सिवनी की नवागत कलेक्टर अंजू अरुण कुमार का घंसौर दौरा, खेत में टमाटर-मिर्च की खेती देखी, आंगनवाड़ी और कन्या आश्रम की व्यवस्थाएं भी जांचीं

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले की नवागत कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की व्यवस्थाओं और शासकीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का जायजा लेना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में उन्होंने पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी के साथ घंसौर विकासखंड के ग्राम खैरी एवं छीतापार का दौरा कर कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

दौरे के दौरान कलेक्टर ने ग्राम खैरी में कृषक श्री विकास पटेल के खेत पहुंचकर टमाटर एवं मिर्च की फसलों का अवलोकन किया। उन्होंने किसान से खेती की लागत, उत्पादन, बाजार में मिलने वाले भाव और संभावित लाभ के संबंध में विस्तार से चर्चा की। वहीं ग्राम छीतापार में आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों के पोषण, उपस्थिति और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

इसके साथ ही उन्होंने छीतापार स्थित कन्या आश्रम पहुंचकर छात्राओं की पढ़ाई, आवास, भोजन, पेयजल और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने, बच्चों के पोषण पर ध्यान देने और छात्राओं के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर के इस ग्रामीण भ्रमण में कृषि को लाभकारी बनाने के प्रयासों के साथ बच्चों के पोषण और बालिकाओं की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

खैरी गांव में किसान विकास पटेल के खेत पहुंचीं कलेक्टर, टमाटर-मिर्च की खेती का लिया जायजा

घंसौर विकासखंड के ग्राम खैरी में नवागत कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने कृषक श्री विकास पटेल के खेत का निरीक्षण किया। किसान द्वारा अपने खेत में उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत टमाटर एवं मिर्च का उत्पादन किया जा रहा है।

कलेक्टर ने खेत में लगी दोनों फसलों का अवलोकन करते हुए उनकी स्थिति और उत्पादन से संबंधित जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने किसान से खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बातचीत की।

उन्होंने विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया कि टमाटर एवं मिर्च की खेती में कितनी लागत आती है, उत्पादन कितना प्राप्त होता है तथा बाजार में फसल बेचने पर किस प्रकार के भाव मिलते हैं।

किसान विकास पटेल ने उद्यानिकी फसलों के उत्पादन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और खेती के दौरान आने वाली परिस्थितियों एवं व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी।

कलेक्टर ने किसान द्वारा पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया।

पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों से बढ़ सकते हैं आय के अवसर

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने कहा कि किसान यदि पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को भी अपनाते हैं तो उनके लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित हो सकते हैं।

टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियों की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकती है। हालांकि इन फसलों के उत्पादन में मौसम, सिंचाई, बीज, खाद, कीट नियंत्रण, श्रम और बाजार में मिलने वाले भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उद्यानिकी फसलों में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक खेती पद्धतियों, उन्नत बीजों, संतुलित पोषण प्रबंधन और समय पर पौध संरक्षण संबंधी उपायों की जानकारी जरूरी होती है।

किसानों को केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि फसल की लागत और बाजार में बिक्री की संभावनाओं को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनानी चाहिए।

कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषक श्री पटेल को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पात्रतानुसार विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के साथ समय-समय पर आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए किसानों तक विभागीय योजनाओं और तकनीकी जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण है। कई किसान पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन, फल उत्पादन और अन्य उद्यानिकी गतिविधियों को अपनाने में रुचि रखते हैं, लेकिन उन्हें उन्नत तकनीक, बाजार प्रबंधन और उपलब्ध शासकीय सहायता की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।

ऐसे में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मैदानी अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

खैरी में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने इसी पहलू पर ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को किसान को आवश्यक सहयोग देने के निर्देश दिए।

उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहन मिलने से किसानों को फसल विविधीकरण का अवसर मिल सकता है। इससे पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नई कृषि गतिविधियां अपनाने की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।

हालांकि किसी भी फसल की लाभप्रदता का निर्धारण उत्पादन लागत, उपज की गुणवत्ता, बाजार की मांग और बिक्री के समय मिलने वाले भाव से होता है। इसलिए किसानों को खेती संबंधी निर्णय लेते समय इन सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।

छीतापार आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचीं कलेक्टर, बच्चों से किया सहज संवाद

खैरी में कृषि गतिविधियों का निरीक्षण करने के बाद नवागत कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी के साथ घंसौर विकासखंड के ग्राम छीतापार स्थित आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया।

आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचने पर बच्चों ने तिलक लगाकर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक का आत्मीयता से स्वागत किया।

कलेक्टर ने बच्चों के साथ सहजता से बातचीत की और प्रत्येक बच्चे से उसकी आयु, आंगनवाड़ी केंद्र में उपस्थिति तथा यहां मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने बच्चों से यह भी जाना कि उन्हें केंद्र में क्या-क्या गतिविधियां कराई जाती हैं और पोषण आहार किस प्रकार उपलब्ध कराया जाता है।

आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की नियमित उपस्थिति और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति जानने के साथ कलेक्टर ने पोषण आहार वितरण की व्यवस्था का भी जायजा लिया।

उन्होंने पोषण आहार की गुणवत्ता और नियमितता के संबंध में जानकारी लेते हुए संबंधित कार्यकर्ताओं से केंद्र की गतिविधियों के बारे में चर्चा की।

बच्चों के पोषण आहार की गुणवत्ता और नियमितता पर विशेष ध्यान

आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका बच्चों के प्रारंभिक पोषण और विकास में महत्वपूर्ण होती है। यहां बच्चों को पूरक पोषण आहार के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का लाभ दिया जाता है।

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित पोषण, नियमित उपस्थिति और उम्र के अनुरूप गतिविधियां आवश्यक मानी जाती हैं।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बच्चों को दिए जा रहे पोषण आहार की वितरण व्यवस्था, उसकी गुणवत्ता और नियमितता के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से केंद्र में संचालित गतिविधियों और बच्चों की उपस्थिति के बारे में भी चर्चा की।

कलेक्टर ने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से भी संवाद किया। उन्होंने महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराए जा रहे पोषण आहार का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को दूध पिलाने वाली माताओं के लिए उचित पोषण का विशेष महत्व होता है। इस दौरान पोषण संबंधी जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण रहती है।

कलेक्टर ने संबंधित कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं का नियमित रूप से ध्यान रखा जाए।

स्नेह परिधान अभियान के तहत बच्चों को मिली नई ड्रेस

छीतापार आंगनवाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान स्नेह परिधान अभियान के अंतर्गत बच्चों को ड्रेस का वितरण भी किया गया।

नई ड्रेस मिलने पर बच्चों में उत्साह दिखाई दिया। इस अवसर पर कलेक्टर ने बच्चों को नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र आने और वहां आयोजित पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

बच्चों के लिए ड्रेस जैसी सुविधाएं उनके केंद्र से जुड़ाव और सामूहिक गतिविधियों में सहभागिता को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए स्वच्छ वातावरण, नियमित पोषण आहार, खेल आधारित गतिविधियां और प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इस दृष्टि से स्नेह परिधान अभियान के तहत ड्रेस वितरण के साथ-साथ केंद्र की अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा भी निरीक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

कन्या आश्रम छीतापार में छात्राओं से पढ़ाई को लेकर की चर्चा

ग्राम छीतापार के दौरे के दौरान कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने कन्या आश्रम का भी निरीक्षण किया।

उन्होंने आश्रम में निवासरत छात्राओं से सहज संवाद कर उनकी पढ़ाई, पाठ्यक्रम और आश्रम में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

कलेक्टर ने छात्राओं से उनके विषयों और पढ़ाई की प्रगति को लेकर बातचीत की। उन्होंने विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी शैक्षणिक समझ एवं तैयारी को जानने का प्रयास किया।

छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक कलेक्टर के प्रश्नों के उत्तर दिए।

इस दौरान कलेक्टर ने छात्राओं को नियमित अध्ययन करने के साथ शिक्षा के अलावा अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बालिकाओं के लिए भविष्य में आगे बढ़ने के अनेक अवसर विकसित हो सकते हैं। इसलिए पढ़ाई के प्रति नियमितता, अनुशासन और आत्मविश्वास बनाए रखना जरूरी है।

छात्राओं के भोजन, पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था का लिया जायजा

कन्या आश्रम के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्राओं के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त की।

उन्होंने आश्रम में आवास, भोजन, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर ने छात्राओं से बातचीत कर भोजन की गुणवत्ता एवं नियमितता के संबंध में जानकारी ली। इसके साथ ही आश्रम प्रबंधन से छात्राओं की दैनिक दिनचर्या, अध्ययन व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में चर्चा की।

आवासीय शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण, पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल और पढ़ाई के लिए अनुकूल व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।

छात्राओं की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और दैनिक आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी संबंधित प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए और आश्रम में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

उन्होंने आश्रम की सुविधाओं को छात्राओं की जरूरतों के अनुरूप बनाए रखने पर जोर दिया।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी ने भी छात्राओं से किया संवाद

इस निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी भी कलेक्टर के साथ मौजूद रहे।

उन्होंने कन्या आश्रम में निवासरत छात्राओं से संवाद कर उनकी पढ़ाई एवं अन्य गतिविधियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

पुलिस अधीक्षक ने छात्राओं को आगे बढ़ने और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की संयुक्त उपस्थिति में छात्राओं को अपनी पढ़ाई और आश्रम से संबंधित विषयों पर बातचीत करने का अवसर मिला।

ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण से सामने आती हैं जमीनी जरूरतें

किसानों के खेत, आंगनवाड़ी केंद्र और कन्या आश्रम का निरीक्षण प्रशासन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

कृषि क्षेत्र में किसान की लागत, उत्पादन और बाजार भाव की जानकारी प्राप्त करने से खेती की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने में मदद मिलती है।

इसी प्रकार आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार की गुणवत्ता और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा से बाल विकास एवं पोषण संबंधी व्यवस्थाओं की स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।

कन्या आश्रम में छात्राओं से सीधे बातचीत करने से उनकी शैक्षणिक जरूरतों और आवासीय सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त होती है।

इन तीनों क्षेत्रों का संबंध ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं से है।

  • कृषि: किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को प्रोत्साहित करने के अवसर।
  • पोषण: बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतें।
  • शिक्षा: ग्रामीण बालिकाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना।

इन व्यवस्थाओं में सुधार के लिए केवल निरीक्षण ही नहीं, बल्कि समय-समय पर विभागीय निगरानी और दिए गए निर्देशों का पालन भी आवश्यक है।

प्रशासन के सामने योजनाओं को प्रभावी बनाने की चुनौती

सिवनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, पोषण और शिक्षा से संबंधित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

खैरी में किसान को उद्यानिकी खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं छीतापार के आंगनवाड़ी केंद्र में पोषण आहार और बच्चों की सुविधाओं की समीक्षा की गई।

कन्या आश्रम में छात्राओं की पढ़ाई और मूलभूत व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया गया।

इन निर्देशों का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब संबंधित विभाग नियमित रूप से इन व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे और आवश्यक सुधारों को समय पर पूरा करेंगे।

किसानों को तकनीकी जानकारी, आंगनवाड़ी केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण पोषण और आश्रमों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

खेती से लेकर शिक्षा और पोषण तक व्यवस्थाओं पर कलेक्टर की नजर

नवागत कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार का घंसौर विकासखंड के ग्राम खैरी एवं छीतापार का दौरा कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

खैरी में उन्होंने किसान विकास पटेल के खेत में टमाटर एवं मिर्च की खेती का अवलोकन कर उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करने और किसानों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

छीतापार में आंगनवाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान बच्चों के पोषण, उपस्थिति और स्नेह परिधान अभियान के तहत ड्रेस वितरण की जानकारी ली। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से भी संवाद किया।

वहीं कन्या आश्रम में छात्राओं की पढ़ाई, भोजन, पेयजल, आवास और स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लेते हुए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

कलेक्टर के इस दौरे में ग्रामीण विकास के तीन महत्वपूर्ण आधारों खेती, पोषण और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया। अब इन निरीक्षणों के दौरान दिए गए निर्देशों का विभागीय स्तर पर कितना प्रभावी पालन होता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।

किसानों को आधुनिक खेती के अवसर, बच्चों को बेहतर पोषण और बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना ही ऐसे प्रशासनिक प्रयासों की वास्तविक सफलता होगी।