मानसून के साथ बढ़ जाती हैं विद्युत दुर्घटनाओं की आशंकाएं
(अशोक सोनी)
सिवनी (साई)।मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत और किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आता है, वहीं यह मौसम कई तरह के जोखिम भी साथ लेकर आता है। तेज बारिश, आंधी और तूफान के दौरान बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, सिवनी ने नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
विद्युत विभाग ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों, हाईटेंशन और लो टेंशन विद्युत लाइनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। विभाग का कहना है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
सिवनी विद्युत विभाग ने जारी की महत्वपूर्ण एडवाइजरी
मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के कार्यपालन अभियंता (संचालन एवं संधारण) श्री सुभाष राय ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि बरसात के दौरान विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
विभाग ने विशेष रूप से निम्न सावधानियां बरतने की सलाह दी है—
- बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- हाईटेंशन और एलटी लाइनों के नीचे खड़े न हों।
- पालतू पशुओं को बिजली के खंभों या स्टे वायर से न बांधें।
- टूटे या लटकते तारों के पास जाने से बचें।
- किसी भी विद्युत दुर्घटना की सूचना तुरंत विभाग को दें।
इन सावधानियों का पालन कर कई गंभीर हादसों से बचा जा सकता है।
बारिश के दौरान क्यों बढ़ जाता है करंट लगने का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान पानी बिजली का अच्छा संवाहक बन जाता है। बारिश के कारण यदि कोई तार टूटकर जमीन पर गिर जाता है या किसी खंभे में करंट प्रवाहित हो जाता है, तो आसपास का क्षेत्र भी खतरनाक हो सकता है।
ऐसी स्थिति में—
- पानी से भरे गड्ढों में करंट फैल सकता है।
- खंभों के आसपास की जमीन में विद्युत प्रवाह हो सकता है।
- खराब वायरिंग वाले घरों में करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
- बिजली के उपकरणों के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
यही कारण है कि मानसून के दौरान विद्युत सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
गीले हाथों से बिजली उपकरणों को छूना हो सकता है खतरनाक
विद्युत विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बारिश के दौरान गीले हाथों या नंगे पैर किसी भी विद्युत उपकरण, तार, स्विच बोर्ड या बिजली के कनेक्शन को नहीं छूना चाहिए।
कई बार लोग छोटे-मोटे विद्युत कार्य स्वयं करने का प्रयास करते हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- गीले हाथों से स्विच ऑन या ऑफ नहीं करना चाहिए।
- नंगे पैर विद्युत उपकरणों के पास नहीं जाना चाहिए।
- गीले कपड़ों में बिजली संबंधी काम करने से बचना चाहिए।
- खराब तारों को स्वयं ठीक करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
जलभराव वाले स्थानों पर रखें विशेष सावधानी
मानसून के दौरान शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन जाती है। ऐसे स्थानों पर बिजली के खंभों के पास जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
यदि किसी स्थान पर पानी जमा है और उसके आसपास बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर या टूटे तार मौजूद हैं, तो वहां जाने से बचना चाहिए।
विद्युत विभाग ने लोगों से अपील की है कि—
- जलभराव वाले क्षेत्रों में बच्चों को खेलने न दें।
- बिजली के खंभों के पास जमा पानी से दूर रहें।
- पानी में पड़े तार को छूने की कोशिश न करें।
- ऐसे स्थानों पर रखे विद्युत उपकरणों का उपयोग न करें।
घरों की वायरिंग और अर्थिंग की जांच क्यों है जरूरी?
बरसात के मौसम में घरों की पुरानी और खराब वायरिंग कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन जाती है। घरों की छत या दीवारों से होने वाला पानी का रिसाव बिजली के संपर्क में आने पर गंभीर हादसों को जन्म दे सकता है।
विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे समय-समय पर प्रमाणित इलेक्ट्रीशियन से—
- घरेलू वायरिंग की जांच कराएं।
- कमजोर अर्थिंग को ठीक कराएं।
- ढीले कनेक्शनों की मरम्मत कराएं।
- पुराने और क्षतिग्रस्त तारों को बदलवाएं।
यह छोटी-सी सावधानी बड़े हादसों को रोक सकती है।
आईएसआई मार्क वाले तार और एमसीबी का उपयोग क्यों आवश्यक?
बिजली विभाग ने कहा है कि घरों में केवल मानक गुणवत्ता वाले आईएसआई मार्क विद्युत तारों का उपयोग किया जाना चाहिए। निम्न गुणवत्ता वाले तार कई बार शॉर्ट सर्किट और आग लगने का कारण बनते हैं।
इसके अलावा घरों में—
- मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) लगाना चाहिए।
- उचित अर्थिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
- ओवरलोडिंग से बचना चाहिए।
- पुराने विद्युत उपकरणों की जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरण विद्युत दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम कर देते हैं।
टूटे तार दिखाई दें तो क्या करें?
बरसात के दौरान तेज हवा और तूफान की वजह से कई बार बिजली के तार टूटकर सड़कों या खेतों में गिर जाते हैं। ऐसे तार अत्यंत खतरनाक होते हैं क्योंकि उनमें विद्युत प्रवाह जारी रह सकता है।
विद्युत विभाग ने नागरिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं—
- टूटे हुए तारों के पास न जाएं।
- तार को हटाने की कोशिश न करें।
- दूसरों को भी उस स्थान से दूर रखें।
- तुरंत विद्युत विभाग को सूचना दें।
विशेषज्ञों के अनुसार कई हादसे केवल इसलिए होते हैं क्योंकि लोग गिरे हुए तारों को सामान्य समझ लेते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक रहती है चुनौती
सिवनी जिले का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे क्षेत्रों में मानसून के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों तक पहुंचना कई बार कठिन हो जाता है।
तेज बारिश और तूफान के कारण—
- बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
- पेड़ों की शाखाएं तारों पर गिर सकती हैं।
- बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।
- दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जनजागरूकता से कम हो सकते हैं हादसे
विद्युत विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश विद्युत दुर्घटनाएं लापरवाही और जागरूकता की कमी के कारण होती हैं।
यदि लोग सुरक्षा नियमों का पालन करें तो—
- करंट लगने की घटनाएं कम हो सकती हैं।
- विद्युत आगजनी की घटनाओं में कमी आ सकती है।
- बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है।
- मानसून के दौरान होने वाली जानहानि को रोका जा सकता है।
इसी उद्देश्य से विद्युत विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है।
आपात स्थिति में कहां करें संपर्क?
विद्युत विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी विद्युत आपात स्थिति, दुर्घटना की आशंका या टूटे हुए तार की जानकारी तुरंत विभाग को दें।
उपभोक्ता—
- टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।
- अपने निकटतम विद्युत वितरण केंद्र में सूचना दे सकते हैं।
- किसी भी जोखिमपूर्ण स्थिति की तत्काल जानकारी प्रशासन को दे सकते हैं।
समय पर दी गई सूचना कई लोगों की जान बचा सकती है।
बरसात का मौसम जहां राहत लेकर आता है, वहीं बिजली से जुड़े खतरों को भी बढ़ा देता है। सिवनी विद्युत विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी इस बात की याद दिलाती है कि थोड़ी-सी सावधानी बड़े हादसों को टाल सकती है।
बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों और टूटे तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना, गीले हाथों से विद्युत उपकरणों का उपयोग न करना, घर की वायरिंग और अर्थिंग की जांच कराना तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत विभाग को सूचना देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
मानसून के दौरान सतर्कता और जागरूकता ही विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। स्वयं सुरक्षित रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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