(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। जिला प्रशासन ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती नेहा मीना के नेतृत्व में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया। यह आदेश 30 सितंबर 2026 से तत्काल प्रभाव से दो महीने तक लागू रहेगा और कानून-व्यवस्था, लोक शांति एवं जन-सामान्य की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
आदेश के प्रमुख प्रावधान
आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति या संगठन को पूर्व लिखित अनुमति के बिना धरना-प्रदर्शन, जुलूस या रैली आयोजित करने से प्रतिबंधित किया गया है। अनुमति हेतु पुलिस अभिमत के साथ कम से कम 48 घंटे और बिना पुलिस अभिमत के 72 घंटे पूर्व एसडीएम कार्यालय में आवेदन अनिवार्य है। धार्मिक या वर्गीय भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले नारे, पोस्टर, बैनर या गीतों के प्रयोग पर भी रोक लगाई गई है।
प्रशासनिक प्रक्रिया एवं प्रतिबंध
सामाजिक मीडिया पर आपत्तिजनक, सांप्रदायिक या तनाव उत्पन्न करने वाले फोटो, वीडियो, कमेंट या संदेश पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करना प्रतिबंधित रहेगा। मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 तथा ध्वनि प्रदूषण नियमों के प्रावधान प्रभावी रहेंगे; लाउडस्पीकर, डीजे या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग केवल लिखित अनुमति पर ही संभव है और रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक इनके संचालन पर प्रतिबंध रहेगा।
सामाजिक एवं पर्यावरणीय पहलू
आदेश में सड़कों एवं चौराहों पर वाहन खड़े कर या ठेले लगाकर आवागमन बाधित करने, तथा पत्थर आदि फेंकने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों में शांति बनाए रखना, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना और सामाजिक तनाव को न्यूनतम करना है। उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: जिला प्रशासन, सिवनी
• आयोजन: प्रतिबंधात्मक आदेश जारी
• स्थान: सिवनी
• मुख्य उद्देश्य: सार्वजनिक शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: धरना‑प्रदर्शन, रैली, ध्वनि यंत्र, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध
• लक्ष्य: दो महीने में कानून‑व्यवस्था की स्थिरता
सिवनी में जारी किया गया धारा 163 प्रतिबंधात्मक आदेश प्रशासनिक अनुशासन को सुदृढ़ करता है और नागरिकों के अधिकारों एवं सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है। नियमित अनुमति प्रक्रिया, ध्वनि नियंत्रण और सोशल मीडिया निगरानी से भविष्य में सार्वजनिक घटनाओं में व्यवधान कम होगा, जिससे सतत विकास और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।