सिवनी की हवाई पट्टी पर उतर सकेगा सूबे के निजाम का नया उड़न खटोला!
(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के व्यक्तिगत उपयोग के लिए बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 मिड‑साइज़ जेट खरीदा। यह विमान कनाडा की बॉम्बार्डियर कंपनी से टोरंटो के माध्यम से भारत भेजा जाएगा। सिवनी की हवाई पट्टी पर दो भारतीय पायलटों को प्रशिक्षण दिया गया, परन्तु पहली कोशिश में आवश्यक टेस्ट पास न कर पाने के कारण उन्हें पुनः 18‑दिन की ट्रेनिंग लेनी पड़ी। अब दोनों पायलटों को सह‑पायलट प्रमाणपत्र मिल चुका है, जबकि प्रारंभिक उड़ान विदेशी पायलट के FATA अनुमोदन के साथ होगी।
प्रशिक्षण प्रक्रिया और चुनौतियाँ
विमान निर्माण कंपनी ने भारतीय पायलटों को 18 दिनों में पूर्ण प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन देने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, दोनों पायलटों ने प्रारम्भिक परीक्षण में आवश्यक मानकों को पूरा नहीं किया, जिससे अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ी। पुनः प्रशिक्षण के दौरान अतिरिक्त लागत और समय दोनों बढ़े, परन्तु मध्यप्रदेश सरकार ने इस खर्च को उठाया। अंततः, विमानन आयुक्त चंद्रमौली शुक्ला ने पुष्टि की कि दोनों पायलटों को सह‑पायलट के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र प्रदान कर दिया गया है, जिससे वे भविष्य में विमान में सह‑पायलट की भूमिका निभा सकेंगे।
विमान का आगमन और नियामक प्रक्रिया
बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट को 26 या 27 सितंबर को टोरंटो से भारत के लिए रवाना किया जाएगा और 30 सितंबर तक भोपाल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने की उम्मीद है। भारत पहुंचने के बाद विमान को कस्टम क्लियरेंस और DGCA की तकनीकी जांच से गुजरना होगा। DGCA की सुरक्षा मंजूरी मिलने पर ही यह जेट नियमित रूप से मुख्यमंत्री के आधिकारिक उपयोग के लिए तैयार होगा।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: बॉम्बार्डियर (कनाडा)
• आयोजन: चैलेंजर‑3500 जेट की खरीद और पायलट प्रशिक्षण
• स्थान: सिवनी (प्रशिक्षण), टोरंटो‑भोजपुर (आगमन)
• मुख्य उद्देश्य: मुख्यमंत्री के लिए सुरक्षित, आधुनिक जेट उपलब्ध कराना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: भारतीय पायलटों को सह‑पायलट प्रमाणपत्र प्रदान करना, विदेशी पायलट द्वारा प्रारम्भिक उड़ान
• लक्ष्य: 30 सितंबर तक विमान का भारत में आगमन और DGCA मंजूरी के बाद नियमित उपयोग
भविष्य की दिशा
भविष्य में मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि इस जेट के नियमित उपयोग से राज्य के प्रशासनिक यात्रा में समय और लागत दोनों की बचत हो। भारतीय पायलटों के निरंतर कौशल विकास, आधुनिक एयरोस्पेस तकनीक का अपनाना और नियामक निकायों के साथ सहयोग इस पहल को स्थायी सफलता की ओर ले जाएगा। नियमित सुरक्षा समीक्षा और कर्मचारी कल्याण पर ध्यान देकर राज्य की विमानन क्षमता को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।