बिजली चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 23 प्रकरण दर्ज; मीटर से छेड़छाड़ से लेकर स्मार्ट मीटर बाईपास तक मामले सामने आए

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिवनी संभाग में बिजली के अवैध उपयोग और विद्युत चोरी के खिलाफ चलाए गए विशेष जांच अभियान में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सिवनी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में की गई आकस्मिक जांच के दौरान बिजली उपयोग से जुड़ी कई अनियमितताएं पाई गईं। विभाग के अनुसार कुल 23 मामलों में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जांच में मीटर से छेड़छाड़, सर्विस लाइन में कट, अवैध अर्थिंग, घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग, स्मार्ट मीटर बाईपास और स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग जैसी अनियमितताएं सामने आईं।

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में बिजली के अवैध उपयोग और चोरी के खिलाफ बिजली विभाग ने जांच अभियान चलाया। 6 अक्टूबर 2026 को सिवनी शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में की गई आकस्मिक जांच के दौरान विद्युत उपयोग से जुड़ी कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं। विभागीय जानकारी के अनुसार जांच में कुल 23 मामलों में अनियमितताएं पाए जाने पर नियमानुसार प्रकरण पंजीकृत किए गए।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिजली के अवैध उपयोग को रोकने के लिए विभाग की ओर से निगरानी और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान की खास बात यह रही कि जांच में केवल पारंपरिक मीटर से छेड़छाड़ के मामले ही नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर को बाईपास करने और स्वीकृत भार से अधिक विद्युत उपयोग जैसी अनियमितताएं भी सामने आईं।

पांच विशेष जांच टीमों ने की आकस्मिक जांच

विभागीय प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह विशेष अभियान अधीक्षण अभियंता (संचा./संधा.) वृत्त सिवनी पी.के. गेडाम और कार्यपालन अभियंता (संचा./संधा.) संभाग सिवनी आर.एस. डावर के निर्देशन में चलाया गया।

अभियान के लिए कुल 5 विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों का नेतृत्व सिवनी संभाग में पदस्थ सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं द्वारा किया गया। टीमों ने सिवनी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक चेकिंग की।

विभाग का उद्देश्य विद्युत के अवैध उपयोग और चोरी पर रोक लगाना तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करना बताया गया है।

मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी का मामला

जांच के दौरान विद्युत मीटर से छेड़छाड़ के मामले भी सामने आए। विभाग के अनुसार कुछ मामलों में मीटर के पीछे छेद कर उसकी गति को धीमा करने और बिजली की वास्तविक खपत को कम दर्ज कराने का प्रयास पाया गया।

मीटर में इस प्रकार की छेड़छाड़ विद्युत चोरी से जुड़ी गंभीर अनियमितता मानी जाती है। विभाग ने ऐसे मामलों को जांच के दायरे में लेते हुए संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई की है।

सर्विस लाइन में कट लगाकर बिजली का उपयोग

जांच अभियान के दौरान मुख्य सर्विस लाइन में सीधे कट लगाकर बिजली के अवैध उपयोग का मामला भी सामने आया। विभागीय प्रेस विज्ञप्ति में इसे जांच के दौरान पाई गई प्रमुख अनियमितताओं में शामिल किया गया है।

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सर्विस लाइन में इस प्रकार का अनधिकृत हस्तक्षेप बिजली की सामान्य आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करने के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर हो सकता है। विभाग ने ऐसे मामलों में भी विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।

अवैध अर्थिंग के जरिए बाईपास

जांच में घरों में अतिरिक्त अर्थिंग बनाकर सीधे बाईपास के माध्यम से बिजली का अनधिकृत उपयोग किए जाने की अनियमितता भी सामने आई।

विभाग ने इसे बिजली के अवैध उपयोग से संबंधित मामलों में शामिल किया है। इस तरह की गतिविधियों को लेकर विभाग की जांच का दायरा केवल मीटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिजली आपूर्ति की पूरी व्यवस्था से जुड़े संभावित अनधिकृत तरीकों की भी जांच की गई।

घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग

विशेष जांच के दौरान घरेलू विद्युत कनेक्शन का गैर-घरेलू या व्यावसायिक कार्यों के लिए उपयोग किए जाने के मामले भी पाए गए।

किसी उपभोक्ता को जिस श्रेणी के लिए विद्युत कनेक्शन स्वीकृत किया गया है, उसके विपरीत उपयोग करना नियमों के दायरे में आता है। विभागीय जांच में इस तरह की अनियमितता भी दर्ज की गई और संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली कनेक्शन की श्रेणी और उपयोग के बीच अंतर होने पर विभागीय स्तर पर अतिरिक्त जांच और नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।

स्मार्ट मीटर बाईपास ने बढ़ाई चिंता

बिजली चोरी की जांच में स्मार्ट मीटर को बाईपास कर बिजली का उपयोग किए जाने के मामले भी सामने आए। आधुनिक विद्युत व्यवस्था में स्मार्ट मीटर का उपयोग बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाता है।

ऐसे में स्मार्ट मीटर को बाईपास करने की कोशिश विभाग के लिए गंभीर अनियमितता का विषय है। प्रेस विज्ञप्ति में स्मार्ट मीटर बाईपास को भी जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताओं में शामिल किया गया है।

इससे यह भी संकेत मिलता है कि बिजली के अवैध उपयोग की जांच अब केवल पुराने प्रकार की मीटर छेड़छाड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े मामलों पर भी विभाग की नजर है।

स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग

जांच अभियान के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें उपभोक्ताओं द्वारा स्वीकृत विद्युत भार से अधिक भार का उपयोग किया जा रहा था।

किसी कनेक्शन के लिए स्वीकृत भार से अधिक विद्युत उपयोग स्थानीय वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। विभाग ने ऐसे मामलों को भी जांच के दायरे में शामिल किया और नियमानुसार कार्रवाई की।

जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताएं

विभागीय जानकारी के अनुसार अभियान में मुख्य रूप से ये मामले सामने आए—

  • विद्युत मीटर से छेड़छाड़।
  • मुख्य सर्विस लाइन में कट लगाकर बिजली का उपयोग।
  • अतिरिक्त अर्थिंग के माध्यम से बाईपास।
  • घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग।
  • स्मार्ट मीटर को बाईपास करना।
  • स्वीकृत भार से अधिक विद्युत भार का उपयोग।
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23 प्रकरणों में विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई

सिवनी शहर में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कुल 23 मामलों में अनियमितताएं पाए जाने की जानकारी विभाग ने दी है। इन मामलों में नियमानुसार प्रकरण पंजीकृत किए गए।

विभागीय प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इन मामलों में विद्युत अधिनियम की धारा 135, 138 और 126 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की गई।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रत्येक प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित मामले के तथ्यों और सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई पर निर्भर करेगी। उपलब्ध विभागीय सूचना में 23 प्रकरण दर्ज किए जाने और संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।

कार्रवाई में अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

विशेष जांच अभियान में बिजली विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। विभागीय जानकारी के अनुसार सहायक अभियंता संदीप डोडे, नीलेश कुमार उइके, जगदीश प्रसाद परिहार और भूपाल सिंह उइके, कनिष्ठ अभियंता शरदेन्दु पांडे और मुकेश मर्सकोले सहित अन्य कर्मचारी कार्रवाई में शामिल रहे।

सिवनी शहर के लाइन कर्मचारियों और कार्यालयीन स्टाफ ने भी अभियान में सहयोग किया। इनमें मोहन सिंह बघेल, आनंद पटले, पवन शरणागत, सीमा सनोडिया, अंजूलता जॉवरे, ज्योतेश्वरी पटले, दीपा ठाकुर और कोमेन्द्र भरने सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

आगे भी जारी रहेगा जांच अभियान

बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि सिवनी संभाग में विद्युत के अवैध उपयोग और चोरी को रोकने के लिए जांच अभियान क्रमबद्ध रूप से आगे भी जारी रहेगा।

इस घोषणा के बाद यह साफ है कि 6 अक्टूबर को की गई जांच को विभाग एक नियमित और व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में भी अलग-अलग क्षेत्रों में आकस्मिक जांच किए जाने की संभावना है।

हालांकि, भविष्य में कितने मामले सामने आएंगे और किन मामलों में किस स्तर की कार्रवाई होगी, इसका आकलन अभी नहीं किया जा सकता। उपलब्ध विभागीय सूचना केवल वर्तमान जांच और दर्ज किए गए 23 प्रकरणों तक सीमित है।

बिजली चोरी सिर्फ राजस्व का मुद्दा नहीं

बिजली चोरी को अक्सर विभागीय राजस्व के नुकसान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका असर इससे व्यापक हो सकता है। मीटर से छेड़छाड़, सर्विस लाइन में अनधिकृत कट या बिजली व्यवस्था को बाईपास करने की कोशिश वितरण प्रणाली की सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती है।

विद्युत व्यवस्था में किसी भी तरह का अनधिकृत हस्तक्षेप दुर्घटना का जोखिम पैदा कर सकता है। वहीं स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग करने पर स्थानीय वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।

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इस लिहाज से बिजली चोरी और अवैध उपयोग पर कार्रवाई का संबंध केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं, बल्कि सुरक्षित विद्युत आपूर्ति से भी है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या जरूरी?

बिजली उपभोक्ताओं को अपने कनेक्शन का उपयोग निर्धारित श्रेणी और स्वीकृत भार के अनुसार करना चाहिए। यदि मीटर, बिल, कनेक्शन की श्रेणी या स्वीकृत भार से संबंधित कोई समस्या है तो उसका समाधान विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाना अधिक उचित है।

मीटर में छेड़छाड़, सर्विस लाइन में कट, बाईपास या किसी अन्य अनधिकृत तरीके से बिजली का उपयोग करने के बजाय उपभोक्ताओं को विभाग से संपर्क कर अपनी समस्या का वैध समाधान कराना चाहिए।

सिवनी में हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि विभाग ऐसे मामलों की जांच को गंभीरता से ले रहा है।

विभाग की सख्ती से क्या संदेश?

एक ही दिन के अभियान में 23 प्रकरण दर्ज होने की विभागीय जानकारी से यह संकेत मिलता है कि सिवनी संभाग में बिजली के अवैध उपयोग और चोरी के खिलाफ निगरानी को सक्रिय रखा गया है।

विशेष रूप से स्मार्ट मीटर बाईपास जैसे मामले सामने आने से यह भी स्पष्ट होता है कि जांच का दायरा बदलती तकनीक के साथ बदल रहा है। बिजली चोरी के पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है।

आगे क्रमबद्ध जांच अभियान जारी रखने की विभागीय घोषणा के बाद बिजली उपभोक्ताओं के लिए नियमों के अनुरूप विद्युत उपयोग करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिवनी में 6 अक्टूबर 2026 को बिजली चोरी और अवैध विद्युत उपयोग के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान में 23 प्रकरण दर्ज किए गए। विभागीय जांच में मीटर से छेड़छाड़, सर्विस लाइन में कट, अवैध अर्थिंग, घरेलू कनेक्शन के व्यावसायिक उपयोग, स्मार्ट मीटर बाईपास और स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग जैसी अनियमितताएं सामने आने की जानकारी दी गई है।

विभाग ने संबंधित मामलों में विद्युत अधिनियम की धारा 135, 138 और 126 के तहत कार्रवाई की है। साथ ही सिवनी संभाग में बिजली के अवैध उपयोग और चोरी को रोकने के लिए जांच अभियान आगे भी क्रमबद्ध रूप से जारी रखने की बात कही है।

इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि विद्युत कनेक्शन का उपयोग स्वीकृत नियमों और निर्धारित भार के अनुसार किया जाए। अनधिकृत तरीके से बिजली का उपयोग न केवल कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है, बल्कि विद्युत सुरक्षा और वितरण व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।

बिजली विभाग की ओर से जारी संदेश के अनुसार—

“बिजली की बचत ही, बिजली का उत्पादन है।”