(ब्यूरो कार्यालय)
नई दिल्ली (साई)। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक आज दिल्ली में शुरू हो गई है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी से जुड़े बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इस बैठक में सबसे बड़ी चर्चा जीएसटी स्लैब में बड़े बदलाव को लेकर है, जिसके तहत कई रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं।
आम आदमी की जेब पर राहत की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार कई आवश्यक वस्तुओं को मौजूदा 12% और 18% के स्लैब से हटाकर सीधे 5% के स्लैब में लाने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है तो घी, मक्खन, पनीर, मिल्क पाउडर, टूथपेस्ट, शैंपू, दवाएं और पैकेज्ड पानी जैसी चीजें काफी सस्ती हो सकती हैं। इसके पीछे का मकसद त्योहारी सीजन से पहले बाजार में मांग को बढ़ाना और आम उपभोक्ताओं को राहत देना है।
लक्ज़री आइटम्स पर टैक्स बढ़ेगा
एक तरफ जहां आम जरूरत की चीजें सस्ती हो सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा लक्ज़री और डिमेरिट वस्तुओं पर टैक्स बढ़ने का प्रस्ताव है। इनमें लक्ज़री कारें, एसयूवी, 350 सीसी से ऊपर की बाइक, कोल्ड ड्रिंक और तंबाकू उत्पाद शामिल हैं, जिन पर जीएसटी दर 40% तक हो सकती है।
दो स्लैब की नई योजना: जीएसटी 2.0
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह बैठक मौजूदा चार-स्तरीय कर ढांचे (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो स्लैब – 5% और 18% – करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस पर जीएसटी में सुधार का ऐलान किया था।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
वर्तमान में 12% स्लैब में आने वाली 99% वस्तुएं 5% स्लैब में आ सकती हैं।
28% स्लैब में आने वाली 90% वस्तुएं 18% स्लैब में शिफ्ट हो सकती हैं।
सिर्फ कुछ लक्ज़री और डिमेरिट वस्तुओं पर 40% की विशेष दर लगेगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने पर भी चर्चा होगी।
राज्यों की चिंता और मुआवजा सेस पर बहस
इस संभावित बदलाव से कुछ राज्य राजस्व में कमी की आशंका जता रहे हैं। खासकर विपक्षी-शासित राज्य जैसे पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और केरल ने केंद्र से स्पष्ट मुआवजा तंत्र की मांग की है। हालांकि, केंद्र का तर्क है कि टैक्स कम होने से खपत बढ़ेगी, जिससे आखिरकार राजस्व संतुलित हो जाएगा।
बैठक में कंपनसेशन सेस को समय से पहले, यानी 31 अक्टूबर 2025 तक खत्म करने पर भी चर्चा हो रही है। इस सेस का इस्तेमाल राज्यों को राजस्व घाटे की भरपाई के लिए किया जाता था, जिसकी अवधि जून 2022 में खत्म हो चुकी है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए अंतिम फैसले का ऐलान कल, यानी 4 सितंबर को होगा। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार आम आदमी को इस दिवाली पर कोई बड़ा तोहफा देगी।