प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली‑एनसीआर स्वच्छ मोबिलिटी योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए बुनियादी ढाँचे को नया आयाम दिया

केंद्रीय कैबिनेट ने दो साल के स्वच्छ मोबिलिटी स्कीम, एयरलाइन समर्थन और कई हाईवे अपग्रेड को स्वीकृति दी, जिससे प्रदूषण में कमी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में तेजी आएगी

(मणिका सोनल)
नई दिल्ली (साई)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जून को एक विस्तृत श्रृंखला में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रमुख निर्णयों को उजागर किया, जिसमें दिल्ली‑एनसीआर में प्रदूषण घटाने के लिए दो‑साल की स्वच्छ मोबिलिटी योजना, एयरलाइन एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण के लिए एक बार की वित्तीय सहायता, तथा कई राष्ट्रीय राजमार्गों का चौपट लेन विस्तार शामिल है। इस घोषणा ने न केवल पर्यावरणीय सुधारों की दिशा में एक निर्णायक कदम को रेखांकित किया, बल्कि देशभर में बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने, आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने और यात्रियों के खर्च को कम करने की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया। मोदी ने बताया कि योजना के तहत बीएस‑IV या पुराने ट्रकों को बीएस‑VI या इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने वाले मालिकों को वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वाहन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। साथ ही, एयरलाइन समर्थन पैकेज के माध्यम से एटीएफ की कीमतों को स्थिर किया जाएगा, जिससे टियर‑II और टियर‑III शहरों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इन सभी कदमों को एक साथ देखना भारत के सतत विकास और जलवायु लक्ष्य की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है।

1. घटना का मुख्य विवरण और तत्कालीन संकट

तात्कालिक घटनाक्रम: 3 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर (X) पर एक श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत कई प्रमुख निर्णयों का विस्तृत विवरण दिया, जिसमें दिल्ली‑एनसीआर में प्रदूषण कम करने हेतु दो‑साल की स्वच्छ मोबिलिटी योजना, एयरलाइन एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण के लिए एक बार की वित्तीय सहायता, तथा बिहार, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्गों का चौपट लेन विस्तार शामिल है। उन्होंने बताया कि इस योजना का कुल वित्तीय व्यय लगभग 9,585 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र से 5,041 करोड़ रुपये और भाग लेने वाले राज्यों से कर रियायतों के रूप में 1,601 करोड़ रुपये शामिल हैं। योजना के तहत बीएस‑IV या उससे पुराने ट्रकों और बसों को बीएस‑VI मानक या इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने वाले मालिकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे वाहन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही, एयरलाइन समर्थन पैकेज के तहत भारतीय एयरलाइनों को अधिकतम 10,000 करोड़ रुपये की एक बार की बजट सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे एटीएफ की कीमतों में स्थिरता आएगी और यात्रियों के किराए में दबाव कम होगा। इन सभी कदमों को राष्ट्रीय आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के दोहरे लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।

मुख्य विवाद और वर्तमान स्थिति: इस घोषणा के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, कुछ ने योजना की वित्तीय व्यवहार्यता और कार्यान्वयन की गति को लेकर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने इसे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक निर्णायक कदम माना। केंद्र ने बताया कि योजना के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) को प्रमुख भूमिका दी जाएगी और राज्य सरकारों के सहयोग से टैक्‍स रियायतें प्रदान की जाएँगी। एयरलाइन समर्थन के संदर्भ में, एटीएफ की कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए, यह पैकेज मौजूदा वैश्विक तेल मूल्य उछाल के मद्देनज़र अत्यावश्यक माना गया। हाईवे परियोजनाओं के लिए, बिहार में खगड़िया‑पूर्णिया सेक्शन, मध्य प्रदेश में हिवरखेड़ी‑रोशन‑अशापुर‑रुधी सेक्शन और तेलंगाना में कई राष्ट्रीय राजमार्गों को चौपट लेन तक अपग्रेड करने की स्वीकृति दी गई, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी की उम्मीद है। वर्तमान में इन परियोजनाओं की प्रारम्भिक चरणों में अनुबंध जारी किए जा रहे हैं और अगले कुछ महीनों में कार्य आरम्भ होने की संभावना है।

2. मामले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गहरा संदर्भ

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: दिल्ली‑एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या पिछले दो दशकों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख चिंता का विषय रही है, विशेषकर सर्दियों में धुंध और स्मॉग की घटनाएँ सामाजिक और आर्थिक दोनों पहलुओं को प्रभावित करती रही हैं। पिछले सरकारों ने कई बार वैकल्पिक उपायों की घोषणा की, परंतु वित्तीय प्रोत्साहन और सख्त उत्सर्जन मानकों की कमी के कारण प्रभावी परिणाम नहीं मिल पाए। बीएस‑VI मानक को 2020 में लागू करने के बाद भी कई पुराने ट्रकों और बसों ने अपने उत्सर्जन स्तर को घटाने में असफलता दिखाई, जिससे पर्यावरणीय लक्ष्य अधूरे रह गए। इसी संदर्भ में, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) ने कई बार स्वच्छ मोबिलिटी के लिए विस्तृत रिपोर्टें प्रस्तुत कीं, लेकिन वित्तीय संसाधनों की कमी और राज्यों के बीच समन्वय की कमी ने योजना को ठहराव में डाल दिया। अब मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत दो‑साल की स्वच्छ मोबिलिटी योजना इन ऐतिहासिक चुनौतियों को दूर करने के लिए एक व्यापक वित्तीय और नियामक ढाँचा प्रदान करती है।

छिपे हुए कारक और अंतर्निहित समस्याएं: इस बड़े पैमाने के पहल के पीछे कई जटिल आर्थिक और राजनीतिक कारक निहित हैं। प्रथम, केंद्र और राज्यों के बीच कर रियायतों का वितरण एक संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि विभिन्न राज्य सरकारों की राजस्व स्थिति अलग‑अलग है और उन्हें अतिरिक्त खर्चों को वहन करने में कठिनाई हो सकती है। द्वितीय, बीएस‑VI या इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च प्रारम्भिक लागत छोटे व्यवसायियों और ट्रक मालिकों के लिए बाधा बन सकती है, जिससे प्रोत्साहन योजना की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठते हैं। तृतीय, एयरलाइन समर्थन पैकेज को लागू करने के लिए तेल कंपनियों और एटीएफ डीलरों के साथ विस्तृत समझौते आवश्यक हैं, जो बाजार की अस्थिरता को देखते हुए जटिल हो सकता है। चौथा, हाईवे अपग्रेड परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय विरोध जैसी समस्याएँ अक्सर देरी का कारण बनती हैं। इन सभी अंतर्निहित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने वित्तीय मॉडल (BOT, HAM, Hybrid Annuity) को विविधित किया है, जिससे जोखिम साझा हो और परियोजनाओं की समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।

3. महत्वपूर्ण आंकड़े और मुख्य हाइलाइट्स

आंकड़ों का विश्लेषण: स्वच्छ मोबिलिटी योजना के कुल व्यय 9,585 करोड़ रुपये में से 5,041 करोड़ रुपये केंद्र द्वारा सीधे वित्तपोषित किए जाएंगे, जबकि भाग लेने वाले राज्यों को 1,601 करोड़ रुपये कर रियायत के रूप में मिलेंगे, जिससे योजना की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी। इस योजना के तहत अनुमानित 10,000 से अधिक बीएस‑IV और पुराने ट्रकों को बीएस‑VI या इलेक्ट्रिक वैरिएंट में बदलने की योजना है, जिससे वार्षिक वाहन उत्सर्जन में लगभग 30% की कमी की उम्मीद है। एयरलाइन समर्थन पैकेज के तहत अधिकतम 10,000 करोड़ रुपये की एक बार की सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे एटीएफ की कीमतों में 5‑7% की संभावित स्थिरता आएगी और यात्रियों के टिकट मूल्य में समान प्रतिशत तक कमी संभव होगी। हाईवे अपग्रेड के लिए कुल व्यय लगभग 25,000 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें बिहार के खगड़िया‑पूर्णिया सेक्शन (143.529 किमी) का 4‑लेन विस्तार, मध्य प्रदेश के हिवरखेड़ी‑रोशन‑अशापुर‑रुधी सेक्शन का 2‑लेन अपग्रेड और तेलंगाना के 190.76 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग का 4‑लेन विस्तार शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से अनुमानित रूप से 15,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश स्थानीय रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

  • मुख्य साक्ष्य और डेटा बिंदु एक: स्वच्छ मोबिलिटी योजना के तहत बीएस‑VI अनुपालन वाले वाहनों की खरीद पर 20% तक सब्सिडी दी जाएगी, जिससे छोटे व्यवसायियों के लिए वित्तीय बोझ कम होगा।
  • मुख्य साक्ष्य और डेटा बिंदु दो: एयरलाइन समर्थन पैकेज के माध्यम से एटीएफ की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए 2024‑2025 वित्तीय वर्ष में औसत 6% की कीमत घटाव की संभावना है, जिससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों दोनों को लाभ होगा।
  • मुख्य साक्ष्य और डेटा बिंदु तीन: हाईवे अपग्रेड परियोजनाओं में BOT और HAM मॉडल के मिश्रण से निजी निवेशकों को 12‑15% की रिटर्न दर की अपेक्षा है, जिससे सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की सफलता की संभावनाएँ बढ़ती हैं।