सिवनी में स्वास्थ्य सेवाओं पर कलेक्टर सख्त, एएनसी पंजीयन में लापरवाही पर तीन विकासखंडों के बीएमओ को नोटिस के निर्देश

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में गर्भवती महिलाओं और बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिले में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विकासखंडवार समीक्षा की गई। बैठक में गर्भवती महिलाओं के एएनसी पंजीयन, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी, एनीमिया नियंत्रण, बच्चों के टीकाकरण, कुपोषण उपचार, टीबी उन्मूलन और डेंगू-मलेरिया जैसे मौसमी रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया गया।

समीक्षा के दौरान बरघाट, लखनादौन और गोपालगंज विकासखंड में गर्भवती महिलाओं के एएनसी पंजीयन की कम प्रगति सामने आने पर कलेक्टर ने संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिले में कोई भी गर्भवती महिला एएनसी पंजीयन से वंचित नहीं रहनी चाहिए। प्रत्येक गर्भवती महिला की पहचान, समय पर पंजीयन और निर्धारित अंतराल पर स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

बैठक का प्रमुख संदेश यह रहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ केवल योजनाओं और सरकारी सुविधाओं की उपलब्धता से नहीं, बल्कि मैदानी स्तर पर उनकी प्रभावी पहुंच से सुनिश्चित होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारियों को संयुक्त रूप से काम करने और पात्र हितग्राहियों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

एएनसी पंजीयन में कम प्रगति पर तीन विकासखंडों के बीएमओ को नोटिस

जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में गर्भवती महिलाओं के एएनसी यानी एंटीनेटल केयर पंजीयन की विकासखंडवार समीक्षा की गई। एएनसी पंजीयन गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके माध्यम से गर्भवती महिला की पहचान कर उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन, आवश्यक जांच, पोषण संबंधी सलाह और संभावित जोखिमों की निगरानी की जाती है।

समीक्षा में बरघाट, लखनादौन और गोपालगंज विकासखंड में एएनसी पंजीयन की प्रगति कम पाए जाने पर कलेक्टर ने संबंधित बीएमओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि प्रशासन गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और देखभाल के मामले में लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है।

कलेक्टर ने कहा कि कोई भी गर्भवती महिला पंजीयन से छूटनी नहीं चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों को मिलकर काम करना होगा।

डोर-टू-डोर सर्वे से गर्भवती महिलाओं की पहचान

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि दोनों विभागों के संयुक्त दल क्षेत्र का निरीक्षण करें। इसके साथ ही डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से उन महिलाओं को चिन्हांकित किया जाए, जो गर्भवती हैं लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाई हैं।

इस प्रक्रिया में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ये कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र में परिवारों से संपर्क कर गर्भवती महिलाओं की पहचान, पंजीयन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ाव सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।

समय पर पंजीयन होने से गर्भावस्था के दौरान जरूरी जांचों की योजना बनाना आसान होता है। साथ ही महिला के स्वास्थ्य में किसी तरह की समस्या सामने आने पर उसका समय रहते उपचार और आवश्यक परामर्श दिया जा सकता है।

हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर

बैठक में हाई रिस्क श्रेणी की गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन और निगरानी पर भी विशेष जोर दिया गया। गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां सामने आ सकती हैं, जिनमें सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक सावधानी और चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत होती है।

ऐसी महिलाओं की समय पर पहचान करना और नियमित जांच कराना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाकर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके लिए मैदानी अमले को महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी साझा करने, आवश्यक जांच के लिए प्रेरित करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

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हाई रिस्क गर्भावस्था में समय पर चिकित्सकीय सलाह और उपचार उपलब्ध होना जरूरी है। यदि महिला की स्थिति में कोई बदलाव आता है, तो संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को इसकी जानकारी समय पर मिलनी चाहिए। विभागीय समन्वय से इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

एनीमिक गर्भवती महिलाओं के उपचार की समीक्षा

बैठक में एनीमिक यानी खून की कमी से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के चिन्हांकन और उपचार की भी बीएमओवार समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि चिन्हांकित महिलाओं को समय पर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए।

गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती है। खून की कमी होने पर महिला को कमजोरी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, आवश्यक चिकित्सकीय सलाह, आयरन एवं फोलिक एसिड की उपलब्धता और उपचार की निरंतरता महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्यकर्मियों को यह भी देखना होगा कि जिन महिलाओं को उपचार की सलाह दी गई है, वे निर्धारित तरीके से उसका पालन कर रही हैं या नहीं।

महिला बाल विकास विभाग का मैदानी अमला भी पोषण संबंधी जानकारी और जागरूकता के माध्यम से इस कार्य में सहयोग कर सकता है। परिवारों को संतुलित आहार, नियमित जांच और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी देना भी जरूरी है।

बच्चों और महिलाओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण के निर्देश

कलेक्टर ने बैठक में टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए सभी पात्र बच्चों और महिलाओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग का मैदानी अमला आपसी समन्वय से उन बच्चों और महिलाओं की पहचान करे, जिनका टीकाकरण किसी कारण से छूट गया है।

टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब पात्र हितग्राहियों को निर्धारित समय पर टीके लगाए जाएं और छूटे हुए लाभार्थियों को दोबारा टीकाकरण सेवाओं से जोड़ा जाए।

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कभी-कभी जानकारी के अभाव, परिवारों की अनुपलब्धता या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई के कारण टीकाकरण छूट सकता है। ऐसे मामलों में मैदानी कर्मचारियों द्वारा घर-घर संपर्क और नियमित फॉलोअप उपयोगी हो सकता है।

कलेक्टर के निर्देशों के अनुसार, दोनों विभागों को अपनी सूचियों का मिलान कर छूटे हुए बच्चों और महिलाओं की पहचान करनी होगी। इससे टीकाकरण अभियान की वास्तविक प्रगति का आकलन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

एनआरसी में गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने के निर्देश

जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्रों यानी एनआरसी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इन केंद्रों में जरूरतमंद कुपोषित बच्चों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) को निर्देशित किया कि वे गंभीर कुपोषित और उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करें तथा जरूरत के अनुसार उन्हें एनआरसी में भर्ती कराएं।

पोषण पुनर्वास केंद्र उन बच्चों के उपचार और पोषण प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें गंभीर कुपोषण की स्थिति में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे बच्चों को केवल सामान्य पोषण सलाह देना पर्याप्त नहीं हो सकता। चिकित्सकीय जांच, पोषण प्रबंधन और नियमित निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।

उपचार के बाद भी बच्चों की निगरानी जरूरी

कलेक्टर ने केवल एनआरसी में भर्ती कराने पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि उपचार के बाद बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि केंद्र से छुट्टी मिलने के बाद भी बच्चे की पोषण स्थिति पर ध्यान देना जरूरी होता है।

परिवार को बच्चे के भोजन, देखभाल और नियमित स्वास्थ्य जांच के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारी मिलकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार बना रहे।

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इसके लिए आंगनवाड़ी स्तर पर पोषण संबंधी सेवाओं और स्वास्थ्य केंद्रों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। गंभीर कुपोषण की पहचान, उपचार के लिए रेफरल और बाद की निगरानी एक सतत प्रक्रिया के रूप में संचालित होनी चाहिए।

एसएनसीयू और एनआईसीयू में भर्ती बच्चों की स्थिति की समीक्षा

बैठक में विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) और नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती बच्चों की संख्या तथा उपचार की स्थिति की समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि आवश्यकता के अनुसार ही बच्चों को रेफर किया जाए और अनावश्यक रेफरल से बचा जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को समय पर उचित उपचार मिले और स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग जरूरत के अनुसार हो।

नवजात बच्चों की स्थिति कई बार संवेदनशील होती है। ऐसे मामलों में उपचार का निर्णय चिकित्सकीय स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर होना चाहिए।

अनावश्यक रेफरल से परिवारों को अतिरिक्त परेशानी हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, जिस बच्चे को उच्च स्तरीय उपचार की वास्तविक आवश्यकता है, उसे समय पर रेफर करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए रेफरल प्रक्रिया में चिकित्सकीय आकलन और स्वास्थ्य केंद्रों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की स्क्रीनिंग तेज करने के निर्देश

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने स्क्रीनिंग कार्य में तेजी लाने और चिन्हांकित बच्चों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं और विकास में देरी जैसी स्थितियों की समय पर पहचान करना है। शुरुआती स्तर पर समस्या का पता चलने से उपचार और प्रबंधन की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।

स्क्रीनिंग के दौरान जिन बच्चों में किसी स्वास्थ्य समस्या की पहचान होती है, उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए उपयुक्त स्वास्थ्य केंद्र से जोड़ना जरूरी है।

केवल स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है। इसके बाद बच्चे को वास्तव में उपचार मिला या नहीं, इसकी जानकारी भी रखनी होगी। कलेक्टर ने इसी दिशा में चिन्हांकित बच्चों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

टीबी उन्मूलन के लिए हाई रिस्क क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर

बैठक में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने हाई रिस्क समूहों और क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए।

टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसका समय पर पता लगना और पूरा उपचार होना बेहद जरूरी है। यदि मरीज की पहचान देर से होती है या उपचार बीच में छोड़ दिया जाता है, तो बीमारी के प्रसार और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।

हाई रिस्क समूहों में नियमित स्क्रीनिंग और जागरूकता गतिविधियां बीमारी की पहचान में मदद कर सकती हैं। स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ऐसे लोगों तक जांच सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है।

निक्षय मित्र कार्यक्रम को बढ़ावा देने पर जोर

कलेक्टर ने निक्षय मित्र कार्यक्रम को बढ़ावा देने और उपचाररत जरूरतमंद टीबी मरीजों के लिए पोषण बास्केट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

टीबी के उपचार में दवाओं के साथ पोषण और नियमित देखभाल का भी महत्व है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए पोषण संबंधी सहायता उपयोगी हो सकती है।

निक्षय मित्र कार्यक्रम के माध्यम से जरूरतमंद टीबी मरीजों को सामुदायिक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसमें सहयोग करने वाले व्यक्ति, संस्था या संगठन मरीजों की पोषण संबंधी जरूरतों में मदद कर सकते हैं।

जिले में इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए जरूरतमंद मरीजों की पहचान, सहयोग की उपलब्धता और सहायता के नियमित वितरण पर ध्यान देना होगा।

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के निर्देश

मौसमी और वेक्टर जनित बीमारियों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

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इन बीमारियों का प्रसार मच्छरों के माध्यम से होता है। इसलिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना, जलभराव रोकना और प्रभावित क्षेत्रों में समय पर नियंत्रण गतिविधियां चलाना महत्वपूर्ण है।

कलेक्टर ने प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका के समन्वय से लार्वा विनष्टीकरण और फॉगिंग की प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

लार्वा विनष्टीकरण और फॉगिंग पर ध्यान

डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए केवल बीमारी सामने आने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान और उन्हें समाप्त करने पर लगातार काम करना जरूरी है।

घरों और आसपास रखे खुले बर्तनों, टंकियों, कूलर, पुराने टायरों तथा अन्य स्थानों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए नागरिकों को भी पानी जमा न होने देने और आसपास सफाई बनाए रखने की जरूरत है।

नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय से प्रभावित क्षेत्रों में लार्वा नियंत्रण, फॉगिंग और जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। कार्रवाई की प्राथमिकता संबंधित क्षेत्रों से प्राप्त रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति के आधार पर तय की जानी चाहिए।

स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के समन्वय पर प्रशासन का जोर

पूरी बैठक में कलेक्टर का मुख्य जोर स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के बीच बेहतर तालमेल पर रहा। गर्भवती महिलाओं की पहचान से लेकर बच्चों के टीकाकरण, कुपोषण उपचार और पोषण संबंधी निगरानी तक दोनों विभागों की भूमिका एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा जांच, उपचार, टीकाकरण और रोग नियंत्रण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है। वहीं महिला बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल देखभाल और हितग्राहियों से संपर्क का महत्वपूर्ण कार्य करता है।

यदि दोनों विभागों के पास उपलब्ध जानकारी का प्रभावी उपयोग हो, तो पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने में आसानी हो सकती है। इसके लिए नियमित बैठक, संयुक्त निरीक्षण, साझा सूची और मैदानी स्तर पर जवाबदेही तय करना उपयोगी रहेगा।

अब निर्देशों के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों का वास्तविक असर विकासखंड और ग्राम स्तर पर होने वाली कार्रवाई से सामने आएगा। एएनसी पंजीयन में कम प्रगति वाले विकासखंडों में सुधार, छूटी हुई गर्भवती महिलाओं की पहचान, हाई रिस्क गर्भावस्था की निगरानी और टीकाकरण की स्थिति महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

इसी तरह एनआरसी में जरूरतमंद बच्चों की भर्ती, उपचार के बाद उनकी निगरानी, टीबी मरीजों को पोषण सहायता और मौसमी बीमारियों के नियंत्रण की कार्रवाई पर भी ध्यान देना होगा।

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह सहित स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

योजनाओं का लाभ हर पात्र हितग्राही तक पहुंचाना प्राथमिकता

सिवनी में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर प्रशासन की प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग को आपसी समन्वय से काम करने तथा मैदानी स्तर पर सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

बरघाट, लखनादौन और गोपालगंज में एएनसी पंजीयन की कम प्रगति पर संबंधित बीएमओ को नोटिस जारी करने के निर्देश प्रशासन की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, एनीमिया का उपचार, बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण, गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान और टीबी मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने की है। यदि विभागीय समन्वय, नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होती है, तो सिवनी जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिल सकती है।