(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। जिले में संचालित विकास योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जमीनी प्रगति जानने के लिए जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक जनपद पंचायत घंसौर के सभाकक्ष में आयोजित की गई। मंडला लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कृषि, सिंचाई, विद्युत आपूर्ति, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और रेलवे से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में आगामी रबी मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए सिंचाई की उपलब्धता, खाद-बीज वितरण और कृषि कार्यों के लिए बिजली आपूर्ति की तैयारियों की समीक्षा की गई। पेंच व्यपवर्तन परियोजना, संजय सरोवर सहित जिले के विभिन्न छोटे-बड़े बांधों से सिंचाई की संभावनाओं एवं व्यवस्थाओं पर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई।
सांसद श्री कुलस्ते ने पेंच व्यपवर्तन परियोजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही किसानों को खाद एवं बीज प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए ई-विकास प्रणाली के माध्यम से वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई।
बैठक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित नल-जल योजनाओं, ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और गोंदिया-जबलपुर रेलवे मार्ग के डबल लाइन प्रस्ताव को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक का मुख्य केंद्र जिले के विकास कार्यों की प्रगति के साथ-साथ आम नागरिकों और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं को प्रभावी बनाना रहा।
घंसौर में आयोजित हुई जिला स्तरीय दिशा समिति की बैठक
जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक जनपद पंचायत घंसौर के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने की। इसमें जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समिति के सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक की शुरुआत पूर्व में आयोजित बैठक के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा के साथ हुई। इस दौरान पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति की जानकारी प्राप्त की गई। संबंधित विभागों से यह जाना गया कि पूर्व में निर्धारित कार्यों और निर्देशों पर कितनी प्रगति हुई है।
दिशा समिति की बैठकों का उद्देश्य केंद्र एवं राज्य शासन की विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना, उनके क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं को सामने लाना और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना है।
घंसौर में हुई इस बैठक में भी ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। विशेष रूप से आगामी रबी मौसम में किसानों को होने वाली संभावित जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि एवं सिंचाई संबंधी तैयारियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
रबी सीजन से पहले सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा, पेंच व्यपवर्तन परियोजना पर विशेष जोर
बैठक में आगामी रबी मौसम के लिए जिले में सिंचाई की उपलब्धता और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने पेंच व्यपवर्तन परियोजना, संजय सरोवर तथा जिले के अन्य छोटे-बड़े बांधों से मिलने वाले सिंचाई जल की स्थिति के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
रबी मौसम में गेहूं, चना, मसूर और अन्य फसलों की खेती के लिए सिंचाई की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किसानों की कृषि गतिविधियों और उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित करता है।
सांसद ने पेंच व्यपवर्तन परियोजना के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्यपालन यंत्री को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं, जिससे सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य की पूर्ति हो सके।
जिले में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
पेंच व्यपवर्तन परियोजना के कार्यों की समयबद्ध पूर्णता जिले के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना की प्रगति और उससे मिलने वाली सिंचाई सुविधाओं का प्रभाव संबंधित क्षेत्रों के किसानों की खेती की योजना पर पड़ सकता है।
खाद-बीज वितरण में किसानों को परेशानी न हो, ई-विकास प्रणाली की समीक्षा
रबी सीजन के दौरान किसानों की प्रमुख आवश्यकताओं में खाद और उन्नत बीज की उपलब्धता शामिल है। बैठक में इस विषय को भी प्रमुखता से उठाया गया।
सांसद श्री कुलस्ते ने अधिकारियों से खाद एवं बीज की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक खाद और बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएं।
इसके साथ ही ई-विकास प्रणाली के माध्यम से खाद-बीज वितरण की व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इस प्रणाली के संचालन में किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कृषि सीजन में खाद और बीज की उपलब्धता में देरी होने से किसानों की बुवाई और फसल प्रबंधन प्रभावित हो सकता है। इसलिए वितरण व्यवस्था को समय पर और व्यवस्थित बनाए रखना आवश्यक है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि संबंधित विभाग किसानों की जरूरतों के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कृषि सामग्री प्राप्त करने में परेशानी न हो।
कम पानी में तैयार होने वाली रबी फसलों को प्रोत्साहित करने के निर्देश
सिंचाई के लिए उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से सांसद ने कम पानी में होने वाली रबी फसलों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को ऐसी फसलों के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, जिनमें अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है।
कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन लगातार महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के संसाधन सीमित हैं, वहां फसल चयन और पानी के उपयोग की उचित योजना किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को उनकी मिट्टी, स्थानीय जलवायु, उपलब्ध सिंचाई साधनों और बाजार की मांग के अनुसार जानकारी देना जरूरी है।
बैठक में कृषि विभाग के मैदानी अमले की भूमिका पर भी जोर दिया गया, ताकि योजनाओं और कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी को केवल कार्यालयों तक सीमित न रखकर गांवों में किसानों तक पहुंचाया जा सके।
नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने पर जोर
बैठक में नरवाई प्रबंधन को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। सांसद ने किसानों को फसल अवशेष यानी नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों को जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता, पर्यावरण और आसपास के क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त खेतों में आग फैलने की आशंका भी बनी रहती है।
इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को नरवाई प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
सांसद ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नरवाई प्रबंधन के बेहतर तरीकों के संबंध में गांव-गांव तक जागरूकता पहुंचाई जाए। इसके साथ ही किसानों को उन्नत कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उनके उपयोग के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।
कृषि विभाग के मैदानी अमले को इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए, ताकि किसान फसल अवशेषों का उपयोगी प्रबंधन कर सकें।
जल जीवन मिशन की नल-जल योजनाओं की प्रगति जांची
बैठक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले में संचालित समूह एवं एकल नल-जल योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों से योजनाओं के तहत चल रहे निर्माण कार्यों की स्थिति की जानकारी ली गई। सांसद श्री कुलस्ते ने शेष कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिन नल-जल योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, उनके माध्यम से ग्रामीणों को नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध होना सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में घरों तक नल से पानी पहुंचाना केवल निर्माण कार्य पूरा करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए जल स्रोत की उपलब्धता, पाइपलाइन की स्थिति, नियमित संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।
इस दृष्टि से बैठक में पूर्ण हो चुकी योजनाओं के नियमित संचालन पर दिया गया जोर महत्वपूर्ण है। ग्रामीण परिवारों को नियमित पेयजल सुविधा उपलब्ध होने से महिलाओं और अन्य परिवार सदस्यों को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम में राहत मिल सकती है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं की भी हुई समीक्षा
दिशा समिति की बैठक में जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की गई।
सांसद ने आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
विशेष रूप से दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और जरूरत के समय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसे विषय आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े हुए हैं।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग को इन विषयों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
गोंदिया-जबलपुर रेलवे मार्ग की डबल लाइन पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
बैठक में रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में गोंदिया-जबलपुर रेलवे मार्ग के डबल लाइन प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रस्तावित रेलवे यार्ड के लिए पर्याप्त खाली स्थान वाले स्थान का चयन करने पर जोर दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि रेलवे यार्ड और अन्य रेलवे संबंधी कार्यों के कारण स्थानीय नागरिकों के आवागमन एवं दैनिक सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
रेलवे लाइन का दोहरीकरण रेल परिचालन क्षमता और परिवहन व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है। हालांकि किसी भी प्रस्तावित रेलवे परियोजना की वास्तविक प्रगति उसके तकनीकी सर्वेक्षण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, भूमि संबंधी आवश्यकताओं, वित्तीय स्वीकृति और रेलवे की प्रशासनिक मंजूरी पर निर्भर करती है।
ऐसे में प्रस्तावित डबल लाइन के संबंध में स्थानीय आवश्यकताओं को शुरुआती योजना में शामिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेलवे यार्ड के लिए स्थान का चयन करते समय आसपास की आबादी, सड़कों, स्थानीय आवागमन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने पर दिया गया जोर इस चर्चा का महत्वपूर्ण पहलू रहा।
किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए क्या मायने रखते हैं बैठक के निर्देश?
घंसौर में आयोजित दिशा समिति की बैठक में लिए गए निर्देशों का संबंध जिले के अलग-अलग वर्गों से है।
किसानों के लिए सिंचाई, खाद-बीज और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था आगामी रबी सीजन की तैयारियों से जुड़ी है। वहीं जल जीवन मिशन की योजनाएं ग्रामीण परिवारों की पेयजल जरूरतों से संबंधित हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी प्रकार रेलवे डबल लाइन प्रस्ताव पर चर्चा क्षेत्रीय परिवहन और स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं से जुड़ी हुई है।
इन सभी विषयों में एक समान बात यह है कि योजनाओं की सफलता केवल समीक्षा बैठकों या निर्देशों से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए विभागीय स्तर पर नियमित निगरानी, समयबद्ध कार्यवाही और जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई देना भी जरूरी है।
दिशा समिति की बैठक में पूर्व बैठक के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा किए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि पहले दिए गए निर्देशों की प्रगति की समीक्षा को बैठक का हिस्सा बनाया गया।
आगामी समय में इन निर्देशों के क्रियान्वयन और विभागवार प्रगति से यह आकलन किया जा सकेगा कि बैठक में उठाए गए विषयों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई है।
बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
जनपद पंचायत घंसौर के सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते के अलावा विधायक श्री दिनेश राय, विधायक श्री रजनीश सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती डेहरिया उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह भी बैठक में शामिल हुईं।
बैठक में जिले की सभी जनपद पंचायतों एवं नगरीय निकायों के अध्यक्ष, समिति के सदस्य और संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में विकास योजनाओं की प्रगति और संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान विभागीय अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।
योजनाओं की समीक्षा के साथ जमीनी क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
सिवनी जिले के घंसौर में आयोजित जिला स्तरीय दिशा समिति की बैठक में कृषि, सिंचाई, पेयजल, स्वास्थ्य और रेलवे से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने आगामी रबी मौसम को देखते हुए किसानों के लिए सिंचाई, खाद-बीज और विद्युत आपूर्ति की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया। पेंच व्यपवर्तन परियोजना के कार्यों में तेजी लाने, कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने और नरवाई प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए।
इसके साथ ही जल जीवन मिशन की अधूरी योजनाओं को गुणवत्ता के साथ पूरा करने, पूर्ण योजनाओं से नियमित पेयजल उपलब्ध कराने और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
गोंदिया-जबलपुर रेलवे मार्ग के डबल लाइन प्रस्ताव को लेकर स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने और रेलवे यार्ड के लिए उपयुक्त स्थान चयनित करने के निर्देश भी बैठक के प्रमुख विषय रहे।
अब इन सभी निर्देशों का वास्तविक महत्व उनके जमीनी क्रियान्वयन से तय होगा। किसानों को समय पर खाद-बीज और सिंचाई सुविधा, ग्रामीणों को नियमित पेयजल तथा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। विकास योजनाओं की नियमित निगरानी और विभागीय जवाबदेही से ही बैठक में निर्धारित लक्ष्यों को धरातल पर उतारा जा सकेगा।