कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता KGP12 ने चार शावक जन्म दिए – संरक्षण में नया अध्याय

(ब्यूरो कार्यालय)
श्योपुर (साई)। भोजपुरी में कहा जाता है, “जीवन अपना रास्ता खुद ढूँढ़ लेता है”; यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुए ऐतिहासिक प्रसंग में दोहराई। 18 सितंबर 2026 को, भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने कूनो में चार नन्हे शावक को जन्म दिया। इस घटना ने न केवल राज्य के वन्यजीव संरक्षण को नई ऊर्जा दी, बल्कि प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूर्ण होने के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 56 तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना।

प्रोजेक्ट चीता की प्रगति

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल से 17 सितंबर 2022 को कूनो में शुरू हुआ प्रोजेक्ट चीता, आज एक सफल मॉडल बन चुका है। चार शावकों के जन्म से यह स्पष्ट हुआ कि कूनो का प्राकृतिक वातावरण प्रजनन के लिए अनुकूल है। राज्य वन विभाग, राष्ट्रीय वन्यजीव प्राधिकरण और स्थानीय वैज्ञानिकों ने मिलकर आवास सुधार, जल स्रोत प्रबंधन और शिकार नियंत्रण के उपाय लागू किए, जिससे चीतों की जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

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पर्यावरणीय प्रभाव और भविष्य की योजना

कूनो में चीतों की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में शिकारियों और शिकार के संतुलन में सकारात्मक बदलाव आया है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि शावकों की सफलता से भविष्य में अधिक प्रजनन केंद्र स्थापित करने की संभावना बढ़ेगी। राज्य सरकार ने अगले दो वर्षों में अतिरिक्त 5 हेक्टेयर आवास क्षेत्र का विस्तार करने और ड्रोन‑सहायता निगरानी प्रणाली स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे प्रजनन प्रक्रिया को रीयल‑टाइम में ट्रैक किया जा सके।

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खबर के प्रमुख बिंदु

• कंपनी: कूनो राष्ट्रीय उद्यान (प्रोजेक्ट चीता)
• आयोजन: मादा चीता KGP12 द्वारा चार शावकों का जन्म
• स्थान: कूनो, मध्यप्रदेश (भोपाल)
• मुख्य उद्देश्य: चीता प्रजनन एवं संरक्षण को सुदृढ़ बनाना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: आवास विस्तार, ड्रोन निगरानी, अगले दो वर्षों में 5 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र
• लक्ष्य: 2028 तक भारत में चीतों की कुल संख्या 70 तक पहुंचाना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस सफलता से वन्यजीव संरक्षण में निरंतर निवेश और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता स्पष्ट होती है। शावकों का जन्म न केवल जैव विविधता को बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय समुदायों में संरक्षण के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न करता है। भविष्य में नियमित प्रजनन समीक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग और कर्मचारियों के कल्याण पर ध्यान देकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान भारत के वन्यजीव संरक्षण में एक मॉडल बनता रहेगा।