(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें पूर्व डीजीपी एम.डब्ल्यू. अंसारी ने कहा कि इसे किसी भी समुदाय पर जबरन नहीं थोपा जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में इसका उल्लेख जरूर है, लेकिन यह बाध्यकारी प्रावधान नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों की सहमति जरूरी है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है
यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानून है जो सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्रदान करता है। इसका उद्देश्य यह है कि सभी नागरिकों को एक समान अधिकार और दायित्व प्रदान किए जाएं।
हालांकि इसके प्रस्तावित स्वरूप पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कानून मुस्लिम समाज के अधिकारों का हनन करता है, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए एक समान अधिकार प्रदान करता है।
पूर्व डीजीपी का बयान
पूर्व डीजीपी एम.डब्ल्यू. अंसारी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए एक समान अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसके प्रस्तावित स्वरूप पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों की सहमति जरूरी है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह कानून मुस्लिम समाज के अधिकारों का हनन करता है।
Uniform Civil Code के प्रस्तावित स्वरूप पर आपत्ति
यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रस्तावित स्वरूप पर कई आपत्तियां उठाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कानून मुस्लिम समाज के अधिकारों का हनन करता है, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए एक समान अधिकार प्रदान करता है।
इसके अलावा मुस्लिम समाज के नेताओं ने कहा कि यह कानून उनके अधिकारों का हनन करता है। उन्होंने कहा कि वे इस कानून का विरोध करेंगे। इसके अलावा वे संविधान और कानून के दायरे में रहकर सरकार तक बात पहुंचाएंगे।
आगे की रणनीति
यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रस्तावित स्वरूप पर आपत्ति जताने वाले लोगों ने कहा कि वे इस कानून का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि वे संविधान और कानून के दायरे में रहकर सरकार तक बात पहुंचाएंगे।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि वे जिला स्तर पर बैठकें और जनजागरण करेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।

मौसम विभाग पर जमकर पकड़, लगभग दो दशकों से मौसम का सटीक पूर्वानुमान जारी करने के लिए पहचाने जाते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय महेश रावलानी वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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