मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फिर साफ किया कि परिवीक्षाधीन कर्मचारियों को 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की शर्त सही नहीं है। इसके बावजूद कर्मचारियों को अपना हक पाने के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर करनी पड़ रही हैं। इससे सरकार के रवैये पर नए सवाल उठ रहे हैं।