मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु रहा — प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत भारिया, बैगा और सहरिया समुदाय के घरों का विद्युतीकरण।
🔹 PVTG समुदायों के घरों को रोशनी देने की बड़ी पहल
राज्य सरकार ने इस अभियान के द्वितीय चरण के लिए लगभग ₹78 करोड़ 94 लाख रुपये की अतिरिक्त कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान की।
इस योजना के तहत प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups) यानी भारिया, बैगा और सहरिया समुदायों के 18,338 अविद्युतीकृत घरों में बिजली पहुंचाई जाएगी।
इसमें केंद्र सरकार का 60% (₹47.36 करोड़) योगदान होगा जबकि राज्य सरकार 40% (₹31.58 करोड़) राशि अंशपूंजी के रूप में वितरण कंपनियों को प्रदान करेगी।
🔹 प्रति घर व्यय सीमा दोगुनी
पूर्व में प्रति घर विद्युतीकरण की स्वीकृत सीमा ₹1 लाख प्रति हाउसहोल्ड थी, जिसे बढ़ाकर अब ₹2 लाख प्रति हाउसहोल्ड कर दिया गया है।
यदि किसी बसाहट में लागत इससे अधिक आती है, तो ऊर्जा विकास निगम द्वारा 1 किलोवाट की ऑफ-ग्रिड सोलर प्रणाली लगाकर घरों में बिजली की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
इस योजना के तहत 211 घरों में सौर ऊर्जा आधारित विद्युतीकरण किया जाएगा।
🔹 PM-JANMAN योजना का प्रथम चरण सफल
उल्लेखनीय है कि 11 मार्च 2024 को सम्पन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रथम चरण में 10,952 घरों के विद्युतीकरण के लिए ₹65 करोड़ की कार्ययोजना स्वीकृत की गई थी।
इनमें से 8,752 घरों में बिजली पहुंच चुकी है, जिससे हजारों जनजातीय परिवार अब रोशनी से जगमगा रहे हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी आदिवासी घर अंधेरे में न रहे और हर परिवार तक बिजली पहुंचाई जाए — चाहे वह जंगलों, पहाड़ियों या दूरदराज इलाकों में ही क्यों न रहता हो।
⚡ 132 केवी और उससे बड़ी पारेषण लाइनों के लिए क्षतिपूर्ति में वृद्धि
मंत्रि-परिषद ने किसानों के हित में एक और बड़ा निर्णय लिया है। अब 132 केवी और उससे अधिक वोल्टेज वाली पारेषण लाइनों के लिए मुआवजा दरों में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है।
- टॉवर स्थापना पर मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि को 85% से बढ़ाकर 200% किया गया।
- लाइन ट्रांसमिशन के ROW (Right of Way) क्षेत्र में आने वाली भूमि की क्षतिपूर्ति 15% से बढ़ाकर 30% कर दी गई।
- टॉवर के चार पाए के चारों ओर 1-1 मीटर की अतिरिक्त भूमि भी अब क्षतिपूर्ति के दायरे में आएगी।
भूमि का स्वामित्व किसान के पास ही रहेगा, और वह लाइन के नीचे की फसलें उगा सकेगा।
इस कदम से किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और पारेषण परियोजनाओं में स्थानीय विरोध कम होगा।
🧱 क्षतिपूर्ण क्षेत्रफल में भी वृद्धि
राज्य सरकार ने क्षतिपूर्ण क्षेत्रफल (compensated area) में भी सुधार किया है —
| वोल्टेज लाइन | पूर्व क्षेत्रफल | नया क्षेत्रफल |
| 132 K.V. | 7 मीटर | 28 मीटर |
| 220 K.V. | 14 मीटर | 35 मीटर |
| 400 K.V. | 52 मीटर | 52 मीटर (निर्धारित) |
यह परिवर्तन किसानों को अधिक संतुलित मुआवजा दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
⚖️ बक्स्वाहा (छतरपुर) में न्यायिक ढांचा सुदृढ़ होगा
बैठक में छतरपुर जिले के बक्स्वाहा में व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड स्तर का एक नया न्यायिक पद सृजित करने का निर्णय भी लिया गया।
इसके साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 पदों सहित कुल 7 नए पदों की स्वीकृति दी गई।
इसके लिए ₹52.46 लाख प्रतिवर्ष का बजट स्वीकृत किया गया है।
यह निर्णय क्षेत्रीय न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा और स्थानीय जनता को तेजी से न्याय दिलाने में मददगार होगा।
🏠 भोपाल शासकीय आवास नियमों में संशोधन
शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 के नियम 17 और 37 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
अब स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति की स्थिति में शासकीय सेवक को आवास धारण करने के लिए अधिक लचीली अवधि प्रदान की जाएगी।
🔸 प्रमुख बिंदु:
- स्थानांतरण की स्थिति में – अधिकतम 6 माह तक सामान्य दर पर आवास रख सकेंगे।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी –
- पहले 3 माह तक सामान्य दर पर
- अगले 3 माह तक 10 गुना किराए पर आवास धारण कर सकेंगे।
- इसके बाद दाण्डिक (penal) किराया लागू होगा और बेदखली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पहले यह अवधि केवल 3 माह थी, जिसे अब 6 माह तक बढ़ा दिया गया है।
🔸 अनधिकृत आधिपत्य की स्थिति में:
- 3 माह तक सामान्य दर पर आवास रखा जा सकेगा।
- उसके बाद दाण्डिक किराया 10 गुना से बढ़ाकर 30 गुना किया गया है।
- साथ ही, हर माह 10% की अतिरिक्त वृद्धि लागू होगी।
यह संशोधन सरकारी आवासों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
🗣️ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के दौरान कहा कि
“राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विकास नहीं, बल्कि समावेशी विकास है।
जनजातीय समाज, किसान, कर्मचारी और आम नागरिक — सभी को सरकार की योजनाओं का समान लाभ मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारिया, बैगा और सहरिया जैसे समुदायों को बिजली से जोड़ना केवल तकनीकी कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का प्रतीक है।
🌿 PM-JANMAN योजना का सामाजिक प्रभाव
PM-JANMAN (Prime Minister Janjatiya Adhikar Maha Abhiyan) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो PVTG समुदायों के समग्र विकास के लिए संचालित की जा रही है।
मध्यप्रदेश सरकार इस योजना को तेजी से और प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।
🔸 योजना के मुख्य उद्देश्य:
- हर PVTG परिवार को बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास उपलब्ध कराना।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा समाधान को बढ़ावा देना।
- महिलाओं और बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
- PVTG समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार करना।
📈 राज्य सरकार की ऊर्जा नीतियों में गति
मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले एक वर्ष में ऊर्जा क्षेत्र में 20% अधिक निवेश आकर्षित किया है।
साथ ही ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट ग्रिड, सौर पैनल, और विद्युत उपकेंद्रों की स्थापना को गति दी जा रही है।
भविष्य में सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक राज्य 100% बिजली पहुंच वाला प्रदेश बने।
✅ निष्कर्ष (Conclusion)
मध्यप्रदेश की मंत्रि-परिषद का यह निर्णय आदिवासी सशक्तिकरण, किसान सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारिया, बैगा और सहरिया समुदायों के घरों में अब रोशनी पहुंचेगी, किसानों को बेहतर मुआवजा मिलेगा, और सरकारी आवासों के उपयोग में व्यवस्था और अनुशासन स्थापित होगा।
यह बैठक स्पष्ट करती है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार विकास के साथ न्याय और संवेदनशीलता को समान महत्व देती है।