(स्पेशल ब्यूरो)
भोपाल (साई)।मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और सिवनी के पूर्व पुलिस अधीक्षक रहे सुनील मेहता द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किए जाने की खबर ने पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। वर्तमान में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में डीसीपी जोन-4 के पद पर पदस्थ सुनील मेहता ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नौकरी छोड़ने की इच्छा जताई है।
हालांकि उनका वीआरएस आवेदन अभी पुलिस मुख्यालय के विचाराधीन है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में फिलहाल वे अपने पद पर कार्यरत हैं।
अचानक लिए गए फैसले ने बढ़ाई उत्सुकता
मध्य प्रदेश पुलिस के अनुभवी अधिकारियों में गिने जाने वाले सुनील मेहता का यह निर्णय कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक माना जा रहा है। इसकी एक वजह यह भी है कि मई 2026 में ही उन्हें इंदौर जोन-4 के डीसीपी पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा और संवेदनशील शहर माना जाता है। यहां कानून व्यवस्था और प्रशासनिक चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में एक वरिष्ठ अधिकारी का कुछ ही समय बाद वीआरएस के लिए आवेदन करना चर्चा का विषय बन गया है।
पारिवारिक जिम्मेदारियों का दिया हवाला
मीडिया से बातचीत में सुनील मेहता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय किया है।
उनका कहना है कि लंबे समय तक प्रशासनिक सेवाओं में रहने के बाद अब वे अपने परिवार को अधिक समय देना चाहते हैं और पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
हालांकि उन्होंने अपने निर्णय के पीछे किसी अन्य कारण का उल्लेख नहीं किया है।
कौन हैं आईपीएस सुनील मेहता?
सुनील मेहता मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के अनुभवी अधिकारियों में शामिल हैं। उनका चयन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से राज्य पुलिस सेवा में हुआ था।
उनका प्रशासनिक सफर
- 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी।
- बाद में पदोन्नति के माध्यम से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए।
- वर्ष 2016 बैच के प्रमोटी आईपीएस अधिकारी बने।
- इंदौर में एडिशनल एसपी (ट्रैफिक) के रूप में सेवाएं दीं।
- सिवनी जिले में पुलिस अधीक्षक रहे।
- इंदौर ग्रामीण के एसपी पद पर कार्य किया।
- मई 2026 में इंदौर जोन-4 के डीसीपी नियुक्त हुए।
उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और जमीनी कार्यशैली के कारण वे प्रदेश पुलिस के महत्वपूर्ण अधिकारियों में गिने जाते हैं।
सिवनी में कार्यकाल के दौरान रहे चर्चा में
सिवनी जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में सुनील मेहता का कार्यकाल काफी चर्चित रहा। कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था में सुधार के लिए उनके कई प्रयासों की सराहना हुई।
हालांकि अक्टूबर 2025 में सामने आए चर्चित सिवनी हवाला प्रकरण के दौरान भी उनका नाम चर्चाओं में रहा।
क्या था सिवनी हवाला कांड?
इस मामले में आरोप लगे थे कि कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा कटनी के एक हवाला कारोबारी से कथित रूप से 1.45 करोड़ रुपये की लूट की गई थी।
इस प्रकरण में नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी और मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना था।
हालांकि इस मामले में सुनील मेहता के खिलाफ किसी प्रकार की प्रत्यक्ष कार्रवाई या आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
विशिष्ट सेवा पदक से हो चुके हैं सम्मानित
सुनील मेहता को वर्ष 2023 में उत्कृष्ट और विशिष्ट पुलिस सेवाओं के लिए इंडियन पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किया गया था।
पुलिस विभाग में यह सम्मान उन अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक उल्लेखनीय और अनुकरणीय सेवाएं प्रदान की हों।
उनकी प्रशासनिक क्षमता और अनुशासन के कारण वे पुलिस महकमे में सम्मानित अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं।
क्या तुरंत नौकरी छोड़ देंगे?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी द्वारा दिया गया वीआरएस आवेदन तत्काल प्रभाव से स्वीकार नहीं माना जाता।
इसके लिए एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करना होता है।
वीआरएस प्रक्रिया में शामिल प्रमुख चरण
- संबंधित विभाग द्वारा आवेदन की जांच।
- राज्य शासन की अनुशंसा।
- आवश्यक प्रशासनिक अनुमोदन।
- अंतिम आदेश जारी होना।
जब तक यह पूरी प्रक्रिया संपन्न नहीं होती, तब तक अधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं।
इसलिए फिलहाल सुनील मेहता के नौकरी छोड़ने की औपचारिक स्थिति नहीं बनी है।
पुलिस महकमे में चर्चा का विषय क्यों बना मामला?
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का सेवा अवधि पूरी होने से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का फैसला सामान्य घटना नहीं माना जाता।
ऐसे निर्णय कई स्तरों पर प्रभाव डालते हैं।
संभावित प्रभाव
- अनुभवी अधिकारियों की कमी महसूस हो सकती है।
- प्रशासनिक फेरबदल की संभावना बढ़ सकती है।
- नए अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
- पुलिस व्यवस्था में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
क्या प्रदेश पुलिस में होगा बड़ा प्रशासनिक बदलाव?
यदि सुनील मेहता का वीआरएस आवेदन मंजूर होता है तो मध्य प्रदेश पुलिस में एक महत्वपूर्ण पद रिक्त हो जाएगा। इसके बाद पुलिस मुख्यालय को नई पदस्थापनाओं और प्रशासनिक पुनर्संतुलन पर विचार करना पड़ सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में कई वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। इसलिए इस घटनाक्रम को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासनिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पूर्व अधिकारियों और प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण पदों पर काम करने वाले अधिकारी कई बार व्यक्तिगत कारणों, स्वास्थ्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों और निजी जीवन को अधिक समय देने के लिए वीआरएस का विकल्प चुनते हैं।
ऐसे निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत होते हैं, लेकिन उनका प्रभाव विभागीय कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अनुभवी अधिकारियों की कार्यशैली, संकट प्रबंधन क्षमता और प्रशासनिक अनुभव को तुरंत प्रतिस्थापित करना आसान नहीं होता।
फिलहाल मुख्यालय के फैसले पर टिकी निगाहें
सुनील मेहता का आवेदन फिलहाल पुलिस मुख्यालय में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा। आवेदन मंजूर होने के बाद ही उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रभावी मानी जाएगी।
इसी कारण प्रदेश के पुलिस और प्रशासनिक महकमे की नजरें अब मुख्यालय के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।
सिवनी के पूर्व एसपी और वर्तमान में इंदौर जोन-4 के डीसीपी सुनील मेहता द्वारा वीआरएस के लिए आवेदन देना मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन की एक बड़ी खबर बनकर सामने आया है। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण बताए हैं, जबकि उनका आवेदन अभी अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा में है। यदि उनका वीआरएस स्वीकार होता है तो यह प्रदेश पुलिस में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस मुख्यालय के फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।

लगभग 16 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो के रूप में लगभग 12 सालों से कार्यरत हैं.
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