(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन भोपाल एवं विकास संचालनालय में अफसरों से ज्यादा कंसल्टेंट काम कर रहे हैं। बता दें कि सरकारी अफसरों की संख्या एक हजार है। वहीं कंसल्टेंट की संख्या 1100 से भी ज्यादा है। इन कंसल्टेंट पर विभाग हर महीने 8 करोड़ रुपए खर्च करता है। इतना ही नहीं। नगरीय निकायों में भी अलग से कंसल्टेंट नियुक्त हैं। केंद्र सरकार की मदद से प्रदेश में अमृत 2.0, हाउसिंग फॉर ऑल, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं चल रही हैं।
नगरीय प्रशासन में कंसल्टेंट की संख्या
नगरीय प्रशासन भोपाल एवं विकास संचालनालय में अफसरों से ज्यादा कंसल्टेंट काम कर रहे हैं।
बता दें कि सरकारी अफसरों की संख्या एक हजार है। वहीं कंसल्टेंट की संख्या 1100 से भी ज्यादा है।
कंसल्टेंट पर होने वाला खर्च
इन कंसल्टेंट पर विभाग हर महीने 8 करोड़ रुपए खर्च करता है।
इतना ही नहीं। नगरीय निकायों में भी अलग से कंसल्टेंट नियुक्त हैं।
नगरीय प्रशासन में कंसल्टेंट की भूमिका
केंद्र सरकार की मदद से प्रदेश में अमृत 2.0, हाउसिंग फॉर ऑल, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं चल रही हैं।
इन योजनाओं में कंसल्टेंट की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
- अमृत 2.0 योजना में सबसे ज्यादा कंसल्टेंट लगे हैं।
- निकायों में पेयजल, सीवेज और ग्रीन एरिया डेवलपमेंट के लिए अकेले अमृत 2.0 में 900 से ज्यादा कंसल्टेंट रखे गए हैं।
- इन सभी को हर महीने पांच करोड़ 92 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।
नगरीय प्रशासन में कंसल्टेंट की आवश्यकता
नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे का कहना है कि एक साल में 300 कंसल्टेंट बाहर किए गए हैं।
जिनका काम ठीक नहीं है, उन्हें हटाया जा रहा है। नगरीय प्रशासन में कंसल्टेंट की आवश्यकता है।

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