छत्तीसगढ़ में नशे के बड़े कारोबारियों पर कसेगा शिकंजा, संपत्तियों की होगी जांच; मेडिकल स्टोर भी रडार पर, 3 महीने में कार्रवाई तेज करने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में नशे के बड़े तस्करों पर कार्रवाई की तैयारी, संपत्तियों की होगी जांच; मेडिकल स्टोर भी सरकार के रडार पर

(ब्यूरो कार्यालय)

रायपुर (साई)। छत्तीसगढ़ में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी की है। अब कार्रवाई केवल नशीले पदार्थों की जब्ती और छोटे स्तर पर बिक्री करने वालों की गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय पूरे तस्करी नेटवर्क पर केंद्रित करने की योजना है। इसमें नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वालों, उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वालों, स्थानीय स्तर पर बिक्री करने वालों और इस कारोबार से कथित रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान करने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार की रणनीति में वित्तीय लेन-देन की जांच, तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास निगरानी जैसे कदम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पुराने जब्त मादक पदार्थों के नष्टीकरण की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने तथा राष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध हेल्पलाइन ‘मानस’ के टोल फ्री नंबर 1933 का प्रचार करने पर भी जोर दिया गया है।

प्रस्तावित कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य नशे के कारोबार की पूरी सप्लाई चेन की पहचान करना है। यदि जांच के दौरान तस्करी से अर्जित संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और आपूर्ति नेटवर्क के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकेगी।

सरकार की इस रणनीति में अगले तीन महीनों के भीतर अधिक से अधिक पात्र मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ाने का लक्ष्य भी शामिल है। हालांकि, संपत्ति कुर्क करने, वाहन राजसात करने और अन्य दंडात्मक कदमों के लिए संबंधित कानूनों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक होगा।

छोटे पैडलरों से लेकर बड़े तस्करों तक जांच का दायरा

नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई में अक्सर नशीले पदार्थों के साथ पकड़े गए लोगों और स्थानीय स्तर पर बिक्री करने वालों के मामले सामने आते हैं। लेकिन किसी संगठित तस्करी नेटवर्क की पहचान करने के लिए यह पता लगाना भी जरूरी होता है कि नशीले पदार्थ कहां से लाए जा रहे हैं, उनका परिवहन कौन कर रहा है और इस कारोबार को आर्थिक सहायता कौन दे रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से बताई गई रणनीति में इसी व्यापक नेटवर्क की जांच पर जोर दिया गया है। सभी जिलों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा के दौरान नशीले पदार्थों की जब्ती, आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई और लंबित मामलों की स्थिति पर विचार किया गया।

जांच के दौरान कई स्तरों पर जानकारी जुटाने की आवश्यकता होगी। इनमें नशीले पदार्थों के स्रोत, परिवहन के रास्ते, स्थानीय वितरण, बिक्री से जुड़े लोगों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल शामिल हो सकती है।

यदि किसी मामले में बड़े आपूर्तिकर्ताओं या संगठित नेटवर्क से जुड़े लोगों के संबंध में साक्ष्य मिलते हैं, तो जांच को आगे बढ़ाकर उनकी भूमिका निर्धारित की जा सकती है। इससे केवल मौके पर पकड़े गए व्यक्ति तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क की जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का बड़े तस्करी नेटवर्क से संबंध होने का निष्कर्ष केवल आशंका या संपर्क के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए साक्ष्य और कानूनी जांच आवश्यक है।

नशे की कमाई से बनाई गई संपत्तियों की होगी जांच

सरकार की कार्रवाई का एक प्रमुख पहलू नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से अर्जित धन और उससे बनाई गई संपत्तियों की जांच है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि तस्करी से प्राप्त कथित अवैध आय का उपयोग कहां किया गया और क्या उससे वाहन, जमीन, भवन या अन्य संपत्तियां खरीदी गईं।

इस काम के लिए एक विशेष समिति गठित करने की योजना बताई गई है, जिसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ वित्तीय और कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। समिति वित्तीय लेन-देन, निवेश और संबंधित संपत्तियों की जानकारी का परीक्षण करने में सहयोग कर सकती है।

वित्तीय जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी मामले में अवैध कारोबार से प्राप्त धन किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुंचा। बैंकिंग लेन-देन, उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

यदि किसी संपत्ति का अपराध से संबंध स्थापित होता है और संबंधित कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो सक्षम प्राधिकारी लागू कानून के तहत कुर्की या जब्ती की कार्रवाई कर सकता है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि संपत्ति की जांच, अस्थायी कुर्की, अंतिम जब्ती और संपत्ति का राजसात होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं। प्रत्येक मामले में लागू कानून, सक्षम प्राधिकारी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसलिए जांच शुरू होने मात्र से किसी व्यक्ति की संपत्ति स्वतः कुर्क नहीं हो जाती।

सरकार की रणनीति का महत्व इस बात में है कि नशे के कारोबार से अर्जित कथित अवैध धन के स्रोत और उपयोग की पहचान करके कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

 

एनडीपीएस एक्ट और सफेमा के तहत कार्रवाई की समीक्षा

नशे के अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम और सफेमा के अंतर्गत की गई कार्रवाइयों की समीक्षा पर भी जोर दिया है।

एनडीपीएस अधिनियम मादक और मन:प्रभावी पदार्थों से संबंधित अपराधों, जांच और दंडात्मक कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण कानूनी आधार प्रदान करता है। वहीं, सफेमा यानी अवैध व्यापार निवारण एवं तस्करी से अर्जित संपत्तियों के अधिग्रहण संबंधी कानून कुछ निर्धारित परिस्थितियों में अवैध गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान करता है।

इन कानूनों के तहत कार्रवाई के लिए संबंधित व्यक्ति, अपराध और संपत्ति के बीच कानूनी रूप से आवश्यक संबंध स्थापित करना तथा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। प्रत्येक मामले में केवल आरोप के आधार पर संपत्ति जब्त या अधिग्रहित नहीं की जा सकती।

सरकार की ओर से की जा रही समीक्षा का उद्देश्य लंबित मामलों की स्थिति समझना और उन मामलों में आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाना है, जिनमें कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाए जा सकते हैं।

मेडिकल स्टोरों पर निगरानी, नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर कार्रवाई

नशे के खिलाफ प्रस्तावित अभियान में मेडिकल स्टोरों की जांच भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार की योजना के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टरों के साथ समन्वय करके मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया जाएगा। विशेष रूप से प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाओं की बिक्री, नशीले कैप्सूलों के अवैध वितरण और नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंज एवं नीडल की गैरकानूनी बिक्री पर निगरानी रखी जाएगी।

स्कूलों और कॉलेजों के आसपास के क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य उन स्थानों की पहचान करना है, जहां नशीले पदार्थों की बिक्री या सेवन से संबंधित शिकायतें मिलती हैं।

हालांकि, सभी मेडिकल स्टोरों या दवाओं की बिक्री को संदेह की दृष्टि से देखना उचित नहीं होगा। वैध चिकित्सा उपयोग के लिए दवाओं की बिक्री और नियमों का उल्लंघन करके नशीली दवाओं का वितरण अलग-अलग स्थितियां हैं। कार्रवाई का आधार दवा संबंधी कानून, बिक्री के रिकॉर्ड, आवश्यक लाइसेंस और निरीक्षण में सामने आए तथ्य होने चाहिए।

यदि किसी मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित दवाओं की गैरकानूनी बिक्री के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए स्वास्थ्य एवं औषधि नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।

तीन महीने में कार्रवाई तेज करने का लक्ष्य

सरकार ने अगले तीन महीनों में अधिक से अधिक पात्र मामलों में कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत नशे की तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों, लंबित मामलों और न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों पर ध्यान दिया जाएगा।

तस्करी में प्रयुक्त वाहनों को कानून के अनुसार जब्त या राजसात करने और पात्र मामलों में नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, वाहन की जब्ती और अंतिम राजसात के लिए लागू कानूनी शर्तों तथा संबंधित प्राधिकारी की कार्रवाई का पालन आवश्यक है।

जिन मामलों में न्यायालय का आदेश या अन्य न्यायिक प्रक्रिया आवश्यक है, उन्हें संबंधित विशेष न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया है। लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए भी अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

तस्करी के दौरान पुलिस पर हमला करने वाले आरोपियों के विरुद्ध भी कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित अपराधों में कार्रवाई की जा सकेगी।

31 दिसंबर 2026 तक पुराने जब्त मादक पदार्थों के नष्टीकरण का लक्ष्य

सरकार ने पुराने जब्त नशीले पदार्थों के नष्टीकरण के लिए भी समय-सीमा निर्धारित की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 30 जून 2026 तक जब्त किए गए ऐसे मादक पदार्थ, जो छह महीने से अधिक पुराने हैं और जिनके निस्तारण की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उन्हें 31 दिसंबर 2026 तक नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस प्रक्रिया में न्यायालय से संबंधित औपचारिकताओं और प्रशासनिक कार्यवाही को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। जब्त मादक पदार्थों का नष्टीकरण निर्धारित नियमों और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

इस व्यवस्था से पुराने जब्त पदार्थों के मामलों को लंबित रखने के बजाय पात्र मामलों में उनका नियमानुसार निस्तारण करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जब्ती, सुरक्षित भंडारण और नष्टीकरण की प्रक्रिया का रिकॉर्ड बनाए रखना भी जरूरी होगा।

नशे के खिलाफ अभियान में आम लोगों की भूमिका

नशे के अवैध कारोबार की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध हेल्पलाइन ‘मानस’ के टोल फ्री नंबर 1933 का प्रचार किया जाएगा। इसके माध्यम से नागरिक नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार से संबंधित सूचनाएं साझा कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने तथा सोशल मीडिया के जरिए नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देने की योजना है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता, समय पर मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर उपचार संबंधी सहायता भी महत्वपूर्ण हैं।

नागरिकों को किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देते समय स्वयं जोखिम उठाने या आरोपित व्यक्ति से सीधे भिड़ने से बचना चाहिए। सूचना संबंधित अधिकृत एजेंसी तक पहुंचाना अधिक सुरक्षित तरीका है।

कार्रवाई का असर जमीन पर दिखना जरूरी

छत्तीसगढ़ सरकार की प्रस्तावित रणनीति में नशे के छोटे विक्रेताओं के साथ बड़े तस्करों, सप्लाई नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और मेडिकल स्टोरों से जुड़े संभावित उल्लंघनों की जांच पर जोर दिया गया है। अगले तीन महीनों में पात्र मामलों में कार्रवाई तेज करने तथा 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित श्रेणी के पुराने जब्त मादक पदार्थों के नष्टीकरण का लक्ष्य भी महत्वपूर्ण है।

इस अभियान की सफलता केवल गिरफ्तारियों या जब्त किए गए नशीले पदार्थों की संख्या से नहीं आंकी जानी चाहिए। बड़े नेटवर्क की पहचान, वित्तीय जांच, कानून के अनुसार संपत्तियों पर कार्रवाई, लंबित मामलों की प्रगति और युवाओं को नशे से बचाने के प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे।

नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश के लिए जरूरी है कि कार्रवाई साक्ष्य आधारित, पारदर्शी और कानून के अनुरूप हो। यदि जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, वित्तीय निगरानी और जन-जागरूकता को साथ लेकर अभियान चलाया जाता है, तो अवैध नशा कारोबार के नेटवर्क को कमजोर करने और समाज को इसके नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।