(विनीत खरे)
नई दिल्ली (साई)। केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को मापने के लिए एक नई व्यवस्था चर्चा में है। केंद्रीय सचिवों और उनके विभागों के प्रदर्शन के लिए ‘Administrative Scorecard’ यानी प्रशासनिक स्कोरकार्ड तैयार किए जाने की जानकारी फरवरी 2026 में सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार था जब केंद्रीय सचिवों के प्रदर्शन को करीब एक दर्जन निर्धारित मानकों पर अंक आधारित तरीके से आंका गया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि किसी मंत्रालय या विभाग ने कितना काम किया, बल्कि काम की गति, योजनाओं का क्रियान्वयन, फाइलों का निपटारा, जनशिकायतों का समाधान और सरकारी धन के उपयोग जैसे पहलुओं को भी मापना है।
पहले चरण का स्कोरकार्ड सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2025 के प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया था और रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने इसे जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में संबंधित सचिवों को भेजा था।
क्या है सचिवों का नया Administrative Scorecard?
कार्मिक मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रशासनिक स्कोरकार्ड को केंद्रीय सरकार के सचिवों और उनके विभागों के प्रदर्शन को मात्रात्मक तरीके से देखने की व्यवस्था के रूप में रिपोर्ट किया गया है।
इसमें कुल 100 अंक रखे गए हैं और करीब एक दर्जन प्रदर्शन मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। खास बात यह है कि इसमें सामान्य सकारात्मक अंकों के साथ कुछ परिस्थितियों में नकारात्मक अंक और असाधारण काम के लिए विवेकाधीन अंक देने का प्रावधान भी बताया गया है।
इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विभाग की तुलना केवल दूसरे विभागों से ही नहीं, बल्कि उसके अपने पिछले प्रदर्शन के संदर्भ में भी की जा सकती है। इससे प्रशासनिक प्रदर्शन को केवल धारणा या सामान्य टिप्पणी के बजाय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर देखने का प्रयास किया गया है।
फाइल निपटारे को सबसे ज्यादा 20 अंक
नए स्कोरकार्ड में फाइल डिस्पोजल यानी फाइलों के निपटारे को सबसे अधिक वजन दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद विभाग के आउटपुट/गतिविधियों और योजनाओं तथा पूंजीगत व्यय से जुड़े प्रदर्शन के लिए 15-15 अंक रखे गए हैं।
इसका सीधा संबंध सरकारी निर्णय प्रक्रिया की गति से है। किसी मंत्रालय में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं तो उसका असर योजनाओं, मंजूरियों, परियोजनाओं और नागरिक सेवाओं पर पड़ सकता है।
इसलिए फाइल निपटारे को कुल स्कोर में सबसे बड़ा हिस्सा देना प्रशासनिक गति को मापने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
100 अंकों में प्रमुख मानक
रिपोर्ट के अनुसार स्कोरकार्ड में प्रमुख रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं:
- फाइल निपटारा – 20 अंक
- आउटपुट/गतिविधियां – 15 अंक
- योजनाओं पर खर्च – 15 अंक
- पूंजीगत व्यय – 15 अंक
- जनशिकायतों का निपटारा
- कैबिनेट नोट्स
- Project Monitoring Group द्वारा निगरानी वाली परियोजनाओं की समय पर पूर्णता
- Pay and Accounts Office तथा Chief Controller of Accounts से संबंधित बिलों का समय पर निपटारा।
इस तरह मूल्यांकन में केवल फाइलों की संख्या नहीं, बल्कि विभाग के व्यापक प्रशासनिक प्रदर्शन को शामिल करने का प्रयास किया गया है।
नकारात्मक अंक भी होंगे
इस स्कोरकार्ड की एक अलग विशेषता Negative Marking है।
रिपोर्ट के अनुसार अधिकतम 12 नकारात्मक अंक ऐसे मामलों में लगाए जा सकते हैं जिनमें विदेशी यात्राओं या आयोजनों पर अत्यधिक खर्च, सचिव स्तर और उससे ऊपर फाइलों का असामान्य लंबित रहना तथा MSME को भुगतान में देरी जैसी स्थितियां शामिल हैं।
इस व्यवस्था का महत्व इसलिए है क्योंकि प्रदर्शन को केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि प्रशासनिक कमियों से भी जोड़ने की कोशिश की गई है।
हालांकि किसी सचिव के वास्तविक स्कोर या व्यक्तिगत रैंकिंग को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सभी विवरण एक समान नहीं हैं। इसलिए किसी अधिकारी के बारे में केवल इस व्यवस्था के आधार पर व्यक्तिगत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
असाधारण काम के लिए 5 अतिरिक्त अंक
स्कोरकार्ड में 5 Discretionary Marks का प्रावधान भी बताया गया है।
इन अंकों को कैबिनेट सचिव द्वारा किसी सचिव या विभाग के असाधारण काम अथवा विशेष योगदान के लिए दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है।
इससे यह संकेत मिलता है कि व्यवस्था पूरी तरह स्वचालित आंकड़ों तक सीमित नहीं है। कुछ ऐसे काम भी मूल्यांकन में शामिल किए जा सकते हैं जिन्हें निर्धारित मात्रात्मक संकेतकों से पूरी तरह मापना कठिन हो।
यही कारण है कि स्कोरकार्ड में मात्रात्मक और विवेकाधीन दोनों प्रकार के आकलन का मिश्रण रखा गया है।
पहली रिपोर्ट किन महीनों के काम पर बनी?
रिपोर्ट के मुताबिक पहला Administrative Scorecard सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2025 की अवधि के प्रदर्शन पर आधारित था।
इसे जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में केंद्रीय सचिवों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।
इससे यह स्पष्ट होता है कि ‘रिपोर्ट कार्ड’ की अवधारणा केवल भविष्य की प्रस्तावित व्यवस्था नहीं रही, बल्कि 2026 की शुरुआत में इसका पहला सेट सचिवों तक पहुंचाए जाने की रिपोर्ट सामने आ चुकी थी।
यह पहल बाद में सार्वजनिक चर्चा में इसलिए आई क्योंकि इसमें पहली बार केंद्रीय सचिवों के प्रशासनिक प्रदर्शन को एक संरचित 100-अंकीय ढांचे में प्रस्तुत करने की बात सामने आई।
यह व्यवस्था अचानक नहीं आई
सचिवों के प्रदर्शन को अधिक मात्रात्मक बनाने की दिशा में इससे पहले भी प्रशासनिक स्तर पर प्रयास होते रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में कैबिनेट सचिव को सचिवों द्वारा भेजे जाने वाले मासिक demi-official letters की व्यवस्था में बदलाव किया गया था, जिसमें मंत्रालय-विशिष्ट quantitative performance indicators जोड़े गए थे।
यानी मौजूदा स्कोरकार्ड व्यवस्था को प्रशासनिक प्रदर्शन को आंकड़ों के माध्यम से देखने की व्यापक प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में समझा जा सकता है।
इसके अलावा IAS अधिकारियों के लिए Department of Personnel and Training की SPARROW प्रणाली पहले से Performance Appraisal Reports को ऑनलाइन रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल होती है। DoPT की 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार SPARROW का उद्देश्य Performance Appraisal Reports की रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता, समयबद्धता और निगरानी बेहतर करना है।
इसलिए ‘रिपोर्ट कार्ड’ को पूरी तरह से पुराने प्रदर्शन मूल्यांकन को समाप्त करने वाली व्यवस्था कहना सही नहीं होगा। यह वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर प्रदर्शन को मापने के एक अतिरिक्त और अधिक मात्रात्मक तरीके के रूप में सामने आया है।
क्या इससे सचिवों की जिम्मेदारियां बदलेंगी?
यह सवाल इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
उपलब्ध रिपोर्ट में स्कोरकार्ड का मुख्य उद्देश्य सचिवों और उनके विभागों के प्रशासनिक प्रदर्शन और दक्षता का आकलन बताया गया है। इसका इस्तेमाल विभागों के प्रदर्शन की तुलना के लिए किया जाना है।
हालांकि, किसी विशेष सचिव को केवल इस स्कोरकार्ड के आधार पर नई जिम्मेदारी देने, हटाने या सेवा विस्तार देने का कोई सार्वभौमिक नियम सार्वजनिक स्रोतों से स्थापित नहीं होता।
IAS अधिकारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन और पदस्थापन से जुड़े अलग-अलग प्रशासनिक तंत्र पहले से मौजूद हैं। DoPT के नियमों में Performance Appraisal Report और संबंधित मूल्यांकन प्रक्रियाओं का प्रावधान है।
इसलिए ‘रिपोर्ट कार्ड आने के बाद बड़े पैमाने पर तबादले निश्चित हैं’ जैसी बात को फिलहाल स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
भ्रष्टाचार संबंधी दावों पर क्या तथ्य उपलब्ध हैं?
उपलब्ध मूल सामग्री में कुछ विभागों के सचिवों के बारे में धन अर्जित करने से जुड़े खुफिया इनपुट का दावा किया गया है। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए कोई सार्वजनिक सरकारी दस्तावेज या आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं मिला।
इसलिए इसे तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—प्रशासनिक प्रदर्शन का स्कोरकार्ड और भ्रष्टाचार की जांच दो अलग प्रक्रियाएं हैं।
किसी अधिकारी का कम प्रशासनिक स्कोर अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। इसी तरह किसी अधिकारी का अच्छा प्रशासनिक स्कोर किसी अन्य प्रकार की जांच के निष्कर्ष का विकल्प नहीं हो सकता।
यदि किसी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी कोई औपचारिक जांच, FIR, अभियोजन या सक्षम प्राधिकरण की कार्रवाई होती है, तो उसके आधार पर अलग से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की जा सकती है।
प्रधानमंत्री और सचिवों के बीच सीधे संवाद की भूमिका
प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी से यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर केंद्र सरकार के सचिवों के साथ सीधे बैठकें करते हैं।
एक आधिकारिक PMO अपडेट में बताया गया कि प्रधानमंत्री ने सभी केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक की थी, जिसमें कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री भी उपस्थित थे। उस बैठक में कैबिनेट सचिव ने सचिवों के आठ समूहों द्वारा जनवरी में प्रधानमंत्री को सौंपी गई रिपोर्टों के आधार पर अब तक किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया था।
इससे यह स्पष्ट है कि शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री स्तर पर समीक्षा बैठकों की व्यवस्था मौजूद है।
लेकिन इसे व्यक्तिगत सचिवों की ‘रैंकिंग’ के बराबर नहीं माना जा सकता। स्कोरकार्ड का ढांचा एक अलग प्रशासनिक मूल्यांकन उपकरण है।
नौकरशाही के लिए इसका क्या अर्थ?
नई व्यवस्था का सबसे प्रत्यक्ष असर प्रशासनिक कामकाज में मापनीय परिणामों पर जोर बढ़ने के रूप में देखा जा सकता है।
यदि किसी विभाग की फाइलें लंबे समय तक लंबित हैं, योजनाओं पर खर्च अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है या परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो रही हैं, तो इन पहलुओं को स्कोरकार्ड में दर्ज किया जा सकता है।
इसके दूसरी ओर, बेहतर आउटपुट, समय पर फाइल निपटारा और प्रभावी शिकायत निवारण जैसे पहलू प्रदर्शन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
इससे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह अधिक स्पष्ट हो सकता है कि किन प्रशासनिक परिणामों को केंद्र सरकार प्राथमिकता दे रही है।
पारदर्शिता और आंकड़ों की विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण
किसी भी Performance Scorecard की प्रभावशीलता केवल अंक तय करने से नहीं होती। यह भी महत्वपूर्ण है कि आंकड़े सही, समान रूप से मापे जाने योग्य और तुलनीय हों।
उदाहरण के लिए अलग-अलग मंत्रालयों का कामकाज एक जैसा नहीं होता। कुछ मंत्रालयों में फाइलों की संख्या अधिक हो सकती है, जबकि दूसरे मंत्रालयों में परियोजनाओं और पूंजीगत खर्च की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसीलिए मंत्रालय-विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
रिपोर्ट के अनुसार नए स्कोरकार्ड पर सचिवों से feedback और suggestions भी मांगे गए थे।
यह संकेत देता है कि व्यवस्था के संचालन के दौरान इसमें सुधार या बदलाव की गुंजाइश रखी गई है।
आगे क्या हो सकता है?
यदि यह व्यवस्था नियमित रूप से जारी रहती है तो आने वाले समय में केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रदर्शन को अधिक व्यवस्थित तरीके से मापने के लिए इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।
इसके संभावित प्रभावों में शामिल हैं:
- लंबित फाइलों पर अधिक निगरानी।
- परियोजनाओं की समयसीमा पर ज्यादा ध्यान।
- योजनागत और पूंजीगत खर्च की नियमित समीक्षा।
- जनशिकायत निपटारे पर जोर।
- विभागों के प्रदर्शन की आपसी तुलना।
- प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में समयबद्धता।
- कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की पहचान।
हालांकि किसी भी अधिकारी या विभाग के प्रदर्शन का अंतिम आकलन केवल एक अंक से करना उचित नहीं होगा। प्रशासनिक कामकाज में नीति की जटिलता, संसाधन, कानूनी अड़चनें और दूसरे विभागों पर निर्भरता जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।
केंद्रीय सचिवों के लिए 100 अंकों वाले Administrative Scorecard की शुरुआत वरिष्ठ नौकरशाही के प्रदर्शन को अधिक मापनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में सामने आई है। फरवरी 2026 में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार पहला स्कोरकार्ड सितंबर से नवंबर 2025 के प्रदर्शन पर आधारित था और जनवरी 2026 में सचिवों को भेजा गया था।
फाइल निपटारे को 20 अंक, आउटपुट/गतिविधियों तथा योजनाओं और पूंजीगत खर्च को 15-15 अंक दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जनशिकायत, कैबिनेट नोट्स, परियोजना समयसीमा और भुगतान जैसे संकेतक भी मूल्यांकन में शामिल हैं। नकारात्मक अंकों और असाधारण काम के लिए विवेकाधीन अंकों का प्रावधान इसे केवल पारंपरिक Performance Appraisal से अलग बनाता है।
वहीं सचिवों के खिलाफ भ्रष्टाचार या खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट से जुड़े दावों को अलग जांच और आधिकारिक प्रमाण के बिना तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी तरह स्कोरकार्ड को अपने आप में तबादले या सेवा विस्तार का निर्णायक आधार मानना भी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से साबित नहीं होता।
असल परीक्षा इस बात की होगी कि यह व्यवस्था सरकारी कामकाज की गति, जवाबदेही और परिणामों में कितना मापनीय सुधार लाती है और इसके आंकड़ों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।