(ब्यूरो कार्यालय)
ग्वालियर (साई)। मध्यप्रदेश में कृषि और किसान कल्याण को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की है। बुधवार, 02 सितंबर 2026 को ग्वालियर में आयोजित बलराम जयंती महोत्सव एवं सहकारी किसान समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने, अगले ढाई साल में प्रदेश के सिंचित क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने तथा सहकारिता व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कई घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि “जिसके हाथ में हल है, वही इस देश का असली बल है।” उन्होंने किसानों के परिश्रम को मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार बताते हुए कहा कि सरकार बीज से बाजार और खेत से निर्यात तक किसान के साथ खड़ी है।
कार्यक्रम के दौरान किसान कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं और सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। इनमें ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण व्यवस्था का सरलीकरण, कृषक कवच योजना, 200 नए पैक्स कार्यालय और अपेक्स बैंक की ग्वालियर संभागीय शाखा प्रमुख रहे।
बलराम जयंती को कृषि गौरव से जोड़ा गया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बलराम जयंती को किसानों, श्रम और कृषि गौरव का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि भगवान बलराम केवल बल के देवता नहीं, बल्कि श्रम के सम्मान और कृषि संस्कृति के प्रतीक हैं।
ग्वालियर में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में किसान और अन्नदाता शामिल हुए। आयोजकों की ओर से मुख्यमंत्री को खेती-किसानी के पुण्य प्रतीक के रूप में हल भेंट किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बलराम जयंती खेतों की हरियाली और किसानों की समृद्धि का पर्व है। उन्होंने किसानों को इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कृषि को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण ताकत बताया।
दिन में 10 घंटे बिजली देने की घोषणा
किसानों के लिए मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणा बिजली से जुड़ी रही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो रही है और अब किसानों को दिन में भी बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली देने की बात कही। खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध होने से किसानों को सिंचाई के दौरान सुविधा मिलने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता सिंचाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में दिन के समय बिजली मिलने से किसानों को खेतों में सिंचाई कार्य करने में सुविधा हो सकती है और रात के समय सिंचाई पर निर्भरता कम हो सकती है।
100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में 60 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित है।
सरकार का लक्ष्य अगले ढाई वर्ष में सिंचित क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है।
यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो प्रदेश के बड़े कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ने में मदद मिलेगी। इसका प्रभाव फसल उत्पादन, फसल विविधीकरण और किसानों की कृषि आय पर पड़ सकता है।
सिंचाई का विस्तार केवल खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इससे किसान एक से अधिक फसल लेने, उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को अपनाने और मौसम आधारित जोखिम को कम करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।
ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल शुरू
किसानों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल का शुभारंभ किया गया।
मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से इस पोर्टल की शुरुआत की। इसके माध्यम से किसान घर बैठे किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे।
ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से किसानों को आवेदन के लिए बार-बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है। डिजिटल माध्यम से आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने का उद्देश्य कृषि ऋण तक किसानों की पहुंच आसान करना है।
यह व्यवस्था विशेष रूप से उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपने गांव या क्षेत्र से ही बैंकिंग प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं।
शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण की व्यवस्था हुई सरल
कार्यक्रम में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण योजना के सरलीकरण की भी शुरुआत की गई।
नई व्यवस्था के तहत खरीफ और रबी कृषि ऋण की अलग-अलग अदायगी की बाध्यता समाप्त करने की बात कही गई है। अब किसान अपनी सुविधा के अनुसार 12 महीने की अवधि में ऋण चुका सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को अब छह-छह महीने में खाता पलटने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान वर्ष में अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय कर्ज की राशि चुका सकेंगे।
इस बदलाव का उद्देश्य किसानों के लिए ऋण अदायगी की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
कृषक कवच योजना से लंबित खातों वाले किसानों को राहत
सरकार ने कृषक कवच योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य ऐसे किसानों को ऋण और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करना है, जिनके खातों की जांच लंबित होने के कारण वे अब तक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में बैंकिंग और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण कई बार किसानों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कृषक कवच योजना इसी तरह की समस्या से प्रभावित किसानों को व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आई है।
200 नए पैक्स कार्यालयों का शुभारंभ
गांवों में सहकारिता गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 200 नई प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के कार्यालयों का भी शुभारंभ किया गया।
पैक्स ग्रामीण स्तर पर किसानों और सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। इनके माध्यम से किसानों को कृषि ऋण सहित विभिन्न सहकारी सुविधाओं से जोड़ा जाता है।
नई संस्थाओं और कार्यालयों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता व्यवस्था की पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य है।
इसके साथ ही अपेक्स बैंक की ग्वालियर संभागीय शाखा का भी शुभारंभ किया गया। इससे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शिवपुरी जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को मदद की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शिवपुरी को उसकी वर्तमान स्थिति से उबरने के लिए राज्य शासन की ओर से जरूरी मदद देने की घोषणा की।
यह घोषणा सहकारिता क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की वित्तीय आवश्यकताओं से सीधे जुड़े होते हैं।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े बैंकों को आर्थिक कठिनाइयों से बचाने की बात कही। उनके अनुसार राज्य सरकार ने सहकारिता विभाग से जुड़े 16 बैंकों को डिफॉल्टर होने से बचाने के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई है।
कृषि से एग्री-टेक और फूड प्रोसेसिंग तक जोर
मुख्यमंत्री ने कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि “कृषि हमारी विरासत है, एग्री-टेक और एग्री-बिजनेस हमारा भविष्य है।”
सरकार कृषि में तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार के माध्यम से नई संभावनाएं विकसित करने पर जोर दे रही है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, जैविक खेती, मत्स्य पालन और नई फसलों को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई।
मुख्यमंत्री ने किसानों से उत्पादन के बाद की प्रक्रिया पर ध्यान देने की अपील की। इसमें—
- फसलों की ग्रेडिंग,
- प्रोसेसिंग,
- पैकेजिंग,
- बेहतर बाजार संपर्क,
- फसल विविधीकरण,
- कृषि उद्यमिता
जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया।
इसका उद्देश्य किसान को केवल उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि कृषि व्यवसाय की पूरी श्रृंखला का भागीदार बनाना है।
“एक बगिया मां के नाम” योजना पर जोर
मुख्यमंत्री ने किसानों से अनाज के साथ उद्यानिकी फसलों से भी आय बढ़ाने की अपील की। इसके लिए “एक बगिया मां के नाम” योजना की शुरुआत का उल्लेख किया।
फसल विविधीकरण किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा कर सकता है। पारंपरिक फसलों के साथ फल, सब्जी और अन्य उद्यानिकी गतिविधियों को अपनाने से कृषि आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं।
सरकार प्राकृतिक खेती और पानी की हर बूंद के सदुपयोग पर भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।
पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा
कृषि के साथ पशुपालन को ग्रामीण आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनाने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए नई गौपालन योजना का उल्लेख किया।
योजना के तहत पशुपालकों को 40 लाख रुपये तक के ऋण पर 10 लाख रुपये का अनुदान दिए जाने की जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त किसानों को मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और बकरी पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी योजनाओं का उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को देश की “मिल्क कैपिटल” बनाने की मंशा भी व्यक्त की।
हर ब्लॉक में विकसित होगा वृंदावन ग्राम
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है। उन्होंने चारा अनुदान को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये किए जाने की जानकारी भी दी।
पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चारा उपलब्धता और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए कृषि के साथ अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
फार्मर आईडी को बताया महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फार्मर आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं, समर्थन मूल्य के भुगतान तथा सब्सिडी पर खाद और बीज जैसी सुविधाओं को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
डिजिटल किसान पहचान व्यवस्था कृषि से संबंधित सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। आने वाले समय में किसान की विभिन्न सरकारी सेवाओं तक पहुंच में इसका उपयोग बढ़ सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने पर सहकारिता का फोकस
सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण और सहकारिता के माध्यम से किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने की बात कही।
उन्होंने बलराम जयंती के अवसर पर किसानों की खेती को लाभ का जरिया बनाने और उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने का संकल्प लेने की अपील की।
अपेक्स बैंक अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान प्रदेश के 22 जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने पैक्स से जुड़े क्रेडिट कार्ड धारकों के बीमा कवर की राशि बढ़ाने सहित क्षेत्रीय विकास से संबंधित मांगें भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।
ग्वालियर-चंबल में कृषि और कनेक्टिविटी पर जोर
केंद्रीय दूरसंचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कृषि और सहकारिता की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बांध और जलाशयों से खेती को लाभ मिला है। श्योपुर क्षेत्र को ग्वालियर से जोड़ने वाली नैरोगेज रेल लाइन का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे ब्रॉडगेज में बदलने के कार्य की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन और अक्षय ऊर्जा जैसे साधनों का उपयोग किसानों की समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में आगे ले जाने का दावा
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान समृद्ध होंगे तो देश समृद्ध होगा। उन्होंने मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य खेती में अग्रणी बन रहा है।
उन्होंने शून्य ब्याज दर पर किसानों को ऋण उपलब्ध कराने, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि और जैविक खेती के विस्तार जैसे विषयों पर भी बात रखी।
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी किसान कल्याण, सहकारिता और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृषि के साथ युवाओं को जोड़ने की रणनीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती से युवाओं का रिश्ता बना रहना चाहिए। उन्होंने कृषि को रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया।
उनका कहना था कि युवा डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशों में आगे बढ़ें, लेकिन कृषि से अपना संबंध बनाए रखें। सरकार युवाओं को उद्योग और रोजगार से जोड़ने के साथ-साथ रोजगार देने वाले युवा तैयार करने पर काम कर रही है।
यह दृष्टिकोण कृषि को पारंपरिक पेशे के बजाय आधुनिक व्यवसाय और उद्यमिता के क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
सड़क, रेल और एक्सप्रेसवे से बाजार तक पहुंच
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन के साथ बाजार तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हाईवे और ग्रीनफील्ड रोड के निर्माण के साथ रेल और एविएशन कनेक्टिविटी बढ़ने का उल्लेख किया।
बेहतर परिवहन व्यवस्था से कृषि उत्पादों को मंडियों, प्रसंस्करण केंद्रों और बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है। लंबी अवधि में यह खेत से बाजार और बाजार से निर्यात तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने में मददगार हो सकती है।
आगे की दिशा क्या होगी?
सरकार की घोषणाओं का वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराना, सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना, ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया को प्रभावी बनाना और सहकारी बैंकों को मजबूत करना बड़े स्तर के कार्य हैं।
आने वाले समय में इन योजनाओं की सफलता को कुछ प्रमुख बिंदुओं से देखा जा सकेगा—
- कितने किसानों को ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा मिली।
- दिन में किसानों को कितने घंटे वास्तविक बिजली उपलब्ध हुई।
- सिंचित क्षेत्र में कितनी वृद्धि हुई।
- कृषक कवच योजना से कितने वंचित किसानों को लाभ मिला।
- नए पैक्स कार्यालयों की सेवाएं कितनी प्रभावी रहीं।
- कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में कितना विस्तार हुआ।
- किसानों को बाजार और निर्यात से कितना बेहतर जोड़ा गया।
ग्वालियर में आयोजित बलराम जयंती महोत्सव एवं सहकारी किसान समागम में मध्यप्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं सामने रखीं। दिन में 10 घंटे बिजली, अगले ढाई साल में 100 लाख हेक्टेयर सिंचाई, ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड, शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण व्यवस्था का सरलीकरण, कृषक कवच योजना और 200 नए पैक्स कार्यालय जैसी घोषणाएं सीधे तौर पर किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि को परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक, एग्री-टेक, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और निर्यात से जोड़ने पर जोर दिया है। साथ ही उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, जैविक खेती और फसल विविधीकरण को आय के अतिरिक्त माध्यम के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही गई।
अब इन घोषणाओं की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि योजनाओं और सुविधाओं का लाभ कितनी तेजी और पारदर्शिता से खेत तक पहुंचता है। यदि बिजली, सिंचाई, ऋण, सहकारिता, तकनीक और बाजार की सुविधाएं प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचती हैं, तो मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को आने वाले वर्षों में नई मजबूती मिल सकती है।

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