(विजय सिंह राजपूत)
इंदौर (साई)।मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने राज्य सेवा परीक्षा और राज्य वन सेवा प्री परीक्षा 2026 का बहुप्रतीक्षित रिजल्ट जारी कर दिया है। शुक्रवार देर शाम जारी हुए इस परिणाम में आयोग ने एक बार फिर 87-13 फीसदी फॉर्मूले को लागू करते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है। रिजल्ट जारी होने के साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उम्मीदवार अपनी मूल कैटेगरी में ही बने रहेंगे और चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में इंटरचेंज की अनुमति नहीं होगी।
राज्य सेवा परीक्षा में 156 पदों के लिए कुल 3,775 उम्मीदवारों को मेंस परीक्षा के लिए चयनित किया गया है। वहीं राज्य वन सेवा परीक्षा में 36 पदों के लिए 783 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। दोनों परीक्षाओं की मुख्य परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
इस बार का रिजल्ट केवल चयन सूची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 87-13 फीसदी आरक्षण फॉर्मूले और अलग-अलग भर्ती एजेंसियों की नीतियों को लेकर एक नई बहस भी शुरू हो गई है।
राज्य सेवा परीक्षा में कितने उम्मीदवार हुए चयनित
एमपीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2026 के तहत कुल 156 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इनमें से 87 फीसदी कैटेगरी के अंतर्गत 140 पद रखे गए हैं, जबकि 13 फीसदी कैटेगरी में 16 पद शामिल किए गए हैं।
आयोग ने 87 फीसदी कैटेगरी के लिए कुल 3,014 उम्मीदवारों को मेंस परीक्षा के लिए चयनित किया है। वहीं 13 फीसदी कैटेगरी के 16 पदों के लिए 731 उम्मीदवारों को चयन सूची में जगह मिली है।
कुल मिलाकर 3,775 अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया है।
पदों का वर्गवार विवरण
राज्य सेवा परीक्षा के 156 पदों में:
- अनारक्षित वर्ग – 41 पद
- अनुसूचित जाति (SC) – 20 पद
- अनुसूचित जनजाति (ST) – 33 पद
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) – 42 पद
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 20 पद
इसके अलावा दिव्यांगजन कोटे के लिए भी 6 पद आरक्षित किए गए हैं।
राज्य वन सेवा परीक्षा में क्या रही स्थिति
राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कुल 36 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें:
- 30 पद वन क्षेत्रपाल के
- 6 पद सहायक वन संरक्षक के
सहायक वन संरक्षक के 6 पदों में से 5 पद 87 फीसदी कैटेगरी और 1 पद 13 फीसदी कैटेगरी के अंतर्गत रखा गया है।
वन सेवा परीक्षा में 87 फीसदी कैटेगरी के अंतर्गत 741 उम्मीदवारों को चयनित किया गया है। वहीं 13 फीसदी कैटेगरी के एक पद के लिए 42 उम्मीदवारों ने मेंस परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया है।
इस प्रकार कुल 783 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए हैं।
क्या है 87-13 फीसदी फॉर्मूला
मध्य प्रदेश में आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ वर्षों से 87-13 फीसदी फॉर्मूला लगातार चर्चा में रहा है।
इस फॉर्मूले के तहत:
- 87 फीसदी पद नियमित आरक्षण व्यवस्था के अनुसार भरे जाते हैं
- 13 फीसदी पद अलग श्रेणी के अंतर्गत रखे जाते हैं
यह व्यवस्था राज्य में आरक्षण से जुड़े न्यायिक मामलों और प्रशासनिक निर्णयों के बाद लागू की गई थी।
हालांकि इस फॉर्मूले को लेकर समय-समय पर विवाद और कानूनी बहस भी सामने आती रही है।
MPPSC ने रिजल्ट में क्या स्पष्ट किया
एमपीपीएससी ने इस बार भी अपने रिजल्ट नोटिफिकेशन में साफ शब्दों में कहा है कि उम्मीदवार अपनी मूल कैटेगरी में ही बने रहेंगे।
आयोग के अनुसार:
- 87 फीसदी कैटेगरी का उम्मीदवार उसी में रहेगा
- 13 फीसदी कैटेगरी का उम्मीदवार उसी श्रेणी में रहेगा
- किसी प्रकार का इंटरचेंज स्वीकार नहीं होगा
- चयन प्रक्रिया के हर चरण में यही नियम लागू रहेगा
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि प्री परीक्षा, मेंस, इंटरव्यू और अंतिम चयन तक यही व्यवस्था प्रभावी रहेगी।
साथ ही सभी चयनित उम्मीदवारों से इस संबंध में शपथपत्र भी लिया जाएगा।
ESB और MPPSC की अलग नीतियों से बढ़ा विवाद
यह मुद्दा इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि हाल ही में कर्मचारी चयन मंडल (ESB) की एसआई-सूबेदार भर्ती परीक्षा में अलग नीति देखने को मिली थी।
बताया गया कि ESB ने मेरिट के आधार पर 87 फीसदी कैटेगरी के 60 से अधिक उम्मीदवारों को 13 फीसदी कैटेगरी में शिफ्ट कर दिया था।
ईएसबी का तर्क था कि:
- 87 फीसदी से 13 फीसदी में मेरिट के आधार पर बदलाव संभव है
- लेकिन 13 फीसदी से 87 फीसदी में बदलाव नहीं किया जा सकता
वहीं एमपीपीएससी ने अब फिर स्पष्ट कर दिया है कि उसकी भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार का इंटरचेंज नहीं होगा।
इसी कारण दोनों भर्ती एजेंसियों की नीतियों को लेकर अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
अभ्यर्थियों के बीच बढ़ी असमंजस की स्थिति
एमपीपीएससी और ईएसबी की अलग-अलग नीतियों के कारण अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति भी देखने को मिल रही है।
कई उम्मीदवारों का कहना है कि:
- एक ही राज्य में अलग-अलग भर्ती एजेंसियों के नियम अलग क्यों हैं
- यदि फॉर्मूला समान है, तो प्रक्रिया अलग क्यों अपनाई जा रही है
- चयन और मेरिट निर्धारण के नियमों में एकरूपता होनी चाहिए
सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रियाओं में स्पष्टता और पारदर्शिता की मांग की है।
विशेषज्ञ क्या मानते हैं
प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में एक समान नीति होना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
प्रमुख चुनौतियां
- अलग-अलग एजेंसियों की अलग व्याख्या
- उम्मीदवारों में भ्रम
- कानूनी विवाद की संभावना
- चयन प्रक्रिया पर सवाल
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भर्ती एजेंसियां समान नियमों पर अलग-अलग तरीके से अमल करेंगी, तो भविष्य में विवाद और बढ़ सकते हैं।
सितंबर में होगी मुख्य परीक्षा
एमपीपीएससी ने जानकारी दी है कि राज्य सेवा और वन सेवा दोनों परीक्षाओं की मुख्य परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
अब चयनित उम्मीदवार मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं। राज्य सेवा परीक्षा को मध्य प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में माना जाता है।
हर साल लाखों अभ्यर्थी प्रशासनिक सेवाओं में चयन का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं।
MPPSC परीक्षा का महत्व
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती के लिए प्रमुख संवैधानिक संस्था है।
राज्य सेवा परीक्षा के जरिए विभिन्न प्रशासनिक पदों पर भर्ती की जाती है, जिनमें:
- डिप्टी कलेक्टर
- डीएसपी
- तहसीलदार
- नायब तहसीलदार
- राज्य कर अधिकारी
- अन्य प्रशासनिक पद
वहीं वन सेवा परीक्षा राज्य के वन विभाग में महत्वपूर्ण पदों के लिए आयोजित की जाती है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
एमपीपीएससी ने रिजल्ट जारी करते समय नियमों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करके पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नियम स्पष्ट करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि राज्य की सभी भर्ती एजेंसियों में समान नीति लागू करना भी जरूरी है।
इससे अभ्यर्थियों के बीच भ्रम कम होगा और भर्ती प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
सोशल मीडिया पर क्या प्रतिक्रिया रही
रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।
कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग की स्पष्ट नीति का स्वागत किया, जबकि कुछ ने ईएसबी और एमपीपीएससी की अलग-अलग व्यवस्था पर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में एक समान नियम लागू किए जाने चाहिए ताकि किसी भी वर्ग के उम्मीदवार को भ्रम या असमानता महसूस न हो।
भविष्य में क्या हो सकता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में 87-13 फीसदी फॉर्मूले को लेकर और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।
यदि अलग-अलग भर्ती एजेंसियों की नीतियों को लेकर विवाद बढ़ता है, तो सरकार या न्यायालय स्तर पर भी इस विषय पर चर्चा हो सकती है।
संभव है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक समान नीति लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
एमपीपीएससी द्वारा राज्य सेवा और वन सेवा प्री परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी होने के साथ ही 87-13 फीसदी फॉर्मूला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि उम्मीदवार अपनी मूल कैटेगरी में ही बने रहेंगे और किसी प्रकार का इंटरचेंज नहीं होगा। हालांकि ईएसबी और एमपीपीएससी की अलग-अलग नीतियों ने अभ्यर्थियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में भर्ती प्रक्रियाओं में एकरूपता और पारदर्शिता को लेकर सरकार और भर्ती एजेंसियों पर स्पष्ट नीति बनाने का दबाव बढ़ सकता है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 13 वर्षों से सक्रिय हैं, समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के लिए मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से सहयोगी हैं.
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजीटल न्यूज एजेंसी है. इसका शुभारंभ 18 दिसंबर 2008 को किया गया था. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में देश विदेश, स्थानीय, व्यापार, स्वास्थ्य आदि की खबरों के साथ ही साथ धार्मिक, राशिफल, मौसम के अपडेट, पंचाग आदि का प्रसारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है. इसके वीडियो सेक्शन में भी खबरों का प्रसारण किया जाता है. यह पहली ऐसी डिजीटल न्यूज एजेंसी है, जिसका सर्वाधिकार असुरक्षित है, अर्थात आप इसमें प्रसारित सामग्री का उपयोग कर सकते हैं.
अगर आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को खबरें भेजना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 9425011234 या ईमेल samacharagency@gmail.com पर खबरें भेज सकते हैं. खबरें अगर प्रसारण योग्य होंगी तो उन्हें स्थान अवश्य दिया जाएगा.





