सिवनी में हार्वेस्टर से कटाई के लिए SMS सिस्टम लगाना अनिवार्य: नरवाई जलाने पर रोक लगाने प्रशासन सख्त, कलेक्टर ने 45 संचालकों को दिए निर्देश

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले फसल अवशेष यानी नरवाई को जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। नरवाई प्रबंधन को लेकर शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पालन में कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने हार्वेस्टर संचालकों को अपनी मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन नहीं होने पर किसान उन्हें खेतों में जला देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों प्रभावित होते हैं।

इसी विषय को लेकर कृषि उपज मंडी सिमरिया में जिले के हार्वेस्टर एवं कस्टम हायरिंग केंद्र संचालकों की बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में फसल कटाई के दौरान और उसके बाद नरवाई प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में जिले के 45 हार्वेस्टर एवं कस्टम हायरिंग केंद्र संचालकों ने सहभागिता की।

बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि हार्वेस्टर से फसल कटाई के दौरान फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए सभी हार्वेस्टर संचालकों को अपनी मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवाने के निर्देश दिए गए। बैठक में संचालकों को शासन के दिशा-निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। संचालकों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखते हुए नरवाई प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।

हार्वेस्टर संचालकों के लिए स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य

फसल कटाई के दौरान हार्वेस्टर मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन मशीनों से कम समय में बड़े क्षेत्र की फसल की कटाई संभव होती है, लेकिन कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों का उचित प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

विशेष रूप से धान और गेहूं जैसी फसलों की कटाई के बाद खेत में डंठल, पुआल और अन्य अवशेष बच जाते हैं। इन्हें ही सामान्य तौर पर नरवाई कहा जाता है। कई स्थानों पर किसान अगली फसल की तैयारी के लिए खेत को जल्दी साफ करने के उद्देश्य से इन अवशेषों में आग लगा देते हैं।

नरवाई जलाने की इसी समस्या को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा हार्वेस्टर संचालकों को स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम हार्वेस्टर के साथ लगाया जाने वाला ऐसा उपकरण है, जो कटाई के दौरान फसल के बचे हुए अवशेषों को व्यवस्थित रूप से फैलाने में मदद करता है। इससे खेत में फसल अवशेषों का एक स्थान पर ढेर लगने की स्थिति कम होती है और उनके आगे के प्रबंधन में सुविधा मिलती है।

इस व्यवस्था के माध्यम से किसान फसल अवशेषों को खेत में मिलाने, अन्य कृषि उपयोगों में लेने अथवा उपयुक्त मशीनों की सहायता से प्रबंधित करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने सभी हार्वेस्टर संचालकों को अपने हार्वेस्टर में एसएमएस लगवाने के निर्देश देते हुए नरवाई प्रबंधन को गंभीरता से लेने की बात कही।

नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव

खेतों में नरवाई जलाना किसानों के लिए भले ही कम समय में खेत साफ करने का आसान तरीका दिखाई देता हो, लेकिन इसके दूरगामी नुकसान होते हैं।

फसल अवशेषों में आग लगाने से मिट्टी की सतह पर मौजूद जैविक पदार्थ प्रभावित होते हैं। इसके अलावा मिट्टी में रहने वाले कई उपयोगी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

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मिट्टी की गुणवत्ता केवल उसमें मौजूद पोषक तत्वों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी जैविक गतिविधियों, संरचना और नमी बनाए रखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

नरवाई जलाने से इन सभी पहलुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

कलेक्टर ने बैठक में बताया कि फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से मिट्टी की नमी एवं उर्वरता प्रभावित होती है। साथ ही इससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फसल अवशेषों को जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण में सूक्ष्म कणों और विभिन्न प्रदूषकों की मात्रा बढ़ा सकता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को सांस संबंधी परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से श्वसन संबंधी समस्याओं से प्रभावित लोगों के लिए धुएं का संपर्क अधिक परेशानी पैदा कर सकता है।

फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए SMS तकनीक क्यों जरूरी?

हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाने का मुख्य उद्देश्य कटाई के दौरान खेत में बचने वाले अवशेषों को व्यवस्थित करना है।

सामान्य हार्वेस्टर से कटाई के दौरान फसल का कुछ हिस्सा खेत में रह जाता है। यदि इन अवशेषों को उचित तरीके से प्रबंधित नहीं किया जाए, तो कई किसान अगली फसल की तैयारी के लिए खेत में आग लगाने का विकल्प चुनते हैं।

SMS तकनीक इस समस्या को कम करने में सहायक हो सकती है।

इसके प्रमुख उपयोग और लाभ इस प्रकार हैं:

  1. फसल अवशेषों का समान वितरण

स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम कटाई के दौरान बचे हुए अवशेषों को खेत में अपेक्षाकृत समान रूप से फैलाने में मदद करता है। इससे अवशेषों के एक जगह जमा होने की समस्या कम होती है।

  1. नरवाई जलाने की आवश्यकता कम करने में मदद

जब खेत में फसल अवशेष व्यवस्थित रूप से फैले रहते हैं, तो उनके प्रबंधन के लिए अन्य कृषि उपकरणों का उपयोग करना आसान हो सकता है।

  1. मिट्टी के संरक्षण में सहयोग

फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित उपयोग करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बनाए रखने और भूमि की गुणवत्ता के संरक्षण में मदद मिल सकती है।

  1. पर्यावरण प्रदूषण को कम करने की दिशा में प्रयास

नरवाई जलाने की घटनाओं में कमी आने से खेतों से उठने वाले धुएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

  1. कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग

फसल अवशेषों को उचित तरीके से प्रबंधित कर खाद, मल्चिंग और अन्य कृषि उपयोगों की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

हालांकि, केवल SMS लगाने से फसल अवशेषों का पूरा प्रबंधन नहीं हो जाता। इसके लिए किसानों को भी उपलब्ध कृषि उपकरणों और तकनीकों का उपयोग करना होगा।

कृषि उपज मंडी सिमरिया में हुई बैठक, 45 संचालकों की सहभागिता

नरवाई प्रबंधन को लेकर कृषि उपज मंडी सिमरिया में आयोजित बैठक में जिले के 45 हार्वेस्टर एवं कस्टम हायरिंग केंद्र संचालक शामिल हुए।

बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने की। इस दौरान हार्वेस्टर से फसल कटाई के समय फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन और नरवाई जलाने की रोकथाम को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में संचालकों को शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फसल कटाई के दौरान नरवाई प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था की जानी चाहिए।

बैठक में उपस्थित हार्वेस्टर संचालकों ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने नरवाई प्रबंधन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।

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यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हार्वेस्टर संचालक फसल कटाई की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कटाई के समय ही फसल अवशेषों के प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाए, तो बाद में नरवाई जलाने की नौबत आने की आशंका कम की जा सकती है।

बैठक में पुलिस अधीक्षक और जिला पंचायत सीईओ सहित अधिकारी रहे उपस्थित

कृषि उपज मंडी सिमरिया में आयोजित इस बैठक में प्रशासन और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहभागिता की।

बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित अधिकारियों में शामिल रहे:

  • कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार।
  • पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी।
  • मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह।
  • अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सिवनी।
  • उप संचालक कृषि।
  • सहायक कृषि यंत्री।
  • संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी।

अधिकारियों की उपस्थिति में हार्वेस्टर संचालकों को नरवाई प्रबंधन के महत्व और शासन के निर्देशों के पालन के संबंध में जानकारी दी गई।

इससे स्पष्ट है कि फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से काम करने की तैयारी में है।

किसानों के सामने क्या हैं नरवाई प्रबंधन की चुनौतियां?

नरवाई जलाने की समस्या को केवल किसानों की लापरवाही के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे खेती की लागत, समय, मशीनों की उपलब्धता और अगली फसल की तैयारी जैसे कई व्यावहारिक कारण भी होते हैं।

फसल कटाई के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेत को अगली बुवाई के लिए तैयार करने की होती है।

कई किसान कम समय में खेत की सफाई करना चाहते हैं। यदि फसल अवशेषों को हटाने या खेत में मिलाने के लिए आवश्यक मशीनें उपलब्ध नहीं हों, तो उनके लिए नरवाई प्रबंधन मुश्किल हो सकता है।

इसके अतिरिक्त छोटे और सीमांत किसानों के सामने मशीनों का किराया और अतिरिक्त कृषि कार्यों की लागत भी चुनौती बन सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन के लिए जरूरी है कि किसानों को केवल नरवाई नहीं जलाने की सलाह देने के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्थाओं की जानकारी और उपलब्ध सुविधाओं तक पहुंच भी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएं।

कस्टम हायरिंग केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसान आवश्यक कृषि मशीनें किराये पर प्राप्त कर सकते हैं और फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं।

नरवाई का उपयोग खेतों के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में किया जा सकता है

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल अवशेषों को बेकार समझकर जलाने के बजाय उनका उचित उपयोग किया जा सकता है।

नरवाई का प्रबंधन करने के लिए अलग-अलग कृषि तकनीकें उपलब्ध हैं। इनमें से किसी तकनीक का चयन फसल, मिट्टी, उपलब्ध मशीनरी और अगली फसल की जरूरत के अनुसार किया जा सकता है।

फसल अवशेषों के उपयोग के कुछ प्रमुख विकल्प हैं:

  1. खेत में अवशेषों को मिलाना: उपयुक्त कृषि उपकरणों की सहायता से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे समय के साथ जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
  2. मल्चिंग के रूप में उपयोग: कुछ परिस्थितियों में फसल अवशेषों को मिट्टी की सतह पर फैलाकर नमी के संरक्षण और खरपतवार नियंत्रण में मदद ली जा सकती है।
  3. पशुओं के लिए उपयोग: उपयुक्त फसल अवशेषों का उपयोग पशुओं के लिए चारे के रूप में किया जा सकता है। हालांकि, यह फसल और अवशेषों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
  4. जैविक खाद तैयार करना: उचित विधि से फसल अवशेषों को कंपोस्ट में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसका उपयोग खेतों में जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
  5. अन्य उपयोग: स्थानीय उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर फसल अवशेषों का उपयोग विभिन्न कृषि एवं औद्योगिक गतिविधियों में भी किया जा सकता है।
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इस प्रकार उचित तकनीक और संसाधनों के उपयोग से नरवाई को समस्या के बजाय उपयोगी कृषि संसाधन में बदला जा सकता है।

नरवाई जलाने की रोकथाम के लिए प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने हार्वेस्टर संचालकों के साथ ही किसानों से भी अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के स्थान पर उनका उचित प्रबंधन करें।

प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

किसानों को चाहिए कि वे फसल कटाई से पहले ही नरवाई प्रबंधन की योजना तैयार करें। हार्वेस्टर संचालकों से भी यह अपेक्षा की गई है कि वे अपनी मशीनों में निर्धारित स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

यदि कटाई के समय से ही फसल अवशेषों का प्रबंधन किया जाए, तो बाद में खेतों में आग लगाने की आवश्यकता कम की जा सकती है।

इस दिशा में किसानों, हार्वेस्टर संचालकों, कस्टम हायरिंग केंद्रों और कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

नियमों के पालन के साथ किसानों को जागरूक करना भी जरूरी

नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए शासन के दिशा-निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन महत्वपूर्ण है। लेकिन इस समस्या का स्थायी समाधान किसानों को जागरूक करने और उन्हें वैकल्पिक तकनीकों से जोड़ने में भी छिपा है।

कई बार किसानों को फसल अवशेषों के आर्थिक और कृषि संबंधी उपयोग की पूरी जानकारी नहीं होती। यदि उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मशीनों, कंपोस्ट निर्माण और अवशेष प्रबंधन की तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाए, तो वे बेहतर विकल्प अपना सकते हैं।

प्रशासन और कृषि विभाग की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण हो जाती है।

किसानों को समय पर जानकारी, मशीनों की उपलब्धता और तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो नरवाई प्रबंधन को व्यवहार में लागू करना आसान हो सकता है।

साथ ही, हार्वेस्टर संचालकों के लिए SMS की उपलब्धता और उसके सही संचालन को लेकर भी आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपयोगी रहेगा।

नरवाई जलाने पर रोक के लिए कटाई के स्तर से ही प्रबंधन जरूरी

सिवनी जिले में नरवाई प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया कदम कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने हार्वेस्टर संचालकों को मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश देकर फसल कटाई के दौरान ही अवशेषों के उचित प्रबंधन पर जोर दिया है।

कृषि उपज मंडी सिमरिया में आयोजित बैठक में 45 हार्वेस्टर एवं कस्टम हायरिंग केंद्र संचालकों की सहभागिता और नरवाई प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर उनकी सहमति इस दिशा में महत्वपूर्ण है।

हालांकि, इस अभियान की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब हार्वेस्टर संचालक निर्देशों का पालन करें और किसान भी नरवाई जलाने के बजाय उपलब्ध वैकल्पिक तकनीकों को अपनाएं।

मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, प्रदूषण को कम करना और कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करना किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

यदि प्रशासन, कृषि विभाग, हार्वेस्टर संचालक और किसान मिलकर इस दिशा में प्रयास करें, तो सिवनी जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को कम करने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।