सिवनी में वन्दे मातरम् सामूहिक गायन: 1500+ प्रतिभागियों ने गाया राष्ट्रभक्ति गीत

(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)।25 सितंबर 2026 को शुक्रवार को प्रातः 11 बजे सिवनी के सरस्वती शिशु/उ.मा.विद्यालय भैरोगंज में विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एकत्रित 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने एक समय, एक लय, एक स्वर में राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य 1 करोड़ छात्रों और नागरिकों की भागीदारी से राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना था।

कार्यक्रम का विस्तृत विवरण

वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन से पहले विद्यालय के विशाल प्रांगण में ध्वजवंदन और शांति घोषणा हुई। डॉ. ओमप्रकाश सरवैया, प्राचार्य शास. कन्या महाविद्यालय सिवनी, ने अध्यक्ष एवं पर्यवेक्षक के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पंकज दुबे, जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, ने मंच संभाला और उपस्थित सभी को राष्ट्रीय गीत के महत्व पर प्रकाश डाला। संगीत विशेषज्ञ श्री नेत्रपाल दुबे ने ध्वनि व्यवस्था और स्वर समन्वय की देखरेख की, जिससे सभी आवाज़ें स्पष्ट और सुसंगत रही।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों, विद्यालय के अधिकारीगण और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इसे गरिमामय बना दिया। सभी ने एकजुट होकर वन्दे मातरम् का गान किया, जिससे अनुशासन, एकता और देशभक्ति का संदेश स्पष्ट रूप से प्रसारित हुआ।

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खबर के प्रमुख बिंदु

• कंपनी: विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान
• आयोजन: वन्दे मातरम् सामूहिक गायन (150 वर्ष)
• स्थान: सरस्वती शिशु विद्यालय, भैरोगंज, सिवनी
• मुख्य उद्देश्य: राष्ट्रीय भावना का प्रसार और 1 करोड़ प्रतिभागियों का लक्ष्य
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: अनुशासन, एकता, राष्ट्रभक्ति को सुदृढ़ करना
• लक्ष्य: भविष्य में समान राष्ट्रीय कार्यक्रमों का नियमित आयोजन

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वन्दे मातरम् के इस सामूहिक गायन ने छात्रों और नागरिकों में राष्ट्रीय अभिमान को पुनःजागृत किया। नियमित रूप से ऐसे बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का आयोजन, आधुनिक ध्वनि तकनीक और सख्त अनुशासन के साथ, संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। भविष्य में भी विद्याभारती और अन्य शैक्षणिक संस्थाएँ इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक एकता और सतत विकास की भावना को पोषित करती रहेंगी।