर
लखन पटेल की गिनती मध्य प्रदेश बीजेपी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं में होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पथरिया सीट से मैदान में उतारा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के कुंवर पुष्पेंद्र सिंह हजारी से हुआ।
- लखन पटेल ने 2013 के विधानसभा चुनाव में 7,315 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
- 2018 के विधानसभा चुनाव में पटेल फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
- 2023 के विधानसभा चुनाव में लखन पटेल ने फिर वापसी की। बीजेपी ने उन्हें दोबारा पथरिया से टिकट दिया और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार राव ब्रजेंद्र सिंह को 18 हजार159 वोटों से हराकर जीत हासिल की।
सरकार की छवि पर असर
चर्चा है कि मामला सामने आने पर सरकार की छवि को नुकसान पहुंच सकता था। फिलहाल पशुपालन विभाग मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश की गौशालाओं से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर भी मुख्यमंत्री नाराज थे। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मध्य प्रदेश समाचार के अनुसार, सरकार ने इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। आप राजनीति समाचार और भारतीय राजनीति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मूलतः प्रयागराज निवासी, पिछले लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से नई दिल्ली में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय विनीत खरे किसी पहचान को मोहताज नहीं हैं.
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