मानसून में सर्पदंश से रहें सतर्क, झाड़-फूंक में समय न गंवाएं; स्वास्थ्य विभाग ने जारी की अहम एडवाइजरी

मानसून के साथ बढ़ता है सर्पदंश का खतरा

(मनोज राव)

सिवनी (साई)।मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह कई स्वास्थ्य चुनौतियों को भी जन्म देता है। इनमें सर्पदंश यानी सांप के काटने की घटनाएं सबसे गंभीर मानी जाती हैं। लगातार बारिश के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और कई बार घरों, खेतों और मानव बस्तियों के आसपास पहुंच जाते हैं। ऐसे में लोगों के सामने सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है।

इसी संभावित खतरे को देखते हुए सिवनी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि मानसून के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें और किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक या अप्रमाणित उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें।

जिलेभर में चलाया जा रहा जन-जागरूकता अभियान

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज दुबे के निर्देशन में जिलेभर में सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसका सही और समय पर इलाज ही जीवन बचा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों से जानकारी उपलब्ध करा रहा है, ताकि मानसून के दौरान होने वाली संभावित घटनाओं में कमी लाई जा सके।

मानसून में क्यों बढ़ जाती हैं सर्पदंश की घटनाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में जमीन के भीतर पानी भरने और नमी बढ़ने के कारण सांप अपने प्राकृतिक ठिकानों से बाहर निकल आते हैं। वे अक्सर सुरक्षित स्थान की तलाश में घरों, खेतों, लकड़ी के ढेर, झाड़ियों और पशु शेड तक पहुंच जाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और जंगल क्षेत्रों में रहने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।

सर्पदंश बढ़ने के प्रमुख कारण

  • लगातार बारिश से सांपों का बिलों से बाहर निकलना।
  • खेतों और झाड़ियों में अधिक आवाजाही।
  • रात में अंधेरे में बिना रोशनी के बाहर निकलना।
  • जमीन पर सोने की आदत।
  • लकड़ियों और झाड़ियों में बिना सावधानी हाथ डालना।

स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

क्या करें?

✔ रात में घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें।
✔ खेत, बाड़ी और जंगल में जूते और दस्ताने पहनकर काम करें।
✔ जमीन पर सोने के बजाय पलंग या चारपाई का उपयोग करें।
✔ घर के आसपास झाड़ियों और कचरे को साफ रखें।
✔ बच्चों को खुले स्थानों में सावधानी बरतने के लिए जागरूक करें।

क्या न करें?

❌ नंगे पैर बाहर न निकलें।
❌ झाड़ियों और लकड़ियों के ढेर में बिना देखे हाथ न डालें।
❌ सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
❌ सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं।

सर्पदंश होने पर तुरंत क्या करें?

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सही कदम उठाने से रोगी की जान बचाई जा सकती है।

प्राथमिक उपचार के महत्वपूर्ण कदम

  • रोगी को शांत रखें।
  • अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से रोकें।
  • प्रभावित अंग को हृदय के स्तर से नीचे रखें।
  • रोगी को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
  • यदि सुरक्षित हो तो सांप की पहचान के लिए उसकी तस्वीर ली जा सकती है।

ये गलतियां कभी न करें

देश के कई हिस्सों में आज भी सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक, तांत्रिक उपचार और घरेलू उपायों का सहारा लिया जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो जाती है।

स्वास्थ्य विभाग ने इन बातों से बचने की सलाह दी

  • कटे स्थान पर चीरा न लगाएं।
  • जहर निकालने की कोशिश न करें।
  • घाव को जलाएं नहीं।
  • कसकर पट्टी न बांधें।
  • चिकित्सकीय सलाह के बिना कोई दवा, भोजन या पेय पदार्थ न दें।
  • झाड़-फूंक और देसी उपचार में समय बिल्कुल न गंवाएं।

समय पर इलाज क्यों है जरूरी?

चिकित्सकों का कहना है कि सांप की हर प्रजाति विषैली नहीं होती, लेकिन यह पहचानना आम व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। इसलिए हर सर्पदंश की घटना को गंभीरता से लेना चाहिए।

समय पर अस्पताल पहुंचने से:

  • जहर के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • शरीर के अंगों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • मृत्यु का जोखिम काफी कम हो जाता है।
  • मरीज के पूर्ण स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है।

जिले के अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध

सिवनी जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इससे सर्पदंश के मरीजों को तत्काल और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

जिन स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र – आदेगांव, कान्हीवाड़ा, भोमा, मुंगवानी, कुडारी, सुनवारा, कहानी, रुमाल, पलारी, उगली, बेहरई, आष्टा, चमारी, ग्वारी एवं खवासा।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र – छपारा, गोपालगंज, कुरई, धनौरा एवं घंसौर।
  • सिविल अस्पताल – लखनादौन, बरघाट एवं केवलारी।
  • जिला चिकित्सालय – सिवनी।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि सभी संस्थानों को मानसून के दौरान विशेष रूप से तैयार रखा गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें उपचार में देरी और जागरूकता की कमी के कारण होती हैं। कई लोग आज भी अस्पताल पहुंचने के बजाय पारंपरिक उपचार पर भरोसा करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता बढ़ाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि:

  • अधिकांश घटनाएं खेतों और गांवों में होती हैं।
  • समय पर अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाती है।
  • झाड़-फूंक पर विश्वास अभी भी कई स्थानों पर प्रचलित है।
  • प्राथमिक उपचार की सही जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाती।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान सर्पदंश को लेकर घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:

  • हर गांव में प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जाए।
  • स्कूलों और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए।
  • लोगों को वैज्ञानिक और प्रमाणित उपचार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

मानसून के मौसम में सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन थोड़ी सावधानी और समय पर उपचार से अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है। सिवनी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं, झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तुरंत निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचकर निःशुल्क उपचार प्राप्त करें। समय पर उठाया गया एक सही कदम किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकता है।