जानिए किन किन मंत्रियों पर लटक रही हटाए जाने की तलवार . . .

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम से बढ़ी हलचल, कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में

(सोनाली खरे)

भोपाल (साई)। भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर नए संगठनात्मक बदलावों की आहट के साथ ही मध्य प्रदेश की राजनीति में भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के गठन को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश से कई वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

हालांकि इस संभावित फेरबदल ने प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों की चिंता भी बढ़ा दी है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कई मंत्री नहीं चाहते कि उन्हें संगठन में ऐसी जिम्मेदारी मिले, जिसके चलते उन्हें राज्य सरकार का मंत्री पद छोड़ना पड़े। यही कारण है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अपनी मंशा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दी है।

राष्ट्रीय टीम के गठन से बढ़ी राजनीतिक हलचल

भाजपा संगठन में लंबे समय बाद बड़े स्तर पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में बनने वाली नई टीम में अनुभवी नेताओं और चुनावी रणनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है।

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मध्य प्रदेश भाजपा को संगठन का मजबूत गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि प्रदेश से कई नेताओं के नाम राष्ट्रीय टीम के लिए सामने आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, वरिष्ठ नेता प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह को लेकर हो रही है।

बताया जा रहा है कि पार्टी इन नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका देना चाहती है ताकि आगामी विधानसभा चुनावों में उनके अनुभव का उपयोग किया जा सके। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और भाजपा संगठन इन चुनावों को बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है।

मंत्री पद छोड़ने को लेकर असहजता

राजनीतिक सूत्रों की मानें तो जिन नेताओं के नाम राष्ट्रीय टीम में शामिल होने की संभावना है, वे फिलहाल प्रदेश सरकार में अपनी जिम्मेदारियों को जारी रखना चाहते हैं।

दरअसल भाजपा संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिलने के बाद नेताओं को सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई मंत्री यह नहीं चाहते कि उन्हें राज्य सरकार से बाहर होना पड़े।

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माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व को यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया है कि संबंधित नेता फिलहाल प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। खासकर वे नेता जो सरकार में प्रभावशाली विभाग संभाल रहे हैं, वे अपने राजनीतिक प्रभाव को प्रदेश में बनाए रखना चाहते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल पर खास नजर

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रह चुके हैं। संगठन और चुनाव प्रबंधन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। यही कारण है कि पार्टी उन्हें फिर से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका दे सकती है।

इसी तरह प्रहलाद पटेल को भी संगठनात्मक अनुभव वाला नेता माना जाता है। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव उन्हें पार्टी के लिए अहम बनाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनावों में अनुभवी नेताओं को संगठन में सक्रिय कर चुनावी रणनीति मजबूत करना चाहती है। ऐसे में मध्य प्रदेश के नेताओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

कुंवर विजय शाह को लेकर भी चर्चा

आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह का नाम भी संभावित राष्ट्रीय टीम की सूची में बताया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि किसी कानूनी या राजनीतिक परिस्थिति में उनका मंत्री पद प्रभावित होता है, तो पार्टी उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर आदिवासी वोट बैंक को साधने का प्रयास कर सकती है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भाजपा पिछले कुछ वर्षों से आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में संगठन में आदिवासी चेहरे को महत्व देना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलें

पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है। दतिया उपचुनाव की संभावनाओं के बीच उन्हें राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने की अटकलें तेज हैं।

सूत्रों के अनुसार पार्टी उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे बड़े पद पर जिम्मेदारी दे सकती है। इसके अलावा अगले महीने खाली होने वाली राज्यसभा सीटों के लिए भी उनका नाम संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है।

यदि ऐसा होता है तो डॉ. मिश्रा की सक्रियता पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ सकती है। भाजपा नेतृत्व उन्हें आक्रामक और रणनीतिक नेता के रूप में देखता है।

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विष्णुदत्त शर्मा और गणेश सिंह भी चर्चा में

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का नाम भी राष्ट्रीय संगठन की संभावित सूची में सामने आ रहा है। हालांकि माना जा रहा है कि वे संगठन से अधिक केंद्र सरकार में भूमिका चाहते हैं, लेकिन पार्टी यदि उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देती है तो वे इंकार नहीं करेंगे।

इसी तरह पांच बार के सांसद गणेश सिंह का नाम भी चर्चा में है। भाजपा संगठन अनुभवी सांसदों को संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर चुनावी रणनीति मजबूत करना चाहता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अब ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाना चाहती है जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत हो और जो अलग-अलग राज्यों में चुनावी अभियान को प्रभावी बना सकें।

महिला नेतृत्व को भी मिल सकता है अवसर

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में महिला नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। मध्य प्रदेश से किसी महिला नेत्री को राष्ट्रीय महासचिव स्तर की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

पार्टी पिछले कुछ वर्षों से महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। महिला वोट बैंक को मजबूत करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर महिला चेहरों को प्रमुखता देना भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति पर टिकी नजर

भाजपा में संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति को सबसे प्रभावशाली इकाइयों में गिना जाता है। पार्टी के बड़े फैसले इन्हीं मंचों से लिए जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार यदि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में शामिल किया जाता है, तो उनकी नजर इन शीर्ष समितियों में स्थान पाने पर रहेगी।

चर्चा यह भी है कि कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे नेताओं को संसदीय बोर्ड या केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल कर पार्टी उनका राजनीतिक कद और मजबूत कर सकती है। इससे मध्य प्रदेश की राजनीति में भी उनका प्रभाव बना रहेगा।

युवा नेताओं के लिए भी खुल सकते हैं रास्ते

नितिन नवीन की नई टीम में युवा चेहरों को भी मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। गौरव तिवारी, राहुल कोठारी और भक्ति शर्मा जैसे नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं।

इन नेताओं ने पूर्व में भाजपा युवा मोर्चा के साथ राष्ट्रीय स्तर पर काम किया है। ऐसे में संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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हालांकि राहुल कोठारी पहले से प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, इसलिए उनका राष्ट्रीय टीम में शामिल होना फिलहाल कठिन माना जा रहा है।

प्रदेश भाजपा को मिल सकता है नया प्रभारी

संगठनात्मक बदलावों के बीच मध्य प्रदेश भाजपा को नया प्रभारी और सहप्रभारी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि वर्तमान प्रभारी डॉ. महेंद्र यादव आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इसी कारण पार्टी मध्य प्रदेश के लिए नए प्रभारी की नियुक्ति कर सकती है।

वहीं सह प्रभारी सतीश उपाध्याय भी दिल्ली की राजनीति में व्यस्त हैं। ऐसे में संगठन किसी नए चेहरे को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंप सकता है।

राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है असर

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का असर केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका प्रभाव प्रदेश सरकार और राजनीतिक समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।

यदि वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर भेजा जाता है तो राज्य मंत्रिमंडल में भी बदलाव की संभावना बन सकती है। इससे नए नेताओं को अवसर मिलने का रास्ता खुल सकता है।

साथ ही आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन अनुभवी और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

जनता और कार्यकर्ताओं में बढ़ी उत्सुकता

भाजपा के संभावित संगठनात्मक फेरबदल को लेकर कार्यकर्ताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों में उत्सुकता बढ़ गई है।

पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि नई टीम आगामी चुनावों की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं प्रदेश स्तर पर नेताओं की नई भूमिकाएं भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय कर सकती हैं।

मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों संगठन और सत्ता के बीच संतुलन को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर पार्टी अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देकर चुनावी रणनीति मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कई नेता प्रदेश सरकार में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखना चाहते हैं।

आने वाले दिनों में भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि इससे मध्य प्रदेश की राजनीति में भी नए समीकरण बन सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, राज्यसभा की संभावनाएं और संगठन में नई नियुक्तियां आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम साबित होंगी।