(ब्यूरो कार्यालय)
रीवा (साई)।भारत को 2047 तक विश्वगुरू और आधुनिक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प केवल सरकारी योजनाओं या नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी असली शक्ति देश का युवा वर्ग है। इसी भावना को सशक्त शब्दों में व्यक्त करते हुए मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवाओं पर देश को विश्वगुरू बनाने की महती जिम्मेदारी है और उन्हें अपनी प्रतिभा, परिश्रम तथा देशभक्ति से इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए सतत प्रयास करना होगा।
राज्यपाल श्री पटेल यह विचार बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय,रीवा के तेरहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त कर रहे थे। यह समारोह न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि भारत के भविष्य को दिशा देने वाले विचारों का मंच भी बना।
भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। आज देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। ऐसे में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र और विश्वगुरू बनाने का संकल्प युवाओं की भागीदारी के बिना अधूरा है।
इसी पृष्ठभूमि में विश्वविद्यालयों और दीक्षांत समारोहों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां विद्यार्थी न केवल उपाधियाँ प्राप्त करते हैं, बल्कि जीवन की नई यात्रा का आरंभ भी करते हैं। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह इसी व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जुड़ा रहा।
वर्तमान स्थिति / Latest Developments
रीवा में आयोजित इस भव्य दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान कीं। साथ ही, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया।
मानद उपाधियाँ प्रदान की गईं:
- लेफ्टिनेंट जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह को डी.लिट. (Doctor of Literature)
- प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. युगल किशोर मिश्रा को डी.एस.ई. (Doctor of Science in Engineering)
इसके अतिरिक्त, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नव-निर्मित रिसर्च,इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया।
युवाओं को संदेश: दीक्षांत शपथ का आजीवन पालन
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल उपाधि प्राप्त कर संतुष्ट न हों, बल्कि दीक्षांत शपथ को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाएं। उन्होंने कहा कि:
- दीक्षांत शपथ नैतिकता और उत्तरदायित्व की याद दिलाती है
- इसका पालन जीवन भर किया जाना चाहिए
- शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है
उन्होंने शिक्षकों से भी अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ भारतीयता के संस्कार और जीवन जीने की कला सिखाएं।
भारतीय परंपरा और राष्ट्रीय चेतना पर बल
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता में निहित है।
उन्होंने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा रामायण पीठ की स्थापना की विशेष सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह पीठ:
- रामायण पर शोध को प्रोत्साहन देगी
- भारतीय दर्शन और संस्कृति को वैश्विक मंच प्रदान करेगी
- युवा शोधार्थियों को नए अवसर उपलब्ध कराएगी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीयता
राज्यपाल श्री पटेल ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को शिक्षा जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस नीति में:
- प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा
- आधुनिक विज्ञान और तकनीक
- कौशल विकास और नवाचार
का समन्वय किया गया है। इससे शिक्षा प्रणाली को भारतीयता का मजबूत आधार मिला है और विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कारों की भी शिक्षा मिल रही है।
संत महात्माओं का संदेश: एकता और सेवा
समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरदास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि:
- जात-पात और धर्म के भेद मिटाकर
- सच्चे मन से भारतीय बनकर
- भारत माता की सेवा करना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है
उन्होंने भारत के प्राचीन दर्शन और शिक्षा के महान संस्कारों को आत्मसात करने पर जोर दिया।
विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के समक्ष विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने विश्वविद्यालय का विस्तृत प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसमें:
- शैक्षणिक उपलब्धियाँ
- अनुसंधान कार्य
- अधोसंरचना विकास
- नवाचार और स्टार्टअप पहल
की जानकारी दी गई।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
इस दीक्षांत समारोह का प्रभाव केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा। इसके व्यापक प्रभाव देखे गए:
- युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना सुदृढ़ हुई
- शिक्षा में संस्कार और नवाचार के महत्व पर चर्चा बढ़ी
- विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदाता नहीं, बल्कि विचार केंद्र के रूप में उभरी
प्रशासनिक दृष्टि से यह कार्यक्रम राज्य में उच्च शिक्षा की दिशा और दशा को दर्शाने वाला रहा।
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
यदि व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो:
- भारत की युवा आबादी: लगभग 80 करोड़
- 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य: 22 वर्षों में
- उच्च शिक्षा में नामांकन में निरंतर वृद्धि
- रिसर्च और इनोवेशन पर बढ़ता सरकारी फोकस
ये सभी तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि युवाओं की भूमिका निर्णायक है। राज्यपाल का संदेश इसी यथार्थ को रेखांकित करता है।
आम जनता पर असर
इस प्रकार के कार्यक्रमों का सीधा प्रभाव समाज पर भी पड़ता है:
- अभिभावकों में शिक्षा के प्रति विश्वास बढ़ता है
- विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य और दिशा मिलती है
- समाज में सकारात्मक संवाद और प्रेरणा का वातावरण बनता है
रीवा और आसपास के क्षेत्रों में इस समारोह को लेकर उत्साह और गौरव की भावना देखी गई।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
आने वाले समय में अपेक्षा है कि:
- विश्वविद्यालय रिसर्च और इनोवेशन को और गति देगा
- रामायण पीठ से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध को बढ़ावा मिलेगा
- युवा शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे
यदि युवा वर्ग राज्यपाल के संदेश को आत्मसात करता है, तो 2047 का विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है।
🧾 Conclusion / निष्कर्ष
रीवा में आयोजित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का संदेश देने वाला मंच बना। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने युवाओं को देश को विश्वगुरू बनाने की महती जिम्मेदारी का अहसास कराया और यह स्पष्ट किया कि भारत का भविष्य उसकी युवा शक्ति के हाथों में है।
शिक्षा, संस्कार, नवाचार और भारतीयता के समन्वय से ही भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर हो सकता है। यह समारोह युवाओं के लिए प्रेरणा, दिशा और संकल्प का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज हुआ।

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