साइबर अटैक: एमपी, सीजी और राजस्थान की सरकारी योजनाओं पर बड़ा खतरा

देश के सरकारी पोर्टल्स पर बड़ा साइबर खतरा मंडरा रहा है। हैकर्स सरकारी योजनाओं का डेटा चुराकर डार्क-वेब पर बेच रहे हैं। इसमें आम नागरिकों और लाभार्थियों की निजी जानकारी शामिल है। एक मीडिया संस्थान की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। इसमें सामने आया कि भारतीय नागरिकों का डेटा रूस के साइबर बाजारों में खुलेआम बिक रहा है। यह कारोबार डार्क-वेब के जरिए चल रहा है।

(ब्यूरो कार्यालय)
नई दिल्ली (साई)।
देश के सरकारी पोर्टल्स पर बड़ा साइबर खतरा मंडरा रहा है। हैकर्स सरकारी योजनाओं का डेटा चुराकर डार्क-वेब पर बेच रहे हैं। इसमें आम नागरिकों और लाभार्थियों की निजी जानकारी शामिल है। एक मीडिया संस्थान की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। इसमें सामने आया कि भारतीय नागरिकों का डेटा रूस के साइबर बाजारों में खुलेआम बिक रहा है। यह कारोबार डार्क-वेब के जरिए चल रहा है। इसके अलावा, हैकर्स सरकारी पोर्टल्स के लॉगिन आईडी और पासवर्ड की कीमत बेहद कम रखी गई है। एक अकाउंट सिर्फ 10 डॉलर, यानी लगभग 930 रुपए में बिक रहा है।

साइबर अटैक का खतरा

हैकर्स सरकारी योजनाओं का डेटा चुराकर डार्क-वेब पर बेच रहे हैं। इसमें आम नागरिकों और लाभार्थियों की निजी जानकारी शामिल है।

एक मीडिया संस्थान की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। इसमें सामने आया कि भारतीय नागरिकों का डेटा रूस के साइबर बाजारों में खुलेआम बिक रहा है।

डार्क-वेब पर डेटा बिक्री

डार्क-वेब पर बिग ब्रदर नाम के एक पेज पर यह डेटा उपलब्ध बताया जा रहा है। इस पेज पर देश के 17 अहम सरकारी विभागों का डेटा बिक्री के लिए रखा गया है।

इनमें छत्तीसगढ़, केरल और बिहार के विभाग शामिल हैं। महाराष्ट्र वन विभाग, कोल इंडिया और राष्ट्रीय आयुष मिशन का डेटा भी इसमें है।

साइबर अटैक के पीछे की कहानी

पड़ताल में एक और बड़ी बात सामने आई है। देश में हो रहे म्यूल अकाउंट और फर्जी पहचान के मामलों के पीछे यही चोरी का डेटा है।

अपराधी इसी डेटा से फर्जी बैंक खाते खोल रहे हैं। हैकर चोरी किए गए यूजर अकाउंट और पासवर्ड डार्क-वेब के बाजार में डाल देते हैं।

  • हैकर्स सरकारी योजनाओं का डेटा चुराकर डार्क-वेब पर बेच रहे हैं।
  • डार्क-वेब पर बिग ब्रदर नाम के एक पेज पर यह डेटा उपलब्ध बताया जा रहा है।
  • देश में हो रहे म्यूल अकाउंट और फर्जी पहचान के मामलों के पीछे यही चोरी का डेटा है।

साइबर सुरक्षा की कमी

केंद्र सरकार के दिशानिर्देश साफ हैं जिन विभागों में आधार-आधारित योजनाएं चलती हैं, वहां फ्रॉड प्रोटेक्शन और फ्रॉड एनालिटिक्स तंत्र लगाना जरूरी है।

डेटाबेस एक्टिविटी मॉनिटरिंग टूल भी लगाना अनिवार्य है, ताकि चोरी होते ही अलर्ट मिल सके। साइबर सुरक्षा के बारे में और जानें। इसके अलावा, साइबर अटैक से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं। साइबर सुरक्षा के बारे में और जानें।