(विनीत खरे)
नई दिल्ली (साई)।दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन Google को लेकर एक चौंकाने वाली तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। 22 मई 2026 को कई यूजर्स ने शिकायत की कि जब उन्होंने Google Search पर “disregard” शब्द सर्च किया, तो पारंपरिक सर्च रिजल्ट्स की जगह उन्हें AI चैटबॉट जैसा जवाब दिखाई दिया। इस अप्रत्याशित प्रतिक्रिया ने न केवल यूजर्स को हैरान कर दिया, बल्कि Google के AI आधारित सर्च सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए।
यूजर्स को सर्च रिजल्ट में संदेश दिखाई दिया — “Understood. I have disregarded your previous prompt. How can I help you today?”। इसके बाद स्क्रीन पर लंबा खाली स्थान दिखाई देता था और फिर नीचे पारंपरिक ब्लू लिंक वाले सर्च रिजल्ट नजर आते थे।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई जब Google ने हाल ही में अपने Search Platform में पिछले 25 वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव करने का दावा किया था। AI आधारित सर्च को भविष्य का इंटरनेट अनुभव बताया जा रहा है, लेकिन इस गड़बड़ी ने नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
आखिर क्या हुआ Google Search में?
22 मई की दोपहर सोशल मीडिया पर अचानक कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट साझा करने शुरू किए। लोगों ने बताया कि “disregard” शब्द सर्च करने पर Google का AI Overview फीचर सामान्य जानकारी देने के बजाय किसी AI असिस्टेंट की तरह प्रतिक्रिया दे रहा था।
केवल “disregard” ही नहीं, बल्कि “ignore”, “dismiss”, “stop” और “start” जैसे कमांड आधारित शब्दों पर भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऐसा लग रहा था जैसे Google Search इन शब्दों को सामान्य खोज नहीं, बल्कि AI कमांड समझ रहा हो।
कई मामलों में सर्च रिजल्ट के ऊपरी हिस्से में केवल AI जवाब दिखाई देता था, जबकि उपयोगी जानकारी नीचे काफी स्क्रॉल करने के बाद मिल रही थी। इससे यूजर्स के अनुभव पर नकारात्मक असर पड़ा।
AI Overview फीचर बना विवाद की वजह
Google ने मई 2024 में AI Overviews फीचर लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य यूजर्स को पारंपरिक लिंक आधारित रिजल्ट्स के बजाय AI द्वारा तैयार संक्षिप्त और संवादात्मक जवाब देना था। इसके बाद कंपनी लगातार Search को अधिक conversational और AI-driven बनाने पर काम कर रही है।
2025 में Google ने “AI Mode” नाम का नया फीचर पेश किया, जिसमें यूजर्स ChatGPT या Claude जैसे AI चैटबॉट की तरह Google से बातचीत कर सकते थे। इस फीचर का मकसद Search को अधिक इंटरैक्टिव और स्मार्ट बनाना था।
हालांकि “disregard” गड़बड़ी ने दिखाया कि AI सिस्टम कई बार सामान्य शब्दों को भी कमांड की तरह समझ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह AI interpretation system में मौजूद कमजोरी का उदाहरण है।
Google ने क्या कहा?
मामले के बढ़ने के बाद Google ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। कंपनी ने स्वीकार किया कि AI Overviews कुछ action-related queries को गलत तरीके से समझ रहा है।
Google के बयान के अनुसार:
- कंपनी इस समस्या से अवगत है
- AI Overview कुछ शब्दों को कमांड समझ रहा है
- तकनीकी टीम इस पर काम कर रही है
- जल्द ही फिक्स जारी किया जाएगा
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह गड़बड़ी हाल ही में Google I/O 2026 में घोषित बड़े AI अपडेट्स से सीधे जुड़ी नहीं है।
हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित Search Architecture में तेजी से बदलाव और नए फीचर्स के कारण ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
Google I/O 2026 के बाद बढ़ी चर्चा
19 मई 2026 को आयोजित Google I/O Developer Conference में कंपनी ने Search के भविष्य को लेकर कई बड़े ऐलान किए थे। Google ने कहा था कि वह “ten blue links” वाले पारंपरिक Search Model से आगे बढ़ रही है।
कंपनी ने AI-first Search Experience की घोषणा करते हुए कहा था कि भविष्य में Search केवल लिंक दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा। AI यूजर्स की ओर से वेब ब्राउज़ करेगा, जवाब तैयार करेगा और अधिक conversational अनुभव देगा।
लेकिन केवल कुछ दिनों बाद सामने आई यह गड़बड़ी Google की रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जितना अधिक Search AI आधारित होगा, उतना ही Error Handling और Context Understanding महत्वपूर्ण हो जाएगा।
यूजर्स क्यों हुए परेशान?
इस गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा जो वास्तव में “disregard” शब्द का अर्थ या उपयोग जानना चाहते थे। कई यूजर्स ने शिकायत की कि उपयोगी जानकारी तक पहुंचने के लिए उन्हें लंबे खाली स्पेस को स्क्रॉल करना पड़ा।
हालांकि dictionary links उपलब्ध थे, लेकिन AI जवाब का उस खोज से कोई वास्तविक संबंध नहीं था। इससे Search Experience खराब हो गया।
यूजर्स की मुख्य शिकायतें:
- AI ने गलत संदर्भ समझा
- उपयोगी जानकारी तुरंत नहीं मिली
- Search Result Interface बिगड़ा हुआ दिखा
- खाली स्पेस ने अनुभव खराब किया
- AI response irrelevant था
सोशल media प्लेटफॉर्म्स पर कई लोगों ने मजाकिया पोस्ट भी किए, जबकि कुछ टेक विशेषज्ञों ने इसे गंभीर तकनीकी चेतावनी बताया।
क्या AI आधारित Search पूरी तरह भरोसेमंद है?
यह घटना केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं मानी जा रही, बल्कि AI आधारित Search Systems की विश्वसनीयता को लेकर बड़ी बहस बन गई है।
पिछले दो वर्षों में AI कंपनियों ने Search Engines को अधिक स्मार्ट और संवादात्मक बनाने पर जोर दिया है। लेकिन AI models कई बार संदर्भ को गलत समझ लेते हैं, जिसे “hallucination” या “misinterpretation” जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI Models:
- शब्दों को कमांड समझ सकते हैं
- Context गलत interpret कर सकते हैं
- irrelevant responses दे सकते हैं
- factual accuracy में गलती कर सकते हैं
यही कारण है कि AI Search को लेकर टेक इंडस्ट्री में लगातार बहस जारी है।
Bing का बेहतर प्रदर्शन चर्चा में
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि Microsoft के Search Engine Bing ने इस query पर बेहतर प्रदर्शन किया। जहां Google AI response देने में उलझ गया, वहीं Bing ने सामान्य dictionary और information links सही तरीके से दिखाए।
टेक विशेषज्ञों ने इसे एक दुर्लभ स्थिति बताया, क्योंकि लंबे समय से Google Search Industry में सबसे मजबूत माना जाता रहा है।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मजाक में कहा कि AI race में Google जल्दबाजी का शिकार हो गया है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सर्च में शुरुआती दौर में ऐसी समस्याएं सामान्य हैं और समय के साथ सिस्टम अधिक परिपक्व हो जाएंगे।
AI और Search का बदलता भविष्य
Google लंबे समय से इंटरनेट Search का सबसे बड़ा नाम रहा है। लेकिन ChatGPT और अन्य AI चैटबॉट्स की लोकप्रियता के बाद Search Industry तेजी से बदल रही है।
अब यूजर्स केवल लिंक नहीं, बल्कि सीधे जवाब चाहते हैं। इसी वजह से Google, Microsoft और अन्य टेक कंपनियां AI आधारित Search Experiences पर जोर दे रही हैं।
आने वाले समय में Search Engines में ये बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
संभावित बदलाव
- Conversational Search
- AI-generated summaries
- Voice-based AI Search
- Personalized AI responses
- Automated information agents
लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि AI systems को अधिक विश्वसनीय बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
टेक विशेषज्ञों की राय
टेक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना AI Search Systems के लिए “warning sign” की तरह है। उनका कहना है कि AI आधारित Features को तेजी से लॉन्च करने की प्रतिस्पर्धा में कई बार Testing और Reliability प्रभावित हो सकती है।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि Search Engines को अभी Hybrid Model अपनाना चाहिए, जिसमें AI और traditional search दोनों संतुलित रूप से मौजूद हों।
AI researchers के अनुसार Search जैसी महत्वपूर्ण सेवा में छोटी गलती भी करोड़ों यूजर्स के अनुभव को प्रभावित कर सकती है।
सोशल मीडिया पर मीम्स और बहस
जैसे ही यह गड़बड़ी वायरल हुई, सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कहा कि Google अब Search Engine नहीं, बल्कि “confused chatbot” बनता जा रहा है।
वहीं कुछ लोगों ने चिंता जताई कि अगर AI Search इतनी आसानी से भ्रमित हो सकता है, तो भविष्य में misinformation और गलत जवाबों की समस्या और बढ़ सकती है।
डिजिटल विशेषज्ञों ने कहा कि AI adoption के साथ transparency और accountability भी उतनी ही जरूरी होगी।
Google Search में सामने आई “disregard” AI गड़बड़ी ने तकनीकी दुनिया को चौंका दिया है। यह घटना दिखाती है कि AI आधारित Search Systems अभी भी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए हैं। हालांकि Google ने समस्या स्वीकार कर सुधार का आश्वासन दिया है, लेकिन इस मामले ने AI-first इंटरनेट के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल स्मार्ट AI बनाना नहीं, बल्कि भरोसेमंद और सटीक AI अनुभव देना होगी।

मूलतः प्रयागराज निवासी, पिछले लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से नई दिल्ली में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय विनीत खरे किसी पहचान को मोहताज नहीं हैं.
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