दिल्ली में फ्री लगेगा रूफटॉप सोलर पैनल, 400 यूनिट तक बिजली खपत वालों को बड़ा फायदा; जानें पात्रता और आवेदन का तरीका

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली (साई)। दिल्ली के उन परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो बढ़ती बिजली जरूरतों के बीच अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं, लेकिन शुरुआती खर्च के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे थे। दिल्ली सरकार ने सोलर एनर्जी पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए पात्र घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर सिस्टम को जीरो अपफ्रंट कॉस्ट पर उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1 सितंबर 2026 को कैबिनेट के फैसले के बाद संशोधित नीति की जानकारी दी। इसके तहत औसतन 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को तकनीकी रूप से संभव होने की स्थिति में 3 kW तक का रूफटॉप सोलर सिस्टम बिना शुरुआती भुगतान के लगाया जा सकेगा। 

सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए मार्च 2027 तक करीब 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाना और दिल्ली में लगभग 500 MW अतिरिक्त रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ना है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में रूफटॉप सोलर अपनाने की रफ्तार शुरुआती लागत की वजह से अपेक्षा के मुताबिक नहीं बढ़ पाई थी। 

क्या है दिल्ली की नई फ्री रूफटॉप सोलर योजना?

संशोधित दिल्ली सोलर पॉलिसी का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पात्र घरेलू उपभोक्ता को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए शुरुआत में अपनी जेब से पैसा नहीं लगाना होगा।

पहले रूफटॉप सोलर लगाने वाले परिवारों को सिस्टम की पूरी या बड़ी लागत पहले चुकानी पड़ सकती थी और सरकारी सब्सिडी बाद में मिलने की व्यवस्था थी। इस कारण कई परिवार सोलर लगाने के इच्छुक होने के बावजूद शुरुआती निवेश नहीं कर पाते थे।

नई व्यवस्था में सरकार ने इसी समस्या को दूर करने की कोशिश की है। पात्र उपभोक्ता के लिए केंद्र की सब्सिडी, दिल्ली सरकार की कैपिटल सब्सिडी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टॉप-अप के जरिए सोलर प्लांट की लागत को कवर किया जाएगा। इसलिए लाभार्थी को इंस्टॉलेशन के समय प्रारंभिक भुगतान नहीं करना होगा। 

हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि ‘फ्री सोलरका अर्थ हर आकार के सिस्टम के लिए असीमित मुफ्त सुविधा नहीं है। पात्रता, सिस्टम की क्षमता और लागत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों तथा तकनीकी व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।

400 यूनिट तक बिजली खपत वालों को मिलेगा लाभ

नई नीति का प्रमुख फोकस घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। जिन परिवारों की औसत मासिक बिजली खपत वित्त वर्ष 2025-26 में 400 यूनिट तक रही है, वे अधिकतम 3 kW तक के सिस्टम के लिए पात्र हो सकते हैं।

सिस्टम लगाने से पहले छत और कनेक्शन से जुड़ी तकनीकी व्यवहार्यता भी देखी जाएगी। यानी केवल बिजली खपत 400 यूनिट से कम होना ही पर्याप्त नहीं है; संबंधित घर की छत पर सिस्टम लगाना तकनीकी रूप से संभव होना भी जरूरी है। 

इसका सीधा फायदा उन मध्यम और निम्न-मध्यम खपत वाले परिवारों को मिल सकता है, जो बिजली बिल कम करने के लिए सोलर अपनाना चाहते हैं लेकिन करीब एक से दो लाख रुपये तक के संभावित शुरुआती निवेश से बचना चाहते हैं।

कितनी है सब्सिडी और सरकार कैसे उठाएगी खर्च?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। केंद्र सरकार की PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के तहत 3 kW तक के आवासीय रूफटॉप सोलर सिस्टम पर अधिकतम केंद्रीय सहायता ₹78,000 तक है। आधिकारिक दिल्ली सोलर पोर्टल भी 2 kW तक ₹30,000 प्रति kW और अतिरिक्त 1 kW के लिए ₹18,000 प्रति kW के हिसाब से अधिकतम ₹78,000 केंद्रीय सहायता बताता है। 

नई दिल्ली नीति में इसके साथ राज्य सरकार की सहायता जोड़ी गई है। 3 kW सिस्टम के लिए दिल्ली सरकार की ओर से भी ₹78,000 तक कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा, यदि तय सब्सिडी और टेंडर के जरिए तय सिस्टम लागत के बीच अंतर रहता है, तो सरकार अतिरिक्त टॉप-अप देकर उसे कवर करेगी। 

यही वजह है कि पात्र उपभोक्ता को इंस्टॉलेशन के समय भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पुरानी दिल्ली सोलर पॉलिसी के आधिकारिक पोर्टल पर राज्य की सामान्य कैपिटल सब्सिडी पहले ₹10,000 प्रति kW, अधिकतम ₹30,000 तक बताई गई थी। नई व्यवस्था इस सहायता को काफी बढ़ाती है और शेष लागत को टॉप-अप के जरिए कवर करने का प्रावधान करती है। 

3 kW सिस्टम से कितना फायदा हो सकता है?

सोलर सिस्टम की वास्तविक बिजली उत्पादन क्षमता कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे छत का आकार, धूप की उपलब्धता, पैनल की दिशा, मौसम और सिस्टम की तकनीकी दक्षता।

सरकार के अनुमान के अनुसार, 3 kW सिस्टम वाले कुछ पात्र घरेलू उपभोक्ता अपनी खपत का एक हिस्सा सोलर से पूरा कर सकेंगे और अतिरिक्त बिजली को लागू नेट-मीटरिंग व्यवस्था के तहत ग्रिड में भेज सकेंगे। 201 से 400 यूनिट की श्रेणी में 3 kW सिस्टम के लिए औसत अतिरिक्त मासिक लाभ करीब ₹1,659 तक अनुमानित किया गया है। 

इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिवार को हर महीने बिल्कुल इतनी ही बचत होगी। वास्तविक बचत मौसम, बिजली की खपत और सिस्टम के उत्पादन पर निर्भर करेगी।

पांच साल तक मुफ्त मेंटेनेंस

नई योजना की एक और अहम विशेषता पांच साल का मुफ्त ऑपरेशन और मेंटेनेंस है।

चयनित वेंडर द्वारा लगाए गए सिस्टम का संचालन और रखरखाव शुरुआती पांच वर्षों तक किया जाएगा। इससे लाभार्थियों को पैनल, सिस्टम या उससे जुड़े रखरखाव के सामान्य खर्च को लेकर तत्काल चिंता नहीं करनी होगी। 

पांच साल के बाद उपभोक्ता डिस्कॉम या संबंधित अधिकृत एजेंसियों के जरिए मेंटेनेंस और इंश्योरेंस जैसी सेवाएं लेने का विकल्प चुन सकेंगे। सोलर सिस्टम की अपेक्षित उपयोगी अवधि लगभग 25 साल बताई गई है। 

क्या पुरानी बिजली सब्सिडी बंद हो जाएगी?

यह सवाल दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रूफटॉप सोलर का लाभ लेने के बावजूद मौजूदा बिजली सब्सिडी व्यवस्था जारी रहेगी।

यानी पात्र परिवार को सोलर सिस्टम मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसकी मौजूदा बिजली सब्सिडी अपने आप समाप्त हो जाएगी। खास तौर पर 200 यूनिट तक खपत वाले परिवारों के लिए मौजूदा 100 प्रतिशत बिजली सब्सिडी जारी रहने की जानकारी दी गई है। 

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बिजली बिल घटाना नहीं है, बल्कि परिवारों को बिजली के उपभोक्ता के साथ-साथ उत्पादक बनाने की दिशा में ले जाना है।

नेट मीटरिंग की प्रक्रिया भी होगी आसान

रूफटॉप सोलर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नेट मीटरिंग है। इसके जरिए सोलर सिस्टम से पैदा हुई बिजली का उपयोग घर में किया जा सकता है और अतिरिक्त बिजली को लागू व्यवस्था के तहत ग्रिड में भेजा जा सकता है।

नई नीति में घरेलू सोलर सिस्टम की नेट मीटरिंग प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया गया है। पहले इसमें करीब 75 दिन तक लगने की बात सामने आई थी, जिसे घटाकर करीब 25 दिन करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 10 kW तक के आवासीय सोलर सिस्टम के लिए आवेदन और रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने की जानकारी दी गई है। I

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल सब्सिडी देना पर्याप्त नहीं होता। अगर कनेक्शन, निरीक्षण और मीटरिंग की प्रक्रिया लंबी हो, तो उपभोक्ता सोलर लगाने से पीछे हट सकता है।

आवेदन कैसे करें?

नई व्यवस्था का आवेदन राष्ट्रीय PM Surya Ghar पोर्टल के जरिए किया जाएगा। दिल्ली के आधिकारिक सोलर पोर्टल पर भी ऑनलाइन आवेदन के लिए इसी राष्ट्रीय पोर्टल का उल्लेख किया गया है। 

आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. PM Surya Ghar के राष्ट्रीय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें।
  2. अपने बिजली कनेक्शन से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज करें।
  3. Rooftop Solar के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करें।
  4. संबंधित डिस्कॉम द्वारा तकनीकी व्यवहार्यता की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
  5. मंजूरी मिलने के बाद पात्र उपभोक्ता निर्धारित वेंडर प्रक्रिया के तहत इंस्टॉलेशन करा सकेगा।
  6. सिस्टम लगने के बाद निरीक्षण और नेट मीटरिंग से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होगी।
  7. योजना के तहत चयनित वेंडर पांच साल तक सिस्टम का ऑपरेशन और मेंटेनेंस संभालेगा।

दिल्ली सोलर पोर्टल के अनुसार PM Surya Ghar के तहत ऑनलाइन आवेदन राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। 

दिल्ली में सोलर को बढ़ावा देने की जरूरत क्यों पड़ी?

दिल्ली की Solar Energy Policy 2023 का मूल उद्देश्य राजधानी में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना, बिजली की औसत लागत कम करना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और प्रदूषण घटाने में मदद करना है।

नीति के मूल लक्ष्य में दिल्ली में 750 MW रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित करना शामिल है। साथ ही सौर ऊर्जा को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने और हरित रोजगार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। 

लेकिन वास्तविक स्तर पर रूफटॉप सोलर अपनाने की गति उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। 2026 की शुरुआत में दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण में PM Surya Ghar के तहत करीब 6,735 इंस्टॉलेशन होने की जानकारी थी। बाद की सरकारी जानकारी के अनुसार यह संख्या बढ़कर 10,073 सोलर सिस्टम हो गई है, जिनमें बड़ी संख्या सरकारी इमारतों पर है। 

नई नीति का उद्देश्य इसी अंतर को तेजी से कम करना है।

सरकार के लिए यह फैसला कितना बड़ा है?

मार्च 2027 तक 2.30 लाख घरों को सोलर से जोड़ना महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इसका मतलब है कि अगले कुछ महीनों में इंस्टॉलेशन की रफ्तार काफी बढ़ानी होगी।

इसके लिए सरकार ने केवल सब्सिडी बढ़ाने पर निर्भर रहने के बजाय utility-led aggregation model अपनाने की योजना बनाई है। इसके तहत IPGCL प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से सोलर वेंडर्स का चयन करेगा और इंस्टॉलेशन, वेंडर प्रबंधन तथा शिकायत निवारण जैसे कामों में भूमिका निभाएगा।

अगर यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो बड़ी संख्या में घरों को एक समान प्रक्रिया के जरिए सोलर से जोड़ा जा सकता है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

इस योजना का सबसे प्रत्यक्ष असर घरेलू बिजली खर्च पर पड़ सकता है। जिन घरों में दिन के समय बिजली की अच्छी खपत होती है, वहां रूफटॉप सोलर से ग्रिड से खरीदी जाने वाली बिजली की जरूरत कम हो सकती है।

दूसरा फायदा यह है कि परिवारों को सिस्टम खरीदने के लिए बड़ा कर्ज या अपनी बचत खर्च करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि पात्र उपभोक्ताओं के लिए शुरुआती लागत सरकार द्वारा कवर करने की व्यवस्था की गई है।

तीसरा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। सौर ऊर्जा का विस्तार पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है। दिल्ली सरकार की सोलर नीति का उद्देश्य भी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के साथ प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। 

किन बातों का ध्यान रखें?

हालांकि योजना को फ्री सोलरके तौर पर प्रचारित किया जा रहा है, उपभोक्ताओं को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें समझनी चाहिए।

  • 400 यूनिट की पात्रता औसत मासिक खपत के आधार पर बताई गई है।
  • अधिकतम 3 kW तक का सिस्टम पात्रता के तहत उपलब्ध हो सकता है।
  • सिस्टम इंस्टॉलेशन तकनीकी व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा।
  • सरकार द्वारा चयनित या अधिकृत वेंडर के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
  • पांच साल का मुफ्त मेंटेनेंस योजना की प्रमुख सुविधा है।
  • सोलर सिस्टम लगने के बाद भी ग्रिड से बिजली की जरूरत पूरी तरह खत्म होना जरूरी नहीं है।
  • वास्तविक बचत घर की खपत, मौसम और सोलर उत्पादन के आधार पर अलग-अलग होगी।

इसलिए किसी भी निजी एजेंट को केवल सरकारी योजनाके नाम पर अलग से बड़ी रकम देने से पहले आधिकारिक प्रक्रिया और पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है।

आगे क्या बदलेगा?

अगर 2.30 लाख घरों तक यह योजना निर्धारित समय में पहुंचती है, तो दिल्ली के रूफटॉप सोलर क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। अब तक जिस समस्या में उपभोक्ता को पहले निवेश करना पड़ता था, नई नीति उस बाधा को हटाने की कोशिश करती है।

इसके साथ ही 500 MW अतिरिक्त रूफटॉप क्षमता का लक्ष्य दिल्ली के बिजली ढांचे पर भी असर डाल सकता है। बड़ी संख्या में घरों से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ने पर दिन के समय ग्रिड पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि योजना की सफलता सिर्फ घोषणा से तय नहीं होगी। असली परीक्षा वेंडर चयन, इंस्टॉलेशन की गति, गुणवत्ता, नेट मीटरिंग, शिकायत निवारण और पांच साल के रखरखाव के प्रभावी क्रियान्वयन की होगी।

दिल्ली सरकार की संशोधित सोलर नीति ने रूफटॉप सोलर को आम परिवारों के लिए पहले की तुलना में काफी अधिक सुलभ बनाने की कोशिश की है। 400 यूनिट तक औसत मासिक खपत वाले पात्र परिवारों को 3 kW तक का सिस्टम बिना शुरुआती भुगतान के मिलना, पांच साल का मुफ्त रखरखाव और मौजूदा बिजली सब्सिडी का जारी रहना इस योजना के सबसे बड़े आकर्षण हैं। 

मार्च 2027 तक 2.30 लाख घरों को सोलर से जोड़ने का लक्ष्य बड़ा है। यदि सरकार इसे समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू कर पाती है, तो इससे परिवारों के बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ दिल्ली की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता भी बढ़ सकती है।

यानी दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए यह केवल मुफ्त सोलर पैनल की योजना नहीं, बल्कि बिजली के उपभोक्ता से ऊर्जा उत्पादक बनने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है।