(आशीष कौशल)
नागपुर (साई)। दीपावली के त्योहार से पहले नागपुर शहर में पटाखों की अस्थायी दुकानों को लेकर सुरक्षा और अतिक्रमण का मुद्दा सामने आया है। शहर के कई इलाकों में फुटपाथों और सड़कों के किनारे पटाखा दुकानें संचालित होने की खबरें हैं। इनमें से कुछ दुकानों में निर्धारित टिन शेड के बजाय कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। पटाखों जैसे अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक सामान की बिक्री के दौरान इस तरह की लापरवाही आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता पैदा करती है।
मामले को देखते हुए नागपुर नगर निगम ने शहर के सभी 10 जोन के अधिकारियों को अनधिकृत पटाखा दुकानों की पहचान कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम की ओर से 29 अक्टूबर को जारी निर्देशों में जोन स्तर पर सर्वे और सार्वजनिक स्थानों से अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया गया। इसके अगले दिन, 30 अक्टूबर को नगर आयुक्त विपिन इतनकर ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और धार्मिक स्थलों जैसे संवेदनशील संस्थानों के आसपास संचालित पटाखा दुकानों के लाइसेंस की समीक्षा करने का अनुरोध किया।
यह मामला केवल फुटपाथ खाली कराने तक सीमित नहीं है। इसमें अग्नि सुरक्षा, पैदल यात्रियों की आवाजाही, यातायात व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण और त्योहार के दौरान नागरिकों की सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं।
फुटपाथों पर अस्थायी पटाखा दुकानों से बढ़ी चिंता
दीपावली के समय पटाखों की मांग बढ़ने के कारण शहरों के प्रमुख बाजारों और व्यस्त इलाकों में अस्थायी दुकानें लगाई जाती हैं। नागपुर में भी त्योहार से पहले कई स्थानों पर पटाखा बिक्री के लिए अस्थायी स्टॉल दिखाई देने की जानकारी सामने आई है।
समस्या तब गंभीर हो जाती है, जब ऐसी दुकानें निर्धारित स्थानों के बजाय फुटपाथों, सड़क किनारों या भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्रों में संचालित होने लगती हैं। फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए बनाए जाते हैं। इन पर दुकानें लगने से लोगों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है और यातायात भी प्रभावित होता है।
पटाखों की दुकानों में सुरक्षा मानकों का पालन और भी जरूरी है। पटाखों में आग लगने या विस्फोट की स्थिति में आसपास मौजूद दुकानों, वाहनों और राहगीरों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि दुकान के निर्माण में कपड़े, प्लास्टिक या अन्य ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया गया हो, तो आग तेजी से फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
टिन शेड के बजाय कपड़े और ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल
सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अस्थायी पटाखा दुकानों में निर्धारित टिन शेड के बजाय कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। यह स्थिति सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
पटाखों का कारोबार सामान्य खुदरा व्यापार से अलग है। इसमें विस्फोटक और आग पकड़ने वाली सामग्री का भंडारण तथा बिक्री होती है। इसलिए दुकान की बनावट, स्थान, बिजली की व्यवस्था, आग बुझाने के उपकरण और आसपास की जगह जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
ऐसी दुकानों के लिए प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा शर्तों का पालन महत्वपूर्ण है। केवल दुकान के लिए जगह मिल जाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित अनुमति, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित स्थान संबंधी नियमों की भी जांच आवश्यक है।
नागरिकों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि किसी दुकान पर पटाखे उपलब्ध होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसका संचालन सभी नियमों के अनुरूप हो रहा है। नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
नगर निगम ने सभी 10 जोन को दिए सर्वे के निर्देश
नागपुर नगर निगम ने 29 अक्टूबर को शहर के सभी 10 जोन के अधिकारियों को अनधिकृत पटाखा दुकानों की पहचान करने और उन्हें हटाने के निर्देश दिए। इस आदेश का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई अवैध दुकानों और अतिक्रमण पर कार्रवाई करना है।
जोन स्तर पर अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में दुकानों की स्थिति का जायजा लेना है। खास तौर पर प्रमुख सड़कों, बाजारों, चौराहों और फुटपाथों पर संचालित अस्थायी दुकानों की जांच जरूरी है।
नगर निगम की कार्रवाई के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों से अनधिकृत पटाखा दुकानों को हटाना।
- बिना वैध अनुमति संचालित दुकानों की पहचान करना।
- निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
- बाजारों और मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण कम करना।
- पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना।
- आग और अन्य दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना।
निर्देश जारी होना कार्रवाई की शुरुआत है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सभी जोन में निरीक्षण कितनी प्रभावी तरीके से होता है और नियमों का उल्लंघन करने वाली दुकानों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
पुलिस आयुक्त को पत्र, संवेदनशील संस्थानों के पास लाइसेंस की समीक्षा
नगर आयुक्त विपिन इतनकर ने 30 अक्टूबर को पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर संवेदनशील संस्थानों के आसपास संचालित पटाखा दुकानों के लाइसेंस की समीक्षा करने का अनुरोध किया।
इसमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और धार्मिक स्थलों जैसे स्थानों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। ऐसे संस्थानों के आसपास पटाखों की दुकानें संचालित होने पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
स्कूल और कॉलेजों के आसपास बड़ी संख्या में विद्यार्थी आते-जाते हैं। अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही रहती है। धार्मिक स्थलों पर त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ सकती है। ऐसे क्षेत्रों में पटाखों की बिक्री और भंडारण के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
लाइसेंस की समीक्षा से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित दुकान को अनुमति किस स्थान के लिए दी गई है और क्या वह उसी स्थान पर संचालित हो रही है। साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि दुकान के संचालन में निर्धारित शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी दुकान के पास लाइसेंस होना और उसका निर्धारित स्थान तथा सुरक्षा शर्तों के अनुरूप संचालन करना दो अलग-अलग बातें हैं। प्रशासनिक जांच में इन दोनों पहलुओं को देखना आवश्यक होगा।
अधिकृत दुकानों और अनधिकृत स्टॉलों में अंतर जरूरी
पटाखा दुकानों पर कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि नियमों का पालन करने वाले लाइसेंसधारी कारोबारियों और अनधिकृत रूप से दुकान लगाने वालों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सामने आई जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर तक नागपुर में 831 पटाखा दुकानों को नगर निगम की मंजूरी मिल चुकी थी। दूसरी ओर, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत स्टॉल लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आईं।
इससे स्पष्ट है कि शहर में पटाखों की बिक्री के लिए अनुमति प्राप्त दुकानों का संचालन और नियमों का उल्लंघन कर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए स्टॉल अलग-अलग विषय हैं। सभी दुकानों को एक ही श्रेणी में रखकर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।
प्रशासन को प्रत्येक दुकान की अनुमति, निर्धारित स्थान, सुरक्षा व्यवस्था और वास्तविक संचालन की जांच करनी चाहिए। जिन दुकानों में नियमों का उल्लंघन पाया जाए, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
300 से 400 अनधिकृत स्टॉल होने का अनुमान
नवंबर की शुरुआत में प्रकाशित रिपोर्टों में नागपुर के प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक क्षेत्रों में लगभग 300 से 400 अनधिकृत पटाखा स्टॉल होने का अनुमान बताया गया। सीताबर्डी, महल, धरमपेठ, कॉटन मार्केट और रेशमबाग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।
यह संख्या एक अनुमान के रूप में सामने आई है। इसे नगर निगम की ओर से सत्यापित अंतिम आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति का पता जोन स्तर पर होने वाले सर्वे और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही चल सकेगा।
इन क्षेत्रों में त्योहार के समय लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। यदि फुटपाथों पर अस्थायी दुकानें लगती हैं, तो पैदल चलने वालों को परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, भीड़भाड़ वाले बाजारों में आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।
इसलिए सर्वे में केवल दुकानों की संख्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। उनके स्थान, आसपास की इमारतों, प्रवेश और निकास मार्गों तथा अग्नि सुरक्षा की उपलब्धता का भी आकलन जरूरी है।
पटाखा बिक्री के साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बड़ी चुनौती
दीपावली के दौरान पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रहता है। पटाखों के धुएं से हवा में सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक बढ़ सकते हैं। तेज आवाज वाले पटाखों से बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और ध्वनि के प्रति संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है।
नागपुर में पटाखों के उपयोग और प्रदूषण को लेकर भी निगरानी की व्यवस्था की गई है। नवंबर की शुरुआत में सामने आई जानकारी के अनुसार, शहर पुलिस आयुक्तालय में वायु और ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने के लिए 24 घंटे की व्यवस्था शुरू की गई है। नागरिकों के लिए मोबाइल नंबर 9823300100 जारी किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य पटाखों से होने वाले प्रदूषण संबंधी मामलों में शिकायत प्राप्त करना और आवश्यक कार्रवाई करना है। नागरिकों को निर्धारित नियमों का पालन करने तथा किसी उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाने की जरूरत है।
फुटपाथ खाली रहना पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी
शहरों में फुटपाथों का निर्माण पैदल यात्रियों को सुरक्षित आवाजाही उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। लेकिन जब इन पर अस्थायी दुकानें, सामान या अन्य अतिक्रमण हो जाते हैं, तो लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है।
इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और महिलाओं पर पड़ सकता है। व्यस्त सड़कों पर पैदल चलने के लिए पर्याप्त सुरक्षित जगह न होने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है।
पटाखा दुकानों के मामले में यह जोखिम और गंभीर हो सकता है, क्योंकि यहां ज्वलनशील तथा विस्फोटक सामग्री रखी जाती है। यदि किसी दुकान में आग लगती है, तो आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए पर्याप्त जगह मिलना जरूरी है।
नगर निगम की कार्रवाई को इसलिए केवल अतिक्रमण हटाने की मुहिम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह नागरिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्थानों के उचित उपयोग और शहर की यातायात व्यवस्था से भी जुड़ा विषय है।
प्रशासन के सामने कार्रवाई को लगातार प्रभावी बनाए रखने की चुनौती
त्योहारों के दौरान अस्थायी दुकानें हटाने के लिए अभियान चलाना जरूरी है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है कि कार्रवाई के बाद उन्हीं स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण न हो।
इसके लिए नगर निगम और पुलिस के बीच समन्वय आवश्यक होगा। सभी 10 जोन के अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी करनी होगी। जहां दुकानें हटाई जाएं, वहां दोबारा स्टॉल लगाए जाने की स्थिति में समय पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने कुछ प्रमुख चुनौतियां भी रहेंगी:
- लगातार निगरानी: एक बार दुकान हटाने के बाद दोबारा उसी स्थान पर दुकान लगने से रोकना।
- लाइसेंस की जांच: दुकान के वास्तविक स्थान और अनुमति में समानता की पुष्टि करना।
- अग्नि सुरक्षा: दुकानों में आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और सुरक्षित ढांचे की उपलब्धता देखना।
- विभागीय समन्वय: नगर निगम, पुलिस और दमकल विभाग के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट रखना।
- नागरिक सहभागिता: लोगों को नियमों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना।
यदि इन बिंदुओं पर प्रभावी ढंग से काम किया जाता है, तो त्योहार के दौरान बाजारों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं
पटाखों की सुरक्षित बिक्री और उपयोग केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। दुकानदारों और खरीदारों को भी नियमों का पालन करना चाहिए।
दुकानदारों को वैध अनुमति और निर्धारित सुरक्षा शर्तों के अनुरूप ही कारोबार करना चाहिए। दुकान के आसपास अनावश्यक भीड़, आग के स्रोत और ज्वलनशील सामग्री से बचना चाहिए। वहीं ग्राहकों को भी फुटपाथों या सड़क पर अवैध रूप से लगाए गए स्टॉल से खरीदारी करने के बजाय अधिकृत दुकानों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नागरिकों को किसी दुकान में स्पष्ट सुरक्षा उल्लंघन दिखाई देने पर संबंधित प्रशासनिक या पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। शिकायत करते समय स्थान और समस्या का स्पष्ट विवरण देना उपयोगी होगा।
त्योहार की खुशी तभी सार्थक है, जब उससे किसी दूसरे व्यक्ति की सुरक्षा और सुविधा प्रभावित न हो।
दीपावली की रौनक के साथ सुरक्षा भी जरूरी
नागपुर में फुटपाथों और सड़कों के किनारे असुरक्षित पटाखा दुकानों का मामला शहरी व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। नगर निगम ने सभी 10 जोन के अधिकारियों को अनधिकृत दुकानों की पहचान कर हटाने के निर्देश दिए हैं। नगर आयुक्त ने पुलिस आयुक्त को संवेदनशील संस्थानों के आसपास पटाखा दुकानों के लाइसेंस की समीक्षा करने के लिए पत्र भी भेजा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। दुकानों के स्थान, लाइसेंस, सुरक्षा व्यवस्था और फुटपाथों की स्थिति की नियमित जांच जरूरी है।
दीपावली के अवसर पर बाजारों में रौनक और कारोबार बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन यह गतिविधि नागरिकों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। प्रशासन, दुकानदारों और आम लोगों के साझा प्रयास से ही त्योहार को सुरक्षित, व्यवस्थित और खुशहाल बनाया जा सकता है।