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उत्तराखण्ड पुलिस को मिली नई पहचान, CM धामी ने किया नए ध्वज, प्रतीक चिह्न और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण; 6 नवंबर को मिलेगा राष्ट्रपति पुलिस कलर

October 31, 2026
महेश रावलानी

(ब्यूरो कार्यालय)

देहरादून (साई)। उत्तराखण्ड पुलिस की पहचान अब नए स्वरूप में नजर आएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। पुलिस के नए गौरव चिह्नों को राज्य की भौगोलिक पहचान, राष्ट्रीय गौरव, सत्य, न्याय, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के भावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

उत्तराखण्ड पुलिस के लिए यह बदलाव केवल ध्वज और वर्दी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस बल की संस्थागत पहचान, गौरवशाली परंपराओं और भविष्य की जिम्मेदारियों को नए सिरे से रेखांकित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि पुलिस की नई पहचान का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब आम नागरिकों को पुलिस के व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्यप्रणाली में दक्षता और कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई दे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि नए प्रतीक गौरव के साथ जिम्मेदारी का भी एहसास कराते हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और स्मार्ट पुलिसिंग को समय की आवश्यकता बताते हुए पुलिस बल को अधिक सक्षम और दक्ष बनाने की राज्य सरकार की प्राथमिकता दोहराई।

7. ARTICLE BODY

उत्तराखण्ड पुलिस के गौरवशाली इतिहास को मिला नया स्वरूप

उत्तराखण्ड पुलिस ने अपनी संस्थागत पहचान में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नया ध्वज और प्रतीक चिह्न अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किए गए अनावरण के साथ ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की वर्दी पर उपयोग किए जाने वाले फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी नया स्वरूप प्रदान किया गया है।

इस पहल का उद्देश्य पुलिस बल की परंपराओं और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। पुलिस की पहचान केवल उसके पद, वर्दी और अधिकारों से नहीं बनती, बल्कि जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा भावना भी उसकी संस्थागत प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण आधार होती है।

मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में कहा कि नए गौरव चिह्न पुलिस के प्रत्येक अधिकारी और जवान को अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाएंगे। उनके अनुसार, वर्दी का सम्मान आचरण से और जनता का विश्वास सेवा से मजबूत होता है।

यह संदेश पुलिस प्रशासन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नागरिकों के साथ पुलिस का प्रत्यक्ष संपर्क कानून व्यवस्था, शिकायतों के निराकरण, अपराध नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में होता है।

गहरे नीले रंग में होगा उत्तराखण्ड पुलिस का नया ध्वज

उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज में सबसे प्रमुख बदलाव इसकी पृष्ठभूमि के रंग और प्रतीक चिह्न को लेकर किया गया है।

पूर्व में प्रचलित तीन रंगों वाले क्षैतिज पुलिस ध्वज के स्थान पर अब गहरे नीले रंग की पृष्ठभूमि वाला नया ध्वज अपनाया गया है। इसके मध्य में उत्तराखण्ड पुलिस का नवीन प्रतीक चिह्न स्थापित किया गया है। ध्वज में लाल और स्वर्णिम किनारों को भी शामिल किया गया है।

नए ध्वज की डिजाइन में पुलिस बल की संस्थागत पहचान और गौरव को प्रमुखता दी गई है। मध्य में स्थापित प्रतीक चिह्न उत्तराखण्ड की विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ राष्ट्रीय गौरव के भाव को भी प्रदर्शित करता है।

ध्वज किसी भी पुलिस संगठन के लिए केवल पहचान का माध्यम नहीं होता, बल्कि वह उसके अनुशासन, एकजुटता, कर्तव्य और संस्थागत परंपराओं का प्रतिनिधित्व भी करता है।

उत्तराखण्ड पुलिस के नए ध्वज में इन भावों को समाहित करने का प्रयास किया गया है। आने वाले समय में पुलिस के औपचारिक कार्यक्रमों, परेड और अन्य निर्धारित अवसरों पर यह नई पहचान दिखाई देगी।

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ से लेकर हिमालय और नदी तक शामिल

उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन प्रतीक चिह्न को विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें राष्ट्रीय प्रतीकों और राज्य की प्राकृतिक पहचान को एक साथ स्थान दिया गया है।

नए पुलिस लोगो में निम्नलिखित प्रमुख तत्व शामिल किए गए हैं:

  • अशोक स्तंभ: भारत की राष्ट्रीय पहचान, संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक।
  • सत्यमेव जयते: सत्य की विजय और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश।
  • स्वर्णिम लॉरेल रीथ: उत्कृष्टता, उपलब्धि और गौरव का प्रतीक।
  • हिमालय: उत्तराखण्ड की भौगोलिक पहचान, प्राकृतिक विरासत और विशिष्ट पर्वतीय स्वरूप का प्रतिनिधित्व।
  • नदी: प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और जीवनदायिनी जलधाराओं की पहचान।

इन सभी प्रतीकों को एक साथ शामिल करने के पीछे उत्तराखण्ड पुलिस की राष्ट्रीय जिम्मेदारी और राज्य की विशिष्ट पहचान को प्रदर्शित करने का उद्देश्य दिखाई देता है।

अशोक स्तंभ और सत्यमेव जयते जहां राष्ट्रीय मूल्यों तथा सत्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, वहीं हिमालय और नदी राज्य की प्राकृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं को रेखांकित करते हैं।

इस प्रकार नया प्रतीक चिह्न पुलिस संगठन की पहचान को उत्तराखण्ड की विशिष्टता के साथ जोड़ता है।

‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ होगा उत्तराखण्ड पुलिस का नया ध्येय वाक्य

उत्तराखण्ड पुलिस के नए गौरव चिह्नों के साथ उसके ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ को भी विशेष महत्व दिया गया है।

यह ध्येय वाक्य तीन प्रमुख मूल्यों को सामने रखता है:

  1. कर्म: अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण, जिम्मेदारी और कार्यनिष्ठा।
  2. सत्यं: सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और निष्पक्षता।
  3. शौर्यम्: साहस, दृढ़ता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कर्तव्य पालन।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पुलिस के प्रत्येक अधिकारी और जवान को इन आदर्शों को अपने आचरण और कार्यशैली में आत्मसात करना होगा।

पुलिस बल के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस पुलिस की कार्यप्रणाली के महत्वपूर्ण आधार होते हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, नए प्रतीक चिह्नों का सम्मान तभी सार्थक होगा, जब पुलिसकर्मी इन मूल्यों को अपने दैनिक कार्यों में भी प्रदर्शित करेंगे।

पारंपरिक खाकी वर्दी को दिया गया नया सेरेमोनियल स्वरूप

उत्तराखण्ड पुलिस की नई पहचान में सेरेमोनियल वर्दी भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। पारंपरिक खाकी परिधान को बरकरार रखते हुए इसमें बहुरंगी सेरेमोनियल सैश, अलंकरण और परेड के लिए विशेष साज-सज्जा को शामिल किया गया है।

इस बदलाव का उद्देश्य पुलिस की पारंपरिक वर्दी और औपचारिक आयोजनों की गरिमा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।

नई सेरेमोनियल वर्दी को विशेष रूप से औपचारिक कार्यक्रमों, परेड और अन्य निर्धारित समारोहों के लिए तैयार किया गया है। इसके माध्यम से पुलिस बल की एकरूपता, अनुशासन और संस्थागत गौरव को प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की वर्दी पर लगाए जाने वाले फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी नए प्रतीक चिह्न के अनुरूप तैयार किया गया है।

इससे पुलिस के अलग-अलग पदों और संरचनाओं की पहचान में एकरूपता स्थापित करने में मदद मिलेगी।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सेरेमोनियल वर्दी में बदलाव पुलिस की नियमित परिचालन संबंधी जिम्मेदारियों से अलग है। इसका मुख्य संबंध औपचारिक अवसरों और पुलिस बल की संस्थागत प्रस्तुति से है।

4 अप्रैल 2008 को हुआ था पुलिस ध्वज का पूर्व अनावरण

उत्तराखण्ड पुलिस के ध्वज का अनावरण इससे पहले 4 अप्रैल 2008 को किया गया था। इसके बाद बदलती परिस्थितियों, पुलिस बल के बढ़ते दायित्वों और नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अब इसके गौरव चिह्नों एवं प्रतीकों को नया स्वरूप प्रदान किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन प्रतीकों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 21 अक्टूबर 2026 को अनुमोदन प्रदान किया था। इसके बाद 31 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में इनका औपचारिक अनावरण किया गया।

इस बदलाव को पुलिस संगठन की पहचान को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है।

वर्तमान समय में पुलिस की जिम्मेदारियां पारंपरिक कानून व्यवस्था बनाए रखने से कहीं आगे बढ़ चुकी हैं। साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी, संगठित अपराध, यातायात प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा जैसी चुनौतियों के कारण पुलिस बल को लगातार अपनी कार्यप्रणाली विकसित करनी पड़ रही है।

ऐसे में संस्थागत प्रतीकों का आधुनिकीकरण पुलिस संगठन के भीतर एकरूपता और गौरव की भावना को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है।

स्मार्ट पुलिसिंग और आधुनिक तकनीक पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, अधिक प्रशिक्षित, दक्ष और सक्षम बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

स्मार्ट पुलिसिंग का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

आज पुलिस के सामने कई ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका समाधान केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है। डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बढ़ते स्वरूप ने पुलिस के सामने नई आवश्यकताएं पैदा की हैं।

इसके अलावा पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड में भौगोलिक परिस्थितियां भी पुलिस प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती हैं। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखना, आपात परिस्थितियों में सहायता पहुंचाना और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।

ऐसी परिस्थितियों में आधुनिक संचार व्यवस्था, तकनीकी संसाधन, प्रशिक्षण और बेहतर समन्वय पुलिस की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।

हालांकि स्मार्ट पुलिसिंग की सफलता का आकलन केवल नई तकनीक या आधुनिक प्रतीकों से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं, शिकायतों के समाधान और कानून के निष्पक्ष क्रियान्वयन से भी किया जाएगा।

6 नवंबर को अमित शाह करेंगे राष्ट्रपति पुलिस कलर से अलंकृत

उत्तराखण्ड पुलिस के लिए आगामी 6 नवंबर 2026 का दिन विशेष महत्व रखने वाला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इस अवसर पर उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से अलंकृत करेंगे।

यह सम्मान पुलिस संगठन के लिए विशेष गौरव का विषय माना जाता है।

राष्ट्रपति पुलिस कलर किसी पुलिस बल को प्रदान किया जाने वाला विशिष्ट संस्थागत सम्मान है। यह संगठन की सेवा परंपरा, कर्तव्यनिष्ठा और कार्यों की मान्यता से जुड़ा होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर उत्तराखण्ड पुलिस के जवान अपनी नवीन सेरेमोनियल वर्दी में परेड में प्रतिभाग करेंगे।

इस प्रकार 6 नवंबर का कार्यक्रम पुलिस के नए प्रतीकों और औपचारिक वर्दी को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर भी बनेगा।

उत्तराखण्ड पुलिस के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें संगठन की नई पहचान के साथ उसकी संस्थागत उपलब्धियों और सेवा परंपराओं को भी सामने रखा जाएगा।

राष्ट्रीय एकता दिवस पर अनावरण का विशेष महत्व

उत्तराखण्ड पुलिस के नए गौरव चिह्नों का अनावरण राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर किया गया। राष्ट्रीय एकता दिवस भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

सरदार पटेल को देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका के लिए याद किया जाता है। स्वतंत्रता के बाद विभिन्न रियासतों के एकीकरण में उनके योगदान के कारण उन्हें राष्ट्रीय एकता का शिल्पकार भी कहा जाता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर पुलिस के नए प्रतीकों का अनावरण राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

पुलिस व्यवस्था का भी देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। ऐसे में राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम पुलिस संगठन की जिम्मेदारियों और आदर्शों को रेखांकित करता है।

मुख्यमंत्री ने पुलिस के व्यवहार और निष्पक्षता पर दिया जोर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि पुलिस की नई पहचान का वास्तविक सम्मान उसके व्यवहार और कार्यप्रणाली से ही सुनिश्चित होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को पुलिस के व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्यप्रणाली में दक्षता और कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई देनी चाहिए।

यह बात पुलिस सुधार और जनविश्वास के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।

आम नागरिकों का पुलिस से सबसे अधिक संपर्क शिकायत दर्ज कराने, विवादों के निराकरण, अपराध की जांच, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा से संबंधित मामलों में होता है।

ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई वर्दी और प्रतीक चिह्न पुलिस बल के गौरव को प्रदर्शित कर सकते हैं, लेकिन नागरिकों के लिए पुलिस की वास्तविक पहचान उसके कामकाज से ही बनती है।

इसी कारण मुख्यमंत्री ने नए प्रतीकों के साथ पुलिसकर्मियों के आचरण और सेवा भावना को भी महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में शासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड शासन और पुलिस विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, महानिदेशक पी.वी.के. प्रसाद, महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन, सचिव दिलीप जावलकर, आर. राजेश कुमार, पंकज पांडेय तथा पुलिस महानिरीक्षक मती रिधिम अग्रवाल सहित शासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।

पुलिस की नई पहचान के सामने होंगी जनविश्वास और कार्यक्षमता की अपेक्षाएं

उत्तराखण्ड पुलिस के नए ध्वज, लोगो और सेरेमोनियल वर्दी के अनावरण के बाद अब पुलिस संगठन के सामने अपनी नई पहचान के अनुरूप कार्यसंस्कृति को और मजबूत करने की अपेक्षा रहेगी।

किसी भी पुलिस संगठन की प्रतिष्ठा उसके प्रतीकों के साथ-साथ नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं से भी जुड़ी होती है।

पुलिस बल के लिए अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम, यातायात प्रबंधन और आपदा के समय त्वरित सहायता जैसे विषय लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

उत्तराखण्ड की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन और दूरस्थ क्षेत्रों तक पुलिस सहायता पहुंचाना भी विशेष महत्व रखता है।

नई पहचान के साथ पुलिस के प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और जनसंपर्क व्यवस्था में होने वाला सुधार आने वाले समय में इस पहल की उपयोगिता को स्पष्ट करेगा।

‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ का संदेश भी इसी दिशा में पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

उत्तराखण्ड पुलिस के लिए 31 अक्टूबर 2026 का दिन संस्थागत पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नए पुलिस ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण कर पुलिस बल को नया स्वरूप प्रदान किया।

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ, सत्यमेव जयते, स्वर्णिम लॉरेल रीथ, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। वहीं ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ का नया ध्येय वाक्य पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस का संदेश देता है।

अब सभी की निगाहें 6 नवंबर 2026 को होने वाले उस महत्वपूर्ण समारोह पर रहेंगी, जिसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस कलर से अलंकृत करेंगे।

नई पहचान के साथ उत्तराखण्ड पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा यही रहेगी कि वह अपने गौरव, अनुशासन और सेवा भावना को नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, निष्पक्ष कार्रवाई और प्रभावी कानून व्यवस्था के माध्यम से भी प्रदर्शित करे।

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