(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए लागू सिविल सेवा आचरण नियमों में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अब कोई भी अधिकारी अपने एक महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य का उपहार स्वीकार नहीं कर सकेगा।
सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में पुराने नियम व्यवहारिक नहीं रह गए हैं। इसी कारण वर्ष 1965 में बने मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस प्रस्ताव पर मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में विस्तार से चर्चा हो चुकी है और अब इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
यह बदलाव केवल उपहार लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, संपत्ति और महंगे उपहारों की सूचना देने जैसे कई नए प्रावधान भी इसमें शामिल किए गए हैं।
क्यों जरूरी हो गया नियमों में बदलाव
मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम पहली बार वर्ष 1965 में बनाए गए थे। इसके बाद वर्ष 2000 में इनमें आखिरी संशोधन किया गया था। उस समय के आर्थिक और सामाजिक हालात वर्तमान परिस्थितियों से काफी अलग थे।
वर्तमान नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी विवाह, वर्षगांठ, धार्मिक आयोजन या अन्य सामाजिक अवसरों पर 1,500 रुपये से अधिक का नकद उपहार स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन बढ़ती महंगाई और बदली आर्थिक परिस्थितियों के कारण इस सीमा को अब अव्यावहारिक माना जा रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि कई मामलों में छोटे सामाजिक आयोजनों में भी उपहार की राशि इससे अधिक हो जाती है। ऐसे में पुराने नियमों को व्यवहारिक और आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप बनाना जरूरी हो गया था।
क्या होंगे नए प्रस्तावित नियम
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे संशोधित नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव उपहार स्वीकार करने की सीमा को लेकर है।
प्रस्तावित बदलावों के मुख्य बिंदु
- अधिकारी अपने एक माह के मूल वेतन तक का उपहार ले सकेंगे
- कुछ अधिकारियों ने इसे दो माह के मूल वेतन तक करने का सुझाव भी दिया है
- एक तय सीमा से अधिक मूल्य के उपहार की सूचना देना अनिवार्य होगा
- भूमि, वाहन और अन्य महंगी संपत्तियों की जानकारी प्रशासन को देनी होगी
- छह माह के मूल वेतन से अधिक निवेश पर विभाग को सूचित करना होगा
- बार-बार कार्यक्रम आयोजित कर नियमों का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा
सरकार इस बात पर भी जोर दे रही है कि नियमों का उपयोग पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हो, न कि loophole बनाकर व्यक्तिगत लाभ उठाने के लिए।
बार-बार गिफ्ट लेने पर भी रहेगी नजर
प्रस्तावित नियमों में केवल एक बार में लिए गए उपहार की सीमा तय नहीं की जा रही, बल्कि कुल उपहारों पर भी निगरानी रखने की तैयारी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यदि कोई अधिकारी अलग-अलग अवसरों पर लगातार महंगे उपहार प्राप्त करता है, तो उसकी भी समीक्षा की जाएगी। इसके लिए अधिकतम वार्षिक सीमा तय करने पर विचार चल रहा है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारी सामाजिक आयोजनों की आड़ में नियमों का दुरुपयोग न कर सकें।
केंद्र सरकार के नियमों का भी किया गया अध्ययन
राज्य सरकार ने नए नियम तैयार करने से पहले केंद्र सरकार के सिविल सेवा आचरण नियमों का भी अध्ययन किया है। वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों की समिति ने विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार के प्रावधानों की तुलना कर यह मसौदा तैयार किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब ऐसे नियमों को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी हो गया है।
सरकारी प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
निवेश और संपत्ति पर भी बढ़ेगी निगरानी
नए प्रस्तावित नियमों का एक महत्वपूर्ण पहलू अधिकारियों के निवेश और संपत्ति लेन-देन से जुड़ा है।
यदि कोई अधिकारी अपने छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि का निवेश करता है, तो उसे अपने प्रशासनिक विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। इसमें शेयर बाजार, अचल संपत्ति, महंगे वाहन और अन्य निवेश शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम आय और संपत्ति के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
किन मामलों में देनी होगी सूचना
- महंगी भूमि खरीदने पर
- लग्जरी वाहन लेने पर
- बड़े निवेश करने पर
- महंगे उपहार स्वीकार करने पर
- मूल्यवान वस्तुएं प्राप्त होने पर
सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक ईमानदारी को मजबूत किया जा सकेगा।
प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों के लिए स्पष्ट आचार संहिता होने से कई विवादों और अनियमितताओं को रोका जा सकता है।
प्रस्तावित नियमों से निम्नलिखित फायदे होने की उम्मीद है—
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण मजबूत होगा
- उपहार और निजी लाभ की निगरानी आसान होगी
- अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी
- प्रशासनिक पारदर्शिता में सुधार होगा
- जनता का भरोसा मजबूत होगा
कर्मचारियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच प्रस्तावित नियमों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कुछ कर्मचारियों का मानना है कि पुराने नियम वास्तव में व्यवहारिक नहीं थे और समय के अनुसार बदलाव जरूरी था। वहीं, कुछ अधिकारियों का कहना है कि नियमों को लागू करते समय स्पष्ट दिशा-निर्देश होना जरूरी होगा ताकि अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।
कई कर्मचारियों ने यह भी कहा कि सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में मिलने वाले उपहारों और पेशेवर लाभ के उद्देश्य से दिए गए उपहारों में अंतर स्पष्ट होना चाहिए।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला सरकार की “गुड गवर्नेंस” नीति से भी जुड़ा हुआ है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है।
मध्यप्रदेश सरकार भी अब प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमों को प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकता है।
डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की भी संभावना
सूत्रों के अनुसार भविष्य में इन नियमों के पालन की निगरानी के लिए डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम भी विकसित किया जा सकता है।
संभावना है कि अधिकारी—
- अपने उपहारों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे
- निवेश और संपत्ति की डिजिटल घोषणा करेंगे
- वार्षिक संपत्ति विवरण डिजिटल रूप से जमा करेंगे
इससे निगरानी प्रक्रिया आसान और अधिक पारदर्शी हो सकेगी।
विशेषज्ञों की राय : केवल नियम नहीं, सख्त पालन भी जरूरी
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनका प्रभावी पालन भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- स्पष्ट गाइडलाइन तैयार करनी होगी
- सभी विभागों में समान नियम लागू करने होंगे
- निगरानी तंत्र मजबूत करना होगा
- शिकायत और जांच प्रक्रिया पारदर्शी रखनी होगी
यदि ऐसा किया गया तो यह प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होंगे नियम
फिलहाल प्रस्तावित संशोधन अंतिम चरण में है। वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस पर चर्चा पूरी हो चुकी है और अब इसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद नए नियम आधिकारिक रूप से लागू किए जा सकते हैं। इसके बाद सभी विभागों को नई गाइडलाइन जारी की जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि नए नियम आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों और पारदर्शिता की अपेक्षाओं के अनुरूप हों।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सिविल सेवा आचरण नियमों में प्रस्तावित बदलाव प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बदलते समय और आर्थिक परिस्थितियों के बीच पुराने नियमों को व्यवहारिक बनाना आवश्यक हो गया था।
एक महीने के मूल वेतन से अधिक उपहार लेने पर निगरानी, बड़े निवेश की अनिवार्य सूचना और महंगी संपत्तियों की पारदर्शिता जैसे प्रावधान प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, इन नियमों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उनका पालन कितनी गंभीरता और निष्पक्षता से किया जाता है।
यदि सरकार प्रभावी निगरानी और स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू करने में सफल रहती है, तो यह कदम प्रशासन में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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